Wajood Shayari - Apni pehchaan, existence aur inner strength ki shayari

Wajood shayari reflects the journey of finding your true self, your identity, and your inner strength. It beautifully captures thoughts about existence, self-worth, and purpose in life. Whether you are rediscovering your pehchaan or expressing your inner voice, these lines connect deeply with your soul and personal growth.

wajood shayari
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
Jaun Elia
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pehchaan shayari
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं
Jigar Moradabadi
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asliyat shayari
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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khud shayari
हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी
सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम
Jaun Elia
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khudi shayari
इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
Anwar Shaoor
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hasti shayari
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है
Fani Badayuni
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pehchan shayari
लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे
महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे
Ali Ahmad Jalili
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apnapan shayari
अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगे
ख़्वाब हो जाओगे अफ़्सानों में ढल जाओगे

हम-सफ़र ढूँडो न रहबर का सहारा चाहो
ठोकरें खाओगे तो ख़ुद ही सँभल जाओगे
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Iqbal Azeem
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self shayari
मैं वो चराग़ हूँ जो आँधियों में रौशन था
ख़ुद अपने घर की हवा ने बुझा दिया है मुझे
Saqi Amrohvi
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मैं होश-मंद हूँ ख़ुद भी सो मेरी ग़ज़लों में
न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है
Charagh Sharma
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मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब
मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

ऐ शख़्स अब तो मुझ को सब कुछ क़ुबूल है
ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई
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Jaun Elia
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मैं ख़ुद भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ
कोई मासूम क्यूँ मेरे लिए बदनाम हो जाए
Bashir Badr
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे?
तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का
तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
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Kumar Vishwas
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दिल ऐसा कि सीधे किए जूते भी बड़ों के
ज़िद इतनी कि ख़ुद ताज उठा कर नहीं पहना
Munawwar Rana
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है
हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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तेरे दर से जब उठ के जाना पड़ेगा
ख़ुद अपना जनाज़ा उठाना पड़ेगा
Khumar Barabankvi
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हम आसमाँ के लोग थे जन्नत से आए थे
ख़ुद को मगर ज़मीं में बोना पड़ा हमें
Abbas Qamar
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हम शैख़, न लीडर, न मुसाहिब, न सहाफ़ी
जो ख़ुद नहीं करते वो हिदायत न करेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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हम को देख के शर्माओ तो शर्माने की दाद भी दे
आईने में देख के ख़ुद को शर्माने से क्या होगा?
Nadeem Shaad
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किस लिए देखती हो आईना
तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया
Jaun Elia
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उम्र ये मेरी सिर्फ़ लबादा मेरे ख़द ओ ख़ाल का है
मेरा दिल तो मुश्किल से कुछ सोलह सत्रह साल का है!
Vishal Bagh
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तुम कली पर निखार आने दो
देखना डाल ख़ुद झटक देगी
Vishal Bagh
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तोहमत उतार फेंकी लबादा बदल लिया
ख़ुद को ज़रूरतों से ज़ियादा बदल लिया
Abbas Tabish
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ये ज़िंदगी जो पुकारे तो शक सा होता है
कहीं अभी तो मुझे ख़ुद-कुशी नहीं करनी
Swapnil Tiwari
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तुम सेे इक दिन कहीं मिलेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम

धूप निकली है तेरी बातों की
आज छत पर पड़े रहेंगे हम
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Swapnil Tiwari
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न उस ने हाथ लगाया न उस ने बातें कीं
पड़े पड़े यूँँ ही ख़ुद में ख़राब हो गए हम
Abhishek shukla
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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ
Azm Shakri
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मेरे जिस्म से वक़्त ने कपड़े नोच लिए
मंज़र मंज़र ख़ुद मेरी पोशाक हुआ
Azm Shakri
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कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
Parveen Shakir
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पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है
उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है
Madan Mohan Danish
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हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा
Nida Fazli
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ख़ुद को मनवाने का मुझ को भी हुनर आता है
मैं वो कतरा हूँ समुंदर मेरे घर आता है
Waseem Barelvi
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ख़ुद-कुशी के लिए थोड़ा सा ये काफ़ी है मगर
ज़िंदा रहने को बहुत ज़हर पिया जाता है
Azhar Inayati
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मैं देर तक तुझे ख़ुद ही न रोकता लेकिन
तू जिस अदास उठा है उसी का रोना है
Firaq Gorakhpuri
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दिल चीज़ क्या है दिल से मोहब्बत जताए कौन
अपना जो ख़ुद न हो उसे अपना बनाए कौन
Shakeel Badayuni
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इन
में उदास मत होना
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Kumar Vishwas
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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
Bashir Badr
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क्या ख़ूब तमाशा है ये कार-गह-ए-हस्ती
हर जिस्म सलामत है हर ज़ात अधूरी है
Ambreen Haseeb Ambar
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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ
ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
Adil Mansuri
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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी
फल से भरपूर तो हो लेने दो
Adil Mansuri
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हम भी ख़ुद को तबाह कर लेते
तुम इधर भी निगाह कर लेते
Behzad Lakhnavi
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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ
मगर जो बीच में कम-बख़्त शा'इरी है ना
Afzal Khan
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इस ख़ौफ़ में कि ख़ुद न भटक जाएँ राह में
भटके हुओं को राह दिखाता नहीं कोई
Anwar Taban
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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अंजाम को पहुँचूँगा मैं अंजाम से पहले
ख़ुद मेरी कहानी भी सुनाएगा कोई और
Aanis Moin
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ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल'
छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द
Jamal Ehsani
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ग़रीब लोग कहाँ ख़ुद को बचा पाएँगे
वबास बच भी गए भूख से मर जाएँगे
Astitwa Ankur
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जो यहाँ ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब
एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
Zafar Iqbal
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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
Muneer Niyazi
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किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत
ख़ुद हम को मोहब्बत का सबक़ याद नहीं है
Hafeez Banarasi
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जो पर्दों में ख़ुद को छुपाए हुए हैं
क़यामत वही तो उठाए हुए हैं
Hafeez Banarasi
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हम तिरे शौक़ में यूँँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं
जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
Ahmad Faraz
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
Khumar Barabankvi
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे

हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वा'दा ख़ुद से किया हुआ है
कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे
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Rehman Faris
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इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी का
मगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ
Vikas Sharma Raaz
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जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है
जंग क्या मसअलों का हल देगी
Sahir Ludhianvi
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दुनिया वालों ने तो पूरी कोशिश की ठुकराने की
लेकिन अपनी जिद्द में हम ने ख़ुद को मनवा रक्खा है
Manish Shukla
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इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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जो लोग ख़ुद न करते थे होंठों से पान साफ़
पलकों से कर रहे हैं तेरा पायदान साफ़
Charagh Sharma
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सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो

ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
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Jawwad Sheikh
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना
ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना

ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है
कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
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Ali Zaryoun
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जिस को ख़ुद मैं ने भी अपनी रूह का इरफ़ाँ समझा था
वो तो शायद मेरे प्यासे होंटों की शैतानी थी
Jaun Elia
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न हों अश'आर में माअनी न सही
ख़ुद कलामी का ज़रिया ही सही

तुम न नवाज़ो शे'र को, न सुनाएंगे
ये मेरा ज़ाती नज़रिया ही सही
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Unknown
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इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए
दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
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Khumar Barabankvi
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मुझ को छाँव में रखा और ख़ुद भी वो जलता रहा
मैं ने देखा इक फ़रिश्ता बाप की परछाईं में
Unknown
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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
Ibrat Siddiqui
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उठो अब कोई नहीं तुम को मनाने वाला
एक मुद्दत से यूँँ ही ख़ुदस लगे बैठे हो
Rauf Raza
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ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा
यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा

ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स
इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
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Khurram Afaq
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यार माँगा था मोहब्बत की दुआ माँगी थी
और इस दिल के हिफ़ाज़त की दुआ माँगी थी

अब तो कुछ उस का बिगाड़ा भी नहीं जा सकता
मैं ने ख़ुद उस के सलामत की दुआ माँगी थी
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Ritesh Rajwada
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मैं दौड़ दौड़ के ख़ुद को पकड़ के लाता हूँ
तुम्हारे इश्क़ ने बच्चा बना दिया है मुझे
Liaqat Jafri
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ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर
कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के

उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
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Khan Janbaz
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ख़ुद को इतना जो हवा-दार समझ रक्खा है
क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है
Haseeb Soz
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे
उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
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Gyan Prakash Akul
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उठा के लाते हैं सहरा से रोज़ ख़ुद को हम
बड़े सलीक़े से इक याद छोड़ आती है
Jaani Lakhnavi
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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम

कितने आराम से हैं हम दोनों
देखा बेकार डर रही थी तुम
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Mehshar Afridi
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर
बारिशें हों तो भीग जाया कर

काम ले कुछ हसीन होंठों से
बातों बातों में मुस्कुराया कर
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Shakeel Azmi
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ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं
Iftikhar Arif
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हमारा मसअला है जो हमी ने हार जाना है
हमारी खुद-कुशी में ज़िन्दगी ने हार जाना है
Nawaaz
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देर तक परफ्यूम महकेगा तेरा
देर तक ख़ुद को सम्हाला जाएगा
Dev Niranjan
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ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम
कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में
Anjum Ludhianvi
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ख़ुद-कुशी पर शे'र लिखना है अगर
तो लिखो ऐसा कभी करना नहीं
Tanoj Dadhich
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तस्वीर में जो क़ैद था वो शख़्स रात को
ख़ुद ही फ़्रेम तोड़ के पहलू में आ गया
Adil Mansuri
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हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई
जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए
Nushur Wahidi
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया
मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
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Aalok Shrivastav
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मैं तो ख़ुद बिकने को बाज़ार में आया हुआ हूँ
और दुकाँ-दार ख़रीदार समझते हैं मुझे
Shahid Zaki
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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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ख़ुद को शीशा कर लिया है यार मैं ने
अब तो तेरा देखना बनता है मुझ को
Neeraj Neer
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चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई
Shakeel Badayuni
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मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
Anand Narayan Mulla
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मुझे है ए'तिबार-ए-वादा लेकिन
तुम्हें ख़ुद ए'तिबार आए न आए
Akhtar Shirani
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हिज्र में ख़ुद को तसल्ली दी कहा कुछ भी नहीं
दिल मगर हँसने लगा आया बड़ा कुछ भी नहीं
Afkar Alvi
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दरवाज़े पर दस्तक देने से पहले
मेरे हाथ दुआ में ख़ुद उठ जाते हैं
Tanoj Dadhich
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत
कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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मैं ही मैं हो गया था अपने अंदर
सो ख़ुद में एक तुझ जैसा भी रक्खा
Siddharth Saaz
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अपनी नज़रों में गिर चुका हूँ मैं
ये तरीक़ा भी ख़ुद-कुशी का था
Bhavesh Pathak
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
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Tehzeeb Hafi
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कामयाबी चाहते हो
कर दो फिर क़ुरबान ख़ुद को
A R Sahil "Aleeg"
दोनों हाथों को तेरे हाथ समझ कर जानाँ
अपने गालों पे ख़ुद ही रंग लगाया मैं ने
Upendra Bajpai
कभी पहले नहीं था जिस क़दर मजबूर हूँ मैं आज
नज़र आऊँ न ख़ुद क्या तुम सेे इतना दूर हूँ मैं आज

तुम्हारे ज़ख़्म को ख़ाली नहीं जाने दिया मैं ने
तुम्हारी याद में ही चीख़ के मशहूर हूँ मैं आज
Read Full
SHIV SAFAR
सब समझते हैं ख़ुदा ख़ुद को यहाँ
कौन डरता है ख़ुदा से आजकल
Ravi 'VEER'