Duniya Shayari - Zindagi, log aur duniya ke sach par gehri shayari

Duniya shayari reflects the reality of life, people, and relationships around us. It captures the truth of society, the dual nature of insaan, and the emotional depth hidden behind appearances. Through powerful words, this shayari expresses what we often feel but rarely say about the world.

duniya shayari
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
Rehman Faris
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jahan shayari
दिल में और दुनिया में अब नहीं मिलेंगे हम
वक़्त के हमेशा में अब नहीं मिलेंगे हम
Jaun Elia
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sansaar shayari
इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के
Farhat Ehsaas
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zamana shayari
मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग
मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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aalam shayari
मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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log shayari
तेरे गालों पे जब गुलाल लगा
ये जहाँ मुझ को लाल लाल लगा
Nasir Amrohvi
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insaan shayari
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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jahaan shayari
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है
Fani Badayuni
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duniya-daari shayari
सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
Himayat Ali Shayar
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं
फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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इस दुनिया का हर मंसूबा हर कोशिश बेकार हुई
इक बच्चे ने हाथ बढ़ाया चाँद को छू कर देख लिया
Tariq Qamar
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तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
ये सुहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है
Azhar Faragh
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गिला नहीं कि मेरे हाल पर हँसी दुनिया
गिला तो ये है कि पहली हँसी तुम्हारी थी
Subhan Asad
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दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
Salman Zafar
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न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए
Dushyant Kumar
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कर ही क्या सकती है दुनिया और तुझ को देख कर
देखती जाएगी और हैरान होती जाएगी
Ameer Imam
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यादों की रेल आज वहीं आ के रुक गई
खेले थे हम जहाँ कभी पटरी पे बैठ कर
Munawwar Rana
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दुनिया भी जैसे ताश के पत्तों का खेल है
जोकर के साथ रहती है रानी ही क्यूँ न हो
Munawwar Rana
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उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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जहाँ सारे हवा बनने की कोशिश कर रहे थे
वहाँ भी हम दिया बनने की कोशिश कर रहे थे
Abbas Qamar
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हम आसमाँ के लोग थे जन्नत से आए थे
ख़ुद को मगर ज़मीं में बोना पड़ा हमें
Abbas Qamar
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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
Faiz Ahmad Faiz
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सारी दुनिया से दूर हो जाए
जो ज़रा तेरे पास हो बैठे
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें
रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम
Faiz Ahmad Faiz
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हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा माँगेंगे
इक बाग़ नहीं, इक खेत नहीं, हम सारी दुनिया माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ
साँस लेना भी शा'इरी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
Ahmad Faraz
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अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ
Ahmad Faraz
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तुम्हारे बा'द अब मैं क्या करूँँगा
गुज़रती गाड़ियाँ देखा करूँँगा

मेरे मरने पे काफ़ी लोग होंगे
मैं अपनी मौत पर ख़र्चा करूँँगा
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Asif Ali
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घर के बाहर ढूँढ़ता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
Rahat Indori
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मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे
Rahat Indori
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जहाँ तक आके तुम वापस गए हो
वहाँ अब तक कोई पहुँचा नहीं है
Zubair Ali Tabish
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नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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लगा जब कि दुनिया की पहली ज़रूरत मोहब्बत है तब उस ने माना
यक़ीं हो गया जब मोहब्बत ज़रूरत है तब उस ने माना

वगरना तो ये लोग उसे ख़ुद-कुशी के लिए कह चुके थे
उसे आइने ने बताया कि वो ख़ूब-सूरत है तब उस ने माना
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Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें ये दुनिया कभी फूल तो नहीं देगी
मिले हैं काँटे तो काँटों को ही गुलाब करो
Madan Mohan Danish
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ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं
दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
Abhishek shukla
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जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है
Mirza Ghalib
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दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है
Nida Fazli
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सच्चाई को अपनाना आसान नहीं
दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है
Nawaz Deobandi
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लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं
Shakeel Jamali
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हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद
मैं उसे ढूँढ़ रहा हूँ ये बताने के लिए
Shakeel Jamali
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ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब
लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं
Majrooh Sultanpuri
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सुनते हैं इश्क़ नाम के गुज़रे हैं इक बुज़ुर्ग
हम लोग भी फ़क़ीर इसी सिलसिले के हैं
Firaq Gorakhpuri
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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
Gulzar
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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए
Gopaldas Neeraj
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आप की सादा-दिली से तंग आ जाता हूँ मैं
मेरे दिल में रह चुके हैं इस क़दर हुश्यार लोग
Nomaan Shauque
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कल जहाँ दीवार थी है आज इक दर देखिए
क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए
Javed Akhtar
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बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर
Allama Iqbal
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इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है
वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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इश्क़ का ए'जाज़ सज्दों में निहाँ रखता हूँ मैं
नक़्श-ए-पा होती है पेशानी जहाँ रखता हूँ मैं
Behzad Lakhnavi
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ये जो कुछ लोग ख़यालों में रहा करते हैं
उन का घर-बार भी होता है नहीं भी होता
Afzal Khan
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इसी लिए तो यहाँ अब भी अजनबी हूँ मैं
तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूँ मैं
Bashir Badr
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ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
Ameer Minai
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कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं
Dushyant Kumar
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मैं अपनी दुनिया का ऐसा सूरज हूँ
जिस सूरज का गहना मुश्किल होता है
Aalok Shrivastav
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जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़ब्ह होती हो
जहाँ तज़लील है जीना वहाँ बेहतर है मर जाना
Gulzar Dehlvi
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आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा
जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं
Shakeel Azmi
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कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है
दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है
Hafeez Banarasi
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जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा
वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं
Hafeez Jalandhari
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
जाने क्यूँँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
Qateel Shifai
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'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना
मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा
Altaf Hussain Hali
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अंदर की दुनिया से रब्त बढ़ाओ 'आनिस'
बाहर खुलने वाली खिड़की बंद पड़ी है
Aanis Moin
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लाज़िम है अब कि आप ज़ियादा उदास हों
इस शहर में बचे हैं बहुत कम उदास लोग
Bhaskar Shukla
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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं
Dagh Dehlvi
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जब मिली आँख होश खो बैठे
कितने हाज़िर जवाब हैं हम लोग
Jigar Moradabadi
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ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे
अपनी दुनिया बुरी लग गई

जिस को आबाद करते हुए
मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
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Tehzeeb Hafi
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ये आसमाँ में कोई बुत बैठा भी है कि नईं
या हम ज़मीं के लोग यूँँ ही चीखते हैं बस
Siddharth Saaz
मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
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Abrar Kashif
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वहाँ ईद क्या वहाँ दीद क्या
जहाँ चाँद रात न आई हो
Shariq Kaifi
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ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैं
तेरे आग़ोश में हम छटपटाने लग गए हैं

बहुत मुमकिन है कोई तीर हम को आ लगेगा
हम ऐसे लोग जो पंछी उड़ाने लग गए हैं
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Vikram Sharma
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नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का
ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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शे'र कहते हैं कई लोग मज़ा देते हैं
हम मगर वो हैं जो दीवाना बना देते हैं
Astitwa Ankur
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तेरे आने की इक उम्मीद है और
इसी उम्मीद पर क़ाएम है दुनिया
Shubham Sarkar
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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फ़ुज़ूल-ख़र्ची नहीं करेंगे
Rehman Faris
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दुनिया की नज़रों में हम तो जोकर हैं
सब को ख़ुश रक्खें मतलब वो जोकर हैं

ख़त्म कहानी कर के जब तुम ही ख़ुश हो
अपना क्या है यार अपन तो जोकर हैं
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Nadim Nadeem
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अधर पर बाँसुरी ले प्रीत का संसार रचती है
कभी गिरिधर कभी मोहन बनाती उँगलियाँ देखो
Shubha Shukla Mishra Adhar
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जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे
जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे

अमीर-ए-शहर के आने पे उठना पड़ता है
लिहाज़ा अगली सफ़ों में कभी नहीं बैठे
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Mehshar Afridi
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अज़ल से ले कर के आज तक मैं कभी भी तन्हा नहीं रहा हूँ
कभी थे तुम तो, कभी थी दुनिया, कभी ये ग़ज़लें, कभी उदासी
Ankit Maurya
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हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
वही होता है जो, वो हो रहा है

ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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Shaad Imran
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इक कमरे के कोने में ग़ज़लें लिखकर
शाइ'र पूरी दुनिया पर छा जाता है
Tanoj Dadhich
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं
जीतने का जहाँ मौक़ा था वहीं मात हुई
Manzar Bhopali
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई दे
लहजे को सच्चाई दे

दुनिया है जंगल का सफ़र
लछमन जैसा भाई दे
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Tariq Shaheen
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तुम ने भी उन से ही मिलना होता है
जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है

तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो
ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है
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Zia Mazkoor
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अब नहीं हैं लोग जो दुनिया थे पहले
और ये दुनिया भी अब दुनिया नहीं है
Siddharth Saaz
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तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना
जहाँ पे हम हैं वहाँ चांदनी बहुत कम है
Shakeel Azmi
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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दुनिया के ता'ने सह लेता हूँ
इक अच्छा बेटा कहलाना है
Neeraj Neer
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जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के
उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा
Aabid Adeeb
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बताया है किसी के इश्क़ ने हम को
कि दुनिया ख़ूब-सूरत भी हो सकती है
Ankit Maurya
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इज़हार करते रहते हैं वैसे तो कितने लोग
अच्छा लगेगा पर मुझे तेरी ज़बान से
Ankit Maurya
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सारी दुनिया चॉकलेट पर मरती है
तुम मुझ पर मरती हो ! ये भी बढ़िया है
Divy Kamaldhwaj
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पहले कोई कोशिश कर के तो देखे
हम इतने भी सख़्त नहीं दुनिया वालों
Divy Kamaldhwaj
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया

मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग
मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Read Full
Tehzeeb Hafi
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अपना ही एक मौसम लिए फिरते हैं
लोग जो दिल को पुर-ग़म लिए फिरते हैं

चारा-गर जैसे हैं ये सुख़न-वर सभी
सबके ज़ख़्मों का मरहम लिए फिरते हैं
Read Full
Dileep Kumar
छोड़ दूँ उस को भला मैं किस तरह से
वो मोहब्ब़त है मिरी, आदत नहीं है

जिस की ख़ातिर हम भुला बैठे हैं दुनिया
दोस्तों से ही उन्हें फ़ुर्सत नहीं है
Read Full
Shashank Shekhar Pathak
जहाँ से लौटना मुमकिन नहीं है
कुछ ऐसे मोड़ हैं उस के बदन में
Siddharth Saaz
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वो मिलेंगे उस जहाँ के आसमाँ में
मिल न पाए जो परिंदे इस ज़मीं पर
Raj Tiwari
तुम जहाँ छोड़कर गई थी मुझे
आज तक मैं वहीं पे ठहरा हूँ
Shajar Abbas