Gulshan Shayari - Nature, beauty, and blooming emotions captured in poetic lines

Gulshan shayari beautifully reflects the charm of gardens, blooming flowers, and the freshness of nature. It often symbolizes love, peace, and life’s gentle emotions through imagery of phool, khushboo, and bahaar. Perfect for those who find poetry in nature’s elegance.

gulshan shayari
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
Ahmad Faraz
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bagh shayari
हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
Sahir Ludhianvi
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bagicha shayari
बहार आई कि दिन होली के आए
गुलों में रंग खेला जा रहा है
Jaleel Manikpuri
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phool shayari
तोहफ़ा, फूल, शिकायत, कुछ तो ले कर जा
इश्क़ से मिलने ख़ाली हाथ नहीं जाते
Tanoj Dadhich
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khushboo shayari
बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई
मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा
Saqi Faruqi
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chaman shayari
ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान
मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है
Abbas Tabish
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bahaar shayari
होली है या फिर फूलों का मौसम है
सब के चेहरों पे रंग है ख़ुशबू भी है
Meem Alif Shaz
gulshan shayari
दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया
उस ने मुझे बहार से महरूम कर दिया
Anjum Barabankvi
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bagh shayari
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
Jafar Malihabadi
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bagicha shayari
हर तरफ़ फूल ही फूल खिल जाएँगे
आप ऐसे ही हँसते रहा कीजिए
Wajida Tabassum
phool shayari
गुल कि गुलशन को सुना है तुम चुराना चाहते हो
आज फिर मुझ को गले से तुम लगाना चाहते हो
ATUL SINGH
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अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल ना थे
तुम अगर फूल ना होते तो हमारे होते
Ashfaq Nasir
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बाग़बाँ हम तो इस ख़याल के हैं
देख लो फूल फूल तोड़ो मत
Jaun Elia
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कोई तितली पकड़ लें अगर
फूल पर रख दिया कीजिए
Vikas Rana
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अपने होंटों से कहो फूल को चू
में हर रोज़
जब मेरे लब नहीं होंगे तो सहूलत होगी
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Shahbaz Rizvi
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उस की तरफ़ से फूल भी आएँगे एक रोज़
पत्थर उठा के चूम ले इस को पहल समझ
Munawwar Rana
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अब आप की मर्ज़ी है सँभालें न सँभालें
ख़ुश्बू की तरह आप के रूमाल में हम हैं
Munawwar Rana
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गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
Faiz Ahmad Faiz
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न गुल खिले हैं, न उन से मिले, न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है
Faiz Ahmad Faiz
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को
हाथों में फूल हैं मेरे पाँव में रेत है
Tehzeeb Hafi
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सो देख कर तेरे रुख़्सार-ओ-लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
Ahmad Faraz
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
Balmohan Pandey
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तुम्हें ये दुनिया कभी फूल तो नहीं देगी
मिले हैं काँटे तो काँटों को ही गुलाब करो
Madan Mohan Danish
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तेरा प्यार मेरी ज़िंदगी में
बहार ले कर आया है

तेरे आने से पहले हर दिन
पतझड़ हुआ करता था
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Vipul Kumar
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
Parveen Shakir
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काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन
तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा
Parveen Shakir
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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की
Parveen Shakir
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तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुश्बू से सारा घर महके
Nawaz Deobandi
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ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है
दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
Pallav Mishra
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख
Majrooh Sultanpuri
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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
Gulzar
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हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी
फूल बालों में इक सजाने को
Ada Jafarey
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एक आईना रू-ब-रू है अभी
उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी
Ada Jafarey
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बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने
Kaifi Azmi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
Faiz Ahmad Faiz
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तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा
मैं वो चमन जो बहाराँ के इंतिज़ार में है
Ali Sardar Jafri
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इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ
Ali Sardar Jafri
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कमी कमी सी थी कुछ रंग-ओ-बू-ए-गुलशन में
लब-ए-बहार से निकली हुई दुआ तुम हो
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है
वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है
नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका
Arzoo Lakhnavi
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यूँँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
Qateel Shifai
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तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं
हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं
Farhat Ehsaas
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फूल कर ले निबाह काँटों से
आदमी ही न आदमी से मिले
Khumar Barabankvi
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया
तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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गया था माँगने ख़ुशबू मैं फूल से लेकिन
फटे लिबास में वो भी गदा लगा मुझ को
Aanis Moin
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किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं
वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं
Farhat Ehsaas
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तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना
इत्रदानों के बस की बात नहीं
Fahmi Badayuni
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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वो शाख़ है न फूल, अगर तितलियाँ न हों
वो घर भी कोई घर है जहाँ बच्चियाँ न हों
Bashir Badr
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मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
Bashir Badr
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अगरचे फूल ये अपने लिए ख़रीदे हैं
कोई जो पूछे तो कह दूँगा उस ने भेजे हैं
Iftikhar Naseem
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फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
Sajid Premi
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फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत
और मचल कर जी कहता है छोड़ो मत
Ameeq Hanafi
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हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए
किसी को भेज के मँगवाने थोड़ी होते हैं
Anwar Shaoor
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हर कोई फूल-सा है लेकिन वो
फूल में फूल है गुलाब का फूल
Ramnath Shodharthi
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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है
कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है

है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही
वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है
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Tehzeeb Hafi
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रात यूँँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए
Faiz Ahmad Faiz
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मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर
आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई
Akhtar Shirani
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साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की
Ufuq Lakhnavi
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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आदतन उस के लिए फूल ख़रीदे वरना
नहीं मालूम वो इस बार यहाँ है कि नहीं
Abbas Tabish
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फ़स्ल-ए-बहार आई है होली के रूप में
सोलह सिंगार लाई है होली के रूप में
Saghar Nizami
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मैं ने चाहा भी कि फिर इस संग-दिल पे फूल उगे
पर तुम्हारी रुख़्सती के बा'द ये होता नहीं
Siddharth Saaz
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एक ज़ख़्म ऐसा न खाया कि बहार आ जाती
दार तक ले के गया शौक़-ए-शहादत मुझ को
Kaifi Azmi
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ख़्वाहिश है इन गुलों को दवामी बहार दूँ
जितने किए हैं इश्क़ सुख़न में उतार दूँ
Bhaskar Shukla
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
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Jaun Elia
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तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई
मिलेंगे फूल सब इस
में ग़ज़ल गुलदान है यारों

पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे
हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों
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Tanoj Dadhich
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
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Tehzeeb Hafi
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आप अपने से हम-सुख़न रहना
हमनशीं साँस फूल जाती है
Jaun Elia
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शाख़ें रहीं तो फूल भी पत्ते भी आएँगे
ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएँगे
Manzoor Hashmi
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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं

बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
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Abrar Kashif
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किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे
बेहतर है तेरे हाथ का ख़ंजर लगे मुझे
Vikram Sharma
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें
और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है
Wali Aasi
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ
सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया
Hammad Niyazi
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दूर इक सितारा है और वो हमारा है
आँख तक नहीं लगती कोई इतना प्यारा है

छू के देखना उस को क्या अजब नज़ारा है
तीर आते रहते थे फूल किस ने मारा है
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Kafeel Rana
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जो सावन होते सूखा, उस फूल पे लानत हो
मुझ पे लानत, तेरे होते, यार उदासी है
Siddharth Saaz
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तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए
इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं
Shubham Seth
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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छुआ है तुम ने भी इक रोज़ हम को
ये ख़ुशबू देर तक महका करेगी

तुम्हारे हाथ सालों तक ये दुनिया
हमारे नाम पे चूमा करेगी
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Ritesh Rajwada
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तुम सेे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए

तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए
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Zia Mazkoor
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लब पे आता था जो दुआ बन कर
दिल में रहता है अब ख़ला बन कर

कितना इतरा रहा है अब वो फूल
तेरे बालों का मोगरा बन कर
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Haider Khan
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वैसे तो ज़ेवरों की ज़रूरत नहीं तुझे
फिर भी अगर ये फूल तेरे काम आ सके
Charagh Sharma
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे
उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
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Gyan Prakash Akul
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गुलशन से कोई फूल मुयस्सर न जब हुआ
तितली ने राखी बाँध दी काँटे की नोक पर
Unknown
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है
मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
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Varun Anand
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फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
Azhar Iqbal
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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है
Ghulam Mohammad Qasir
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गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से
मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है
Satish Shukla Raqeeb
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काँटे बनकर वापस क्यूँँ आ जाते हैं?
हम ने तुम को फूल जो भेजे होते हैं
Riyaz Tariq
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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
Naeem Sarmad
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ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग
महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ
Mansoor Usmani
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फूल की आँख में शबनम क्यूँँ है
सब हमारी ही ख़ता हो जैसे
Bashir Badr
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"उस के हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए
उस का हाथ है फूल को फूल बनाने में
Charagh Sharma
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल न थे
तुम अगर फूल न होते तो हमारे होते
Ashfaq Nasir
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चूमा था एक दिन किसी गुल की जबीन को
लहजे से आज तक मेरे ख़ुश्बू नहीं गई
Afzal Ali Afzal
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हैराँ मैं भी हूँ दोस्त यूँँ बालों में गजरा देख कर
ये फूल आख़िर कब से फूलों को पहनने लग गया
Neeraj Neer
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सूखे फूल संभाले हँसती रहती है
औरत सारी उम्र ही लड़की रहती है
Aabi Makhnavi
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उड़ाने पर जो आ जाऊँ उड़ा दूँ होश दुनिया के
मगर मैं फूल से तितली उड़ा सकता नहीं यारों
Divy Kamaldhwaj
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यूँँ तो वो इत्रदान था लेकिन ये क्या हुआ
टूटा तो एक सम्त भी ख़ुशबू नहीं गई
Afzal Ali Afzal
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