Sukoon Shayari Collection - Dil ko milne wali shanti aur inner peace ki shayari

Sukoon shayari reflects the calmness and peace that the heart quietly seeks in a noisy world. These lines capture moments of inner silence, emotional balance, and that rare feeling of chain and itminaan. Whether it comes from love, solitude, or self-acceptance, sukoon is the poetry of a peaceful soul.

sukoon shayari
साहिल के सुकूँ से किसे इनकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
Aale Ahmad Suroor
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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Kaifi Azmi
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हमारी मौत पर बेशक ज़माना आएगा रोने
मगर ज़िंदा हैं जब तक चैन से जीने नहीं देगा
Astitwa Ankur
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मैं हार रहा हूँ और बड़े इत्मीनान से
ऐसे की जैसे हार का मतलब नहीं पता
Shubham Sarkar
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दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
मौत आ गई कि दोस्त का पैग़ाम आ गया
Jigar Moradabadi
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तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई

मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई
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Mirza Ghalib
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जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
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नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिले
तू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है
Naqsh Lyallpuri
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चैन की बाँसुरी बजाइये आप
शहर जलता है और गाइये आप

हैं तटस्थ या कि आप नीरो हैं
असली सूरत ज़रा दिखाइये आप
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Gorakh Pandey
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
Kaifi Azmi
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'इंशा'-जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या
वहशी को सुकूँ से क्या मतलब जोगी का नगर में ठिकाना क्या
Ibn E Insha
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा
Anwar Taban
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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
Josh Malihabadi
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मुयस्सर हमें ख़्वाब-ओ-राहत कहाँ
ज़रा आँख झपकी सहर हो गई
Dagh Dehlvi
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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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Zaki Azmi
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इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं,
सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं!

जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना,
सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
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Balmohan Pandey
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उँगलियों चैन पड़ गया तुम को
उस ने इग्नोर कर दिया मैसेज
Nadim Nadeem
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हैरान हो के देख रहे हैं मुझे अज़ाब
मैं मर रहा हूँ और बहुत इत्मीनान से
Vikram Gaur Vairagi
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं

तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं
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Rehman Faris
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा
तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं
हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते
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Waseem Barelvi
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कुछ तो करें कि दिल ये कहीं और जा लगे
कुछ देर के लिए सही आँखों को चैन हो
Afzal Ali Afzal
बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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क्या वाक़ई वो तेरी पाज़ेब की खनक थी
ऐसा सुकून तो बस नुसरत के गाने में है
Neeraj Neer
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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कहाँ कहाँ पे उसे ढूँढ़ते हैं हम यारों
किसी के लम्स से होता था जो सुकूँ दिल को
Afzal Ali Afzal
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सुकून ए क़ल्ब होता है मुयस्सर
तेरा जब नाम आता है लबों पर
Kiran K
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जल चुका है जिस्म मेरा राख हूँ मैं
पर मुझे अब भी मिली राहत नहीं है
Shashank Shekhar Pathak
अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
अगर जो जाना था तो क्यूँँंँ मिले मुझे

ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
तू अब कभी मिले तो यूँंँ मिले मुझे
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Faiz Ahmad
पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से
पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से
Ankit Maurya
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सुकून देती थी तब मुझ को वस्ल की सिगरेट
अब उस के हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
Upendra Bajpai
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शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की

कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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Aman G Mishra
एक ही शख़्स नहीं होता सदा दिल का सुकूँ
एक करवट पे कभी नींद नहीं आ सकती
Rehan Mirza
उसूली तौर पे मर जाना चाहिए था मगर
मुझे सुकून मिला है तुझे जुदा कर के
Ali Zaryoun
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न तीर्थ जा कर न धर्म ग्रंथो का सार पा कर
सुकूँ मिला है मुझे तो बस तेरा प्यार पा कर

ग़रीब बच्चे किताब पढ़ कर सँवर रहे हैं
अमीर लड़के बिगड़ रहे हैं दुलार पा कर
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Alankrat Srivastava
मुसीबतों में तो याद करते ही हैं किसी को ये लोग सारे
मगर कभी जो सुकूँ में आए ख़याल मेरा तो लौट आना
Hasan Raqim
तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं
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Shamim Abbas
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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ
मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे
Kaleem Aajiz
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ऐ दोस्त जुदाई में तेरी कुछ ऐसे भी लम्हे आते हैंसजों पे भी तड़पा करता हूँ काँटों पे भी राहत होती है
Saba Afghani
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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगरना ज़माने में क्या न था
Azad Ansari
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क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं
Mehshar Afridi
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ये किस अज़ाब में छोड़ा है तू ने इस दिल को
सुकून याद में तेरी न भूलने में क़रार
Shohrat Bukhari
बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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एक तेरा ही तबस्सुम तो न था वजह-ए-सुकूँ
मेरे आँसू भी मोहब्बत में बहुत काम आए
Mushfiq Khwaja
कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh Vanza
इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल
उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा
Aitbar Sajid
फिर उम्र भर कभी न सुकूँ पा सका ये दिल
कटने थे जो भी कट गए राहत में चार दिन
A G Josh
जब से देखा है उसे किसी और कि बाहों में
तब से मैं चैन से सो नहीं पा रहा

उस ने क़सम दी थी मुझे कभी न रोने की
रोना तो चाहता हूँ, मगर रो नहीं पा रहा
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MANOBAL GIRI
मुझे उस की पेशानी का सुकून बनना था मगर
उस की रूह की अज़ीयत का सबब बन गया हूँ
Mohammad Shahrukh Qureshi
चाँद हो तुम चकोर हैं आँखें
हिज्र ये इत्मीनान वाला है
Saarthi Baidyanath
कुँए में चलो कूद जाते हैं दोनों
तभी इस ज़माने को राहत बचेगी
Aarush Sarkaar
तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दिया
दूर नींदों से कहीं रात गुजारी मैं ने

लौट कर आए जो घर शाम थके हारे तब
झूट की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने
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Aditya
जन्नती सुकून की तलाश में अगर चलूँ
मिल सके मुझे सुकून सिर्फ़ माँ कि गोद में
Zain Aalamgir
लिखना जो हुआ ख़ुद को इक दिया लिखूँगा मैं
दिलरुबा को अपने बहती हवा लिखूँगा मैं

बे-चैन हो ख़त पढ़ के उस को नींद ना आए
नाम अपना कोने में सर-फिरा लिखूँगा मैं

इश्क़ की ग़ज़ल मेरी हो गई मुकम्मल तो
ख़ुद रदीफ़ बन तुम को क़ाफ़िया लिखूँगा मैं
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Vedic Dwivedi
ग़मज़दा इस ज़िन्दगी को देखते हैं
और फिर अपनी घड़ी को देखते हैं

ये ख़ुशी भी जाँ कि मर के चैन से हम
जी रहे हर आदमी को देखते हैं
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Prashant Sitapuri
कुछ ऐसे भी होते होंगे
जो हरदम बस रोते होंगे

चैन न उस को आता होगा
जाने कैसे सोते होंगे
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Kabir Altamash
आलम में कहीं बादल ख़ूब बरसते हैं
जन्नत में कहीं राहत शे'र सुनाते हैं
Gaurav Singh
लोग खाते हैं गोलियाँ "अकबर"
हम को चाय सुकून देती है
''Akbar Rizvi"
तुम्हारा हिज्र बड़े ही सुकून से गुज़रा
भटकते रहना था और बस मलाल करना था
Monis faraz
न जीने का सुकूँ है न मरने की इजाज़त है
यार ज़िन्दगी भी न जाने कैसी फ़ज़ीहत है
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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वो लोग जिन्हें शे'र सुनाने थे अमन के
वो लोग सबके मन में जहर घोल कर रहे
Gaurav Singh
सारी रात ही ये चैन से सोने नहीं देती
तेरी याद जैसे मान लो नौ-ज़ाइदा बच्ची
Sarvjeet Singh
ये सदा-ए-ग़ैब और फिर ये सदा-ए-दिल "अमन"
हो सके क़ाफ़िर न हम तो हो सके ज़ाहिद यहाँ
Aman Kumar Shaw "Haif"
सिवाए तालियों के कुछ नहीं मिलता
ग़ज़लगोई फ़क़त धंधा सुकूँ का है
Neeraj Neer
सुकून आप को देती है महफ़िल-ए-ख़ूबाँ
हमें तो मुल्क-ए-ख़मोशाँ सुकून देता है
Shajar Abbas
सियाह शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी
मुझे अँधेरों कि आदत तबाह कर देगी

मैं तेरे दुख में बराबर शरीक हूँ सो मुझे
उदास शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी

जो सब्र और तहम्मुल के साथ ईश़्क करे
उसे तुम्हारी मोहब्बत तबाह कर देगी

जो इश्क़ सब्र की दीवार तोड़ दे जानाँ
उसे बदन की ज़रूरत तबाह कर देगी

दुआ सलाम से आगे अगरचे बात बढ़े
तो फिर ये वस्ल की राहत तबाह कर देगी

हसीन चेहरे की आदत है छोड़ जाने की
सो ऐसे शख्श़ की सोहबत तबाह कर देगी
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Md Akhter Ansari
रात भर मन भटकता रहा और मैं
चैन से सो न पाया तुम्हारी क़सम
Gaurav Singh
सुकूँ प्यारे उलफ़त का छाया हुआ है
अँधेरा भी घर का पराया हुआ है

तसव्वुर का तेरे ये अदना है जादू
दिया जैसे शब में जलाया हुआ है
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Maviya abdul kalam khan
तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दिया
दूर नींदों से कहीं रात गुज़ारी मैं ने

लौट कर आए जो घर शाम थके हारे तब
झूठ की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने
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Aditya
सियासत में न उलझो तुम अभी ठहरो
अमन फ़ैला रहे सरकार रहने दो
Tiwari Jitendra
क्या-क्या छीना है मुझ सेे उस ने बतलाऊँ
नींद, चैन, मुस्कान, ख़ुशी, वो, मैं या'नी सब
Saahir
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मेरे ज़ख़्मों की दवा कोई नीलोफ़र तो नहीं
मगर ख़ुशबू उस की, दिल को कुछ पल राहत देती है
A R Sahil "Aleeg"
बा'द तेरे सुकूँ तलाश किया
हम को हर शय ने फिर हताश किया

कुछ को कांधा दिया लहू कुछ को
हम ने हर चीड़ को पलाश किया
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anupam shah
यार तो कई है आराम-ए-जाँ जहाँ में इस
पर यहाँ सुकून-ए-दिल सिर्फ़ एक नुसरत है
Kartik tripathi
शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम
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Deep kamal panecha
सच कहूँ रात में जब नींद न आती थी मुझे
मेरी माँ लोरियाँ गा-गा के सुलाती थी मुझे

ऐ मेरे लख़्त-ए-जिगर जान-ए-जिगर राहत-ए-जाँ
इस तरह दे के सदा पास बुलाती थी मुझे
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Shajar Abbas
है दुआ लब पे लिए तुझ सेे शजर महव-ए-दुआ
रखना महरूम मुझे दौलत-ए-आलम से ख़ुदा

मेरे आँगन में तवाइफ़ ये अगर आएगी
छीन लेगी ये सभी रिश्ते ख़ुशी चैन मेरा
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Shajar Abbas
चाँदनी रात है और राहत है
चाँद तो साथ है और राहत है
Akash Panwar
सुकूँ को प्यार मतलब से बनाते हो
हमें भी यार मतलब से बनाते हो
Anurag Pandey
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सुकून देती हैं मेरे दिल को शजर की बातें शजर का लहजा
है ख़ूब-सूरत क़सम से सखियों शजर की ज़ुल्फ़ें शजर का चेहरा

बताओ किस का सुनोगी नग़्मा बताओ किस की सुनोगी ग़ज़लें
वो बोली सखियों से मुस्कुरा के शजर की ग़ज़लें शजर का नग़्मा
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Shajar Abbas
गले से लगा लो कभी तो
कभी तो मुझे चैन आए
MOHSIN JAHANGIR
देखा उसे मैं ने झुकाकर नैन को
कोई गया है लूट मेरे चैन को
Akash Kumar
जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है
सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या
Dharamraj deshraj
सुकून-ए-दिल नहीं मिलता विसाल-ए-यार में हर बार
मियाँ इक रोज़ वो हम सेे मिली थी फिर न मिलने हेतु
Sandeep dabral 'sendy'
चाहता हूँ सुकून मिल जाए
झूठ दिन रात बोलता हूँ मैं
Sayeed Khan
मेरा सुकून मेरा चैन छीनने वाले
तुझे कभी भी मय्यसर सुकून-ओ-चैन न हो
Shajar Abbas
यहाँ पे दर्द दिल में हो रहा है
वहाँ तो चैन से वो सो रहा है
Raunak Karn
ऐसा लगता है फ़िराक़ -ए-यार में
जब तलक ज़िंदा रहूँगा रोऊँगा

मैं ने सोचा था मैं तुम को भूल कर
चैन से सहरा में जा कर सोऊँगा
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Shajar Abbas
ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है
मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
होश भी था सुकून में थे हम
हाल बदतर नहीं थे यारों तब

वो भी माहिर था बे-वफ़ाई में
हम भी कमतर नहीं थे यारों तब
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Aqib khan
रात इतनी तवील कैसे है
नींद आती नहीं सुकून नहीं
Meem Alif Shaz
अब तक मिला नहीं है कहाँ है सुकून ए दिल
ख़ुद को मैं खो दिया हूँ इसे ढूँढ़ते हुए
Shaikh Sohail
हम भी सो जाएँगे इक दिन
राहत की तरह ख़ामोशी से
Meem Alif Shaz
रात में यूँँ सुकून का होना
बात में यूँँ जुनून का होना
Seema Mahapatra
यहाँ बे-फ़िक्र भी होना मना है
उठो अब चैन से सोना मना है

मिरे अश्कों को ये समझाए कोई
मैं लड़का हूँ मुझे रोना मना है
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Aman Mishra 'Anant'
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आह! जाँ को मेरी सुकूँ नहीं है
आज फिर यूँँ हुआ कि यूँँ नहीं है
Mohammad Talib Ansari
मिल जाए ऐ ‘सफ़र’ भी दिल-ओ-जान को सुकूँ
‘ग़ालिब’ के पैरहन का मैं घागा जो हो सकूँ
SHIV SAFAR
चैन दिल को आए तो आए कहाँ माँ के बिना
सूना सूना लगता है सारा जहाँ माँ के बिना

कह रहा था मुझ सेे रो-रोकर शजर ज़ैदी मुझे
सारी दुनिया लग रही है राएगाँ माँ के बिना
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Shajar Abbas
दिल बड़ा ही था सुकूँ में क्यूँँ 'पथिक'
दफ़अ'तन जो आप से मिलना हुआ
Suraj "pathik"
कभी ख़ामोश रह कर भी तमाशा देख लेता हूँ
सुकूँ में हूँ, ज़माने की हताशा देख लेता हूँ
Kushal "PARINDA"
ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे
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Jayanti Jha
जो ज़िंदगी से चाहता था मिल गया मुझे
फिर भी मुझे सुकून मुयस्सर नहीं हुआ
shaan manral
तू मेरा दोस्त प्यार सब कुछ है
तू है तो मेरे यार सब कुछ है

अब आ भी जा के तेरे पहलू में
चैन राहत करार सब कुछ है
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Ankit Raj
तमाम तन्हा व काली रातों को मैं ने काटा है करवटों में
सुकून हासिल हो जाए तुम गर ज़रा सा मेरे क़रीब आओ
Rajnish Vishwakarma