Mausam Shayari - Badalte mausam aur jazbaat ko mehsoos karne wali shayari

Mausam shayari beautifully captures how changing weather reflects human emotions. From baarish ki boondein to thandi hawa, every season mirrors feelings of love, nostalgia, and life. These verses connect nature with dil ke jazbaat, making each line feel alive and relatable.

mausam shayari
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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hawa shayari
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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baarish shayari
जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
Jameel Mazhari
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sardi shayari
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
Manzoor Hashmi
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garmi shayari
होली है या फिर फूलों का मौसम है
सब के चेहरों पे रंग है ख़ुशबू भी है
Meem Alif Shaz
badal shayari
ज़िंदगी तुझ से भी क्या ख़ूब तअल्लुक़ है मिरा
जैसे सूखे हुए पत्ते से हवा का रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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rut shayari
वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा
वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई
Khurram Afaq
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fiza shayari
सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
Moin Shadab
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hawayein shayari
गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया
Bedil Haidri
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mehekti hawa shayari
इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ
रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए
Zubair farooq
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mausam shayari
बैठे बैठे फेंक दिया है आतिश-दान में क्या क्या कुछ
मौसम इतना सर्द नहीं था जितनी आग जला ली है
Zulfiqar aadil
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hawa shayari
मैं वो चराग़ हूँ जो आँधियों में रौशन था
ख़ुद अपने घर की हवा ने बुझा दिया है मुझे
Saqi Amrohvi
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न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है हवा चल रही है
Khumar Barabankvi
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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तुम्हें मैं क्या बताऊँ इस शहर का हाल कैसा है
यहाँ बारिश तो होती है मगर सावन नहीं आता
Bhaskar Shukla
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जहाँ सारे हवा बनने की कोशिश कर रहे थे
वहाँ भी हम दिया बनने की कोशिश कर रहे थे
Abbas Qamar
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दिल से तो हर मोआ'मला कर के चले थे साफ़ हम
कहने में उन के सामने बात बदल बदल गई
Faiz Ahmad Faiz
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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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अब तेरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं
कितनी रग़बत थी तेरे नाम से पहले पहले
Ahmad Faraz
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अभी कुछ और करिश्में ग़ज़ल के देखते हैं
'फ़राज़' अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं
Ahmad Faraz
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मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी
Rahat Indori
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टूटी चीज़ों को बदल दें था बेहतर वरना
तू जो चाहता तो दोबारा बना लेता हमें

इस तरह रोते हैं याद करते हुए हम तुझे
जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
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Vikram Gaur Vairagi
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तोहमत उतार फेंकी लबादा बदल लिया
ख़ुद को ज़रूरतों से ज़ियादा बदल लिया
Abbas Tabish
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बहुत बेकार मौसम है मगर कुछ काम करना है
कि ताज़ा ज़ख़्म मिलने तक पुराना ज़ख़्म भरना है
Abbas Tabish
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मैं चोट कर तो रहा हूँ हवा के माथे पर
मज़ा तो जब था कि कोई निशान भी पड़ता
Abhishek shukla
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जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो
मैं चाहता हूँ हवा से रिश्ता बनाए रक्खो
Azm Shakri
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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ
Azm Shakri
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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
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Bashir Badr
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नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
Bashir Badr
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कुछ लोग हैं जो झेल रहे हैं मुसीबतें
कुछ लोग हैं जो वक़्त से पहले बदल गए
Shakeel Jamali
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हमारा काम तो मौसम का ध्यान करना है
और उस के बा'द के सब काम शश-जहात के हैं
Pallav Mishra
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया
इतने नाज़ुक भी ये रिश्ते न बनाए होते
Waseem Barelvi
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूँँ गिला फिर हमें हवा से रहे
Javed Akhtar
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ख़ता तुम से हुई आख़िर तुम्हारा क्या बिगड़ जाता
ये बाज़ी भी तुम्हारी थी अगर मोहरा बदल लेते
Farah Iqbal
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हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमा' जलाने का हौसला न हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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गर्म आँसू और ठंडी आहें मन में क्या क्या मौसम हैं
इस बग़िया के भेद न खोलो सैर करो ख़ामोश रहो
Ibn E Insha
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तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
Bashir Badr
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तेरी यादों की धूप आने लगी है
अभी खुल जाएगा मौसम हमारा
Subhan Asad
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शब की हवा से हार गई मेरे दिल की आग
यख़-बस्ता शहर में कोई रद्द-ओ-बदल न था
Qaisar-ul-Jafri
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हवा जब चली फड़फड़ा कर उड़े
परिंदे पुराने महल्लात के
Muneer Niyazi
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मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर
बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है
Shahryar
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ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द
मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
Farhat Ehsaas
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जाने किस किस का ख़याल आया है
इस समुंदर में उबाल आया है

एक बच्चा था हवा का झोंका
साफ़ पानी को खँगाल आया है
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Dushyant Kumar
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आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अ'तन तग़ाफ़ुल
मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर
Shakeel Badayuni
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न तुझ को मात हुई है न मुझ को मात हुई
सो अब के दोनों ही चालें बदल के देखते हैं
Ahmad Faraz
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उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
Jamal Ehsani
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दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
Qateel Shifai
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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं
Hastimal Hasti
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जैसा मूड हो वैसा मंज़र होता है
मौसम तो इंसान के अंदर होता है
Aziz Ejaaz
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ये हवा सारे चराग़ों को उड़ा ले जाएगी
रात ढलने तक यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा
Naseer Turabi
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ग़ुंचा ओ गुल माह ओ अंजुम सब के सब बेकार थे
आप क्या आए कि फिर मौसम सुहाना आ गया
Asad Bhopali
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सर्दी में दिन सर्द मिला
हर मौसम बे-दर्द मिला

ऊँचे लम्बे पेड़ों का
पत्ता पत्ता ज़र्द मिला
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Mohammad Alvi
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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
Josh Malihabadi
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चुपके चुपके वो पढ़ रहा है मुझे
धीरे धीरे बदल रहा हूँ मैं
Aziz Nabeel
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कौन ताक़ों पे रहा कौन सर-ए-राहगुज़र
शहर के सारे चराग़ों को हवा जानती है
Ahmad Faraz
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चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का
हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती
Waseem Barelvi
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काँटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो साँस की गर्मी न सह सकें
Akhtar Shirani
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
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Ismail Raaz
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जो कह नहीं सका उसे क़रीब था वो जब मेरे
वो बात शे'र में बदल गई तो दूर तक गई
Bhaskar Shukla
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मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के
Mushafi Ghulam Hamdani
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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सुखा ली सबने ही आँखें हवा ए ज़िन्दगी से
यहाँ अब भी वही रोना रुलाना चल रहा है
Farhat Ehsaas
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उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते
Bashir Badr
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शायद अगली इक कोशिश तक़दीर बदल दे
ज़हर तो जब जी चाहे खाया जा सकता है
Siraj Faisal Khan
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चाँद ने ओढ़ ली है चादर-ए-अब्र
अब वो कपड़े बदल रही होगी
Jaun Elia
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तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
Adam Gondvi
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पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं
Unknown
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करती है तो करने दे हवाओं को शरारत
मौसम का तकाज़ा है कि बालों को खुला छोड़
Abrar Kashif
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता
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Abrar Kashif
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दिया बुझ जाए तो अचरज नहीं है
हवा का रुख बदलता जा रहा है
Atul K Rai
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मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू
बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू
Muzammil Raza
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हवा को ख़रीद'ने के लाले पडे हैं
हमारे कयामत से पाले पड़े हैं
Amol
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तुम मुहब्बत से नहीं मुझ सेे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुंतज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक़्शा भी बदल सकते हो
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Vikram Sharma
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बदल जाएँगे ये दिन रात 'अजमल'
कोई ना-मेहरबाँ कब तक रहेगा
Ajmal Siraj
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चराग़ों को उछाला जा रहा है
हवा पर रौब डाला जा रहा है
Rahat Indori
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पहले पानी को और हवा को बचाओ
ये बचा लो तो फिर ख़ुदा को बचाओ
Swapnil Tiwari
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ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा
यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा

ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स
इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
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Khurram Afaq
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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जाने कैसे ख़ुश रहने की आदत डाली जाती है
उन के यहाँ तो बारिश में भी धूप निकाली जाती है
Ritesh Rajwada
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मैं कुछ दिन से अचानक फिर अकेला पड़ गया हूँ
नए मौसम में इक वहशत पुरानी काटती है
Liaqat Jafri
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गर्दिश-ए-माह-ओ-साल से आगे निकल गया हूँ मैं
जैसे बदल गए हो तुम जैसे बदल गया हूँ मैं
Noon Meem Danish
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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ख़ुद को इतना जो हवा-दार समझ रक्खा है
क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है
Haseeb Soz
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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
Farhat Abbas Shah
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मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस
तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
Vikram Gaur Vairagi
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जिस मौसम में भीगना है हम दोनों को
उस मौसम में पूछ रही हो छाता है
Zubair Alam
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बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है
मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
Siddharth Saaz
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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बहुत मुद्दत के बा'द आई है बारिश
और उस ज़ालिम के पेपर चल रहे हैं
Ahmad Farhad
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ग़ुबार-ए-वक़्त में अब किस को खो रही हूँ मैं
ये बारिशों का है मौसम कि रो रही हूँ मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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प्यार की जोत से घर घर है चराग़ाँ वर्ना
एक भी शम्अ' न रौशन हो हवा के डर से
Shakeb Jalali
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आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई
ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई
Manzar Bhopali
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रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं
इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क़रार

जैसे दीवाली की शब हल्की हवा के सामने
गाँव की नीची मुंडेरों पर चराग़ों की क़तार
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Ehsan Danish
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न रूई हो तो अपने अश्कों से बाती बनाएँगे
बुझा दीया हमारा तो हवा से लड़ भी जाएँगे

बनाई रोज़ चौदह साल रंगोली बस इस ख़ातिर
न जाने रामजी वनवास से कब लौट आएंँगे
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Krishnakant Kabk
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
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Tehzeeb Hafi
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वो ग़ुस्से में सीधी बात नहीं करता
तूफ़ानों में बारिश तिरछी होती है
Ankit Maurya
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देख कैसे धुल गए है गिर्या-ओ-ज़ारी के बा'द
आसमाँ बारिश के बा'द और मैं अज़ादारी के बा'द

इस सेे बढ़ कर तो तुझे कोई हुनर आता नहीं
सोचता हूँ क्या करेगा दिल आज़ारी के बा'द
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Abbas Tabish
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देखो मौत का मौसम आने वाला है
ज़िंदा रहना सब सेे बड़ी लड़ाई है
Shadab Asghar
ऐ आसमान तेरी इनायत बजा मगर
फ़स्लें पकी हुई हों तो बारिश फ़ुज़ूल है
Shahid Zaki
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना
Asim Wasti
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ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा
वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा
Waseem Barelvi
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वक़्त किस तेज़ी से गुज़रा रोज़-मर्रा में 'मुनीर'
आज कल होता गया और दिन हवा होते गए
Muneer Niyazi
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गुलाब टहनी से टूटा ज़मीन पर न गिरा
करिश्में तेज़ हवा के समझ से बाहर हैं
Shahryar
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