Phool Shayari - Soft emotions of beauty, love, and fragrance in poetic lines

Phool shayari beautifully captures the softness, fragrance, and charm of emotions through floral imagery. From love and beauty to delicate feelings, these poetic lines use flowers as symbols of purity, romance, and fleeting moments. If you enjoy expressing emotions with elegance and simplicity, phool shayari adds a graceful touch to your words.

phool shayari
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
Ahmad Faraz
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gulaab shayari
हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
Sahir Ludhianvi
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pushp shayari
मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँँ
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
Afzal Allahabadi
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kali shayari
तोहफ़ा, फूल, शिकायत, कुछ तो ले कर जा
इश्क़ से मिलने ख़ाली हाथ नहीं जाते
Tanoj Dadhich
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phoolwari shayari
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
Iftikhar Raghib
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gul shayari
सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
Jawayd Anwar
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kusum shayari
ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान
मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है
Abbas Tabish
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phool shayari
लो हमारा जवाब ले जाओ
ये महकता गुलाब ले जाओ
Aleena Itrat
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gulaab shayari
दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया
उस ने मुझे बहार से महरूम कर दिया
Anjum Barabankvi
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pushp shayari
माइल न करते क़ीमती तोहफ़े मुझे
दिल जीतना है जो मेरा तो ला गुलाब
Ghazala Tabassum
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kali shayari
हर तरफ़ फूल ही फूल खिल जाएँगे
आप ऐसे ही हँसते रहा कीजिए
Wajida Tabassum
phoolwari shayari
गुल कि गुलशन को सुना है तुम चुराना चाहते हो
आज फिर मुझ को गले से तुम लगाना चाहते हो
ATUL SINGH
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अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल ना थे
तुम अगर फूल ना होते तो हमारे होते
Ashfaq Nasir
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बाग़बाँ हम तो इस ख़याल के हैं
देख लो फूल फूल तोड़ो मत
Jaun Elia
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कोई तितली पकड़ लें अगर
फूल पर रख दिया कीजिए
Vikas Rana
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अपने होंटों से कहो फूल को चू
में हर रोज़
जब मेरे लब नहीं होंगे तो सहूलत होगी
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Shahbaz Rizvi
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उस की तरफ़ से फूल भी आएँगे एक रोज़
पत्थर उठा के चूम ले इस को पहल समझ
Munawwar Rana
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न गुल खिले हैं, न उन से मिले, न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है
Faiz Ahmad Faiz
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को
हाथों में फूल हैं मेरे पाँव में रेत है
Tehzeeb Hafi
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सो देख कर तेरे रुख़्सार-ओ-लब यक़ीं आया
कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी
Ahmad Faraz
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
Balmohan Pandey
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तुम कली पर निखार आने दो
देखना डाल ख़ुद झटक देगी
Vishal Bagh
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तुम्हें ये दुनिया कभी फूल तो नहीं देगी
मिले हैं काँटे तो काँटों को ही गुलाब करो
Madan Mohan Danish
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जिन से उठता नहीं कली का बोझ
उन के कंधों पे ज़िन्दगी का बोझ

वक़्त जब हाथ में नहीं रहता
किस लिए हाथ पर घड़ी का बोझ
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Vikram Sharma
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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पकड़ में आती नहीं है कभी वो शाख़-ए-विसाल
हम एक बोसा-ए-गुल के लिए तरसते हैं
Subhan Asad
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वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
Parveen Shakir
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काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिन
तितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा
Parveen Shakir
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नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
Bashir Badr
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ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है
दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
Pallav Mishra
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
Ada Jafarey
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हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी
फूल बालों में इक सजाने को
Ada Jafarey
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Meer Taqi Meer
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नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
Meer Taqi Meer
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अपने दिल के ख़ून से वो गुल खिला देता हूँ मैं
रेगज़ारों को गुलिस्ताँ की अदा देता हूँ मैं
Qaisar Sidddiqui
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तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
Bashir Badr
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फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
Faiz Ahmad Faiz
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फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया
उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के
Adil Mansuri
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अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
Firaq Gorakhpuri
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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका
Arzoo Lakhnavi
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यूँँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
Qateel Shifai
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तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं
हमारे फूल किसी के बदन से आते हैं
Farhat Ehsaas
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फूल कर ले निबाह काँटों से
आदमी ही न आदमी से मिले
Khumar Barabankvi
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया
तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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गया था माँगने ख़ुशबू मैं फूल से लेकिन
फटे लिबास में वो भी गदा लगा मुझ को
Aanis Moin
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किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं
वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं
Farhat Ehsaas
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ग़ुंचा ओ गुल माह ओ अंजुम सब के सब बेकार थे
आप क्या आए कि फिर मौसम सुहाना आ गया
Asad Bhopali
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वो शाख़ है न फूल, अगर तितलियाँ न हों
वो घर भी कोई घर है जहाँ बच्चियाँ न हों
Bashir Badr
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आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं काँच के गुल-दान पर
Shakeb Jalali
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अगरचे फूल ये अपने लिए ख़रीदे हैं
कोई जो पूछे तो कह दूँगा उस ने भेजे हैं
Iftikhar Naseem
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फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
Sajid Premi
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फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत
और मचल कर जी कहता है छोड़ो मत
Ameeq Hanafi
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हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए
किसी को भेज के मँगवाने थोड़ी होते हैं
Anwar Shaoor
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हर कोई फूल-सा है लेकिन वो
फूल में फूल है गुलाब का फूल
Ramnath Shodharthi
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डाल कर ग़ुंचों की मुँदरी शाख़-ए-गुल के कान में
अब के होली में बनाना गुल को जोगन ऐ सबा
Mushafi Ghulam Hamdani
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आदतन उस के लिए फूल ख़रीदे वरना
नहीं मालूम वो इस बार यहाँ है कि नहीं
Abbas Tabish
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मैं ने चाहा भी कि फिर इस संग-दिल पे फूल उगे
पर तुम्हारी रुख़्सती के बा'द ये होता नहीं
Siddharth Saaz
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तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई
मिलेंगे फूल सब इस
में ग़ज़ल गुलदान है यारों

पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे
हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों
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Tanoj Dadhich
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
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Tehzeeb Hafi
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आप अपने से हम-सुख़न रहना
हमनशीं साँस फूल जाती है
Jaun Elia
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निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की
सिलसिला बे-सबा रहा मेरा
Jaun Elia
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शाख़ें रहीं तो फूल भी पत्ते भी आएँगे
ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएँगे
Manzoor Hashmi
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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं

बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
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Abrar Kashif
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किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे
बेहतर है तेरे हाथ का ख़ंजर लगे मुझे
Vikram Sharma
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सिगरटें चाय धुआँ रात गए तक बहसें
और कोई फूल सा आँचल कहीं नम होता है
Wali Aasi
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ
सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया
Hammad Niyazi
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दूर इक सितारा है और वो हमारा है
आँख तक नहीं लगती कोई इतना प्यारा है

छू के देखना उस को क्या अजब नज़ारा है
तीर आते रहते थे फूल किस ने मारा है
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Kafeel Rana
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जो सावन होते सूखा, उस फूल पे लानत हो
मुझ पे लानत, तेरे होते, यार उदासी है
Siddharth Saaz
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तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उस का दिल आए
इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं
Shubham Seth
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किए कराए का सारा हिसाब दूँगा मैं
सवाल जो भी करोगे जवाब दूँगा मैं

ये रख-रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं
बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
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Khurram Afaq
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तुम सेे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए

तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए
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Zia Mazkoor
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लब पे आता था जो दुआ बन कर
दिल में रहता है अब ख़ला बन कर

कितना इतरा रहा है अब वो फूल
तेरे बालों का मोगरा बन कर
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Haider Khan
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वैसे तो ज़ेवरों की ज़रूरत नहीं तुझे
फिर भी अगर ये फूल तेरे काम आ सके
Charagh Sharma
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गर अदीबों को अना का रोग लग जाए तो फिर
गुल मोहब्बत के अदब की शाख़ पर खिलते नहीं
Afzal Ali Afzal
इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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गुलशन से कोई फूल मुयस्सर न जब हुआ
तितली ने राखी बाँध दी काँटे की नोक पर
Unknown
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है
मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है

तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं
जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
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Varun Anand
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Meer Taqi Meer
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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है
Ghulam Mohammad Qasir
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काँटे बनकर वापस क्यूँँ आ जाते हैं?
हम ने तुम को फूल जो भेजे होते हैं
Riyaz Tariq
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फूल की आँख में शबनम क्यूँँ है
सब हमारी ही ख़ता हो जैसे
Bashir Badr
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"उस के हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए
उस का हाथ है फूल को फूल बनाने में
Charagh Sharma
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अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल न थे
तुम अगर फूल न होते तो हमारे होते
Ashfaq Nasir
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चूमा था एक दिन किसी गुल की जबीन को
लहजे से आज तक मेरे ख़ुश्बू नहीं गई
Afzal Ali Afzal
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हैराँ मैं भी हूँ दोस्त यूँँ बालों में गजरा देख कर
ये फूल आख़िर कब से फूलों को पहनने लग गया
Neeraj Neer
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सूखे फूल संभाले हँसती रहती है
औरत सारी उम्र ही लड़की रहती है
Aabi Makhnavi
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पिछ्ला बरस तो ख़ून रुला कर गुज़र गया
क्या गुल खिलाएगा ये नया साल दोस्तो
Farooq Engineer
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उड़ाने पर जो आ जाऊँ उड़ा दूँ होश दुनिया के
मगर मैं फूल से तितली उड़ा सकता नहीं यारों
Divy Kamaldhwaj
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बोसा जो रुख़ का देते नहीं लब का दीजिए
ये है मसल कि फूल नहीं पंखुड़ी सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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गुलाब टहनी से टूटा ज़मीन पर न गिरा
करिश्में तेज़ हवा के समझ से बाहर हैं
Shahryar
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कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
Nida Fazli
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देख लेता है तो खिलते चले जाते हैं गुलाब
मेरी मिट्टी को ख़ुश-आसार किया है उस ने
Irfan Siddiqi
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गुल-दान में गुलाब की कलियाँ महक उठीं
कुर्सी ने उस को देख के आग़ोश वा किया
Mohammad Alvi
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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किसी ने मुझ से कह दिया था ज़िंदगी पे ग़ौर कर
मैं शाख़ पर खिला हुआ गुलाब देखता रहा
Afzaal Firdaus
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महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे
खिले चमन में गुलाब इतने
Muneer Niyazi
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एक ताज़ा गुलाब चेहरे को
एक पुरानी मिसाल कर डाला
Rao Nasir
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अरक़ नहीं तिरे रू से गुलाब टपके है
अजब ये बात है शो'ले से आब टपके है
Unknown
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वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर
Zafar Iqbal
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तुम ने जो फूल लेते में छू लीं हैं उँगलियाँ
मेरे बदन से आएगी ख़ुशबू गुलाब की
Siddharth Saaz
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मेरे साथ हँसने वालों शरीक हों दुख में
गर गुलाब की ख़्वाहिश है तो चूम काँटों को
Neeraj Neer
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है समझना आप को तो शे'र से इज़हार समझें
बात कहने को भला हम फूल क्यूँ तोड़ा करेंगे
Ankit Maurya
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महीनों फूल भिजवाने पड़े थे
वो पहली बार जब रूठा था मुझ से
Varun Anand
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जहाँ पे मैं ने तुझे पहली बार देखा था
वहाँ पे फूल रखे मैं ने, उम्र भर रक्खे
Aslam Rashid
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