Nature Shayari Collection - Feel the beauty of nature through poetic emotions

Nature Shayari captures the raw beauty of prakriti—its calm skies, flowing rivers, and silent mountains. These verses reflect peace, depth, and the emotional connection between humans and nature. Perfect for those who find sukoon in the simplicity of the natural world.

prakriti shayari
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
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nature shayari
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया
Firaq Gorakhpuri
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kudrat shayari
मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो
आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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fitrat shayari
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
Bashir Badr
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सोचता हूँ कि यूँँ न हो इक दिन
ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले
Vikas Rana
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रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ
सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
Nadir Ariz
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम
Unknown
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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इंसानों को जलवाएगी कल इस से ये दुनिया
जो बच्चा खिलौना भी ज़मीं पर नहीं रखता
Munawwar Rana
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हम आसमाँ के लोग थे जन्नत से आए थे
ख़ुद को मगर ज़मीं में बोना पड़ा हमें
Abbas Qamar
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पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था
Tehzeeb Hafi
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अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ
Ahmad Faraz
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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है
नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है
Uday Pratap Singh
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मेरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे
मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले
Rahat Indori
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एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो
Rahat Indori
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जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं
अब तो बस आसमान बाक़ी है
Rajesh Reddy
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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मेरा हाथ पकड़ ले पागल, जंगल है
जितना भी रौशन हो जंगल, जंगल है
Umair Najmi
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शब बसर करनी है, महफ़ूज़ ठिकाना है कोई
कोई जंगल है यहाँ पास में ? सहरा है कोई ?
Umair Najmi
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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई
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Subhan Asad
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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता
Nida Fazli
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ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के
वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है
Javed Akhtar
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माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम
Sahir Ludhianvi
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कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है
ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे
Anwar Jalalpuri
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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द
Kaifi Azmi
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बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले
Kaifi Azmi
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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में
Adil Mansuri
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ
वो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ

एक जंगल है तेरी आँखों में
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ
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Dushyant Kumar
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मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए
Rahat Indori
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तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
ऐसी बरसातें कि बादल भीगता है साथ साथ
Parveen Shakir
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मेरी हर गुफ़्तगू ज़मीं से रही
यूँँ तो फ़ुर्सत में आसमान भी था
Madan Mohan Danish
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ये ज़मीं किस क़दर सजाई गई
ज़िंदगी की तड़प बढ़ाई गई

आईने से बिगड़ के बैठ गए
जिन की सूरत जिन्हें दिखाई गई
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Sahir Ludhianvi
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तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
Dushyant Kumar
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ज़मीन-ओ-आसमाँ को जगमगा दो रौशनी से
दिसम्बर आज मिलने जा रहा है जनवरी से
Bhaskar Shukla
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बोझ उठाए हुए फिरती है हमारा अब तक
ऐ ज़मीं माँ तिरी ये उम्र तो आराम की थी
Parveen Shakir
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क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो
Miyan Dad Khan Sayyah
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आसमाँ ने बंद कर लीं खिड़कियाँ
अब ज़मीं में उस की दिलचस्पी नहीं
Rajesh Reddy
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गुज़र रहा हूँ किसी ख़्वाब के इलाक़े से
ज़मीं समेटे हुए आसमाँ उठाए हुए
Aziz Nabeel
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बात ऐसी भी भला आप में क्या रक्खी है
इक दिवाने ने ज़मीं सर पे उठा रक्खी है

इत्तिफ़ाक़न कहीं मिल जाए तो कहना उस सेे
तेरे शाइ'र ने बड़ी धूम मचा रक्खी है
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Ismail Raaz
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
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Ismail Raaz
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कोई समुन्दर, कोई नदी होती, कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता?
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ जाएँगे हम दोनों ज़मीं पर
ये उस ने आसमाँ पर लिख दिया है
Siraj Faisal Khan
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ज़मीं मेरे सज्दे से थर्रा गई
मुझे आसमाँ से पुकारा गया
Siraj Faisal Khan
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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता
हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता

ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था
गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता
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Tehzeeb Hafi
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मैं इस ख़याल से शर्मिंदगी में डूब गया
कि मेरे होते हुए वो नदी में डूब गया
Siraj Faisal Khan
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अगर्चे गोशागुज़ी हूँ मैं शाइरों में " मीर"
प मेरे शोर ने रू ए ज़मीं तमाम किया
Meer Taqi Meer
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ये आसमाँ में कोई बुत बैठा भी है कि नईं
या हम ज़मीं के लोग यूँँ ही चीखते हैं बस
Siddharth Saaz
ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें
कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
Varun Anand
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
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Jaun Elia
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें
ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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यूँँ तो सर्कस में हम बहुत ख़ुश हैं
फिर भी जंगल तो यार जंगल था
Harman Dinesh
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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अगरचे इश्क़ में मजनू बड़े बदनाम होते हैं
अगरचे क़ैस जैसे आशिक़ों के नाम होते हैं

भटक सकती नहीं जंगल में लैला चाह कर के भी
अजी लैला को घर में दूसरे भी काम होते हैं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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इक रोज़ इक नदी के किनारे मिलेंगे हम
इक दूसरे से अपना पता पूछते हुए
Shahbaz Rizvi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
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Ali Zaryoun
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परिंद ऊँची उड़ानों की धुन में रहता है
मगर ज़मीं की हदों में बसर भी करता है
Khaleel Tanveer
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राहों में जान घर में चराग़ों से शान है
दीपावली से आज ज़मीन आसमान है
Obaid Azam Azmi
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई दे
लहजे को सच्चाई दे

दुनिया है जंगल का सफ़र
लछमन जैसा भाई दे
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Tariq Shaheen
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ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
नदी का साथ देता हूँ समुंदर रूठ जाता है
Aalok Shrivastav
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पाँव रख गई है वो ज़मीन पर
अहमियत बढ़ा दी उस ने धूल की
Nawaaz
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इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ
हम सितारों ने ये सोचा है कि हिजरत कर जाएँ

दौलत-ए-ख़्वाब हमारे जो किसी काम न आई
अब किसी को नहीं मिलने की वसिय्यत कर जाएँ
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Idris Babar
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गुलाब टहनी से टूटा ज़मीन पर न गिरा
करिश्में तेज़ हवा के समझ से बाहर हैं
Shahryar
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हमेशा साथ सबके तो ख़ुदा भी रह नहीं सकता
बना कर औरतें उस ने ज़मीं को यूँँ किया जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
वो मिलेंगे उस जहाँ के आसमाँ में
मिल न पाए जो परिंदे इस ज़मीं पर
Raj Tiwari
जान ले लो जान तुम मेरी यक़ीनन
जान लेना तो मिरी फितरत नहीं है
Shashank Shekhar Pathak
चाहे हो आसमान पे चाहे ज़मीं पे हो
वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो

दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
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Nirmal Nadeem
कहीं किसी भी बहाने मुझे बुला इक रोज़
ऐ चाँद तुझ को क़सम है ज़मीं पे आ इक रोज़

मुझे क़बूल है गर ख़ाक भी हो जाऊँ मैं
क़रीब आ के मुझे सीने से लगा इक रोज़
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Chandan Sharma
जिस की फ़ितरत ही बे वफ़ाई हो
उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा क्या करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
किस जहाँ में तू बैठ कर देखता है मुझ को ख़ुदा
क्यूँँ ज़मीं पर आ कर सभी ज़ख़्म मेरे भरता नहीं
Raj Tiwari
उतर कर आसमानों से ज़मीं की ख़ाक पर बैठो
ख़ुदा ने सब सेे ऊँची आप को मसनद अता की है
Pawan mahabodhi
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फ़लक इतना सूना है क्यूँ
ज़मीं पर तो सब मेरे थे
Parul Singh "Noor"
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नदी को कोसते हैं सब किसी के डूब जाने पर
नदी में डूबते को पर कोई तिनका नहीं देता
Alankrat Srivastava
पराए मुल्क में पैसा नहीं बनाऊँगा
मैं तुम को छोड़ के दुनियां नहीं बनाऊँगा

मैं अपने शौक पुराउंगा अपने पैसों से
ज़मीन बेच के बंगला नहीं बनाऊँगा
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Shadab Asghar
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हर तरफ़ उग आए हैं जंगल हमारी हार के
जीत का कोई भी रस्ता अब नहीं दिखता हमें
Siddharth Saaz
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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं
इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ
रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
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Bashir Badr
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में
सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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उतरी हुई नदी को समुंदर कहेगा कौन
सत्तर अगर हैं आप बहत्तर कहेगा कौन

पपलू से उन की बीवी ने कल रात कह दिया
मैं देखती हूँ आप को शौहर कहेगा कौन
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Paplu Lucknawi
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पत्थर दिल के आँसू ऐसे बहते हैं
जैसे इक पर्वत से नदी निकलती है
Shobhit Dixit
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जो अंजान थे वो मेरे यार निकले
मगर जो भी अपने थे बेकार निकले

ज़मीं खा गई उन वफ़ाओं को आख़िर
सितम ये हुआ हम गुनहगार निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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उसी वक़्त अपने क़दम मोड़ लेना
नदी पार से जब इशारा करूँँगा
Siddharth Saaz
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नदी आँखें भँवर ज़ुल्फ़ें कहाँ तैरूँ कहाँ डूबूँ
कि तेरे शहर में सब की अदाएँ एक जैसी हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
पता करो कि मेरे साथ कौन उतरा था
ज़मीं पे कोई अकेला नहीं उतरता है
Ahmad Abdullah
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ज़मीं का जल कभी बादल रहा है
तमाशा ज़िन्दगी का चल रहा है
Umesh Maurya
मैं घंटों आसमाँ में देखता था
ज़मीं को पीठ के नीचे लगा के
Siddharth Saaz
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ये नदी वर्ना तो कब की पार थी
मेरे रस्ते में अना दीवार थी

आप को क्या इल्म है इस बात का
ज़िंदगी मुश्किल नहीं दुश्वार थी

थीं कमानें दुश्मनों के हाथ में
और मेरे हाथ में तलवार थी

जल गए इक रोज़ सूरज से चराग़
रौशनी को रौशनी दरकार थी

आज दुनिया के लबों पर मुहर है
कल तलक हाँ साहब-ए-गुफ़्तार थी
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ARahman Ansari
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं
हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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ज़ख़्म है दर्द है दवा भी है
जैसे जंगल है रास्ता भी है

यूँँ तो वादे हज़ार करता है
और वो शख़्स भूलता भी है

हम को हर सू नज़र भी रखनी है
और तेरे पास बैठना भी है

यूँँ भी आता नहीं मुझे रोना
और मातम की इब्तिदा भी है

चूमने हैं पसंद के बादल
शाम होते ही लौटना भी है
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Karan Sahar
कहा जो कृष्ण ने गीता में रक्खेगा अगर तू याद
भले जितना घना जंगल हो पर तू खो नहीं सकता
Amaan Pathan
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घास में जज़्ब हुए होंगे ज़मीं के आँसू
पाँव रखता हूँ तो हल्की सी नमी लगती है
Saleem Ahmad
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कहीं ज़मीं से तअल्लुक़ न ख़त्म हो जाए
बहुत न ख़ुद को हवा में उछालिए साहिब
Rajendar Nath Rehbar
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मैं ने ये सोच के बोए नहीं ख़्वाबों के दरख़्त
कौन जंगल में उगे पेड़ को पानी देगा
Aziz Bano Darab Wafa
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बचा लिया मुझे ग़र्क़ाब होने से उस ने
जुनून ए इश्क़ है लाया नदी के पार मुझे
Amaan Pathan
उस की नज़र बदलने से पहले की बात है
मैं आसमान पर था सितारा ज़मीन पर
Jamal Ehsani
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तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना
हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है
Shayar Jamali
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बहकना मेरी फ़ितरत में नहीं पर
सँभलने में परेशानी बहुत है
Muzaffar Abdali
फिर धड़कते हैं दिल-ए-इंसाँ में फ़र्दा के ख़याल
फिर हवाओं ने ज़मीं पर ला उतारा कोई ख़्वाब
Aslam Ansari
इक रोज़ छीन लेगी हमीं से ज़मीं हमें
छीनेंगे क्या ज़मीं के ख़ज़ाने ज़मीं से हम
Saba Akbarabadi
उस की फ़ितरत में न था तर्क-ए-त'अल्लुक़ लेकिन
दूसरे शख़्स को इस नहज पे पहुँचा देना
Jawwad Sheikh
अब आसमान भी कम पड़ रहे हैं उस के लिए
क़दम ज़मीन पे रक्खा था जिस ने डरते हुए
Tariq Naeem
ज़मीन इतनी नहीं है कि पाँव रख पाएँ
दिल-ए-ख़राब की ज़िद है कि घर बनाया जाए
Tariq Naeem
हर एक शख़्स का ये हाल है कि जैसे यहाँ
ज़मीन आख़िरी चक्कर लगाने वाली है
Azhar Abbas
ये ज़मीं आसमाँ से जहाँ पे मिलती है
हम लोग भी मिलेंगे अब वहीं जा कर
Aryan Goswami
मैं सूरज था, रौशनी का चाँद के लिए ढल गया
मैं पानी था नदी का पेड़ों के लिए रुक गया

मैं पत्ता था पेड़ों का टहनियों के लिए सुख गया
मैं टहनी था जंगल का सूरज के इंतिज़ार में जल गया
Read Full
Animesh Choubey
पर्दा उठा कर देखा उसे तब हुआ मालूम
इक चाँद ज़मीं पर भी है कल शब हुआ मालूम
Dharmesh Solanki
इस को तुम फ़ितरत मत समझो
मुस्कान फ़क़त आराइश है
Pawan
हर किसी से दिल लगाने की मेरी फितरत नहीं पर
अब कोई दर से हमारे प्यासे जाए ठीक है क्या
Gaurav Singh