Khushboo Shayari - Mehakti yaadein aur ehsaas ki khushboo bhari shayari collection

Khushboo shayari captures the invisible beauty of emotions that linger like a soft fragrance. Whether it’s the mehak of love, memories, or a fleeting moment, these verses express feelings that stay with you long after they’re gone. Perfect for romantic captions, thoughtful status, or sharing subtle emotions through poetic words.

khushboo shayari
कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तेरी महक
जैसे शदीद धुँध में बाग़ों की सैर हो
Umair Najmi
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mehak shayari
जिन के किरदार से आती हो सदाक़त की महक
उन की तदरीस से पत्थर भी पिघल सकते हैं
Unknown
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mehekti shayari
होली है या फिर फूलों का मौसम है
सब के चेहरों पे रंग है ख़ुशबू भी है
Meem Alif Shaz
itr shayari
ऐसा खिलता गुलाब क्या भेजें
जिस की ख़ुशबू न तुम तलक पहुँचे
Muhammad Fuzail Khan
न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से
वही जो दूध उबलने के बा'द आती है
Munawwar Rana
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अब आप की मर्ज़ी है सँभालें न सँभालें
ख़ुश्बू की तरह आप के रूमाल में हम हैं
Munawwar Rana
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जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी
जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गई
Faiz Ahmad Faiz
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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की
Parveen Shakir
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तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुश्बू से सारा घर महके
Nawaz Deobandi
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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
Gulzar
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एक आईना रू-ब-रू है अभी
उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी
Ada Jafarey
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यूँँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
Qateel Shifai
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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं

तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
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Aalok Shrivastav
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गया था माँगने ख़ुशबू मैं फूल से लेकिन
फटे लिबास में वो भी गदा लगा मुझ को
Aanis Moin
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तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना
इत्रदानों के बस की बात नहीं
Fahmi Badayuni
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
Bashir Badr
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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है
कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है

है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही
वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है
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Tehzeeb Hafi
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मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर
आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई
Akhtar Shirani
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
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Jaun Elia
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इक महक सिम्त ए दिल से आई थी
मैं ये समझा तेरी सवारी है
Jaun Elia
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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
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Tehzeeb Hafi
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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छुआ है तुम ने भी इक रोज़ हम को
ये ख़ुशबू देर तक महका करेगी

तुम्हारे हाथ सालों तक ये दुनिया
हमारे नाम पे चूमा करेगी
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Ritesh Rajwada
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं
हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं

जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे
उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
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Gyan Prakash Akul
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फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का
लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते
Azhar Iqbal
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हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी
लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है
Prof. Rehman Musawwir
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गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से
मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है
Satish Shukla Raqeeb
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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
Naeem Sarmad
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ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग
महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ
Mansoor Usmani
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे
जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
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Tehzeeb Hafi
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चूमा था एक दिन किसी गुल की जबीन को
लहजे से आज तक मेरे ख़ुश्बू नहीं गई
Afzal Ali Afzal
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यूँँ तो वो इत्रदान था लेकिन ये क्या हुआ
टूटा तो एक सम्त भी ख़ुशबू नहीं गई
Afzal Ali Afzal
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तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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गुल-दान में गुलाब की कलियाँ महक उठीं
कुर्सी ने उस को देख के आग़ोश वा किया
Mohammad Alvi
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महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे
खिले चमन में गुलाब इतने
Muneer Niyazi
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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तुम ने जो फूल लेते में छू लीं हैं उँगलियाँ
मेरे बदन से आएगी ख़ुशबू गुलाब की
Siddharth Saaz
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उस सेे पहले उस की ख़ुश्बू आती है
दरवाज़े से पहले मैं खुल जाता हूँ
Atul K Rai
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तुम्हारे बा'द के बोसों में जानाँ
तुम्हारी साँस की ख़ुशबू नहीं थी
Vikas Rana
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अब तो गाँवो में भी ईंटों के महल बसने लगे
गाँव की मिट्टी से वो ख़ुशबू रूहानी ख़ो गई
Divy Kamaldhwaj
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ये शाम ख़ुशबू पहन के तेरी ढली है मुझ
में जो रेज़ा रेज़ा
मैं क़तरा क़तरा पिघल रही हूँ ख़मोश शब के समुंदरों में
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Kiran K
तेरा रुख़सत होना अब भी बाक़ी है
तेरी ख़ुशबू परछाईं से आती है
Gopesh "Tanha"
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मुनफ़रिद ख़ुशबू है इस शजर की
ऐसा लगता है उस ने छुआ हो
Shadab khan
हाथ गुल से औ बदन में रातरानी की महक
आप को लड़की नहीं इक बाग़ होना चाहिए
Ashish Awasthi
उस की ख़ुशबू को मेरी ओर रवाना कर के
ये हवा लौट गई कुछ तो इशारा कर के
Shaan
मुझे तुम फूल देते हो मेरे किस काम के हैं ये
है सुंदर पर महक इन
में तुम्हारी तो नहीं आती
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Firdous khan
इन हवाओं में ज़रा सी ख़ुशबू हज़रत घोलिए
थोड़ी हिंदी थोड़ी सी उर्दू यहाँ पर बोलिए
Navneet krishna
उम्र गुज़री है माँजते ख़ुद को
साफ़ हैं पर चमक नहीं पाए

डाल ने फूल की तरह पाला
ख़ार थे ना महक नहीं पाए
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Vishal Bagh
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फूल के होंठों से ख़ुश्बू के मआ'नी सुन कर
अपना शे'र अच्छा लगा तेरी ज़ुबानी सुन कर
Rajesh Reddy
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो

गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
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Tajdeed Qaiser
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
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इस सोच का क़ब्ज़ा मेरे इदराक पे होना
अफ़लाक पे होने के लिए ख़ाक पे होना

दुनिया मुझे पूछे कि ये ख़ुशबू है किधर की
और मेरा ख़याल आप की पोशाक पे होना
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Ahmad Abdullah
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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होने थे जितने खेल मुक़द्दर के हो गए
हम टूटी नाव ले के समुंदर के हो गए

ख़ुश्बू हमारे हाथ को छू कर गुज़र गई
हम फूल सब को बाँट के पत्थर के हो गए
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Irfan Jafri
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ऐ चमेली की ख़ुशबू ज़रा बात सुन
इक दफ़ा उस के गेसू तले घूम आ
Ummaan hussain
रखना है तो फूलों को तू रख ले निगाहों में
ख़ुशबू तो मुसाफ़िर है खो जाएगी राहों में
Shamim Karhani
कमरा खोला तो आँख भर आई
ये जो ख़ुशबू है जिस्म थी पहले
Fahmi Badayuni
कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग
कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग

चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
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Azhar Iqbal
तेरी ख़ुशबू को लुटाते हुए आते जाते
बाक़ी बचता है जो इंसान कहाँ जाता है
Shaheen Abbas
बताता हूँ राह राहगीरों को अब
राह में ही कहीं खो गया हूँ मैं

मेरे हाथ पे किसी ने गुलाब क्या रखा
ख़ुशबू ख़ुशबू हो गया हूँ मैं
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Murli Dhakad
चला हूँ अब जो मैं बे-फ़िक्र ज़माने से
देख शबनम भी शोलों से दहक जाते हैं

ख़ुशियाँ इतनी बांटी थी बहार ए गुलजार में
कि मौसम ए खिज़ा में भी फूल महक जाते हैं
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Shashank Tripathi
गर कुछ कह न जवाब में तो बस इतना करना
तुम लबों से छू कर ख़त को अपनी ख़ुश्बू मुयस्सर करना
Mohammad Shahrukh Qureshi
इस हल्की-हल्की बारिश में
उस की ख़ुशबू क्यूँँ आती है
Pawan
जहाँ के सर से काली रात का आंचल सरक जाए
खिलें फिर फूल ख़ुशियों के चमन सारा महक जाए

अगर ये रात लंबी है मिरे रब कुछ तो ऐसा कर
इन आँखों में उमीदों का कोई जुगनू चमक जाए
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Aditya
जो भूल के नहीं भुला सके वो ख़्वाब दे दिया
मिरा जी मचल रहा है ए'तिबार हो रहा

तिरे जसद की ये जो 'इत्र में गुलाब खिल रहा
कदम कदम पे इश्क़ का ही इंहिसार हो रहा
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Devraj Sahu
सदियों पहले छोड़ चुका हूँ दामन फिर भी जाने क्यूँँ
मेरे चादर से अब तक उस शख़्स की ख़ुशबू आती है
Aryan Goswami
इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
दग़ाबाज़ी में भी ख़ुशबू वफ़ादारी की आएगी
वो मुझ को बाप की इज़्ज़त की ख़ातिर छोड़ जाएगी

उसे मालूम है मेरा पसंदीदा है काला रंग
मुझे लगता नहीं अब वो कभी काजल लगाएगी
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Richa Choudhary Sahar
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ख़ुशबू की और रंगों की बस एक ही सूरत जानी है
मेहंदी उस के हाथों की और आलता उस के पैरों का
Aarush Sarkaar
क़रीब दिल के वो इतना रहता है
गुलाब ख़ुश्बू से जितना रहता है
Mohammed Huzaif Ansari
पीपल वाली छाँव रखी है ख़ुश्बू बिखरी मिट्टी में
पूरा-पूरा गाँव धरा है मेरी माँ की चिट्ठी में
Ananya Rai Parashar
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जिस्म से आती है मेरे जो ग़रीबी की महक
इस लिए ईद को सीने से लगाया न गया
''Akbar Rizvi"
तुम्हें रब ने बनाया इक कली सा
और उस
में इत्र की ख़ुशबू अता की
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Ananya Rai Parashar
महक रहा है यूँँ कमरा हमारा ख़ुश्बू से
रखी हुई हैं किताबों में चिट्ठियाँ उस की
Shajar Abbas
ख़ूब-सूरत नहीं हो तुम वैसे
फूल, ख़ुशबू, नदी, होते जैसे
Jasmeet singh 'Meet'
घर के पर्दों को याद है ख़ुशबू तेरी
हवाएँ बहती हैं तो मचलने लगते हैं
Aman Tripathi
सिगरेट भी मैं ने जला कर देख ली
उस के लबों जैसी महक इस में नहीं
Rachit Sonkar
दिल अब नहीं लगता कहीं पर भी मियाँ
तस्वीर उस की खो गई हम से कहीं

सिगरेट भी मैं ने जला कर देख ली
उस के लबों जैसी महक इस में नहीं
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Rachit Sonkar
हाँ आज भी आती है वहाँ इश्क़ की ख़ुशबू
ये तेरे मेरे जिस्म जहाँ ख़ाक हुए थे
Kanchan
हमें तुम याद गर आओ नई कोई कहानी हो
मिरे गीतों में ख़ुशबू हो ग़ज़ल में फिर जवानी हो

नहीं आई हमें जो नींद सपने जम गए मेरे
उतर आओ जो ख़्वाबों में तो फिर आँखों में पानी हो
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Aditya
मेरे ज़ख़्मों की दवा कोई नीलोफ़र तो नहीं
मगर ख़ुशबू उस की, दिल को कुछ पल राहत देती है
A R Sahil "Aleeg"
उस के लबों को चूम के आए हुए हैं हम
ख़ुशबू तमाम फूल की लाए हुए हैं हम
Rachit Sonkar
न होकर कहीं इन निगाहों में हो तुम
हो ख़ुशबू चमन की फ़िज़ाओं में हो तुम
Alankrat Srivastava
तुम कहते हो ऐसी वैसी आती है
देखो मुझ से ख़ुशबू कैसी आती है
Aashish kargeti 'Kash'
जब ख़त्म हो जाएगी ख़ुशबू फूल की
तब इस के काँटों को गिनाया जाएगा
Akhil Saxena
बस्ती में मेरी आई है गर रात की रानी
ख़ुशबू से मोअतर मेरा घर करते हुए जा
Shajar Abbas
गले से वो लगा ले जिस को भी अपने
उसे फिर इत्र की दरकार ही क्या है
Harsh saxena
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है ज़ेहन यूँँ मुहीत मेरा याद-ए-यार से
ख़ुशबू रखी हो जैसे किसी इत्र-दान में
shahnawaaz khan
बस और कुछ नहीं है मिरी जान इश्क़ है
वो हर घड़ी जो इत्र सा महकाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
है तेरे क़ुर्ब की ख़ुशबू बदन से रूह तलक
तेरे ख़याल से महकी है ज़िन्दगी मेरी
Kiran K
"मैं तुम्हें ढूँडता रहा"
दिल के वीराने में प्यार के अफ़साने में
झील के पानी में ख़्वाब की रवानी में
फूलों की महक में बयार की लहक में
मैं तुम्हें ढूँडता रहा
या'नी कि गैर से
निज का पता पूछता रहा
मैं तुम्हें ढूँडता रहा
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RAJDIP KOTA
मुझे इक गुल में है ख़ुशबू पिरोनी
सो तेरा लम्स ले कर जा रहा हूँ
Upendra Bajpai
रहे जिस की ख़ुश्बू तमाम उम्र,तू तोहफ़तन वो गुलाब दे
नए रंग भर दिल-ओ-ज़ेहन में, मेरे यार मुझ को किताब दे

मैं शरीफ़-ओ-अहल-ए-जहाँ में 'अच्छों' की झूठी बातों से तंग हूँ
वो जो सामने मेरे सच कहे, मुझे दोस्त ऐसे ख़राब दे
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Nasreen Quamar
एक ख़ुश्बू से मेरी पहचान, बस
ढूढ़ता हूँ बस, उसे हर फूल में
Umesh Maurya
एक तहरीर जो उस ने लिक्खी थी वो
ख़ुशबू बन दिल पे छाई रही रात भर
Kiran K
गुलाब तुम ने जो भेजे थे मुझ को काग़ज़ के
महक रहे हैं वो कमरे में मो'जिज़ा देखो
Shajar Abbas
तेरी ख़ुशबू साँसों में घुल जाती है
जभी मेरे सीने तुम लग जाती हो
Shubham Rai 'shubh'
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ख़ास ख़ुशबू शर हवा में आ रही है
फूल कोई फिर दुआ से खिल गया है
Abhay Mishra
मुझ को पहले के जैसा बनादो ज़रा
प्यार कर के निभाना सिखादो ज़रा

फूल ,कलियाँ मेरे बाग़ में भी खिले
उन सेे ख़ुशबू चुराना सिखा दो ज़रा
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Parmod writes
महकते इत्र के मानिंद है ये इश्क़ जाने मन
भले पर्दे में भी निकलोगी तो पहचान ही लेंगे
Asad Akbarabadi
मिरे लब पे तिरी फिर बात आई है
तिरी ख़ुशबू लिए ये रात आई है
Raunak Karn
वो बदन कभी मेरा तो हुआ नहीं लेकिन
उस बदन कि ख़ुशबू से राबता रहा काफ़ी
Amanpreet singh
दबा न पाया ये इत्र तक भी
तेरे बदन की महक को यारा
Dipanshu Shams
कोई उम्मीद मत सज़ा गुलशन
तिरी ख़ुश्बू का वास्ता है तुझे
Gulshan
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मत करो अपनी तुलना किसी और से
सारे फूलों की होती है ख़ुश्बू अलग
Rachit Sonkar