Chehra Shayari - Expressions of face, beauty, emotions, and hidden feelings

Chehra shayari beautifully captures the emotions hidden behind a face—whether it’s a gentle smile, silent pain, or timeless beauty. In poetry, the face becomes a mirror of the heart, expressing feelings words often fail to convey. Explore meaningful lines that describe husn, identity, and the untold stories written on every chehra.

chehra shayari
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
Ibn E Insha
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soorat shayari
एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है
इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता
Javed Naseemi
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mukh shayari
न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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face shayari
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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roop shayari
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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husn shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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naqab shayari
तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत
हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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chehre ki muskan shayari
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
Shariq Kaifi
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भुला के दूल्हा जिसे बैठता है मंडप में
वो चेहरा आख़िरी फेरे में याद आता है
Shanawar Kiratpuri
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है
हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है
तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं
पेड़ का रूप धार लूँगा मैं

तू निशाने पे आ भी जाए अगर
कौन सा तीर मार लूँगा मैं
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Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
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Tehzeeb Hafi
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रोना हो आसान हमारा
इतना कर नुक़्सान हमारा

बात नहीं करनी तो मत कर
चेहरा तो पहचान हमारा
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Shariq Kaifi
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उम्र गुज़री उस का चेहरा देखते
और जी लेते तो दुनिया देखते
Vipul Kumar
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तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले
तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शा'इरी से पहले
Kaif Bhopali
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क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
Jaun Elia
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
Firaq Gorakhpuri
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ
वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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चैन की बाँसुरी बजाइये आप
शहर जलता है और गाइये आप

हैं तटस्थ या कि आप नीरो हैं
असली सूरत ज़रा दिखाइये आप
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Gorakh Pandey
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ
Arzoo Lakhnavi
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हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
Jigar Moradabadi
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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ये ज़मीं किस क़दर सजाई गई
ज़िंदगी की तड़प बढ़ाई गई

आईने से बिगड़ के बैठ गए
जिन की सूरत जिन्हें दिखाई गई
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Sahir Ludhianvi
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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
Muneer Niyazi
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
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Kaif Bhopali
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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फ़स्ल-ए-बहार आई है होली के रूप में
सोलह सिंगार लाई है होली के रूप में
Saghar Nizami
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इक हुस्न-ए-बेमिसाल की तम्सील के लिए
परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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Jaun Elia
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ऐ शौक़-ए-नज़ारा क्या कहिए नज़रों में कोई सूरत ही नहीं
ऐ ज़ौक़-ए-तसव्वुर क्या कीजे हम सूरत-ए-जानाँ भूल गए
Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न ने शौक़ के हंगा
में तो देखे थे बहुत
इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
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Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ को पूछता नहीं कोई
हुस्न का एहतिराम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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जब आँखों में लगाता हूँ तो चुपके-चुपके हंस-हंसकर
तेरी तस्वीर भी कहती है, सूरत ऐसी होती है
Dagh Dehlvi
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उतर गया है चेहरा तेरे जाने से
लॉक नहीं खुलता है अब मोबाइल का
Tanoj Dadhich
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चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें
Tehzeeb Hafi
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उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या
Ibn E Insha
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न करो बहस हार जाओगी
हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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कुछ ने आँखें कुछ ने चेहरा देखा है
सब ने तुझ को थोड़ा थोड़ा देखा है
Tousief Tabish
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा
मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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हमारे सीने पे उँगलियों से तुम अपना चेहरा बना रहे थे
तुम्हें कुछ उस की ख़बर नहीं थी हमारे दिल में जो चल रहा था
Nadim Nadeem
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर
आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत
Amanat Lakhnavi
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घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
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वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले
ये हुस्न की दौलत है लुटाई नहीं जाती
Unknown
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लुटाते हैं वो दौलत हुस्न की बावर नहीं आता
हमें तो एक बोसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तेरी आँखें बना डाली तेरा चेहरा बना डाला
Ankit Maurya
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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रात भर ता'रीफ़ मैं ने की तुम्हारे रूप की
चाँद इतना जल गया सुन कर कि सूरज हो गया
Chandan Rai
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कल रात मैं बहुत ही अलग सा लगा मुझे
उस की नज़र ने यूँँ मेरी सूरत खंगाली दोस्त
Afzal Ali Afzal
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ज़ख़्म लगे हैं कितने दिल पर याद करूँँ या तुम को देखूँ
शाद नहीं हूँ मैं तुम को नाशाद करूँँ या तुम को देखूँ

उम्र गए पे तेरी सूरत और मिरी आँखें टकराईं
उम्र गए में सोची वो फ़रियाद करूँँ या तुम को देखूँ
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
Shriyansh Qaabiz
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
हसीं ख़्वाबों को अपने साथ में ढोती हुई आंँखे
बहुत प्यारी लगी हम को तेरी सोती हुई आंँखे

मोहब्बत में ये दो क़िस्से सुना है रोज़ होते हैं
कभी हँसता हुआ चेहरा कभी रोती हुई आंँखे
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Naimish trivedi
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हज़ारों मन्नतों पर भी कोई बोसा नहीं मिलता
किसी सूरत में उस कंजूस के बटुए नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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मन के हारे हुए इंसान को हुस्न-ए-शय से
कोई मतलब नहीं कोई भी सरोकार नहीं
shaan manral
तू कभी मुझ सेे मिला तस्वीर मेरी
देख फिर कोई जुदा तस्वीर मेरी

इक बनानी थी उसे ग़मगीन सूरत
वो बनाता ही गया तस्वीर मेरी
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Dileep Kumar
हुस्न उन का सादगी में कुछ अलग महका किया
मैं ने धड़कन से कहा धड़को मगर आराम से
Ishq Allahabadi
इक बार अपनी माँ को मोहब्बत से देख ले
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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बदला जो वक़्त गहरी रफ़ाक़त बदल गई
सूरज ढला तो साए की सूरत बदल गई

इक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहा
फिर यूँँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई
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Shaukat Fehmi
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ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने
यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने

इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने
ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
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Kushal Dauneria
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मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
चल गया होगा पता ये आप को
बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को

इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
तू समझती क्या है अपने आप को
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Kushal Dauneria
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
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Azhar Iqbal
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मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Shadan Ahsan Marehrvi
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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं
इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं

मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं
सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं
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Ashu Mishra
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे

इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
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Vikram Gaur Vairagi
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देखने के लिए सारा आलम भी कम
चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
Asad Badayuni
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नज़र न आए मुझे हुस्न के सिवा कुछ भी
वो बे-वफ़ा भी अगर है तो बे-वफ़ा न लगे
Hasan naim
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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं
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Abrar Kashif
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तुम को तो बस हुस्न के नंबर मिलते हैं
उस का सोचो जिस को पढ़ना पड़ता है
Kafeel Rana
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सीरत किसी की ख़ूब है सूरत किसी की ख़ूब
कोई हमारे दिल में है कोई नज़र में है
Hijr nazim ali khan
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हुस्न ऐसा है कि देखो तो लगे ताज-महल
इस पे वो शख़्स सँवरता भी ग़ज़ल जैसा है
Manazir Ashiq Harganvi
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ख़ुद हुस्न से न पूछिए ता'रीफ़ हुस्न की
दीवाने से ये पूछिए दीवाना क्यूँँ हुआ
Ameer Imam
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ख़ुद हुस्न से न पूछिए ता'रीफ़ हुस्न की
दीवाने से ये पूछिए दीवाना क्यूँँ हुआ
Aamir Azher
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हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त
हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले
Aks samastipuri
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इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ
Moghisuddin Fareedi
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तुम बिजलियाँ रखो तो रखो हुस्न की यहाँ
हम भी तराज़ू में ये दिल-ए-ज़ार रख चुके
Amaan Pathan
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ये इंतिज़ार नहीं शम्अ' है रिफ़ाक़त की
इस इंतिज़ार से तन्हाई ख़ूब-सूरत है
ARSHAD ABDUL HAMID
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तब्दीलियों का नश्शा मुझ पर चढ़ा हुआ है
कपड़े बदल रहा हूँ चेहरा बदल रहा हूँ
Alam Khursheed
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