Naqab Shayari - Hidden truths, fake faces, and emotions behind masks

Naqab shayari explores the hidden layers of human emotions and the masks people wear in everyday life. It reflects on fake smiles, hidden truths, and the contrast between what is shown and what is felt inside. Perfect for expressing thoughts about deception, identity, and unspoken realities.

naqab shayari
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
Ibn E Insha
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chehra shayari
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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chhupa hua shayari
एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है
इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता
Javed Naseemi
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dikhawa shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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parda shayari
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
Shariq Kaifi
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भुला के दूल्हा जिसे बैठता है मंडप में
वो चेहरा आख़िरी फेरे में याद आता है
Shanawar Kiratpuri
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ
हर पर्दा पर्दा नइँ होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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रोना हो आसान हमारा
इतना कर नुक़्सान हमारा

बात नहीं करनी तो मत कर
चेहरा तो पहचान हमारा
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Shariq Kaifi
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उम्र गुज़री उस का चेहरा देखते
और जी लेते तो दुनिया देखते
Vipul Kumar
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब'
कुछ तो है जिस की पर्दा-दारी है
Mirza Ghalib
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ
वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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क्यूँँ इक तरफ़ निगाह जमाए हुए हो तुम
क्या राज़ है जो मुझ से छुपाए हुए हो तुम
Shakeel Badayuni
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तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया
मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में
Allama Iqbal
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अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ
Arzoo Lakhnavi
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दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और
छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और
Rajesh Reddy
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जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा
हया यक-लख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता
Ameer Minai
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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
Muneer Niyazi
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वो एक राज़ जो मुद्दत से राज़ था ही नहीं
उस एक राज़ से पर्दा उठा दिया गया है
Aziz Nabeel
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
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Kaif Bhopali
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सभी से राज़ कह देता हूँ अपने
न जाने क्या छुपाना चाहता हूँ
Shariq Kaifi
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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उतर गया है चेहरा तेरे जाने से
लॉक नहीं खुलता है अब मोबाइल का
Tanoj Dadhich
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रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर
जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें
Tehzeeb Hafi
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कुछ ने आँखें कुछ ने चेहरा देखा है
सब ने तुझ को थोड़ा थोड़ा देखा है
Tousief Tabish
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा
मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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हमारे सीने पे उँगलियों से तुम अपना चेहरा बना रहे थे
तुम्हें कुछ उस की ख़बर नहीं थी हमारे दिल में जो चल रहा था
Nadim Nadeem
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घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
Vikram Gaur Vairagi
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
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किसी के झूठ से पर्दा हटाकर
हमारा सच बहुत रोया था उस दिन
Shadab Asghar
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तेरी आँखें बना डाली तेरा चेहरा बना डाला
Ankit Maurya
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
Shriyansh Qaabiz
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
हसीं ख़्वाबों को अपने साथ में ढोती हुई आंँखे
बहुत प्यारी लगी हम को तेरी सोती हुई आंँखे

मोहब्बत में ये दो क़िस्से सुना है रोज़ होते हैं
कभी हँसता हुआ चेहरा कभी रोती हुई आंँखे
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Naimish trivedi
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सब ने माना मरने वाला दहशत-गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज-दुलारा लिक्खा था
Ahmad Salman
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है
न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है

क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को
नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है
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Paplu Lucknawi
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अव्वल तो तेरी दोस्ती पर शक नहीं कोई
और दूसरा ये मुझ को तेरे राज़ पता हैं
Tanoj Dadhich
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ये गहरा राज़ है इस का बदन को खा ही जाती है
मोहब्बत पाक होकर भी हवस तक आ ही जाती है
ALI ZUHRI
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जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है
वो लड़की राज़ नहीं है कोई पहेली है

हाँ मेरा हाथ पकड़ कर झटक दिया उस ने
सहारा दे के बताया कि तू अकेली है
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Tajdeed Qaiser
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे

इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
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Vikram Gaur Vairagi
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देखने के लिए सारा आलम भी कम
चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
Asad Badayuni
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इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता
कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ
Moghisuddin Fareedi
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तुम सब समझ चुके हो नहीं राज़ ये कोई
क्यूँ देखने लगे हैं तुम्हें तिश्नगी से हम
Amaan Pathan
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तब्दीलियों का नश्शा मुझ पर चढ़ा हुआ है
कपड़े बदल रहा हूँ चेहरा बदल रहा हूँ
Alam Khursheed
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किसी को ढूँडते हैं हम किसी के पैकर में
किसी का चेहरा किसी से मिलाते रहते हैं
Alam Khursheed
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मुझे दिखता नहीं आईने में अपना चेहरा
इक तुझे ढूँढ़ने में ख़ुद को भी खोया है बहुत
Amaan Pathan
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पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी
Sarvat Husain
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तुम्हें भी दिखेगा कभी शाह का असली चेहरा
तुम्हारी भी आँखों से पट्टी हटेगी किसी दिन
Haresh Vanza
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तअज्जुब उन को है क्यूँँ मेरी ख़ुद-कलामी पर
हर आदमी का कोई राज़-दाँ ज़रूरी है
Sagheer Malal
तू अकेला है बंद है कमरा
अब तो चेहरा उतार कर रख दे
Sheen Kaaf Nizam
उन को डर है कि कोई राज़ न खुल जाए कहीं
और मुझ में वो तलब है कि कोई सच न दबे
Haresh Vanza
तू ही इक शख़्स है क़िस्से में अलावा मेरे
तुझ से भी राज़ छुपाया तो कहाँ खोलूँगा
Mumtaz Gurmani
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़ तर्क-ए-आरज़ू
मैं ने दुनिया छोड़ दी तो मिल गई दुनिया मुझे
Seemab Akbarabadi
सब के शानों पे एक चेहरा था
जिन पे सूरत बनी हुई थी मेरी
Anjum Saleemi
इस तरह के लब कौन तराशेगा दोबारा
इस तरह का चेहरा तो किसी का नहीं बनना
Aamir Sohail
तेरे चेहरे को लिखूँ चाँद या फिर चाँद को चेहरा
मेरी रातें इसी उलझन में सारी बीत जातीं हैं
Shakir Dehlvi
इक रोज़ हमारे बिखरते रिश्ते का राज़ खोल दिया उस ने
इल्ज़ाम मुझ पे डाल कर, जुदा होने को बोल दिया उस ने

उस सेे मोहब्बत इतनी कि ख़ामोशी से सुनता रहा तोहमतें
बड़ी बेरुखी से "निहार" मेरी मोहब्बत को तोल दिया उस ने
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Shashank Tripathi
अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं
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karan singh rajput
पर्दा उठा कर देखा उसे तब हुआ मालूम
इक चाँद ज़मीं पर भी है कल शब हुआ मालूम
Dharmesh Solanki
लम्हा-ए-फुर्कत टल गया होता अगर दिखता जभी
मुड़ 'ज़ैन' तब लम्हा-ए-चेहरा ग़मज़दा का देखता
Zain Aalamgir
मैं मुसव्विर की कला को एकटक तकता रहा
रंग कुछ था और चेहरा कुछ बयाँ करता रहा
Achyut Amogh
मेरा चेहरा नहीं बताता है
दोस्त अंदर से मैं भी टूटा हूँ
Prashant Sitapuri
ग़मगीन चेहरा देख आया मैं समुंदर में कहीं
दुख ये निखरता और भी पिछली दफ़ा से देख जब
Zain Aalamgir
जो देख ली सूरत कहीं पहली जब मुलाक़ात में
जैसे हुआ चेहरा मुझे वो हिफ़्ज़ आयत की तरह
Zain Aalamgir
देखने को फिर मिलेगा तेरा चेहरा
सोच कर ये फिर गली से तेरी गुजरे
Prashant Sitapuri
रात तुम्हारी याद में गुज़रे दिन दफ़्तर खा जाता है
एक तुम्हारा चेहरा ज़ेहन में अक्सर आता जाता है

तुम को तुम हो मुझ को मैं हूँ हम की कोई जगह नहीं
एक बेचारा दिल है मेरा ख़्वाहिश में मर जाता है
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Aryan Goswami
मैं तेरा चेहरा बनाता हूँ पानी पे जब जानाँ
देख मुझे तब लोग इक पगला दीवाना कहते हैं
Shashank Shrivastava
उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है
उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है

वो सत्रह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फ़रेबी नज़रों से
इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है
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Shubham Seth
चाँद चेहरा मुझे क़बूल नहीं
अब समझने में कोई भूल नहीं

आँख बस आँख ही है झील नहीं
होंठ बस होंठ ही हैं फूल नहीं
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Sandeep Thakur
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क़ब्र मेरी थी मगर नाम तेरा था उस पर
राज़-ए-दिल संग-तराशों को बताया किस ने
Saarthi Baidyanath
एक चेहरा मिरा दर्द-ए-दिल बन गया
ठीक था आदमी मुज़्महिल बन गया

इत्तिफ़ाक़न मैं गुज़रा था इक कूचे से
फिर गुज़रना ही वो मुस्तक़िल बन गया
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Nakul kumar
कम देखता हूँ आईने में चेहरा अपना तब से मैं
जब से कहा है तू ने ये सूरत नहीं अच्छी मेरी
karan singh rajput
सारी हक़ बातों से पर्दा उठ गया
क्या वहम क्या ख़ुश-फ़हम, सब कुछ ख़तम
Ashraf Ali
घूमता है वो आईना ले कर
पास जिस के न ख़ुद का चेहरा है
Saarthi Baidyanath
तेरे हाथों की मेहन्दी से रंजिश मुझे
देख उस
में है चेहरा किसी और का
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Santy sharma
परतों दर परतों में चेहरा खोलेंगे
धीरे धीरे दिल अब सब का टूटेगा
Khalid Azad
ये आफ़ताब-ओ-क़मर कहकशाँ ख़ुदा की क़सम
तुम्हारे चेहरा-ए-अनवर से नूर लेते हैं
Shajar Abbas
आँख से टपका था रेज़ा दर्द का
हाथ में मेरे था तारा दर्द का

ख़ुशनसीबी समझो या फिर हादसा
मैं ने कल देखा था चेहरा दर्द का
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Ritika reet
हुस्न की मत नुमाइश किया कीजिए
यूँँ न बे-पर्दा छत पर दिखा कीजिए
Zafar Siddqui
चेहरा तेरा और उस पे हसीन ये आँखें
जैसे चाँद पे रौशन दो दीए हो
BR SUDHAKAR
अब किसी और से लाहक़ है मोहब्बत तुझ को
अब किसी और का चेहरा तेरा आईना है

अब नहीं मुझ को मुयस्सर तेरे होंटों की शराब
अब मुझे फिर से वही ख़ून-ए-जिगर पीना है
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Kazim Rizvi
बचाई है अब क्या तू मेरे लिए
तू ने सर से पर्दा गिराया बहुत
Umrez Ali Haider
उस की बातें याद नहीं , चेहरा भी हम भूल चुके हैं
अब उस लड़की की तस्वीर हटा सकते हो कमरे से
Surya Tiwari
कई अर्से महीने बीतने के बा'द आया है
तेरा चेहरा मुझे कैसे न जाने याद आया है
Aniket sagar
कही है बात मैं ने भी सभी प्यारी मगर फिर भी
जिसे देखो तेरी आँखें, तेरा चेहरा ही पढ़ता है
Alankrat Srivastava
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बे-दर्द सियासत ने ज़हनों पर कैसा पर्दा डाल दिया
हम डूब रहे हैं दलदल में और देख रहे आतिशबाज़ी
Amaan Javed
कोई मिरी सादा-दिली से ख़ुश नहीं
कोई मिरी नग़्मा-गरी से ख़ुश नहीं

हर चेहरा कुछ बोलता है इस लिए
कोई मिरी दानिश-वरी से ख़ुश नहीं
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Dileep Kumar
खेल का हिस्सा थे जब तक खेल बस इक खेल था
राज़ सारे खुल गए जब मैं तमाशाई हुआ
shahnawaaz khan
कॉलेज में उस का मुझे चेहरा न दिखे जो
मेरी कोई इक क्लास भी अच्छी नहीं जाती
karan singh rajput
इन आँखों को ताजमहल क्या भाएगा
इन आँखों ने उस का चेहरा देखा है
Ravi 'VEER'
अब किसी का ख़ूब-सूरत चेहरा देखूँ मैं अगर तो
सोचता हूँ कितना उस का हिज्र प्यारा उम्दा होगा
Yogamber Agri
तेरी आँखों में कोई देख न ले चेहरा मेरा
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई
Ajay Pahadiya
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किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
यहाँ पर गुल खिले है जब मिरे जानाँ मोहब्बत के

अगर ढूँढो तो मिल जाए ख़ुदा भी अब किताबों में
किताबों में नहीं मिलते यहाँ बस राज़ उल्फ़त के
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Sandeep Rajput
राज़ खुलता है घर जलाने को
घर कभी आग से नहीं जलता
gaurav saklani
कितने राज़ हसीं वो खोलें
जब ग़ुस्से में मुझ सेे बोलें
Reshma Shaikh