Husn Shayari - Khoobsurti, nazakat aur dilkash andaaz ki shayari

Husn shayari beautifully captures the charm of beauty, grace, and elegance in words. Whether it's the noor of a face or the nazakat in someone's style, these verses express admiration in the most poetic way. Perfect for expressing feelings of attraction, appreciation, and timeless khoobsurti.

husn shayari
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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khoobsurti shayari
न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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haseen shayari
बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर
वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे
Jigar Moradabadi
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jamal shayari
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया
Faryad Aazar
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nazakat shayari
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है
हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है
तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं
पेड़ का रूप धार लूँगा मैं

तू निशाने पे आ भी जाए अगर
कौन सा तीर मार लूँगा मैं
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Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
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Tehzeeb Hafi
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तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले
तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शा'इरी से पहले
Kaif Bhopali
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इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है
और इक हम है हमें सिर्फ़ वफ़ा आती है
Zubair Ali Tabish
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कितने हसीं हो माशा-अल्लाह
तुम पे मोहब्बत ख़ूब जचेगी
Zubair Ali Tabish
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तू इस तरह से मिला फिर मलाल भी न रहा
तेरे ख़याल में अपना ख़याल भी न रहा

कुछ इस अदास झुकी थी हया से आँख तेरी
हमारी आँख में कोई सवाल भी न रहा
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Subhan Asad
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था
मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था
Pallav Mishra
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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
Firaq Gorakhpuri
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मैं देर तक तुझे ख़ुद ही न रोकता लेकिन
तू जिस अदास उठा है उसी का रोना है
Firaq Gorakhpuri
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जिस की जानिब 'अदा' नज़र न उठी
हाल उस का भी मेरे हाल सा था
Ada Jafarey
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हया से सर झुका लेना अदास मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
Akbar Allahabadi
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बात करने का हसीं तौर-तरीक़ा सीखा
हम ने उर्दू के बहाने से सलीक़ा सीखा
Manish Shukla
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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अपने दिल के ख़ून से वो गुल खिला देता हूँ मैं
रेगज़ारों को गुलिस्ताँ की अदा देता हूँ मैं
Qaisar Sidddiqui
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हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
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क्यूँँ पशेमाँ हो अगर वअ'दा वफ़ा हो न सका
कहीं वादे भी निभाने के लिए होते हैं
Ibrat Machlishahri
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इक हसीं ख़्वाब कि आँखों से निकलता ही नहीं
एक वहशत है कि ता'बीर हुई जाती है
Ambreen Haseeb Ambar
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हम तो तमाम उम्र तिरी ही अदा रहे
ये क्या हुआ कि फिर भी हमीं बे-वफ़ा रहे
Jameel Malik
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ
Arzoo Lakhnavi
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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दो तुंद हवाओं पर बुनियाद है तूफ़ाँ की
या तुम न हसीं होते या में न जवाँ होता
Arzoo Lakhnavi
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हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
Jigar Moradabadi
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
Ameer Minai
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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
Ameer Minai
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं
किस मुँह से तुम ने वा'दा किया था निबाह का
Hafeez Jalandhari
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए
मज़ा जब है तुम्हारी हर अदा क़ातिल ही कहलाए
Shakeel Badayuni
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
Jigar Moradabadi
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फ़स्ल-ए-बहार आई है होली के रूप में
सोलह सिंगार लाई है होली के रूप में
Saghar Nizami
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कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में
Nazeer Banarasi
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वो एक शख़्स जो दिखने में ठीक-ठाक सा था
बिछड़ रहा था तो लगने लगा हसीन बहुत
Siraj Faisal Khan
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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इक हुस्न-ए-बेमिसाल की तम्सील के लिए
परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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Jaun Elia
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इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न ने शौक़ के हंगा
में तो देखे थे बहुत
इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
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Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ को पूछता नहीं कोई
हुस्न का एहतिराम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या
Ibn E Insha
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न करो बहस हार जाओगी
हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये
Sahir Ludhianvi
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हसीन लड़की से दिल लगाना भी इक ख़ता है मुझे पता है
अगर सज़ा में मिले क़ज़ा तो अलग मज़ा है मुझे पता है
Jatin shukla
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदास वो
मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के
Riyaz Khairabadi
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वफ़ा का ज़ोर अगर बाज़ुओं में आ जाए
चराग़ उड़ता हुआ जुगनुओं में आ जाए

खिराजे इश्क़, कहीं जा के तब अदा होगा
हमारा ख़ून अगर आँसुओं में आ जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है
उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है
Bhartendu Harishchandra
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर
बारिशें हों तो भीग जाया कर

काम ले कुछ हसीन होंठों से
बातों बातों में मुस्कुराया कर
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Shakeel Azmi
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दुख की दीमक अगर नहीं लगती
ज़िन्दगी किस क़द्र हसीं लगती

वस्ल को लॉटरी समझता हूँ
लॉटरी रोज़ तो नहीं लगती
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Azbar Safeer
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हसीन लड़कियाँ ख़ुश्बूएँ चाँदनी रातें
और इन के बा'द भी ऐसी सड़ी हुई दुनिया
Ameer Imam
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं
इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क़रार

जैसे दीवाली की शब हल्की हवा के सामने
गाँव की नीची मुंडेरों पर चराग़ों की क़तार
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Ehsan Danish
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
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Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे अंदर छुपी हुई इक हसीन लड़की
ज़रा से काजल ज़रा सी लाली से मिल गई है
Vishal Bagh
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हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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Kushal Dauneria
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बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले
ये हुस्न की दौलत है लुटाई नहीं जाती
Unknown
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लुटाते हैं वो दौलत हुस्न की बावर नहीं आता
हमें तो एक बोसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें
वक़्त हम से रूठ जाने की अदा तक ले गया
Fasih Akmal
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले
Arzoo Lakhnavi
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रात भर ता'रीफ़ मैं ने की तुम्हारे रूप की
चाँद इतना जल गया सुन कर कि सूरज हो गया
Chandan Rai
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किसी की कट रही है बस ग़मों में
किसी की ज़िंदगी कितनी हसीं है
Ananya Rai Parashar
इक तो ये नूर उस पे मेरी शर्म भी अलग
तू सामने रहा तो निगह उठ न पाएगी
shaan manral
हद से बढ़ कर हसीन लगते हो
झूटी क़स
में ज़रूर खाया करो
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Abdul Hamid Adam
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हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
है इस हसीन शौक़ में लज़्ज़त छुपी हुई
बहला रहे हैं ख़ुद को मियाँ शा'इरी से हम
shaan manral
हसीं ख़्वाबों को अपने साथ में ढोती हुई आंँखे
बहुत प्यारी लगी हम को तेरी सोती हुई आंँखे

मोहब्बत में ये दो क़िस्से सुना है रोज़ होते हैं
कभी हँसता हुआ चेहरा कभी रोती हुई आंँखे
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Naimish trivedi
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जल्वा-ए-नूर है ये दोनो आँखें उस की
उस को जलता सा शो'ला जो बना रखा है
ALI ZUHRI
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हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ
जल रही है दिल-ए-पुर-नूर की लंका देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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ख़्वाब इतना भी हसीं मत देखो
नींद टूटे तो न ये शब गुज़रे
anupam shah
बादलों में से छनता हुआ नूर देख
ऐसी रौशन जबीं है मेरे यार की
Afzal Ali Afzal
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मन के हारे हुए इंसान को हुस्न-ए-शय से
कोई मतलब नहीं कोई भी सरोकार नहीं
shaan manral
हसीन इतना के सब हसीनों को पीछे छोड़े जहाँ भी जाए
कमाल इतना के बे-वफ़ाई में उस सेे आगे कोई नहीं है
Aqib khan
कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते

वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूँ दुआ करते करते
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Shadab Asghar
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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है
Munawwar Rana
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ये बहस छोड़ कि कितनी हसीन है दुनिया
तू ये बता कि तेरा दिल कहीं लगा कि नहीं
Vijay Sharma
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हुस्न उन का सादगी में कुछ अलग महका किया
मैं ने धड़कन से कहा धड़को मगर आराम से
Ishq Allahabadi
मैं तो मुश्ताक़ हूँ उस दिन का अज़ल से 'ज़ामी'
कब बपा हश्र हो कब उन का मैं जल्वा देखूँ
Parvez Zaami
इक बार अपनी माँ को मोहब्बत से देख ले
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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दोस्त अपना हक़ अदा करने लगे
बेवफ़ाई हमनवा करने लगे

मेरे घर से एक चिंगारी उठी
पेड़ पत्ते सब हवा करने लगे
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Santosh S Singh
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कभी कभी वो बला की हसीन लगती है
कभी कभी तो उसे देखने का जी न करे
Shadab Asghar
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने
यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने

इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने
ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
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Kushal Dauneria
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मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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चल गया होगा पता ये आप को
बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को

इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
तू समझती क्या है अपने आप को
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Kushal Dauneria
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
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Azhar Iqbal
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