Aankhein Shayari - Dil ki baatein aur jazbaat aankhon ke zariye bayan

Aankhein shayari beautifully captures the unspoken emotions that eyes convey without words. From silent love to hidden pain, aankhon ki baat often feels more powerful than any sentence. Explore heartfelt verses that reflect ishq, nazar, and deep jazbaat through expressive poetry.

aankh shayari
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
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aankhein shayari
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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nazar shayari
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
Kaifi Azmi
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nigaah shayari
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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nigah shayari
वफ़ा नज़र नहीं आती कहीं ज़माने में
वफ़ा का ज़िक्र किताबों में देख लेते हैं
Hafeez Banarasi
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palkein shayari
सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर
मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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drishti shayari
जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी
महसूस ये हुआ तुझे हर बार देख कर
Shad Azimabadi
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chashm shayari
तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर
जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है
अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है
Abbas Tabish
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तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते
इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
Waseem Barelvi
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नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं
जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं
Varun Anand
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नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही
नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही
Faiz Ahmad Faiz
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था
एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
Ahmad Faraz
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए
हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन
नज़र दीवार पर जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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आँख में पानी रखो, होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
Rahat Indori
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वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए
उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे
आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
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एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर ‘ताबिश’
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
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मैं कहाँ जाऊँ करूँँ किस से शिकायत उस की
हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं।
Zubair Ali Tabish
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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के
ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त
मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त

हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम
पगला गए हैं आप के चू
में हुए दरख़्त
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Varun Anand
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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा
मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा
Waseem Barelvi
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बचा के आँख बिछड़ जाएँ उस से चुपके से
अभी तो अपनी तरफ़ ध्यान भी ज़ियादा नहीं
Vipul Kumar
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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तू इस तरह से मिला फिर मलाल भी न रहा
तेरे ख़याल में अपना ख़याल भी न रहा

कुछ इस अदास झुकी थी हया से आँख तेरी
हमारी आँख में कोई सवाल भी न रहा
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Subhan Asad
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तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है

बिछड़के तुम सेे आँखें बुझ गई हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है
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Subhan Asad
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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
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Subhan Asad
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तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन
ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
Jigar Moradabadi
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किसी के साथ वो दो पाँव आज चलने लगे
हम अपनी आँख के साथ हाथ भी मसलने लगे
Shadab Javed
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पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
Parveen Shakir
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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
Mirza Ghalib
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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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लाई न ऐसों-वैसों को ख़ातिर में आज तक
ऊँची है किस क़दर तिरी नीची निगाह भी
Firaq Gorakhpuri
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भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया
ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा कर के
Rahat Indori
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जिस की जानिब 'अदा' नज़र न उठी
हाल उस का भी मेरे हाल सा था
Ada Jafarey
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मुमकिन है कि सदियों भी नज़र आए न सूरज
इस बार अँधेरा मिरे अंदर से उठा है
Aanis Moin
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क्यूँँ इक तरफ़ निगाह जमाए हुए हो तुम
क्या राज़ है जो मुझ से छुपाए हुए हो तुम
Shakeel Badayuni
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दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
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चश्म हो तो आईना-ख़ाना है दहर
मुँह नज़र आता है दीवारों के बीच
Meer Taqi Meer
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किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया
Meer Taqi Meer
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हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
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आज है उन को आना, मज़ा आएगा
फिर जलेगा ज़माना, मज़ा आएगा

तीर उन की नज़र के चलेंगे कई
दिल बनेगा निशाना मज़ा आएगा
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Bhaskar Shukla
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निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
Akbar Allahabadi
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ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं
Aalok Shrivastav
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फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
Faiz Ahmad Faiz
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दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब
तसव्वुरात-ए-कुहन के क़दीम बुत-ख़ाने
Ali Sardar Jafri
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हम भी ख़ुद को तबाह कर लेते
तुम इधर भी निगाह कर लेते
Behzad Lakhnavi
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क्या हो गया इसे कि तुझे देखती नहीं
जी चाहता है आग लगा दूँ नज़र को मैं
Ismail Merathi
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तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ'
की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
Anwar Taban
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हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
Jigar Moradabadi
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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
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नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
Shakeel Badayuni
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कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
Ameer Minai
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पुतलियाँ तक भी तो फिर जाती हैं देखो दम-ए-नज़अ
वक़्त पड़ता है तो सब आँख चुरा जाते हैं
Ameer Minai
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दिल्ली के न थे कूचे औराक़-ए-मुसव्वर थे
जो शक्ल नज़र आई तस्वीर नज़र आई
Meer Taqi Meer
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
Ahmad Faraz
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मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ
नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
Akbar Allahabadi
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जो बिस्मिल बना दे वो क़ातिल तबस्सुम
जो क़ातिल बना दे वो दिलकश नज़ारा

मोहब्बत का भी खेल नाज़ुक है कितना
नज़र मिल गई आप जीते मैं हारा
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Nushur Wahidi
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मैं किसी आँख से छलका हुआ आँसू हूँ 'नबील'
मेरी ताईद ही क्या मेरी बग़ावत कैसी
Aziz Nabeel
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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है
कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है

है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही
वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है
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Tehzeeb Hafi
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पहले सौ बार इधर और उधर देखा है
तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है
Majrooh Sultanpuri
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
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Ismail Raaz
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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जब मिली आँख होश खो बैठे
कितने हाज़िर जवाब हैं हम लोग
Jigar Moradabadi
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है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
Siddharth Saaz
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हम तो उस आँख के हैं देखने वाले, देखो
जिस
में शोख़ी है बहुत और हया थोड़ी सी
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Dagh Dehlvi
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मुयस्सर हमें ख़्वाब-ओ-राहत कहाँ
ज़रा आँख झपकी सहर हो गई
Dagh Dehlvi
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हमें दीदार से मरहूम रख कर है नज़र दिल पर
पराया माल ताको और दौलत अपनी रहने दो
Dagh Dehlvi
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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
Asrar Ul Haq Majaz
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होंट को होंट से दूर रखिये अभी
आँख से आँख को चूमने दीजिये!
Atul K Rai
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं
उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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उसूलों पे जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है
फिर इस में अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है
Allama Iqbal
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उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
Unknown
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कभी तो आँख लगते ही मुसलसल ख़्वाब आते थे
अभी तो ख़्वाब ही अक्सर मुझे सोने नहीं देते
Tariq Faiz
आँख आँसू को ऐसे रस्ता देती है
जैसे रेत गुज़रने दरिया देती है

कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक
वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
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Kafeel Rana
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भटकती फिर रही है आँख घर में
तिरी आवाज़ इस को दिख रही है
Himanshu Kiran Sharma
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है
आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
ना तो कुछ सुनते हैं ना ही बोल कुछ पाते हैं हम
सामने उन के सरापा आँख हो जाते हैं हम

वो निगाहें इन निगाहों से कभी हटती नहीं
वरना कितनी ही निगाहें हैं जिन्हें भाते हैं हम
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Bhaskar Shukla
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सब कहते हैं क्या कहते हैं कहने दो
ख़्वाब तुम्हारे आँख हमारी देखेंगे
Ritesh Rajwada
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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सफ़र के ब'अद भी मुझ को सफ़र में रहना है
नज़र से गिरना भी गोया ख़बर में रहना है
Aadil Raza Mansoori
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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ज़रा सी आँख करनी है हमें बंद
बहुत मुश्किल नहीं मरना हमारा
Shahbaz Rizvi
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मुझ को बस उस की ख़ुशियों से मतलब है
अर्जुन को बस आँख दिखाई देती है
Saad Ahmad
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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फूल की आँख में शबनम क्यूँँ है
सब हमारी ही ख़ता हो जैसे
Bashir Badr
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आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई
ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई
Manzar Bhopali
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भीगी पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं

वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
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Zubair Ali Tabish
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा
ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
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Zia Mazkoor
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हम उसे आँखों की दहलीज़ न चढ़ने देते
नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे ले कर

एक दिन उस ने मुझे पाक नज़र से चूमा
उम्र भर चलना पड़ा मुझ को सहारे ले कर
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Aalok Shrivastav
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आँख वो इक शहर जिस
में दम घुटेगा
दिल में रहना घर में रहने की तरह है
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Neeraj Neer
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हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
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बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहजा निगाह
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है
Mirza Ghalib
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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही
Jaleel Manikpuri
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं

वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Read Full
Zubair Ali Tabish
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मुझे तो उस का भीतरी ग़ुबार है निकालना
सो आँख चूमता हूँ उस के होंठ चूमता नहीं
Siddharth Saaz
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आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए
जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना
Parveen Shakir
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे
दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है

मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है
और वो मारने मरने पे उतर आता है
Read Full
Tehzeeb Hafi
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शाम थी हिज्र की हाल मत पूछना
आँख थकने लगे तो जिगर रो पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
कल रात मैं बहुत ही अलग सा लगा मुझे
उस की नज़र ने यूँँ मेरी सूरत खंगाली दोस्त
Afzal Ali Afzal
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हम भी तुम को धोखा दें ये ठीक नहीं
आँख के बदले आँख कहाँ तक जायज़ है
Gaurav Singh
और क्या ही था हमारे पास देने को तुम्हें
ख़्वाब मेरे आँख के तुम को मुबारक हो सनम
Subrat Tripathi