Parinda Shayari - Udaan, azaadi, aur dil ki khwahishon ki shayari

Parinda shayari captures the spirit of freedom, dreams, and endless skies. It reflects the soul’s desire to fly beyond limits, like a bird chasing its own manzil. These verses beautifully express azaadi, hope, and the courage to explore life without boundaries.

parinda shayari
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
Ahmad Faraz
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udaari shayari
इश्क़ हमारा चाँद सितारे छू लेगा
घुटनों पर आ कर इज़हार किया हम ने
Darpan
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udaan shayari
तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
Mirza Ghalib
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par shayari
जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है
Akbar Allahabadi
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aasmaan shayari
जिस दिन मिरी जबीं किसी दहलीज़ पर झुके
उस दिन ख़ुदा शिगाफ़ मिरे सर में डाल दे
Kaif Bhopali
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azaadi shayari
होंटों पर इक बार सजा कर अपने होंट
उस के बा'द न बातें करना सो जाना
Ateeq Allahabadi
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सख़्ती थोड़ी लाज़िम है पर पत्थर होना ठीक नहीं
हिन्दू मुस्लिम ठीक है साहब कट्टर होना ठीक नहीं
Salman Zafar
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सोचता हूँ कि यूँँ न हो इक दिन
ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले
Vikas Rana
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कोई तितली पकड़ लें अगर
फूल पर रख दिया कीजिए
Vikas Rana
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वही लिखने पढ़ने का शौक़ था, वही लिखने पढ़ने का शौक़ है
तेरा नाम लिखना किताब पर, तेरा नाम पढ़ना किताब में
Bashir Badr
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उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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मैं पहले झूठ पर हकलाया उस सेे
फिर उस के बा'द माहिर हो गया था
Shadab Javed
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सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा
तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
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पूछने पर वो ये कह देगा, यूँँ ही शे'र हुए
वैसे यूँँ ही कोई हरकत नहीं की जाती है
Fareeha Naqvi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
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Tehzeeb Hafi
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मैं क्या करूँँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़'
उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं
Ahmad Faraz
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हमारी मौत पर बेशक ज़माना आएगा रोने
मगर ज़िंदा हैं जब तक चैन से जीने नहीं देगा
Astitwa Ankur
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कहाँ रोते उसे शादी के घर में
सो इक सूनी सड़क पर आ गए हम
Shariq Kaifi
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तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन
नज़र दीवार पर जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
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Tehzeeb Hafi
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
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Zubair Ali Tabish
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कोई तितली निशाने पर नहीं है
मैं बस रंगों का पीछा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
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इस दर का हो या उस दर का हर पत्थर पत्थर है लेकिन
कुछ ने मेरा सर फोड़ा हैं कुछ पर मैं ने सर फोड़ा है
Zubair Ali Tabish
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तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए
आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी
Zubair Ali Tabish
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अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
कुछ नहीं आसमान में रक्खा
Jaun Elia
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रोया हूँ तो अपने दोस्तों में
पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ
Jaun Elia
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तुम कली पर निखार आने दो
देखना डाल ख़ुद झटक देगी
Vishal Bagh
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
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Vipul Kumar
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जिन से उठता नहीं कली का बोझ
उन के कंधों पे ज़िन्दगी का बोझ

वक़्त जब हाथ में नहीं रहता
किस लिए हाथ पर घड़ी का बोझ
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Vikram Sharma
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मैं चोट कर तो रहा हूँ हवा के माथे पर
मज़ा तो जब था कि कोई निशान भी पड़ता
Abhishek shukla
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जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है
ज़ख़्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है

उस के घर से दूर नहीं है मेरा घर
रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है
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Subhan Asad
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हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई
उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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Subhan Asad
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उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
Mirza Ghalib
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हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा

मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर
सज़ा से काम चल जाता हमारा
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Shariq Kaifi
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तुर्रा-ए-काकुल-ए-पेचाँ रुख़-ए-नूरानी पर
चश्मा-ए-आईना में साँप सा लहराता है
Miyan Dad Khan Sayyah
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तुम जाओ पर यादों को तो रहने दो
यादों का भी एक सहारा होता है
Sachin Shalini
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वक़्त अच्छा ज़रूर आता है
पर कभी वक़्त पर नहीं आता
Parvez Sahir
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गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने
घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने
Shahzad Ahmad
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तू शाही है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आ
समाँ और भी हैं
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Allama Iqbal
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ये लुत्फ़ मुझ पर किसलिए एहसान का क्या फ़ाइदा
अब वक़्त सारा कट चुका, अच्छा-बुरा, थोड़ा-बहुत
Aziz Nabeel
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मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ
Bashir Badr
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नया साल दीवार पर टाँग दे
पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
Mohammad Alvi
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बन के हँसी होंटों पर भी रहते हो
अश्कों में भी तुम बहते हो तुम भी ना
Ambreen Haseeb Ambar
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मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर
उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया
Adil Mansuri
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फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया
उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के
Adil Mansuri
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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में
Adil Mansuri
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तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है
सीना किस का है मिरी जान जिगर किस का है
Ameer Minai
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हमें गूंगा न समझा जाए कमतर बोलते हैं हम
जहाँ हम को सुना जाए वहीं पर बोलते हैं हम
Bhaskar Shukla
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
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Santosh S Singh
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जिसे तुम काट आए उस शजर को ढूँढ़ता होगा
परिंदा लौट कर के अपने घर को ढूँढ़ता होगा
Bhaskar Shukla
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अब के इस बज़्म में कुछ अपना पता भी देना
पाँव पर पाँव जो रखना तो दबा भी देना
Zafar Iqbal
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सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं
ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
Anwar Shaoor
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
Lala Madhav Ram Jauhar
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एक दरिया है यहाँ पर दूर तक फैला हुआ
आज अपने बाजुओं को देख पतवारें न देख
Dushyant Kumar
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भूलती कब हैं भला पिछली रुतों की सोहबतें
हंस बैठा ही रहा सूखे हुए तालाब पर
Adeem Hashmi
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से
हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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उस की यादों की काई पर अब तो
ज़िंदगी-भर मुझे फिसलना है
Siraj Faisal Khan
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
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Rahat Indori
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छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था
पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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Jaun Elia
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ग़ज़लें लिखकर सब सेे पहले उस को भेजा करता हूँ
जैसे खाना बन जाने पर भोग लगाया जाता है
Tanoj Dadhich
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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हो गई बर्बाद मेरी ज़िन्दगी
पर किसी का शौक़ पूरा हो गया
Tanoj Dadhich
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नमक हल्दी ज़ियादा दाल में छोड़ा गया था
बताएँ क्या हमें किस हाल में छोड़ा गया था

अधूरी एक उस तस्वीर पर सब मर मिटे थे
बना कर यार डिम्पल गाल में छोड़ा गया था
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Atul K Rai
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टक गोर-ए-ग़रीबाँ की कर सैर कि दुनिया में
उन ज़ुल्म-रसीदों पर क्या क्या न हुआ होगा
Meer Taqi Meer
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अपनी लाश उठाओ अपने काँधे पर
सरकारों के जिम्में कुर्सी छोड़ो बस
Atul K Rai
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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं
पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर

तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे
हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर
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Varun Anand
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उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या
Ibn E Insha
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मेरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया
पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं
Varun Anand
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सादा हूँ और ब्रैंड्स पसंद नहीं मुझ को
मुझ पर अपने पैसे ज़ाया' मत करना
Ali Zaryoun
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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सारी तेरी मर्ज़ी है पर, दिल में है एक बात कहूँ
ज़ुल्फ़ें इतनी सुंदर हो तो, बाँधी थोड़ी जाती है
Prashant Sharma Daraz
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सुख़न-फ़हमों की बस्ती में सुख़न की ज़िन्दगी कम है
जहाँ शाइ'र ज़ियादा हैं वहाँ पर शा'इरी कम है

मैं जुगनू हूँ उजाले में भला क्या अहमियत मेरी
वहाँ ले जाइए मुझ को जहाँ पर रौशनी कम है
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Balmohan Pandey
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तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें
हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर
Varun Anand
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चराग़ों को उछाला जा रहा है
हवा पर रौब डाला जा रहा है
Rahat Indori
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भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अश'आर कहते थे
Siddharth Saaz
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सफ़र से लौट जाना चाहता है
परिंदा आशियाना चाहता है

कोई स्कूल की घंटी बजा दे
ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
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Shakeel Jamali
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गर अदीबों को अना का रोग लग जाए तो फिर
गुल मोहब्बत के अदब की शाख़ पर खिलते नहीं
Afzal Ali Afzal
इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग
हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी
दोस्त की दोस्त मान लेते हैं
Dagh Dehlvi
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फ़ुज़ूल-ख़र्ची नहीं करेंगे
Rehman Faris
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प्यार का जादू सब के सर पर चढ़ कर फिर तो बोलेगा
तुम बनना कान्हा की मुरली मधुबन हम हो जाएँगे
Safia Rag Alvi
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए
ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए

अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे
अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
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Mehshar Afridi
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बुरे हालात है पर यार अब भी
गले मिलता है, सेहत पूछता है
Gagan Bajad 'Aafat'
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फिर मचलने लग गई हैं उँगलियाँ
एक ग़ज़ल लिख दूँ क्या तेरे नाम पर
Dev Niranjan
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धूप में कौन किसे याद किया करता है
पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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ख़ुद-कुशी पर शे'र लिखना है अगर
तो लिखो ऐसा कभी करना नहीं
Tanoj Dadhich
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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब
उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब

इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब
पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?
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Tanoj Dadhich
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हम नहीं वो जो करें ख़ून का दावा तुझ पर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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इक कमरे के कोने में ग़ज़लें लिखकर
शाइ'र पूरी दुनिया पर छा जाता है
Tanoj Dadhich
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राहों में जान घर में चराग़ों से शान है
दीपावली से आज ज़मीन आसमान है
Obaid Azam Azmi
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प्यार की रात हो छत पर हो तेरा साथ तो फिर
चाँद को बीच में डाला नहीं जाता मुझ सेे
Waseem Barelvi
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दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी
रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं
इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क़रार

जैसे दीवाली की शब हल्की हवा के सामने
गाँव की नीची मुंडेरों पर चराग़ों की क़तार
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Ehsan Danish
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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी

कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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पाँव रख गई है वो ज़मीन पर
अहमियत बढ़ा दी उस ने धूल की
Nawaaz
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तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना
जहाँ पे हम हैं वहाँ चांदनी बहुत कम है
Shakeel Azmi
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तुम्हारा दिल यहाँ पर खो गया तो कैसी हैरत है
बरेली में तो झुमके तक निकल जाते हैं कानों से
Ashu Mishra
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आ ही जाता वो राह पर 'ग़ालिब'
कोई दिन और भी जिए होते
Mirza Ghalib
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उड़ाने पर जो आ जाऊँ उड़ा दूँ होश दुनिया के
मगर मैं फूल से तितली उड़ा सकता नहीं यारों
Divy Kamaldhwaj
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मुझ सेे मिलने ही आती है नुक्कड़ पर
पानी पूरी केवल एक बहाना है
Divy Kamaldhwaj
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए
लीजिए या दीजिए इनकार रहने दीजिए
Hafeez Jaunpuri
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बोले वो बोसा-हा-ए-पैहम पर
अरे कम-बख़्त कुछ हिसाब भी है
Hasan Barelvi
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