Aasman Shayari - Khule aasman, sapne, aur udaan ki gehri shayari

Aasman shayari reflects limitless dreams, freedom, and the vastness of emotions. Whether it’s about reaching new heights, chasing khwab, or finding peace under the open sky, these verses beautifully connect the heart with the infinite aasman.

aasman shayari
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं
Meer Taqi Meer
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देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है

गोर किस दिल-जले की है ये फ़लक
शो'ला इक सुब्ह यां से उठता है
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Meer Taqi Meer
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आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख
पर अँधेरा देख तू आकाश के तारे न देख
Dushyant Kumar
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ज़मीन-ओ-आसमाँ को जगमगा दो रौशनी से
दिसम्बर आज मिलने जा रहा है जनवरी से
Bhaskar Shukla
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पहले सर की ये शिकायत थी फ़लक ऊँचा है
अब मिरे पाँव ये कहते हैं कि धरती है कहाँ
Rauf Raza
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फ़लक इतना सूना है क्यूँ
ज़मीं पर तो सब मेरे थे
Parul Singh "Noor"
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तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लक
मुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी
Munawwar Rana
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उस चाँद को भी रश्क होता था उसी को देख कर
मैं भी खुले आकाश में तस्वीर उस की चूमता
Ankit Yadav
सुनो जैसे फ़लक में चाँद का होना ज़रूरी है
ग़ज़ल के वास्ते साहिब मेरा होना ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath
ज़ुदा हम हो गए अफ़सोस कैसा
फ़लक धरती से कब लिपटा दिखा है
Atul K Rai
फ़क़त घूंघट में ही रहना नहीं है
गगन छूना है हर लड़की को साहब
Kush Pandey ' Saarang '
उड़ना है अब ग़ज़ल के फ़लक पर मुझे.
मैं परिंदा हूँ आजाद से ख़याल का
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
मोहब्बत है अगर आकाश जैसा
तो मज़हब एक सुपली की तरह है
Saarthi Baidyanath
तुम धरा पर बैठ कर सपने गगन के पालते हो
है विजय की चाह तो क्यूँ काम कल पर टालते हो

और अंदाज़ा नदी का छोर पर मिलता नहीं है
कूद कर देखो न डर क्यूँ डूबने का पालते हो
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ATUL SINGH
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वो क्या अगर सब गुफ़्तगू खुद सेे किए हम जा रहे
ना दिख बुतों में और ना ही दिख फ़लक में वो ख़ुदा
Zain Aalamgir
बुरा या फिर कभी अच्छा लगा मैं
जो जैसे थे उन्हें वैसा लगा मैं

निकाला मैं गया हूँ इस फ़लक से
बता तू अब तुझे कैसा लगा मैं
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Shivam Shaw
बड़ी हैरत में हैं तारे गगन के
कोई जुगनू सितारा हो रहा है
Saarthi Baidyanath
मता-ए-जाँ रुख़-ए-अनवर तुम्हारा
फ़लक के चाँद से ज़्यादा हसीं हैं
Shajar Abbas
तुम फ़लक हो और तुम ही सर
ज़मीं हो जानेमन
मैं जहाँ जाऊँ वहाँ पर बस तुम्हीं हो जानेमन

मैं तुम्हारे दिल से निकला और ठोकर में गया
तुम मेरे दिल में थी कल अब भी वहीं हो जानेमन
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Chandan Sharma
कहाँ हैं आलम-ए-इंसाँ के वालियों मौला
फ़लक ज़दा हूँ मैं मुश्किल कुशाई कर मेरी
Shajar Abbas
उतर आजा फ़लक से अब ज़मीं पे
सदा कोई न आएगी कहीं से
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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कोई पूछे कि बतलाओ किसे तुम इश्क़ कहते हो
तो कह देना उदासी के फ़लक पे दर्द का इक चाँद
Intzar Akhtar
वतन का दुलारा गया आसमाँ को
कि कितनों का प्यारा गया आसमाँ को

ज़मीं ने सितारे लुटाए फ़लक पे
ज़मीं से सँवारा गया आसमाँ को
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Chandan Sharma
मैं किस तरह उसे जताता प्यार है मुझे कि मैं
फ़लक से चाँद तारे तोड़ कर भी ला नहीं सका
Hasan Raqim
रंग लाई है किरन की आ
समाँ से इल्तिमास
चाँद आया है फ़लक से आज आंगन में मिरे
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Kiran K
रौनक फ़लकी होकर हम चाँद गगन पे आए है
सच अब किस सेे बोले हम जान लुटाने आए है
Raunak Karn
ज़रा सा कश्मकश में हूँ ज़मीं पर देख कर तुझ को
फ़लक पर यार तुझ को तो चमकना चाहिए था ना
Shoonya Shrey
पूछता है फ़लक से दीवाना
टूट कर गिर गया सितारा क्या
Ajeetendra Aazi Tamaam
सुनाता है समुंदर इक कहानी हर किनारे पर
कभी कोई तो आया था बनाने घर किनारे पर

फ़लक से चाँद उतरा रक़्स करते इस समुंदर में
सितारे देखने आए वही मंज़र किनारे पर
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Raj Tiwari
फ़लक से वो उतर कर आ गया है
कि अब तो चाँद भी शरमा गया है
Arohi Tripathi
तुम कहो तोड़ के फ़लक से सभी
चाँद तारे ज़मीं पे ले आऊँ
Shajar Abbas
ज़मीं गिरने नहीं देती गगन उठने नहीं देता
हर इक हद तोड़ना चाहे मिरे अंदर का पागलपन
Ajeetendra Aazi Tamaam
हाँ एक दिन तुझे आजादी बहुत खलेगी
इनकार जाँ तुझे जो आकाश को किया हैं
Akash Panwar
इस एक फ़िक्र ने हैरान कर दिया है मुझे
फ़लक पे चाँद तो आया है तुम नहीं आए
Talha Lakhnavi
तेरे लिए मैं सूरज लाया
धरती से आकाश मिलाया
Gopal Bhojak
ख़ून कम होने लगे मुफ़लिस का तब
जब गगन में मेघ छाने लगते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
ख़ुदा की देन है और ये फ़लक से नाज़िल है
हमारे ग़म को मुसलसल उरूज़ हासिल है
Navneet krishna
फ़लक में चाँद के जैसे,रहे मुझ में कहीं मौजूद
कभी आधी, कभी पौनी, कभी पूरी, उदासी है
Vishal Vaid
सभी हैरत करेंगे जब नई पहचान लिख देंगे
फ़लक पर भी हुनर से अपने हिंदुस्तान लिख देंगे
ATUL SINGH
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फ़लक पे जो सितारें हैं वो प्यारे हैं
ख़ुदा से हो मोहब्बत तो हमारे हैं
Meem Alif Shaz
जान-ए-तमन्ना हम ने तब तब तुम्हें पुकारा
रंग-ए-फ़लक से टूटा जब जब कोई सितारा
Kartik tripathi
जब प्राण पखेरू चल पड़ते हैं गगन की ओर
तब साँस नहीं रहती एहसास नहीं रहते
Sandeep dabral 'sendy'
युगों युगों से शहादतों की
जहाँ बही है अतुल्य गंगा

धरा पे टिक कर गगन से ऊँचा
वहीं दमकता मेरा तिरंगा
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Rudransh
ज़मीं सर पे उठा लूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
गगन को भी कुचल दूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं

भला औक़ात क्या इस चाँद की उस चाँद के आगे
हज़ारों चाँद वारूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
तीरगी से पस्त लोग बरहना-पा आ गए हैं
अब फ़लक पे चाँद आया रात का जवाब आया
pankaj pundir
फ़लक भी सर-निगूँ तकने लगा है
हम अपने पाँव पर चलने लगे हैं
Sohil Barelvi
फ़लक के चाँद, सूरज और अंजुम से नहीं मिलते
चमकते है मगर तेरे तबस्सुम से नहीं मिलते

तुम्हारे चेहरे से ही हु-ब-हू ये मेल खाते है
मेरी ग़ज़लें जो मेरे ही तरन्नुम से नहीं मिलते
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maqbul alam
थे जो बातिल फ़लक पर मकीं हो गए
हक़ लिए मैं ज़मीं पर टहलता रहा
Javed Aslam
वो गया आकाश मत रो
आज तो मेरे गले मिल
Akash Panwar
यार आकाश बरसात मत कर अभीसठ के पास गिरवी ज़मीं हैं मिरी
Akash Panwar
किसी के ग़म में पागल हो गई हैं
हमारी आँखें बादल हो गई हैं

फ़लक से कोई चारा-गर उतारो
ज़मीं पर रूहें घाइल हो गई हैं
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Sanjay shajar
एक ज़िद्दी लड़का हासिल आपगा को कर रहा और
घूरता भी जा रहा है उस फ़लक को ग़ौर से अब
Vikas Shah musafir
मेरे लिए आकाश के ही फूल हो
सब को बराबर ही मिले ये रूल हो

हाँ सूद लौटाना नहीं है अब तुझे
उतना मिरा लौटा अभी जो मूल हो
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Akash Panwar
चाँद तारे फ़लक पे चमकने लगे
यादों के चेहरे फिर से झलकने लगे

जब तिरी उँगलियों ने छुआ जिस्म को
मिट्टी के अंग सारे महकने लगे

धूप ने इस तरह से जलाया बदन
सारे मज़दूर सर को पटकने लगे

जब बड़ों की न मानी कभी कोई बात
बच्चे मंज़िल से अपनी भटकने लगे

जब सड़क पे निकल के वो आई परी
बूढ़ों के दिल भी धक धक धड़कने लगे

देख कर मलबे के नीचे मासूमों को
लोगों के आँसू टप टप टपकने लगे
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Meem Alif Shaz
उन की आँखें झील नहीं हैं
आकाश इन्हें बत
लाएँगे

डूबने वाले डूब न पाए
उड़ने वाले उड़ जाएँगे
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Toyesh prakash
वहाँ ऊपर ख़ला में कहकशाँ में कौन रहता है
फ़लक के पार जो है उस जहाँ में कौन रहता है

टहल आए हैं वैसे तो बशर हम चाँद तक लेकिन
सवाल अब भी वही है आसमाँ में कौन रहता है
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Mohit Subran
शोख़ ने क्या ही ज़ुल्फ़ लहराई
अज़-फ़लक बारिशें निकल आईं
Meem Maroof Ashraf
रात को हम कुछ सितारे रख के सोए थे गगन में
देर से जागे तो देखा कोई ले कर जा चुका है
Rishi Vishwakarma
कशिश है आप के चेहरे में ऐसी
फ़लक से चाँद तारे आ गए हैं
shampa andaliib
फ़लक में उदास हैं चाँद, सितारे सभी
वो लड़की आज छत पर नहीं आई
Akash Choudhary
फ़लक तलक ये मंज़िलें ज़मीं पे साँस जा रही
कुछ इस तरह ये ज़िंदगी है मुझ को आज़मा रही
Aman Tripathi
तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने
हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने

मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ
फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने
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Zeeshan kaavish
पिता के काँधे पर बैठा हुआ हूँ
गगन छूने को इक मौक़ा' मिला है
Shivsagar Sahar
फिर से तड़पा है मन आ मुझे प्यार कर
कह रहा ये गगन आ मुझे प्यार कर

तुम ने देखा कटीले नयन से तो फिर
झूम उठा ये बदन आ मुझे प्यार कर
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Murari Mandal
सफ़र ज़मीं का तमाम होगा सफ़र फ़लक का करूँँगा मैं भी
यही तो अब इक ख़ुशी बची है कि एक दिन तो मरूँगा मैं भी
Mohit Subran
फ़लक के चाँद की क्या दीद वो तो है ज़माने का
दिखे जो चाँद मेरा वो मुबारक ईद हो जाए
Abha sethi
चल आ मैं तुझे चाँद तारे दिखाऊँ
ज़मीं से फ़लक के नज़ारे दिखाऊँ
ABhishek Parashar
कोई तो कह रहा था चाँद सा चेहरा है तेरा फिर
फ़लक के सब सितारे तुझ को मिल कर देखते होंगे
Manish Yadav
बरस बीस से बंद है एक कमरा
उसी में खुला यार आकाश हूँ मैं
Akash Panwar
गिर के आकाश से पेड़ों पे अटकना क्यूँ है
हम जो अटके तो परिंदों के परों में होंगे
Toyesh prakash
ये खिलखिलाती हसीन दुनिया ये बात करते हसीं सितारे
ये कह रहे हैं उठो मुसाफ़िर फ़लक झुकाओ क़दम बढ़ाओ
DEVANSH TIWARI
आसमाँ में अब्र है तो चाँद तारे भी दिखेंगे
रोज़ आते माँ के आँचल में मुझे मिलने फ़लक से
Manohar Shimpi
पिता बच्चों की हर विश पूरी करने में लगा है
गगन जैसी भी ख़्वाहिश पूरी करने में लगा है
"Dharam" Barot
तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म में उलझे हैं वरना
इक दिन हम भी फ़लक पर होते बनके कोई सितारा
Meem Alif Shaz
फ़लक की आँख से भी शबनमी क़तरे टपकते हैं
सितारे यूँँ सुनाते हैं हमारी दास्ताँ अक्सर
Dharmesh bashar
है अधूरा गगन बदलियों के बिना
घर सॅंवरते नहीं लड़कियों के बिना
Manish Yadav
तिरी ख़ुशी के लिए मैं नदी के आँचल में
फ़लक से चाँद सितारे उतार लाया हूँ
Shajar Abbas
अब फ़लक से तो नहीं कोई याँ आने वाला
फिर कोई टकराएगा तुझ से ज़माने वाला
Sohil Barelvi
तुम को गर आकाश में उड़ना है तो फिर
धरती के लोगों का चक्कर मत काटो
Nirbhay Nishchhal
दिल बाँध के रखा है रखा है फ़लक पे सर
मंज़िल तो दिख रही है मगर खो गया है घर
Sanjay Bhat
है अभी तो परिंदगी ज़िंदा
मैं गगन में उड़ा परिंदा हूँ
Vinod Ganeshpure
ख़ूब-सूरत आप हो यूँँ
चाँद जैसे है गगन में
Vinod Ganeshpure
जो पंछी आज़ाद गगन में उड़ना चाहता है
उस पंछी के सपने में ही पिंजरे आते हैं
Sanskar Shrivastav
इक आँख सुकूँ है इक आँख आँसू
है फ़लक पर चाँद भी और सूरज भी
Chetan Verma
जहाँ तक दरख़्शाँ उछाले गए
वहीं तक ही उन के उजाले गए

हमीं ने क़बाहत उठाई थी जब
फ़लक को ज़मीं के इज़ाले गए
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
कोई धुन तारी नहीं कोई सनक बाक़ी नहीं
अब फ़लक को नाप आने की हुमक बाक़ी नहीं

अब नहीं वो तिश्नगी जिस को समुंदर चाहिए
मुझ में अब कुछ कर गुज़रने की ललक बाक़ी नहीं
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Sanjay
देखता रहता हूँ उस को मैं फ़लक-बीनों से
उस की आवाज़ भी आती है मिरे कानों में
Javed Aslam
अजब सी रौशनी बिखरी थी दरिया के किनारों में
फ़लक ने चाँद पिघला कर उतारा आबशारों में

बताते हैं वो इक मंज़र किसी जादूगरी सा था
अमाँ दिल हार बैठे थे कई उस दिन नज़ारों में
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
जहाँ बाम-ए-फ़लक पे चाँद चमका हो
वहाँ तारे भी अपना हक़ जताते हैं
Saba Rao
वरक़ पर आज के बरसों में ठहरा है फ़लक आओ
लिखें ज़िंदान में भी नज़्म हम उनवान जो भी हो
kapil verma
इस दुनिया से कूच किया है तो ये हासिल है अपना
दूर फ़लक पर तारों का इक जोड़ा और निखरना है
nakul kumar
नज़र में ठहरी हुई है मस्ती दिलों में ख़्वाहिश नई नई है
ज़मीं पे गिरते हैं चाँद तारे फ़लक की साज़िश नई नई है
Arman Habib
सभी ये मतलबी ही लोग थोड़ी हैं
न फिर देखी सही दुनिया कभी तुम ने

ज़रा ख़ुद को निकालो आज पिंजरे से
न सोचा है गगन होगा कभी तुम ने
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Vinod Ganeshpure
न मंदिर में न मस्जिद के चमन में
न धरती पर न उस चौड़े गगन में

जो रब को ढूँढ़ना है आप को तो
मिलेगा तिफ़्ल के नन्हे से मन में
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Sanjay Bhat
तारे गगन में हैं सभी सच ये नहीं
हम भी सितारे हैं ज़मीं के देख लो
Vinod Ganeshpure
भीड़ से दब के मरी लाश उठा लेते हैं
ये वही लोग हैं आकाश उठा लेते हैं
Prabhat Adhar
वो बहुत दिनों से जला नहीं यूँँ ही उस दिए से ही काम क्या
वो कभी रहा हो फ़लक पे फिर भी बग़ैर उस के ये शाम क्या
Manohar Shimpi
फ़लक तक पहुँच जाएगा तू मगर
ये रख याद तू क़ब्र घर है तेरा
Ammar 'yasir'
आकाश में भी गूँजते हैं गीत प्यार के
आओ पिया कि आए हैं अब दिन बहार के

ये दिन वहीं हैं जिन का हमें इंतिज़ार था
मौसम गुज़र गए हैं सभी इंतिज़ार के
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MIR SHAHRYAAR
उस ने खिड़की से चाँद देखा था
मैं ने खिड़की में चाँद देखा है
Zubair Ali Tabish
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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इस दुनिया का हर मंसूबा हर कोशिश बेकार हुई
इक बच्चे ने हाथ बढ़ाया चाँद को छू कर देख लिया
Tariq Qamar
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निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा
अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
Umair Najmi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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फेंक कर रात को दीवार पे मारे होते
मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते
Unknown
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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अमीर-ए-शहर का रिश्ते में कोई कुछ नहीं लगता
ग़रीबी चाँद को भी अपना मामा मान लेती है
Munawwar Rana
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