Beautiful Mehndi Shayari - Shaadi, pyaar aur khushiyon ki mehndi wali shayari

Mehndi shayari captures the joy, love, and traditions of weddings and celebrations. From the deep color of mehndi on hands to the emotions of a bride’s heart, these verses reflect beauty, rituals, and heartfelt connections. Perfect for sharing during shaadi moments or festive occasions.

mehndi shayari
बहार आई कि दिन होली के आए
गुलों में रंग खेला जा रहा है
Jaleel Manikpuri
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henna shayari
जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की
Nazeer Akbarabadi
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mehendi shayari
चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
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shaadi shayari
होली है या फिर फूलों का मौसम है
सब के चेहरों पे रंग है ख़ुशबू भी है
Meem Alif Shaz
shagun shayari
तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर
जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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rasm shayari
उस ने वा'दा किया है आने का
रंग देखो ग़रीब ख़ाने का
Josh Malihabadi
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haath ki mehndi shayari
वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा
रंग गहरे हैं हमारी शाम के
Muztar Khairabadi
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rang shayari
गले मुझ को लगा लो ऐ मेरे दिलदार होली में
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में
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Bhartendu Harishchandra
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mehndi design shayari
अब के होली पे लगा रंग उतरता ही नहीं
किस ने इस बार हमें रंग लगाया हुआ है
Zia Zameer
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mehndi shayari
खँगालने हैं मुझे अपने सब से अच्छे शे'र
जो तुझ को रंग दे ऐसा गुलाल ढूँढ़ना है
Amulya Mishra
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henna shayari
इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग
Swapnil Tiwari
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन
में
रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
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Fareeha Naqvi
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गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
Faiz Ahmad Faiz
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न गुल खिले हैं, न उन से मिले, न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है
Faiz Ahmad Faiz
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे
हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे

ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें
प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
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Vikram Gaur Vairagi
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हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल
किसे देख कर आप शरमाइएगा
Jigar Moradabadi
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क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
Mirza Ghalib
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ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है
दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
Pallav Mishra
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देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख
Majrooh Sultanpuri
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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कमी कमी सी थी कुछ रंग-ओ-बू-ए-गुलशन में
लब-ए-बहार से निकली हुई दुआ तुम हो
Ali Sardar Jafri
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ऐ दिल की ख़लिश चल यूँँही सही चलता तो हूँ उन की महफ़िल में
उस वक़्त मुझे चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार'
कौन सा रंग भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है
मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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बाग़बाँ कलियाँ हों हल्के रंग की
भेजनी हैं एक कम-सिन के लिए
Ameer Minai
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया
तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं
वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं
Farhat Ehsaas
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
Salim Saleem
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आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को
आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला
Dushyant Kumar
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ग़ैर से खेली है होली यार ने
डाले मुझ पर दीदा-ए-ख़ूँ-बार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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अब की होली में रहा बे-कार रंग
और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के
Mushafi Ghulam Hamdani
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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज
सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है
Shaikh Zahuruddin Hatim
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अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल
Faez Dehlvi
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दिल की दीवार पर सिवा उस के
रंग दूजा कोई चढ़ा ही नहीं
Siraj Faisal Khan
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रंग उतर जाता है दीवारों का भी
जब तेरी तस्वीर उतारी जाती है
Tanoj Dadhich
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तुम्हारी याद का रंग डाल कर के
कहा तन्हाई ने होली मुबारक !
Bhaskar Shukla
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इक हुस्न-ए-बेमिसाल की तम्सील के लिए
परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
Asrar Ul Haq Majaz
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पूछे हैं वजह-ए-गिरिया-ए-ख़ूनी जो मुझ सेे लोग
क्या देखते नहीं हैं सब उस बे-वफ़ा का रंग
Meer Taqi Meer
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रंग-ओ-रस की हवस और बस
मसअला दस्तरस और बस

यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की
एक नस टस से मस और बस
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Ammar Iqbal
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
Nikunj Rana
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रंग की अपनी बात है वर्ना
आख़िरश ख़ून भी तो पानी है
Jaun Elia
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रौशनी ऐसी अजब थी रंग-भूमी की 'नसीम'
हो गए किरदार मुदग़म कृष्ण भी राधा लगा
Iftikhar Naseem
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ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
Ghulam Mohammad Qasir
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ये रंग रंग परिंदे ही हम से अच्छे हैं
जो इक दरख़्त पे रहते हैं बेलियों की तरह
Khaqan Khavar
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यूँँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँँ ही हमेशा खिलाए हैं हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई
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Faiz Ahmad Faiz
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मैं उस को देख के चुप था उसी की शादी में
मज़ा तो सारा इसी रस्म के निबाह में था
Muneer Niyazi
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चूमने की रस्म बाक़ी है अभी भी
डर है पहले देह को उबटन न चू
में
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Neeraj Neer
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बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं
Waseem Nadir
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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Kushal Dauneria
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूँ तो मिस्सी मुँह बनाती है
कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ तो मेहंदी रंग लाती है
Aasi Ghazipuri
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रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज
बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए
Hakim Mohammad Ajmal Khan Shaida
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महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे
खिले चमन में गुलाब इतने
Muneer Niyazi
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तुम्हें ज़रूरत क्या कोई त्योहारों की
रंग लगाकर गले लगाने आ जाओ
Divy Kamaldhwaj
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कभी इश्क़ करो और फिर देखो इस आग में जलते रहने से
कभी दिल पर आँच नहीं आती कभी रंग ख़राब नहीं होता
Saleem Kausar
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तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है
हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने
Shajar Abbas
इश्क़ के रंग में ऐ मेरे यार रंग
आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग

हो गुलाबी या हो लाल पीला हरा
आ लगा दूँ तुझे भी मैं दो चार रंग
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Afzal Ali Afzal
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कितने ही लगे रंग ज़माने में सभी पर
सब रंग छुपा लेती है आ कर यहाँ होली
Aves Sayyad
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दोनों हाथों को तेरे हाथ समझ कर जानाँ
अपने गालों पे ख़ुद ही रंग लगाया मैं ने
Upendra Bajpai
मुझ सेे पहले कोई रंग लगाए उन को
कैसे सह लें यार भला ये होली में हम
Priya Dixit
तुम्हारी इक झलक से रंग उल्फत के उड़ाए हैं
नज़ारों की नज़ाकत को ज़रा देखो मेरी जानाँ
Aniket sagar
तमाम उम्र मिटेगा नहीं वो रूह से फिर
अगर किसी को कभी भी किसी का रंग लगा
Chandan Sharma
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भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
रंग सारे फीके फीके ही लगेंगे मुझ को अब
उन की आँखों का जो काला सुर्मा देखा है अभी
Harsh saxena
चढ़ चुका रंग जिस पर तेरे प्रेम का
होली का रंग उस पर चढ़ेगा नहीं
Alankrat Srivastava
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होली के इस पावन रंग में प्यार का रंग मिला दूँगा
तुम कितना भी बच लो जानम तुम को मैं नहला दूँगा
Nirbhay Nishchhal
आशना किरदार उस का ज़ेहन पे यूँँ नक़्श था
रंग काग़ज़ पर गिरे तो ख़ुद अयाँ होते गए
Kaif Uddin Khan
मुझ से मिलना तो ऐसे मिलना तू
मिले है गुल को जैसे रंग-ओ-बू
Chandan Sharma
किसे पड़ी थी मिरा हाल पूछता मुझ से
मुझे तो रस्म निभानी थी मुस्कुराना था
Sarfraz Nawaz
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लब हैं जैसे गुल सुमबुल रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद को मैख़ाना तितली का बना रखा है
ALI ZUHRI
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प्यादों के रंग अलग है मगर जाएँगे सभी
शतरंज ख़त्म होने पे बक्से में एक ही
Maher painter 'Musavvir'
ये तेरा रंग नया है तू सँभलियो प्यारे
रंग उतरे तो ये दीवार बुरी लगती है
Sandeep kushwaha
आस्था का रंग आ जाए अगर माहौल में
एक राखी ज़िंदगी का रुख़ बदल सकती है आज
Unknown
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मसाइल तो बहुत से हैं मगर बस एक ही हल है
सहरस शाम तक सर मेरा है बेगम की चप्पल है

मेरे मालिक भला इस सेे बुरी भी क्या सज़ा होगी
मेरा शादीशुदा होना ही दोज़ख़ की रिहर्सल है
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Paplu Lucknawi
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हमारे गाँव में अब भी ये रस्म क़ायम है
बड़ों के हाथ में बच्चे कमाई देते हैं
Irshad 'Arsh'
जब बात वफ़ा की आती है जब मंज़र रंग बदलता है
और बात बिगड़ने लगती है वो फिर इक वा'दा करते हैं
Afeef siraj
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नश्शा-हा शादाब-ए-रंग-ओ-साज़-हा मस्त-ए-तरब
शीशा-ए-मय सर्व-ए-सब्ज़-ए-जू-ए-बार-ए-नग़्मा है
Mirza Ghalib
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ये होली ईद कहती है भला कब अपने हाथों में
वफ़ा का रंग होगा प्यार की पिचकारियाँ होंगी
Saleem Raza Rewa
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रंग गालों पे लगा रहने दो
ख़ूब जँचता है ये गहना तुम पर
Mukesh Jha
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गूँध के गोया पत्ती गुल की वो तरकीब बनाई है
रंग बदन का तब देखो जब चोली भीगे पसीने में
Meer Taqi Meer
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आइने में देख सकती हो अभी
रंग मेरा तुम पे अच्छा लग रहा
Neeraj Neer
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देखो तो हर इक रंग से मिलता है मेरा रंग
सोचो तो हर इक बात है औरों से जुदा भी
Athar Nadir
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तितलियों का रंग हो या झूमते बादल का रंग
हम ने हर इक रंग को जाना तेरे आँचल का रंग
Qateel Shifai
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ये जो इतने रंग बिखरे हैं ज़माने में
मुस्कुरा दो तुम अगर सब फ़ीके हो जाएँ
Intzar Akhtar
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वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
Kushal Dauneria
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है
इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं
Sarfaraz Shahid
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हमें पसंद सही अब ये रंग मत पहनो
पराए तन पे हमारी उमंग मत पहनो

हमारी रूह पे पड़ती हैं बदनुमा शिकनें
लिबास पहनो मगर इतना तंग मत पहनो
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Liyaqat Ali Aasim
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रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है
इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने
Sahir Ludhianvi
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न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात
कि चल निकलती है अक्सर यहीं से जंग की बात
Zafar naseemi
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तबक़ों में रंग-ओ-नस्ल के उलझा के रख दिया
ये ज़ुल्म आदमी ने किया आदमी के साथ
Bakhtiyar Ziya
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बे-फ़र्श-ओ-बाम सिलसिला-ए-काएनात के
इस बे-सुतूँ निज़ाम में तू भी है मैं भी हूँ

बे-साल-ओ-सिन ज़मानों में फैले हुए हैं हम
बे-रंग-ओ-नस्ल नाम में तू भी है मैं भी हूँ
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Akbar Hyderabadi
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ढा दे जो इंसान के दिल में रंग ओ नस्ल की दीवारें
कोई तो दस्तूर-ए-मोहब्बत ऐसा आलमगीर लिखो
Iliyas ishqi
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जो कुछ मता-ए-हुनर हो तो सामने लाओ
कि ये ज़माना-ए-इज़हार-ए-नस्ल-ओ-रंग नहीं
Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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क़ौम-ओ-मज़हब क्या किसी का और क्या है रंग-ओ-नस्ल
ऐसी बातें छोड़ कर बस इल्म-ओ-फ़न की बात हो
Sayan quraishi
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ये रंग-ओ-नस्ल और तशद्दुद के सिलसिले
दुश्मन की राहतों के सिवा और कुछ नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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ज़रा सा रंग ज़ुल्फ़ों पर लगाने दो
तुम्हें घर जा के वैसे भी नहाना है
Amaan Pathan
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रंग को मलने से ही रौनक़ नइँ आती
हर इक नुस्ख़ा यार किताबी होता है

देखो शर्माना भी बहुत ज़रूरी है
शर्माने से रंग गुलाबी होता है
Read Full
Divy Kamaldhwaj
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जाने क्यूँँ रंग-ए-बग़ावत नहीं छुपने पाता
हम तो ख़ामोश भी हैं सर भी झुकाए हुए हैं
Sahar Ansari
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रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के
एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें
Nazir Wahid
वस्ल में रंग उड़ गया मेरा
क्या जुदाई को मुँह दिखाऊँगा
Meer Taqi Meer
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हज़ार रंग में मुमकिन है दर्द का इज़हार
तिरे फ़िराक़ में मरना ही क्या ज़रूरी है
Shuja Khawar
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