Chaahat Shayari - Dil ki khwaahish aur pyaar bhari feelings ki shayari

Chaahat shayari beautifully captures the deep desires and heartfelt longing of the soul. It reflects those silent wishes, unspoken love, and emotional connections that live in the dil. Whether it's a hidden khwaahish or an intense mohabbat, these shayaris express what words often fail to say.

chaahat shayari
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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chahat shayari
ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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khwaahish shayari
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं
उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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khwahish shayari
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
Mirza Ghalib
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tamanna shayari
हम से क्या हो सका मोहब्बत में
ख़ैर तुम ने तो बे-वफ़ाई की
Firaq Gorakhpuri
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arzoo shayari
ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को
सोचता हूँ कि कहूँ तुझ से मगर जाने दे
Nazeer Baaqri
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ulfat shayari
सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
Himayat Ali Shayar
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mohabbat shayari
कीजे इज़हार-ए-मोहब्बत चाहे जो अंजाम हो
ज़िंदगी में ज़िंदगी जैसा कोई तो काम हो
Priyamvada ilhan
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chaahat shayari
ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने
फिर गले मिलके मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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कभी कभी तो झगड़ने का जी भी चाहेगा
मगर ये जंग मोहब्बत से जीती जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
मोहब्बत करने वाला इस लिए बर्बाद रहता है
Munawwar Rana
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कभी चाहत पे शक करते हुए ये भी नहीं सोचा
तुम्हारे साथ क्यूँ रहते अगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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ये तू जो मोहब्बत में सिला माँग रहा है
ऐ शख़्स तू अंदर से भिकारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था
ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
Faiz Ahmad Faiz
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इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ
मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
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Tehzeeb Hafi
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
Ahmad Faraz
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क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो
हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरे हैं
Ajaz tawakkal
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे
कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है
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Umair Najmi
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चाहत में मर जाने वाली लड़की हो
तुम सचमुच अफ़साने वाली लड़की हो

आख़िरी बैंच पे बैठने वाला लड़का मैं
जाओ तुम अव्वल आने वाली लड़की हो
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Zubair Ali Tabish
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किसी भूके से मत पूछो मोहब्बत किस को कहते हैं
कि तुम आँचल बिछाओगे वो दस्तर-ख़्वान समझेगा
Zubair Ali Tabish
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कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे
आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
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मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी
मगर ये हिज्र कितना चल रहा है
Zubair Ali Tabish
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मुझे अब तुम से डर लगने लगा है
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या
Jaun Elia
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल
इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया
Jigar Moradabadi
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मोहब्बत में हम तो जिए हैं जिएँगे
वो होंगे कोई और मर जाने वाले
Jigar Moradabadi
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या
मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या

तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना
कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
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Ankita Singh
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देख मोहब्बत का दस्तूर
तू मुझ से मैं तुझ से दूर

कोशिश लाज़िम है प्यारे
आगे जो उस को मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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तमाम फ़र्क़ मोहब्बत में एक बात के हैं
वो अपनी ज़ात का नईं है हम उस की ज़ात के हैं
Pallav Mishra
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बढ़ाई मय जो मोहब्बत से आज साक़ी ने
ये काँपे हाथ कि साग़र भी हम उठा न सके
Majrooh Sultanpuri
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मोहब्बत के घरों के कच्चे-पन को ये कहाँ समझें
इन आँखों को तो बस आता है बरसातें बड़ी करना
Waseem Barelvi
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अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
Sahir Ludhianvi
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दिल चीज़ क्या है दिल से मोहब्बत जताए कौन
अपना जो ख़ुद न हो उसे अपना बनाए कौन
Shakeel Badayuni
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पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं
तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं
Sudarshan Fakir
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मिरे सलीक़े से मेरी निभी मोहब्बत में
तमाम उम्र मैं नाकामियों से काम लिया
Meer Taqi Meer
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यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें
Allama Iqbal
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बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो
मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता
Afzal Khan
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मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी
Afzal Khan
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ये मोहब्बत के महल तामीर करना छोड़ दे
मैं भी शहज़ादा नहीं हूँ तू भी शहज़ादी नहीं
Afzal Khan
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है
मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
Arzoo Lakhnavi
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मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से
Arzoo Lakhnavi
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मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है
Arzoo Lakhnavi
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या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
Shahryar
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
Jigar Moradabadi
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हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली
न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी
Hafeez Jalandhari
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बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए- मन
बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए
Farhat Ehsaas
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याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
Jamal Ehsani
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या
हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते
Asad Bhopali
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ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही
जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही
Khumar Barabankvi
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तुझे मेरी मोहब्बत पे ऐतिबार हो जाना
मुमकिन नहीं है गधे का समझदार हो जाना
Bhavesh kumar
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
Bashir Badr
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इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़
ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
Anwar Shaoor
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ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
Kaleem Aajiz
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अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं
Dagh Dehlvi
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दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती
Nida Fazli
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दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
इतनी ख़ूब-सूरत ये ज़िंदगी नहीं होती
Hastimal Hasti
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मेरी ख़्वाहिश है कि तुझे फूलों से फतह करूँ
वरना ये काम तो तलवार भी कर सकती है
Azhar Faragh
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जो बिस्मिल बना दे वो क़ातिल तबस्सुम
जो क़ातिल बना दे वो दिलकश नज़ारा

मोहब्बत का भी खेल नाज़ुक है कितना
नज़र मिल गई आप जीते मैं हारा
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Nushur Wahidi
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मोहब्बत को छुपाए लाख कोई छुप नहीं सकती
ये वो अफ़्साना है जो बे-कहे मशहूर होता है
Lala Madhav Ram Jauhar
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जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा
रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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दरअस्ल मैं ने मशक़्क़त नहीं मोहब्बत की
हथेलियों पे नहीं मेरे दिल पे छाले है
Ismail Raaz
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तू ने जिस बात को इज़हार-ए-मुहब्बत समझा
बात करने को बस इक बात रखी थी हम ने
Ameer Imam
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कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में
Nazeer Banarasi
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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं
Dagh Dehlvi
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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खूब पहचान लो असरार हूँ मैं
जिंस ए उल्फ़त का तलबगार हूँ मैं
Asrar Ul Haq Majaz
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बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
Asrar Ul Haq Majaz
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फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया
Asrar Ul Haq Majaz
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तुम सेे बिछड़ जाने का ख़याल अच्छा है
क्योंकि अभी मेरा भी हाल अच्छा है

उस ने पूछा तुम्हें कितनी महोब्बत है मुझ सेे
मैं ने कहा मालूम नहीं सवाल अच्छा है
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karan singh rajput
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ये ठीक है कि तुम सेे मोहब्बत नहीं मुझे
ये भी है ठीक तुम को मगर चाहती हूँ मैं
Sabeen Saif
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
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Abrar Kashif
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता
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Abrar Kashif
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मोहब्बत करने वाले कम न होंगे
तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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Zaki Azmi
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तुझे बहुत शौक़ था मोहब्बत की गर्म लपटों से खेलने का
ले जल गई न हथेली अब ख़ुश कहा था मैं ने चराग़ रख दे
Charagh Sharma
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रात दिन तेरे साथ कटते थे
यार अब तुझ सेे बात से भी गए

ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई
दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
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Kafeel Rana
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मोहब्बत कर मोहब्बत कर यही बस कह रहा है दिल
सुन अपने दिल की तू ये ग़ैर की आवाज़ थोड़ी है
Krishnakant Kabk
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नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे
मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे

तुम्हारी मेज़बानी के बहाने
कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
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Khurram Afaq
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लिखी होगी मोहब्बत जिन सफ़ों पर
मेरा दावा है वो नम ही मिलेंगे

किसी दिन ऊब जाओगे सभी से
तुम्हें उस रोज़ फिर हम ही मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना

जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को
इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना
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Liaqat Jafri
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किसी के दिल में जगह किस तरह बनानी है
ये सीखने की हो चाहत हमारे शे'र सुनो
Kashif Adeeb Makanpuri
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे
फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो
Jawwad Sheikh
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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वो जिसे इक मिसाल बनना था
वो नमूना बना मोहब्बत में
Tanoj Dadhich
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यही अंजाम अक्सर हम ने देखा है मोहब्बत का
कहीं राधा तरसती है कहीं कान्हा तरसता है
Virendra Khare Akela
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मोहब्बत से हमें इनकार कब है
मगर वो सैलरी भी पूछते हैं
Gagan Bajad 'Aafat'
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ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
Ghulam Mohammad Qasir
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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे
Read Full
Kanval Dibaivi
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तुम कैसे भुला पाओगे भाई की मोहब्बत
दीवार उठा लेना तो आसान बहुत है
Qamar Rais Bahraichi
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भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए
बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए
Iftikhar Falak Kazmi
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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
Mirza Athar Zia
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