Intezaar Shayari - Dil ki bechaini aur intezaar ke lamhon ki shayari

Intezaar shayari beautifully captures the emotions of waiting for someone special. Whether it’s love, a missed connection, or silent hope, these lines express the bechaini and patience that come with longing. Perfect for those moments when words struggle, but feelings overflow.

intezaar shayari
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
Mirza Ghalib
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intizaar shayari
कोई आया न आएगा लेकिन
क्या करें गर न इंतिज़ार करें
Firaq Gorakhpuri
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wait shayari
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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bechaini shayari
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया
Gulzar
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sabr shayari
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
Farhat Ehsaas
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raah dekhna shayari
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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intezaari shayari
अब जो पत्थर है आदमी था कभी
इस को कहते हैं इंतिज़ार मियाँ
Afzal Khan
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tadap shayari
कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
Hasrat Jaipuri
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bekarari shayari
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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intezaar shayari
चेहरे को आज तक भी तेरा इंतिज़ार है
हम ने गुलाल और को मलने नहीं दिया
Kunwar Bechain
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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
Mehshar Afridi
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ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर
वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए
हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
Jaun Elia
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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
Jaun Elia
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वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
Parveen Shakir
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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कहाँ है तू कि तिरे इंतिज़ार में ऐ दोस्त
तमाम रात सुलगते हैं दिल के वीराने
Nasir Kazmi
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शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में न पूछ कैसे सहर हुई
कभी इक चराग़ जला दिया कभी इक चराग़ बुझा दिया
Majrooh Sultanpuri
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इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात
Firaq Gorakhpuri
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जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
ये सुकूँ का दौर-ए-शदीद है कोई बे-क़रार कहाँ रहा
Ada Jafarey
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तिरी सदा का है सदियों से इंतिज़ार मुझे
मिरे लहू के समुंदर ज़रा पुकार मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना
उस को ख़त लिखना तो मेरा भी हवाला देना
Azhar Inayati
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कोई इशारा दिलासा न कोई वा'दा मगर
जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे
Waseem Barelvi
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हमें भी आज ही करना था इंतिज़ार उस का
उसे भी आज ही सब वादे भूल जाने थे
Aashufta Changezi
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सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ
सो वो मुद्दत से अब नहीं आता
Meer Taqi Meer
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बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर
Allama Iqbal
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा
मैं वो चमन जो बहाराँ के इंतिज़ार में है
Ali Sardar Jafri
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उड़ गए सारे परिंदे मौसमों की चाह में
इंतिज़ार उन का मगर बूढे शजर करते रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो
Arzoo Lakhnavi
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ये ज़मीं किस क़दर सजाई गई
ज़िंदगी की तड़प बढ़ाई गई

आईने से बिगड़ के बैठ गए
जिन की सूरत जिन्हें दिखाई गई
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Sahir Ludhianvi
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था इंतिज़ार मनाएँगे मिल के दीवाली
न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ
Aanis Moin
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ये इंतिज़ार सहर का था या तुम्हारा था
दिया जलाया भी मैं ने दिया बुझाया भी
Aanis Moin
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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इश्क़ में ख़ुद-कुशी नहीं करते
इश्क़ में इंतिज़ार करते हैं
Rajesh Reddy
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थक गए हम करते करते इंतिज़ार
इक क़यामत उन का आना हो गया
Akhtar Shirani
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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल
Ammar Iqbal
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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं
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Jaun Elia
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उस की बेचैनी बढ़ाना चाहती हूँ
सुनिए कह कर चुप लगाना चाहती हूँ
Pooja Bhatia
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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'
Dushyant Kumar
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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
Ibrat Siddiqui
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मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा
तुम मिरा इंतिज़ार मत करना
Liaqat Jafri
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न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था
Firaq Gorakhpuri
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रूह मेरी अब करेगी इंतिज़ार
क़ब्र में ये फ़ोन भी रख दीजिए
Tanoj Dadhich
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उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
Seemab Akbarabadi
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है
पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं
जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं
Unknown
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार
आई है जनवरी तो दिसम्बर चला गया
Rukhsaar Nazimabadi
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ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
Dagh Dehlvi
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जानता है कि वो न आएँगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल
Faiz Ahmad Faiz
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मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ
Muneer Niyazi
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आप का ए'तिबार कौन करे
रोज़ का इंतिज़ार कौन करे
Dagh Dehlvi
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अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे
वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतिबार मुझे
Khumar Barabankvi
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मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना
Sahil Sahri Nainitali
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बे-ख़ुदी ले गई कहाँ हम को
देर से इंतिज़ार है अपना
Meer Taqi Meer
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है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम
मैं ये क्यूँँ पूछूँ कब मिलेंगे आप
Nizam Rampuri
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किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
लुटा के बैठोगे सब्र-ओ-क़रार मेरी तरह
Fareed Parbati
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई
तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है
A R Sahil "Aleeg"
वो आ के लौट भी गया जिस का था इंतिज़ार
और मैं घड़ी-घड़ी, घड़ी ही देखता रहा
Avtar Singh Jasser
मेरी बेचैनी का आलम मेरी बेचैनी से पूछो
मेरे चहरे से पूछोगे कहेगा ठीक है सब कुछ
Aqib khan
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अब वो भी देखे मेरे ही इंतिज़ार को बस
सो उस के दर पे रख आया मैं ये आँखें अपनी
NISHKARSH AGGARWAL
सब्र मेरा फ़िक्र में है रोज़-ओ-शब ये सोचता है
दूध में दोनों अँगूठी ढूँढ़ते कैसे लगेंगे
Raj
अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया
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shaan manral
वो दूर मुझ सेे जब हुआ रो कर नहीं हुआ
तो मैं भी इंतिज़ार में पत्थर नहीं हुआ

दुनिया को ज़हर पी के बचाओ तो बात है
बस भांग पी के कोई भी शंकर नहीं हुआ
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Tanoj Dadhich
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इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ
Meer Taqi Meer
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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है
Rakib Mukhtar
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उस वक़्त इंतिज़ार का आलम न पूछिए
जब कोई बार बार कहे आ रहा हूँ मैं
Unknown
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ये इंतिज़ार नहीं शम्अ' है रिफ़ाक़त की
इस इंतिज़ार से तन्हाई ख़ूब-सूरत है
ARSHAD ABDUL HAMID
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अब एक पल का तग़ाफ़ुल भी सह नहीं सकते
हम अहल-ए-दिल कभी आदी थे इंतिज़ार के भी
Mohsin Naqvi
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न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
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हर शाम इक मलाल की आदत सी हो गई
मिलने का इंतिज़ार भी मिलना सा हो गया
Naseer Turabi
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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जिसे न आने की क़स्में मैं दे के आया हूँ
उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है
Javed Naseemi
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बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
Ajmal Siraj
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चले भी आओ मिरे जीते-जी अब इतना भी
न इंतिज़ार बढ़ाओ कि नींद आ जाए
Mahshar Inayati
सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है
अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर
Yagana Changezi
क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ
Aasi Uldani
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ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है
Shad Azimabadi
मायूस ज़िंदगी से तुझे दर-किनार कर
बैठी हुई हूँ अपने मुक़द्दर से हार कर

मैं कम-नसीब उस के दिलासे में आ गई
उस ने कहा था मुझ से मेरा इंतिज़ार कर
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Himanshi babra KATIB
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बहुत ताख़ीर से पाया है ख़ुद को
मैं अपने सब्र का फल हो गई हूँ
Humaira Rahat
अब अपना इंतिज़ार रहेगा तमाम-उम्र
इक शख़्स था जो मुझ से जुदा कर गया मुझे
Ahtamam Sadiq
ख़ामोशी, बेचैनी, यादें तेरी, मेरा ख़ालीपन
कितना कुछ है कमरे में तेरे और मेरे सिवा
Prashant Shakun
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फिर उस ने खोल दिए सारे रास्ते मुझ पर
वो थक गया था मेरा सब्र आज़माते हुए
Shakir Dehlvi
जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा
वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं

दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी
वो ज़बान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं
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Ashish Anand
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क़दर नहीं होती जब मिल जाता है सब आसानी से
बहुत ज़रूरी है ज़िंदगी में इंतिज़ार होना
Yashvardhan Jain
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दुख की बारिश है और ऐसे में
सब्र कच्चे मकान वाला है
Saarthi Baidyanath
तेरे इंतिज़ार के लम्हें कितने लंबे हो गए
घर के बाहर रुके और लाइट के खंबे हो गए
RUSHIKESH PAWAR
आ जा के बे-क़रारियाँ हद से गुज़र गई
अब ज़ख़्म इंतिज़ार का नासूर हो गया
Sultan
है किस की‌ तड़प दिल को‌ मेरे
बिगाड़े है ख़ुद रिश्ते सारे
Vishal Jha
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
ओ मेरी सोलमेट जन्मों से
है तू ही फेवरेट जन्मों से

इस जन्म में तो मेरी हो जाना
कर रहा हूँ मैं वेट जन्मों से
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Sandeep Thakur
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मैं लम्हा लम्हा सदी में शुमार करता रहूँ
तू आ भी जाए तेरा इंतिज़ार करता रहूँ
Saarthi Baidyanath
हज़ार बार कहा मुझ सेे वक़्त मत पूछिए
मेरी घड़ी में सदा इंतिज़ार बजता है
Ramnath Shodharthi
सब्र नायाब हुआ जा रहा है रोज़ ब रोज़
क्या ख़बर किसलिए हर शख़्स बहुत जल्दी में है
Ramnath Shodharthi
दर-अस्ल वक़्त की क़ीमत वही समझता है
किसी के आने का जो इंतिज़ार करता है
Ramnath Shodharthi
मेरे सोने के इंतिज़ार में ही
मेरा दुश्मन हमेशा जागता है
Saarthi Baidyanath
जो इन्तेज़ार करना जानता है
वही तो प्यार करना जानता है
Saarthi Baidyanath
इक बेचैनी सी है मन में क्या होगा ये रब जाने
यार मिरे कोई पूछो रब से वो तो है सब जाने
Kabir Altamash
ख़ौफ़, ख़ामोशी, बेचैनी ने था जकड़ा
हाथ मेरा तेरे हाथों ने था पकड़ा

प्यार है तो फिर झगड़ा भी करना सीखो
इत्तना सा बस हम दोनों में था झगड़ा
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Udit Narayan Mishra
सियाह शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी
मुझे अँधेरों कि आदत तबाह कर देगी

मैं तेरे दुख में बराबर शरीक हूँ सो मुझे
उदास शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी

जो सब्र और तहम्मुल के साथ ईश़्क करे
उसे तुम्हारी मोहब्बत तबाह कर देगी

जो इश्क़ सब्र की दीवार तोड़ दे जानाँ
उसे बदन की ज़रूरत तबाह कर देगी

दुआ सलाम से आगे अगरचे बात बढ़े
तो फिर ये वस्ल की राहत तबाह कर देगी

हसीन चेहरे की आदत है छोड़ जाने की
सो ऐसे शख्श़ की सोहबत तबाह कर देगी
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Md Akhter Ansari
मुझ को इंतिज़ार करने का कह
ख़ुद शादी रचा गई ग़ैरों से
A R Sahil "Aleeg"
अभी-अभी तो इश्क़ से मिली है इफ़ाक़त
अगरचे सब्र ओ क़रार पाया नहीं है
A R Sahil "Aleeg"