Heart Touching Ghar Shayari - Memories, warmth, and emotions of home in words

Ghar shayari beautifully captures the warmth, comfort, and emotional bond we share with our home. From childhood memories in the aangan to the feeling of sukoon that only home gives, these lines reflect love, belonging, and nostalgia in the most heartfelt way.

ghar shayari
मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़
वरना ऐसी रौशनी करते कि दुनिया देखती
Kashif Sayyed
63 Likes
gharonda shayari
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
Ummeed Fazli
43 Likes
aangan shayari
मैं वो चराग़ हूँ जो आँधियों में रौशन था
ख़ुद अपने घर की हवा ने बुझा दिया है मुझे
Saqi Amrohvi
15 Likes
घर पहुँचता है कोई और हमारे जैसा
हम तेरे शहर से जाते हुए मर जाते हैं
Abbas Tabish
41 Likes
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
Bashir Badr
65 Likes
अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
Shariq Kaifi
45 Likes
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते
इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
Waseem Barelvi
45 Likes
कबूतर को पता है घर तुम्हारा
मिलेगा छत पे तुम को ख़त हमारा
Aqib Jawed
67 Likes
जितनी चाहे पी लो लेकिन ध्यान रहे
तुम को घर पहुँचाने वाले अच्छे हों
Shariq Kaifi
35 Likes
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
Tehzeeb Hafi
54 Likes
कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िन्दगी जैसे
तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा
Ahmad Faraz
42 Likes
घर के बाहर ढूँढ़ता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
Rahat Indori
38 Likes
धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना।

तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
Read Full
Tehzeeb Hafi
122 Likes
दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
Read Full
Vipul Kumar
24 Likes
सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
22 Likes
वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
66 Likes
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए
Nida Fazli
38 Likes
उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
Nida Fazli
27 Likes
ख़ुद को मनवाने का मुझ को भी हुनर आता है
मैं वो कतरा हूँ समुंदर मेरे घर आता है
Waseem Barelvi
83 Likes
मैं एक ख़ाना-ब-दोश हूँ जिस का घर है दुनिया
सो अपने काँधे पे ले के ये घर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
34 Likes
मैं तुझ से मिलने समय से पहले पहुँच गया था
सो तेरे घर के क़रीब आ कर भटक रहा हूँ
Pallav Mishra
28 Likes
लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं
Shakeel Jamali
36 Likes
ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या
ये दौलत तो घर बैठे आ जाती है
Shakeel Jamali
33 Likes
मेरे ही संग-ओ-ख़िश्त से ता'मीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे ही घर को शहर में शामिल कहा न जाए
Majrooh Sultanpuri
22 Likes
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
Gulzar
54 Likes
ऊँची इमारतों से मकाँ मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए
Javed Akhtar
41 Likes
सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
Javed Akhtar
50 Likes
वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता
मगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता
Waseem Barelvi
40 Likes
कोई ताइर इधर नहीं आता
कैसी तक़्सीर इस मकाँ से हुई
Ada Jafarey
21 Likes
आप क्या आए कि रुख़्सत सब अंधेरे हो गए
इस क़दर घर में कभी भी रौशनी देखी न थी
Hakeem Nasir
25 Likes
शहर गुम-सुम रास्ते सुनसान घर ख़ामोश हैं
क्या बला उतरी है क्यूँँ दीवार-ओ-दर ख़ामोश हैं
Azhar Naqvi
24 Likes
सब ज़रूरत का तो सामान है घर में रहिए
क्या हुआ गर कोई हलकान है घर में रहिए
Vineet Aashna
21 Likes
अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
74 Likes
ऐसे डरे हुए हैं ज़माने की चाल से
घर में भी पाँव रखते हैं हम तो सँभाल कर
Adil Mansuri
25 Likes
क्यूँँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो
तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो
Adil Mansuri
26 Likes
बना रक्खी हैं दीवारों पे तस्वीरें परिंदों की
वगर्ना हम तो अपने घर की वीरानी से मर जाएँ
Afzal Khan
20 Likes
हमारा दिल ज़रा उकता गया था घर में रह रह कर
यूँँही बाज़ार आए हैं ख़रीदारी नहीं करनी
Afzal Khan
25 Likes
तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
ऐसी बरसातें कि बादल भीगता है साथ साथ
Parveen Shakir
27 Likes
समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
29 Likes
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए
कहाँ चराग़ मुयस्सर नहीं शहर के लिए
Dushyant Kumar
42 Likes
ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है
तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है

ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ
तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Read Full
Zubair Ali Tabish
173 Likes
हम ने पर्चे आँसुओं से भर दिए
और तुम ने इतने कम नंबर दिए

ऊंचे नीचे घर थे बस्ती में बहुत
जलजले ने सब बराबर कर दिए
Read Full
Zubair Ali Tabish
90 Likes
अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है
मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है
Aanis Moin
19 Likes
हज़ारों क़ुमक़ुमों से जगमगाता है ये घर लेकिन
जो मन में झाँक के देखूँ तो अब भी रौशनी कम है
Aanis Moin
29 Likes
जिसे तुम काट आए उस शजर को ढूँढ़ता होगा
परिंदा लौट कर के अपने घर को ढूँढ़ता होगा
Bhaskar Shukla
25 Likes
तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा
जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा
Shadab Javed
34 Likes
आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा
जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं
Shakeel Azmi
41 Likes
समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
25 Likes
वो शाख़ है न फूल, अगर तितलियाँ न हों
वो घर भी कोई घर है जहाँ बच्चियाँ न हों
Bashir Badr
42 Likes
मेरे घर के तमाम दरवाज़े
तुम से करते हैं प्यार आ जाओ
Anwar Shaoor
31 Likes
तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया
किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था

एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे
एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Read Full
Tehzeeb Hafi
162 Likes
पास मैं जिस के हूँ वो फिर भी, अच्छा लड़का ढूँढ़ रही है
उस ने लगा रक्खा है चश्मा, और वो चश्मा ढूँढ़ रही है

फ़ोन किया मैं ने और पूछा, अब तक घर से क्यूँँ नहीं निकली
उस ने कहा मुझ सेे मिलने का, एक बहाना ढूँढ़ रही है
Read Full
Tanoj Dadhich
55 Likes
एक तरफ़ है पूरी दुनिया एक तरफ़ है मेरा घर
लेकिन तुम को बतला दूँ मैं दुनिया से है अच्छा घर

सब कमरों की दीवारों पर तस्वीरें हैं बस तेरी
मुझ सेे ज़ियादा तो लगता है जानेमन ये तेरा घर
Read Full
Tanoj Dadhich
38 Likes
वरना तो ये दीवार-ओ-दर लगता है
तुम होती हो घर में तो घर लगता है
Bhaskar Shukla
30 Likes
झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो

घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
Read Full
Rahat Indori
69 Likes
दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Read Full
Zia Mazkoor
90 Likes
जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता
Waseem Barelvi
54 Likes
तू अपने घर में मुहब्बत की जीत पर ख़ुश है
अभी ठहर के मेरा ख़ानदान बाक़ी है
Siraj Faisal Khan
34 Likes
इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है
वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है
Siddharth Saaz
47 Likes
सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो

ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए
घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
Read Full
Jawwad Sheikh
42 Likes
पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की
फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की

इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का
मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
Read Full
Tehzeeb Hafi
113 Likes
रेल की सीटी में कैसे हिज्र की तम्हीद थी
उस को रुख़्सत कर के घर लौटे तो अंदाज़ा हुआ
Parveen Shakir
43 Likes
यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया
Ali Zaryoun
122 Likes
घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं

बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
Read Full
Abrar Kashif
58 Likes
आ जाए कौन कब कहाँ कैसी ख़बर के साथ
अपने ही घर में बैठा हुआ हूँ मैं डर के साथ
Pratap Somvanshi
34 Likes
तो क्या उस को मैं होंठों से बजाऊँ
तिरे दर पे जो घंटी लग गई है

चराग़ उस ने मिरे लौटा दिए हैं
अब उस के घर में बिजली लग गई है
Read Full
Fahmi Badayuni
45 Likes
रोज़ ख़्वाबों में मुझे दिखता तेरा घर
काश नींदों में कभी मैं चल भी पाता
Krishnakant Kabk
31 Likes
मौत न आई तो 'अल्वी'
छुट्टी में घर जाएँगे
Mohammad Alvi
36 Likes
मैं चाहता हूँ इक मुसलमां दोस्त हो मेरा
मेरे मकाँ में ईद हो उस के दिवाली हो
Siddharth Saaz
42 Likes
तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है,
दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है

एक शब्द तुम को अंधेरे का ख़ौफ़ दिला कर,
बा'द में ख़ुद भी जान बूझकर डर जाना है
Read Full
Vishal Singh Tabish
54 Likes
दफ़्तर में तय किया था कि तारे गिनेंगे आज
लेकिन हमें पहुँचते ही घर नींद आ गई
Balmohan Pandey
49 Likes
उन के होने से बख़्त होते हैं
बाप घर के दरख़्त होते हैं
Unknown
33 Likes
इन का उठना नहीं है हश्र से कम
घर की दीवार बाप का साया
Unknown
20 Likes
भटकती फिर रही है आँख घर में
तिरी आवाज़ इस को दिख रही है
Himanshu Kiran Sharma
20 Likes
कुछ भी नहीं तो पेड़ की तस्वीर ही सही
घर में थोड़ी बहुत तो हरियाली चाहिए
Himanshu Kiran Sharma
30 Likes
खटखटाने की कोई ज़हमत ही आख़िर क्यूँ करे
इस लिए भी घर का दरवाज़ा खुला रखता हूँ मैं
Tousief Tabish
34 Likes
नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे
मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे

तुम्हारी मेज़बानी के बहाने
कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
Read Full
Khurram Afaq
20 Likes
डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा
मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Read Full
Vishal Singh Tabish
84 Likes
एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम
घर में रह कर भी जैसे बेघर से
Azhar Iqbal
43 Likes
किसी सीने पे आहट दी, किसी काँधे पे सर रक्खा
हुए कितने भी बेपरवाह मगर बस एक घर रक्खा
Prashant Beybaar
28 Likes
मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली
ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने

घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे
तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Read Full
Shariq Kaifi
58 Likes
सारी हिम्मत टूट गई, बच्चों से ये सुन कर
अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है

फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब
मुझ
में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
Read Full
Aman G Mishra
28 Likes
तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख
तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बा'द
Farhat Abbas Shah
47 Likes
कभी उस को हम अपनी रूह का पैकर समझते थे
बहुत नादान थे मक़्तल को अपना घर समझते थे
Haider Khan
35 Likes
प्यार में कैसी थकन कह के ये घर से निकली
कृष्ण की खोज में वृषभानु-लली मीलों तक
Kunwar Bechain
42 Likes
ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है
Read Full
Mehshar Afridi
53 Likes
अगरचे इश्क़ में मजनू बड़े बदनाम होते हैं
अगरचे क़ैस जैसे आशिक़ों के नाम होते हैं

भटक सकती नहीं जंगल में लैला चाह कर के भी
अजी लैला को घर में दूसरे भी काम होते हैं
Read Full
Gagan Bajad 'Aafat'
26 Likes
सब सेे अपनापन दिखलाने वाला मैं
अपने घर में ग़ैर हुआ हूँ जान लो तुम
Vikas Sahaj
गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
Read Full
Azhar Iqbal
65 Likes
जाने क्या कुछ कर बैठा है
बहुत दिनों से घर बैठा है

वो मधुमास लिखे भी कैसे
शाखों पर पतझर बैठा है
Read Full
Vigyan Vrat
65 Likes
उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता
तो या'नी उस को अपने घर का रास्ता नहीं पता

ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे
पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
Read Full
Ruqayyah Maalik
36 Likes
लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी
सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
46 Likes
तुम परिंदों से ज़ियादा तो नहीं हो आज़ाद
शाम होने को है अब घर की तरफ़ लौट चलो
Irfan Siddiqi
29 Likes
ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं
लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे
Bashir Badr
42 Likes
जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
Jamuna Parsad Rahi
26 Likes
प्यार की जोत से घर घर है चराग़ाँ वर्ना
एक भी शम्अ' न रौशन हो हवा के डर से
Shakeb Jalali
22 Likes
किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी
हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
Nomaan Shauque
28 Likes
मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी
मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी

मिट्टी बेच रहा हूँ जिस
में कोई जाल फ़रेब नहीं
सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
Read Full
Gyan Prakash Akul
61 Likes
घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
21 Likes
बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना
तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत

आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे
बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
Read Full
Aalok Shrivastav
40 Likes
घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
Read Full
Aalok Shrivastav
41 Likes
चुप हुए तो घर से निकले जा के दफ़्तर रो पड़े
इश्क़ ऐसी जंग है जिस में सिकंदर रो पड़े

बस दिलों पर कब किसी का चल सका है इश्क़ में
फिर से डायल कर के हम वो एक नंबर रो पड़े
Read Full
Prashant Sharma Daraz
38 Likes
अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता

पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
Read Full
Tehzeeb Hafi
129 Likes
मैं ये भी चाहती हूँ तिरा घर बसा रहे
और ये भी चाहती हूँ कि तू अपने घर न जाए
Rehana Roohi
34 Likes
ओ सखी मन उस का तो तन भी उसी का
हक़ है उस को ग़ैर ये आँगन न चू
में
Read Full
Neeraj Neer
34 Likes
आज हम दोनों बहुत ख़ुश साथ में रहते कहीं
घर बसाने की अगर जल्दी नहीं होती तुम्हें
Tanoj Dadhich
52 Likes
सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
53 Likes
और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम
अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए
Jaun Elia
124 Likes