Maa Shayari - Pure love, care, and sacrifice expressed through heartfelt words

Maa Shayari beautifully captures the unconditional love, sacrifice, and warmth of a mother. From her silent prayers to her endless care, these words reflect the deepest emotions we often struggle to express. Whether you want to honor your maa or share her importance in your life, this collection brings heartfelt feelings into simple yet powerful lines.

maa shayari
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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mamta shayari
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं माँ से
Tahir Shaheer
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maata shayari
बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक
माँ दुआ है जो सदा साया-फ़गन रहती है
Sarfraz Nawaz
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मुनव्वर माँ के आगे यूँँ कभी खुल कर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती
Munawwar Rana
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पहले ये काम बड़े प्यार से माँ करती थी
अब हमें धूप जगाती है तो दुख होता है
Munawwar Rana
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माँ-बाबा का सोच के हर दम रुक जाता हूँ वरना तो
इतने ग़म में मैं ने पंखे से टंग कर मर जाना था
Shashwat Singh Darpan
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मुख़्तसर होते हुए भी ज़िन्दगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी
Munawwar Rana
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मैदान छोड़ देने से मैं बच तो जाऊँगा
लेकिन जो ये ख़बर मेरी माँ तक पहुँच गई
Munawwar Rana
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दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क आँखें तो दिखाने दो
कहीं बच्चों के बोसे से भी माँ का गाल कटता है
Munawwar Rana
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खिलौनों की तरफ़ बच्चे को माँ जाने नहीं देती
मगर आगे खिलौनों की दुकाँ जाने नहीं देती
Munawwar Rana
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लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कुराती है
Munawwar Rana
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है
ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है

एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने
कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
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Waseem Barelvi
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भूके बच्चों की तसल्ली के लिए
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक
Nawaz Deobandi
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किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं
टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है
Siraj Faisal Khan
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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बोझ उठाए हुए फिरती है हमारा अब तक
ऐ ज़मीं माँ तिरी ये उम्र तो आराम की थी
Parveen Shakir
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मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया
मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया

बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा
उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया
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Tehzeeb Hafi
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सब को बस पानी पीने से मतलब है
बस माँ को चिंता है मटका भरने की
Tanoj Dadhich
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वो उजला हो कि मैला हो या महँगा हो कि सस्ता हो
ये माँ का सर है इस पर हर दुपट्टा मुस्कुराता है
Siraj Faisal Khan
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इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है
वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है
Siddharth Saaz
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मुझ सेे बेहतर लड़का तो मिल जाएगा
लेकिन मेरी माँ से बेहतर सास नहीं
Tanoj Dadhich
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दूर अगर रहते हैं माँ से हम ख़र्चीले हो जाते हैं
ऐसा खाना मिलता है सब कपड़े ढीले हो जाते हैं
Tanoj Dadhich
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से
कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
Munawwar Rana
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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली
तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
Satya Prakash Soni
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से
कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
Anjum Saleemi
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उस ने हम सेे बातें करना छोड़ दिया
माँ की जिस सेे बात कराने वाले थे
Tanoj Dadhich
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हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था
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Tanoj Dadhich
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए
ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए

अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे
अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
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Mehshar Afridi
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कमाता हूँ मैं कितना सोच लेना बा'द में ये सब
अभी तो बस यही काफ़ी है माँ के पास रहता हूँ
Tanoj Dadhich
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उस सेे ज़ियादा बातें करते थे हम तुम
जितनी बातें माँ और मौसी करती हैं
Tanoj Dadhich
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आ रही है जो बहू सीधी रहे माँ चाहती
जा रही बेटी मगर चालाक होनी चाहिए
Tanoj Dadhich
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी

कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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मुझे मालूम है माँ की दुआएँ साथ चलती हैं
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैं ने देखा है
Aalok Shrivastav
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मोहब्बत का सुबूत अब और क्या दें
तुम्हारी माँ को माँ कहने लगे हैं
Shadab Asghar
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पहले अपनी माँ को याद किया हम ने
फिर ज़ोमैटो से खाना मंगवाया है
- तनोज दाधीच
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Tanoj Dadhich
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया
बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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अब शहर की थकावट बेचैन कर रही है
अब शाम हो गई है चल माँ से बात कर लें
Akash Rajpoot
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माँ की करते हुए ख़िदमत मुझे आ जाए क़ज़ा
ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ सेे
''Akbar Rizvi"
नज़रें हो गड़ीं जिन की वसीयत पे दिनो-रात
माँ-बाप कि 'उम्रों कि दुआ ख़ाक करेंगे
Asad Akbarabadi
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मैं सालों बा'द जब भी गाँव जाता हूँ
लिए पीपल की ठंडी छाँव जाता हूँ

कहीं मैली न हो जाए ये जन्नत
मैं माँ के पास नंगे पाँव जाता हूँ
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Ashok Sagar
जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
माँ ने अपने ला'ल की तख़्ती जला दी रात को
Sibt Ali Saba
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माँ जैसे देखती हो तुम मगर मैं
तुम्हारी आँख का तारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
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अश्क माँ के जो ख़ुशी से गिरे तो हैं मोती
और छलके जो ग़मों से तो लहू हो जाए
S M Afzal Imam
माँ के आँसू को समझता हूँ मुक़द्दस इतना
बस उन्हें चूम ले अफ़ज़ल तो वज़ू हो जाए
S M Afzal Imam
राम भी हैं कृष्ण भी हैं और भोलेनाथ हैं
माँ तुम्हारे साथ हैं तो सब तुम्हारे साथ हैं
Tanoj Dadhich
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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए
Iftikhar Arif
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एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश'
मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है
Abbas Tabish
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जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
Munawwar Rana
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घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
Qaisar-ul-Jafri
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कल अपने-आप को देखा था माँ की आँखों में
ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है
Munawwar Rana
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तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फ़लक
मुझ को अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी
Munawwar Rana
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बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है
Munawwar Rana
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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है
Munawwar Rana
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माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज
हम को दुनिया में ये दो वक़्त सुहाने से मिले
Kaif Bhopali
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मैं ने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़-ए-माँ रहने दिया
Munawwar Rana
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सब ने माना मरने वाला दहशत-गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज-दुलारा लिक्खा था
Ahmad Salman
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आज फिर माँ मुझे मारेगी बहुत रोने पर
आज फिर गाँव में आया है खिलौने वाला
Nawaz Zafar
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मुद्दतों ब'अद मुयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
Iqbal Ashhar
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बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन
गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई
Irshad Khan Sikandar
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किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए
कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया
Anjum Saleemi
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घर से निकले हुए बेटों का मुक़द्दर मालूम
माँ के क़दमों में भी जन्नत नहीं मिलने वाली
Iftikhar Arif
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माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है
Anjum Rehbar
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मुझ पे पड़ती नहीं बलाओं की धूप
सर पे साया-फ़िगन है माँ की दुआ
Amaan Haider
इक बार अपनी माँ को मोहब्बत से देख ले
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
मैं तेरी गोद में कैसा लगा था माँ
तेरा तो दूसरा बचपन हुआ था मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
अलमास धरे रह जाते हैं बिकता है तो पत्थर बिकता है
अजनास नहीं इस दुनिया में इंसाँ का मुक़द्दर बिकता है

'खालिद सज्जाद' सुनार हूँ मैं इस ग़म को ख़ूब समझता हूँ
जब बेटा छुप कर रोता है तब माँ का ज़ेवर बिकता है
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Khalid Sajjad
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कुछ बेटियाँ बिन बाप के भी काटती हैं ज़िंदगी
कुछ बेटियों के सिर पे दोनों हाथ माँ के होते हैं
Bhoomi Srivastava
तुम जितना तो कोई मुझ को ख़ास नहीं
लेकिन फिर भी क्यूँ तुम को विश्वास नहीं

मुझ सेे बेहतर लड़का तो मिल जाएगा
लेकिन मेरी माँ से बेहतर सास नहीं
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Tanoj Dadhich
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माँ से तेरे बारे में और तुझ सेे माँ के बारे में
बातें कर के कितना अच्छा वक़्त गुज़ारा है मैं ने
Tanoj Dadhich
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सारी दुनिया ने तो नफ़रत से पुकारा मुझ को
माँ समझती है मगर आँख का तारा मुझ को
Muneer shehryaar
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आज फिर बेटे को माँ जाहिल लगी है
सोचिए क्या सीखा हम ने डिग्रियों से
Neeraj Neer
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मिरे माँ बाप जन्नत से नज़र रखते हैं मुझ पर अब
मिरे दिल में यतीमों के लिए इक ख़ास कोना है
Amaan Pathan
ग़म मत करो किसी का जो भी गया गया वो
मम्मी के दिल के टुकड़े पापा की जान हो तुम
Amaan Pathan
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मैं ने भी मुस्कुरा के मेरे घर से ली विदा
माँ ने भी अपने आँसू छलकने नहीं दिए
Divy Kamaldhwaj
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किसी माँ बाप से पूछो कभी बेटी का ये दुख
देखने वाले जिसे देख के रद करते हैं
Saud Usmani
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माँ के क़दमों के निशाँ हैं कि दिए रौशन हैं
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी
Rahat Indori
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ख़ुशनसीबी है तुम्हारी सर पे है जो माँ का हाथ
हम यतीमों को पता है ये दुआ क्या चीज़ है
Amaan Pathan
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कभी घंटों पड़े रहते थे माँ की गोद में इस पर
चलो माँ नाम रखते हैं विराट इस चारपाई का
Vishnu virat
मुझ को डोली में बिठा डर के हवाले कर दे
मेरी माँ मुझ को मुक़द्दर के हवाले कर दे
Rehana Qamar
माँ की सूरत सामने आती रही
ख़ुद-कुशी का फ़ैसला टलता रहा
Gourav Kumar
जंग पर जाते हुए बेटे की माँ से पूछो
कैसे जज़्बात के तूफ़ान सँभाले होंगे
Shifa Kajganvi
हो चाहे राह मुश्किल वो मगर फिर भी निकलती है
चलेगा किस तरह अब घर ये केवल माँ समझती है
Prashant Sitapuri
माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम
सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना
Prashant Sitapuri
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बहुत ख़ुश भाई ज़र हिस्से में पाकर है
मैं ख़ुश हूँ की मेरे हिस्से में आई माँ
Prashant Sitapuri
माँ जब बीमार होती है कहीं भी जी नहीं लगता
माँ के बीमार होने पर वही घर काटता मुझ को
Prashant Sitapuri
सोचता हूँ अब उसे माँ से मिला दूँ
छुप के बैठी है जो कब से चिट्ठियों में
Saarthi Baidyanath
रब हो सकता गर बदला तो बदले में तुम ये कर दो
माँ को मेरी ठीक करो मुझ को बीमार भले कर दो
Prashant Sitapuri
जिस को जितना समझ में आया उस ने मुझ को उतना समझा
मैं अच्छा हूँ माँ कहती है दुनिया से फिर क्या मतलब है
Puneet mishra
मिले मौका यूँँ ज़िम्मेदारियों को बचपना छीने
ख़ुदाया छीन ले सब कुछ कभी माँ-बाप ना छीने
Aarush Sarkaar
हम सेे ज़्यादा महँगा कौन बिकेगा आज
माँ का माथा चूम के बिकने निकला हूँ
Aryan Goswami
माँ बाप के आँसुओं की वजह क्या जाने
जो बेटा छुट्टियों में भी घर नहीं आता
Anurag Ravi
इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
ख़ुदा जाने ख़ुदा कैसा ख़ुदा को किस ने देखा है
कहो, तुम भी ख़ुदा माँ–बाप को ही मानते हो ना
Prit
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तेरे आँचल तले बचपन सजा माँ
उसी में लौट जाना चाहता हूँ

मेरी पलकों पे अपने होंठ रख दे
मैं फिर सपने सजाना चाहता हूँ
Read Full
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
साँसों के बिन वजूद कहाँ धड़कनों का है
माँ से कहो गले से लगाए न लौट कर
Vedic Dwivedi
ख़ुश कैसे रह सकूँगा तुझ सेे दूर जा कर माँ
लगता है फस गया हूँ इस शहर में आ कर माँ

लौट आए जो बचपन तेरी गोदी में सो जाऊ
मैं थक गया हूँ ज़िन्दगी की बोझ उठा कर माँ
Read Full
Udit Narayan Mishra
उठती मिरी तलवार दुश्मन की तरफ़ फिर रुक गई
दुश्मन कि माँ ने तब पुकारा जंग में बेटा मुझे
Zain Aalamgir
वो रोए देख आसमाँ की तरफ़
और कहे देखता हूँ माँ की तरफ़
Vikas Sangam
आख़िर कैसे ये लोग है कैसी ये मक्कारी करते है
माँ पर लिखने वाले ही अब माँ से गद्दारी करते है
Ravi 'VEER'
मुझे मालूम है उस ने मुझे कैसे पढ़ाया है
कभी जब फीस भरनी हो माँ ज़ेवर बेच देती थी
Prashant Sitapuri
ऐसा लगता है मुझे ईद का दिन है 'अकबर'
जब भी माँ बाप के चेहरे पे ख़ुशी होती है
''Akbar Rizvi"
वो माँ तो मर ही जाएगी सद
में से
वो जिस का बेटा लटका हो पंखे से
Read Full
Saahir