Bachpan Shayari - Innocent memories, carefree days, and nostalgic childhood emotions

Bachpan shayari captures the innocence, simplicity, and joy of childhood days. It brings back sweet yaadein of carefree moments, school life, and pure happiness that once filled our lives. These verses beautifully reflect the nostalgia of a time when life was simple and hearts were light.

bachpan shayari
इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए
और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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bachpana shayari
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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masoomiyat shayari
हर एक काम है धोका हर एक काम है खेल
कि ज़िंदगी में तमाशा बहुत ज़रूरी है
Khaleel Mamoon
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ज़िन्दगी अब के मेरा नाम ना शामिल करना
गर ये तय है कि यही खेल दोबारा होगा
Wasi Shah
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बचपन कितना प्यारा था जब दिल को यक़ीं आ जाता था
मरते हैं तो बन जाते हैं आसमान के तारे लोग
Azra Naqvi
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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मेरी तो जान सी गई लेकिन
उस को तो खेल सा लगा ब्रेकअप
Vivek Bijnori
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बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं
जवान होना तो बस लड़कियों को आता है
Kumar Vishwas
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छोड़ कर जाने का मंज़र याद है
हर सितम तेरा सितमगर याद है

अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है
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Salman Zafar
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दुनिया भी जैसे ताश के पत्तों का खेल है
जोकर के साथ रहती है रानी ही क्यूँ न हो
Munawwar Rana
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जब तक है डोर हाथ में तब तक का खेल है
देखी तो होंगी तुम ने पतंगें कटी हुई
Munawwar Rana
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चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस
लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस
Nomaan Shauque
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अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है
खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है

न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर
यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
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Rehman Faris
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लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं
Shakeel Jamali
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हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे
Javed Akhtar
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मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी
Javed Akhtar
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अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया
घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए
Nashtar Khaanqahi
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मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई
Kaifi Azmi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इन
में उदास मत होना
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Kumar Vishwas
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लटकन झटकन ओढ़ मटकते एक परी का दिख जाना,
प्लेन गुजरने पर बचपन के ख़ुश होने सा लगता है!

बिन्दी, लिपस्टिक, चूड़ी, कंगन और किनारा साड़ी का,
लाल कलर पर कब्ज़ा अय हय कितना अच्छा लगता है!
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Atul K Rai
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जो बिस्मिल बना दे वो क़ातिल तबस्सुम
जो क़ातिल बना दे वो दिलकश नज़ारा

मोहब्बत का भी खेल नाज़ुक है कितना
नज़र मिल गई आप जीते मैं हारा
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Nushur Wahidi
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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का
Shahryar
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उन रस भरी आँखों में हया खेल रही है
दो ज़हर के प्यालों में क़ज़ा खेल रही है
Akhtar Shirani
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वो तमाशा ओ खेल होली का
सब के तन रख़्त-ए-केसरी है याद
Faez Dehlvi
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उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते
Bashir Badr
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अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
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एक दिन हम अचानक बड़े हो गए
खेल में दौड़कर उस को छूते हुए
Shariq Kaifi
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खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती
Hastimal Hasti
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ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा
दिलों के खेल में ये जीत हार कुछ भी नहीं
Akhtar Saeed Khan
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और बेहतर, और बेहतर, और बेहतर का ये खेल
मुझ सेे मेरे शे'र की मासूमियत ले जाएगा
Divy Kamaldhwaj
दिल लगाना आ गया और दिल हटाना आ गया
कर ही डाला आपने माहिर हमें इस खेल में
Dev Niranjan
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इश्क़ का था खेल केवल दौड़ का
बन के बल्लेबाज़ शामिल हो गया
Divy Kamaldhwaj
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मुहब्बत याद बचपन की नहीं है
कवर टॉफी का लेकिन पास में है
Tanoj Dadhich
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खेल ही तो है जहाँ मैं उस का हूँ
ज़िन्दगी ये ट्वीट बदलेगी कभी
Neeraj Neer
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कितना अजीब है ये मोहब्बत का खेल भी
हम हार कर भी इस
में कई रोज़ ख़ुश रहे
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Khalid Azad
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तकल्लुफ़ छोड़ कर आओ उसे फिर से जिया जाए
हमारा बचपना जो एल्बमों में क़ैद रहता है
Shiva awasthi
बचपन से ख़ुद पे दाँव लगाते रहे हैं हम
सीखी है खेल खेल में हम ने शनावरी
Ajeetendra Aazi Tamaam
अक़्लमंदों के बस की बात नहीं
इश्क़ अन्धों का खेल है बेटा
Shadab Asghar
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे

ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
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Ali Zaryoun
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बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन
गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई
Irshad Khan Sikandar
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ख़ुद-कुशी करने से बेहतर ज़िंदगी के खेल में
फीस पूरी दीजिए पूरा तमाशा देखिए
Vijay Anand Mahir
मैं तेरी गोद में कैसा लगा था माँ
तेरा तो दूसरा बचपन हुआ था मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
ये कब कहते हैं कि आ कर हम को गले लगा ले वो
मिल जाए तो रस्मन ही बस हाथ मिला ले काफ़ी है

इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें
दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है
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Vashu Pandey
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इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें
दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है
Vashu Pandey
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पास हमारे आ कर वो शर्माती है
तब जा कर के एक ग़ज़ल हो पाती है

उस को छूना छोटा मोटा खेल नहीं
गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है
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Tanoj Dadhich
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तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको
तमाम खेल मुहब्बत में इंतिज़ार का है
Munawwar Rana
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हमारे हाथ में टेडी नहीं है
ये दिल का खेल है सो दिल समझना
ATUL SINGH
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होने थे जितने खेल मुक़द्दर के हो गए
हम टूटी नाव ले के समुंदर के हो गए

ख़ुश्बू हमारे हाथ को छू कर गुज़र गई
हम फूल सब को बाँट के पत्थर के हो गए
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Irfan Jafri
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इश्क़ नादानों का है खेल हमीं कहते थे
और फिर हम ने ही इक रोज़ ये नादानी की
Hina taimuri
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देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना
तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए
Zafar Gorakhpuri
बचपन में हम ही थे या था और कोई
वहशत सी होने लगती है यादों से
Abdul Ahad Saaz
अब तेरा खेल खेल रहा हूँ मैं अपने साथ
ख़ुद को पुकारता हूँ और आता नहीं हूँ मैं
Akbar Masoom
मान जाता था ख़ुद ही मैं रूठ के अपने आप
बचपन में भी मुझ को कोई मनाता नहीं था
karan singh rajput
बचपन में सीखी एक बात अब तक याद है
ज़िन्दगी जितनी कम समझ आए उतनी आसान होती है

ग़लती हो तो झुक जाया करो अपनों के सामने
वरना एक शख़्स के चले जाने से ज़िन्दगी वीरान होती है
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MANOBAL GIRI
बचपन की कुछ यादें मुझे बड़ी याद आती है
वो अंधेरे में चमकने वाले घड़ी याद आती है
karan singh rajput
काग़ज़ी ये कश्तियाँ डूबे न देखो
बचपना इन पर सवारी कर दिखे है
Zain Aalamgir
मिले मौका यूँँ ज़िम्मेदारियों को बचपना छीने
ख़ुदाया छीन ले सब कुछ कभी माँ-बाप ना छीने
Aarush Sarkaar
यादों की गुल्लक को जब तोड़ा मैं ने
उस
में प्यारा बस मेरा बचपन निकला
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Kush Pandey ' Saarang '
तू याद आई और मैं कल देर तक रोया
तस्वीर तेरी रख के बग़ल देर तक रोया

आंगन जहाँ पे खेल के बचपन बिताया था
घर अपना वो पुराना बदल देर तक रोया
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Vedic Dwivedi
पिता के कांध पर राजा सा बैठा
वहीं बचपन सुहाना चाहता हूँ

वो दादी की कहानी रात वाली
उसी में लौट जाना चाहता हूँ
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Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
तेरे आँचल तले बचपन सजा माँ
उसी में लौट जाना चाहता हूँ

मेरी पलकों पे अपने होंठ रख दे
मैं फिर सपने सजाना चाहता हूँ
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Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
ख़ुश कैसे रह सकूँगा तुझ सेे दूर जा कर माँ
लगता है फस गया हूँ इस शहर में आ कर माँ

लौट आए जो बचपन तेरी गोदी में सो जाऊ
मैं थक गया हूँ ज़िन्दगी की बोझ उठा कर माँ
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Udit Narayan Mishra
इस ज़िन्दगी के खेल में
तू आख़िरी उम्मीद हैं
Govind kumar
खेल पूरा सिफारिसों  का था
बेवजह हम किताब में उलझे
Shiv तिवारी ✍️
दर्द की राह को पार हम ने किया
खेल की उम्र में प्यार हम ने किया
Govind kumar
जितने मर्ज़ी खेल खेलो ख़ूब साज़िश भी रचो
वक़्त आने दो कहूँगा, उँगलियाँ अंदर रखो
Ashraf Ali
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अगर बिसात पे ही खेल ख़त्म है तो फिर
मेरे दिमाग़ में क्यूँँ खेल चलता रहता है
Saarthi Baidyanath
आँखें हम से फिर खेल खेल रही है
देखो फिर से ये पीर झेल रही है
Ankit Jha
इश्क़ मोहब्बत खेल नहीं है
सोच समझ कर करना प्यारे
Pawan
जितना होना था हो चुकी बारिश
अब तो सब कुछ भिगो चुकी बारिश

वो जो छोड़ी थीं नांवें बचपन में
उन को कब का डुबो चुकी बारिश
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Muhammad Fuzail Khan
जेब ख़ाली है मगर हूँ मैं वही शहजादा पहचान
जिस के क़िस्से अपनी मां से तुम ने बचपन में सुने थे
BR SUDHAKAR
हार के तौर तरीक़ों पे ग़ौर कीजिए आप
खेल के बा'द नतीजों पे ग़ौर कीजिए आप
Saahir
तुम समझ जिस को रहे हो जेल मेरे लिए
है मोहब्बत सिर्फ़ अब इक खेल मेरे लिए
Faiz Ahmad
बुढापे में उसी ने हाथ नईं थामा किसी का भी
कि बचपन में जिसे सब सेे ज़ियादा प्यार मिलता था
karan singh rajput
बचपन नहीं देखा ख़ुदा बच्चों ने जो
किरदार तुम ने ही बड़ों वाले दिए
Shiv
बचपन में राघव के क़िस्से और बा'द में मोहन के
सुनते-सुनते बड़ा हुआ जो लड़का उस पे शक कैसा
Sanskar Shrivastav
मोहब्बत खेल है गर तो बताओ
खिलौना दिल से भी सस्ता है कोई
Deepika Jain
मुझे वो याद मेरा बचपना दिलाती है
उछल उछल के वो बारिश में जब नहाती है

मैं जिस के सिर्फ़ तसव्वुर से मुस्कुराता था
अब उस की याद मुझे रात दिन रुलाती है
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Abid aseer
वैसे मेरा फोन काट देते हो अच्छा करते हो
लेकिन उस के बा'द रात तुम किस से साझा करते हो?

तुम बचपन का प्यार नहीं हो जिस को भुला दिया जाए
तुम तो मेरी जवानी की ग़ज़लों में पहरा करते हो
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Praveen Sharma SHAJAR
खेल का हिस्सा थे जब तक खेल बस इक खेल था
राज़ सारे खुल गए जब मैं तमाशाई हुआ
shahnawaaz khan
इश्क़ कोई हवस का खेल नहीं
या'नी बस दस्तरस का खेल नहीं

ज़िंदगी तो बहुत ही अच्छी है
हाँ मगर अपने बस का खेल नहीं
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Shaad Imran
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दिलों की डोर का साथी ये कैसा खेल है जिस
में
किसी की मैं मोहब्बत हूँ कोई मेरी मोहब्बत है
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Prashant Sitapuri
तेरी निगाह से मैं बदनाम हो रहा हूँ
बचपन कि भूल से मैं तो आम हो रहा हूँ
Bittoo Stark
मुख़्तसर सी है ये कहानी मेरी
है मुसीबत में ज़िंदगानी मेरी

मुफ़लिसी खा गई थी बचपन को
इश्क़ ने खाई है जवानी मेरी
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Shajar Abbas
देखी है पत्तों की शोख़ी
उस बचपन को कैसे भूले
Meem Alif Shaz
सब खिलौनों की मीठी आवाज़ो में
वो मेरा बचपन बुलाता है मुझ को
Meem Alif Shaz
तुम सेे बिछड़े तो हम किसी कहानी में मरेंगें
बचपन की मेरी ख्वा़हिश अब ज़वानी में मरेंगें
Faizan Faizi
दरमियाँ नफ़रत के घुट घुट कर मुहब्बत मर रही है
ख़ून होता है हया का और शराफ़त मर रही है

ये सियासत है कि दंगों से इन्हें कुर्सी मिली है
इस सियासी खेल में यारों ख़जालत मर रही है
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Chandan Sharma
प्यार जिस्मों का खेल है अब तो
जिस्म जिस का है दिल भी उस का है
Umesh Maurya
कैसा बचपन था, कैसी थी दादीजी भी
बातें बचपन की सब कुछ बताती है वो
FARHAN ASHRAF
दो मुल्कों के सियासी खेल में जाने
यहाँ पर कितनों के घर उजड़े हैं मौला

वही हर सुब्ह मंज़र देखना पड़ता
हज़ारों लोग यूँँ ही मरते हैं मौला
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Harsh saxena
है नाज़ मुझ को आप मेरे राब्ते में हैं
मेरे भी हिस्से आ गए कुछ शानदार लोग

ज़िंदादिली का ज़िक्र कहीं हो रहा हो तो
सुनते ही याद आते हैं बचपन के यार लोग
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Ashraf Ali
बिछड़ते बिछड़ते हुए एक दूजे के दुश्मन
हुआ ख़ूब तक़दीर का खेल हम दोनों के साथ
Sayeed Khan
इश्क़ के इस खेल में भी तुम तभी रखना क़दम
जब बिछड़ने का भी तुम को दाँव आना चाहिए
Khalid Azad
जितना जी चाहे दिलों से खेल लो
पर ख़ुशी फिर भी नहीं होगी तुम्हें

और भी लाखों सजाएँ हैं यहाँ
माना की फाँसी नहीं होगी तुम्हें
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Ajeetendra Aazi Tamaam
मुहब्बत खेल लगता है जिन्हें वो
मुहब्बत छोड़ कर शादी करें वो
Umesh Maurya
रोना धोना बचपन है प्यारे समझा कुछ
जीवन में ही इक वन है प्यारे समझा कुछ
Aarush Sarkaar
कभी फिर से वही बचपन लहर धुन का ज़माना आए
बिना तकलीफ़ के मौसम ख़ुशी का फिर ख़ज़ाना आए
Raunak Karn
दिल मत दो मुझ को बचपन से आदत है मेरी
हाथों में आई चीजें गिरा देने की जानाँ
Jasmeet singh 'Meet'
किसलिए अफ़सोस करना वत्स शाश्वत कौन है
बा'द मुरझाने के फूल इक फिर नया खिल जाएगा

तू भी मैं भी ये भी वो भी सब हैं मोहरे खेल के
शून्य से उपजा है जीवन शून्य में मिल जाएगा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
बड़ा आसान था बचपन हमारा
ज़रा सी बात पे रोए नहीं हम
Meem Alif Shaz
ग़ैर कहाँ इस दिल से खेल अब सकते हैं
सग जैसा बरताव सगे ही करते हैं
SHIV SAFAR
जीते जी मरना होता है तुम क्या जानो क्या होता है
इश्क़ करोगे तब समझोगे इश्क़ नहीं पूरा होता है

मिलना और बिछड़ जाना है खेल नहीं किस्मत का 'पाठक'
हो ही जाता है वो अक्सर होना जिसे जुदा होता है
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Shashank Shekhar Pathak
है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा
जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा

मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त
मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा

अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर
ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा

याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन
याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा

जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में
रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा

बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर
रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा

आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब
आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा

ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से
और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा

मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब
नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा

उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल
उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा

मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम
याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा
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Prasoon
उसी दरख़्त के नीचे उदास बैठा हूँ
कि जिस के साए में हँसकर गुज़ारा था बचपन
Khalid Azad
मन के गुल्लक में बचपन है
और खर्चे जैसा जीवन है

दुनिया में कोई फेल हुआ
तो कोई फस्ट डिवीजन है
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Kush Pandey ' Saarang '
हमेशा खेलता है खेल जानी
नहीं होना हमारा मेल जानी
Arohi Tripathi
नहीं सोचा जहाँ इल्ज़ाम अब हम पर लगाने में
लगे थे हम हक़ीक़त यार अब सब को बताने में

ख़ुशी दी थी सभी को खेल भी खेले बहुत सारे
मगर सबने कसर कोई न छोड़ी है सताने में
Read Full
Raunak Karn