Relationship Shayari Collection - Dil ke rishton, trust aur emotions ki heartfelt shayari

Relationship shayari captures the delicate emotions that define every rishta—trust, love, misunderstandings, and healing. Whether it's a strong bond or a fragile connection, these lines reflect the real depth of human relationships. Perfect for expressing feelings you can't say directly, this collection brings out the beauty and complexity of every connection.

rishta shayari
हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं
हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है
Kanval Ziai
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rishte shayari
हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी
सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम
Jaun Elia
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relationship shayari
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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bandhan shayari
है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से
अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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taalluq shayari
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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nibhana shayari
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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vishwas shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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bharosa shayari
वा'दा करो कि हाथ छुड़ा कर न जाओगे
वा'दा करो कि सात जनम तक रहेगा इश्क़
Mukesh Jha
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ
वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई
पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
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उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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सफ़र हालाँकि तेरे साथ अच्छा चल रहा है
बराबर से मगर एक और रास्ता चल रहा है
Shariq Kaifi
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तू उस के दिल में जगह चाहता है यार जो शख़्स
किसी को देता नहीं अपने साथ वाली जगह
Umair Najmi
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अमीर-ए-शहर का रिश्ते में कोई कुछ नहीं लगता
ग़रीबी चाँद को भी अपना मामा मान लेती है
Munawwar Rana
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जब तक जला ये हम भी जले इस के साथ साथ
जब बुझ गया चराग़ तो सोना पड़े हमें
Abbas Qamar
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ
वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन
इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के
जाने किस किस की याद आती है
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Farhat Ehsaas
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मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
Tehzeeb Hafi
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हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मालूम
कि तू नहीं था तेरे साथ एक दुनिया थी
Ahmad Faraz
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उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
ऐ मेरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
Ahmad Faraz
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साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
Kaif Bhopali
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आख़िरी पन्ने पे बोलो क्या लिखूँ
तुम यहाँ तक साथ तो आए नहीं
Astitwa Ankur
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जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो
लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो
Tehzeeb Hafi
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
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Tehzeeb Hafi
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम
अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
Abhishek shukla
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जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो
मैं चाहता हूँ हवा से रिश्ता बनाए रक्खो
Azm Shakri
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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
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Bashir Badr
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किसी के साथ वो दो पाँव आज चलने लगे
हम अपनी आँख के साथ हाथ भी मसलने लगे
Shadab Javed
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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ज़िंदगी यूँँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
Gulzar
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इस से पहले कि बिछड़ जाएँ हम
दो क़दम और मिरे साथ चलो

मुझ सा फिर कोई न आएगा यहाँ
रोक लो मुझ को अगर रोक सको
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Nasir Kazmi
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ
अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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'मजरूह' क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ
Majrooh Sultanpuri
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किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ते निभाना किस क़दर आसान हो जाए
Waseem Barelvi
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क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इस शिद्दत के साथ
जिस बला का प्यार तुझ सेे बे-ख़बर मैं ने किया
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Waseem Barelvi
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क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता
आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता

तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस
में तेरी क्या
हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता
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Waseem Barelvi
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आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
Gulzar
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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
Gulzar
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मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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दिल बना दोस्त तो क्या क्या न सितम उस ने किए
हम भी नादां थे निभाते रहे नादान के साथ
Shakeel Badayuni
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गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ
Kaifi Azmi
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ
Bashir Badr
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तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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क्यूँँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो
तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो
Adil Mansuri
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किसी ने ख़्वाब में आ कर मुझे ये हुक्म दिया
तुम अपने अश्क भी भेजा करो दु'आओं के साथ
Afzal Khan
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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बारिशें जाड़े की और तन्हा बहुत मेरा किसान
जिस्म और इकलौता कंबल भीगता है साथ-साथ
Parveen Shakir
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या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
Shahryar
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तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
ऐसी बरसातें कि बादल भीगता है साथ साथ
Parveen Shakir
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ
जाने क्यूँँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
Qateel Shifai
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मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया
मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया

बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा
उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया
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Tehzeeb Hafi
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जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा
रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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तअल्लुक़ में नया इतना हुआ है
वो मेरा नाम लेने लग गया है
Madan Mohan Danish
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फिरता है कैसे-कैसे सवालों के साथ वो
उस आदमी की जामा-तलाशी तो लीजिए
Dushyant Kumar
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काँटों से दिल लगाओ जो ता-उम्र साथ दें
फूलों का क्या जो साँस की गर्मी न सह सकें
Akhtar Shirani
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चलो न फिर से दरिया के नज़दीक चलें
चलो न फिर से डुबकी साथ लगाएँगे
Atul K Rai
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मुझे अब आइनों की क्या ज़रूरत
मैं अपने साथ अब रहने लगा हूँ
Madan Mohan Danish
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सात टुकड़े हुए मेरे दिल के
एक हफ़्ता लगा सँभलने में
Tanoj Dadhich
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जगह जगह न तअल्लुक़ ख़राब कर मेरा
तेरे लिए तो किसी से भी लड़ पड़ूँगा मैं
Zia Mazkoor
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टेंशन से मरेगा न कोरोने से मरेगा
इक शख़्स तेरे साथ न होने से मरेगा
Idris Babar
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टूट भी जाऊँ तो तेरा क्या है
रेत से पूछ आइना क्या है

फिर मेरे सामने उसी का ज़िक्र
आप के साथ मसअला क्या है
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Tehzeeb Hafi
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हम जानते तो इश्क़ न करते किसू के साथ
ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ
Meer Taqi Meer
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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
Anjum Saleemi
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रात दिन तेरे साथ कटते थे
यार अब तुझ सेे बात से भी गए

ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई
दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
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Kafeel Rana
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सभी के साथ दिखना भी मगर सब सेे जुदा रहना भी है उस को
उदासी साथ भी रखनी है और तस्वीर में हँसना भी है उस को
Kafeel Rana
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बड़ी मुश्किल से नीचे बैठते हैं
जो तेरे साथ उठते बैठते हैं
Khurram Afaq
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तुम्हारे साथ जो देखे थे मैं ने
वो सारे ख़्वाब बाग़ी हो रहे हैं
Ritesh Rajwada
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कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा
हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था
Shayra kirti
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बरस रही है आँखें हैं ये इनको बादल मत कहना
मौत हुई है दिल की मेरे उस को घाइल मत कहना

जीवन भर वो साथ रहेगा प्यार करेगा बस तुम को
मुझ को पागल कह देती थी उस को पागल मत कहना
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Tanoj Dadhich
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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अगर लगता है वो क़ाबिल नहीं है
तो रिश्ता तोड़ना मुश्किल नहीं है

रक़ीब आया है मेरे शे'र सुनने
तो अब ये जंग है महफ़िल नहीं है
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Tanoj Dadhich
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जो तस्वीरें साथ में खींची जाती हैं
वो इक दिन तन्हा महसूस कराती हैं
Vikram Gaur Vairagi
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प्यार मुहब्बत बा'द की बातें जान कभी ये सोचा है
किस ने तेरा साथ दिया था कौन नशे में ख़त्म हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है
हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
Danish Naqvi
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
Kaif Bhopali
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प्यार की रात हो छत पर हो तेरा साथ तो फिर
चाँद को बीच में डाला नहीं जाता मुझ सेे
Waseem Barelvi
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भीगी पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं
वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं

वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
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Zubair Ali Tabish
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दिवाली भी दिवाली अब नहीं है
तुम्हारे साथ हर दिन थी दिवाली
Tanoj Dadhich
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अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे
Majeed Akhtar
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ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
नदी का साथ देता हूँ समुंदर रूठ जाता है
Aalok Shrivastav
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
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Tehzeeb Hafi
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मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र'
उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं
Zafar Iqbal
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वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी
अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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किसी ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो
दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है
Shahid Zaki
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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
Waseem Nadir
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तेरे साथ भी मुश्किल पड़ता था तेरे बिन तो गुजारा क्या होता
गर तू भी नहीं होता तो न जाने दोस्त हमारा क्या होता
Siddharth Saaz
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मैं शाइ'र उस को चूड़ी ही दे सकता था बस
रिश्ता सोने के कंगन देने पर होता है
Neeraj Neer
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया

शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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Afzal Ali Afzal
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क़त्अ कीजे न तअल्लुक़ हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही
Mirza Ghalib
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इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ
लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी
Hafeez Merathi
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ
बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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आज हम दोनों बहुत ख़ुश साथ में रहते कहीं
घर बसाने की अगर जल्दी नहीं होती तुम्हें
Tanoj Dadhich
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
Jaan Nisar Akhtar
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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
Akhtar Nazmi
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वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है
लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा
वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा
Waseem Barelvi
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