Udas Shayari - Dil ki udaasi aur khamosh ehsaason ki gehri shayari

Udas shayari reflects the quiet pain and heaviness of a lonely heart. It captures moments when words feel heavy and emotions stay unspoken. From broken feelings to silent nights, these lines express that subtle sadness we all feel at times.

udaas shayari
जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो
एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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udasi shayari
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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gam shayari
हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं
दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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gham shayari
ज़िंदगी कितनी मसर्रत से गुज़रती या रब
ऐश की तरह अगर ग़म भी गवारा होता
Akhtar Shirani
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mayoosi shayari
सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
Himayat Ali Shayar
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dukhi shayari
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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dil udaas shayari
ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझ को आदत है मुस्कुराने की
Abdul Hamid Adam
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afsos shayari
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
Bashir Badr
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती
हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
Charagh Sharma
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माँ-बाबा का सोच के हर दम रुक जाता हूँ वरना तो
इतने ग़म में मैं ने पंखे से टंग कर मर जाना था
Shashwat Singh Darpan
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सब कुछ पा कर थोड़ा सा कुछ कम भी रहता है
इन ख़ुशियों में एक तुम्हारा ग़म भी रहता है
Ritesh Rajwada
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ख़्वाब के आस पास रह रह कर
थक गया हूँ उदास रह रह कर
Shahbaz Rizvi
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दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
Salman Zafar
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अफ़सोस हो रहा है तेरी शक्ल देख कर
क्या कोई तेरा चाहने वाला नहीं रहा
Abbas Tabish
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत
जिसे पैरों तले रौंदा गया है

तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म
तुम्हारा कौन सा अपना गया है
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Ali Zaryoun
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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
Faiz Ahmad Faiz
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क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
Faiz Ahmad Faiz
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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
Ahmad Faraz
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आज तो बे-सबब उदास है जी
इश्क़ होता तो कोई बात भी थी
Nasir Kazmi
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जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
Balmohan Pandey
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सुन कर तमाम रात मेरी दास्तान-ए-ग़म
बोले तो सिर्फ़ ये कि बहुत बोलते हो तुम
Firaq Gorakhpuri
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जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगे
Jaun Elia
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
Jaun Elia
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ये बहुत ग़म की बात हो शायद
अब तो ग़म भी गँवा चुका हूँ मैं
Jaun Elia
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बा-हुनर हो के कुछ न कर पाना
रेज़ा-रेज़ा बिखर के ढह जाना

मुझ को बेहद उदास करता है
ख़ास लोगों का आम रह जाना
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Vishal Bagh
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लाखों सद
में ढेरों ग़म फिर भी नहीं हैं आँखें नम
इक मुद्दत से रोए नहीं क्या पत्थर के हो गए हम
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Azm Shakri
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हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई
उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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Subhan Asad
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दिल गया रौनक़-ए-हयात गई
ग़म गया सारी काएनात गई
Jigar Moradabadi
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना
एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है

हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है
कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
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Kumar Vishwas
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या
ये दौलत तो घर बैठे आ जाती है
Shakeel Jamali
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ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें
Majrooh Sultanpuri
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इसी खंडर में कहीं कुछ दिए हैं टूटे हुए
इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात
Firaq Gorakhpuri
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अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है
Majrooh Sultanpuri
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ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता
Gulzar
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
Sahir Ludhianvi
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चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
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लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएं घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
Shakeel Badayuni
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मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं
कुछ ग़म के बड़े इनआ'म भी हैं पढ़िए तो कहानी काम की है
Anjum Barabankvi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
ये सारे खेल हैं, इन
में उदास मत होना
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Kumar Vishwas
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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
Bashir Badr
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दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया
उठ उठ के देखती रही गर्द-ए-सफ़र मुझे
Ali Sardar Jafri
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ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं
Behzad Lakhnavi
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे
हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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गए ज़माने की चाप जिन को समझ रहे हो
वो आने वाले उदास लम्हों की सिसकियाँ हैं
Aanis Moin
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ये किस मक़ाम पे लाई है ज़िंदगी हम को
हँसी लबों पे है सीने में ग़म का दफ़्तर है
Hafeez Banarasi
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जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
Muneer Niyazi
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ
मुक़द्दर सो गया ग़म जागता है
Asad Bhopali
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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
Meer Taqi Meer
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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही
किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही
Masroor Anwar
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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का
Shahryar
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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ख़ुश भी हो लेते हैं तेरे बे-क़रार
ग़म ही ग़म हो इश्क़ में ऐसा नहीं
Firaq Gorakhpuri
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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
Muneer Niyazi
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लाज़िम है अब कि आप ज़ियादा उदास हों
इस शहर में बचे हैं बहुत कम उदास लोग
Bhaskar Shukla
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जैसे देखा हो आख़िरी सपना
रात इतनी उदास थीं आँखें
Siraj Faisal Khan
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
Siddharth Saaz
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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यहाँ वो कौन है जो इंतिख़ाब-ए-ग़म पे क़ादिर हो
जो मिल जाए वही ग़म दोस्तों का मुद्दआ' होगा
Jaun Elia
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अब क्या बताऊँ मैं तिरे मिलने से क्या मिला
इरफ़ान-ए-ग़म हुआ मुझे अपना पता मिला
Seemab Akbarabadi
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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रोना नहीं मुझे मुझे रहने दे बस उदास
तू बैठ मेरे पास मगर यूँँ लिपट नहीं
Swapnil Tiwari
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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तिरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता
कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता

उदास करती है अक्सर तुम्हारी याद मुझे
मगर ये हाल बहुत देर तक नहीं रहता
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Noon Meem Danish
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल
अफ़्सोस ये है उस ने मेरी बात काट दी
Tahir Faraz
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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
Farhat Abbas Shah
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ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है
कई दिनों से कोई आस पास भी कम है

हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर
तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
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Farhat Abbas Shah
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
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Fahmi Badayuni
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बहन का प्यार जुदाई से कम नहीं होता
अगर वो दूर भी जाए तो ग़म नहीं होता
Unknown
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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा
Abid Hashri
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रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे
उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे
Unknown
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किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर
आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत
Amanat Lakhnavi
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अव्वल अव्वल ईजाद हुआ इश्क़ ख़ुदा से
फिर उस के बा'द इस जहाँ में रस्सियाँ बनी

स्कैच को बनाते वक़्त हम उदास थे बहुत
सो शकल हमारी देख कर उदासियाँ बनी
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Nawaaz
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उदास रहने से ग़ज़लों में जान आती है
सो पूरा ध्यान लगाकर उदास रहने लगे
Nadim Nadeem
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
Danish Naqvi
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मेरे तो ग़म भी ज़माने के काम आते हैं
मैं रो पड़ूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं
Tariq Qamar
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परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है
उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में
Khaleel Tanveer
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए
मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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वो आँखें आप के ग़म में नहीं हुई हैं नम
दिया जलाते हुए हाथ जल गया होगा
Shadab Javed
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे
किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है

आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग
मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
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Nadir Ariz
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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
Faiz Ahmad Faiz
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तुझे भुला भी दिया फिर भी तेरे पास रहा
परिंदे उड़ गए लेकिन कफ़स उदास रहा
Shadab Asghar
उस को चाहा और चाहत पर क़ायम हैं
पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते
Shadab Asghar
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के
इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
Waseem Nadir
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जब भी आता है दिसम्बर ग़म के टाँके खुलते हैं
याद है यूँँ तेरा जाना और कहना ख़ुश रहो
Neeraj Neer
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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
Mirza Ghalib
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बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गया
प्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया
Abroo Shah Mubarak
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Read Full
Tehzeeb Hafi
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मिरी नादानी पर रोऊँ कहाँ जा कर
मेरा ग़म कोई ले भी तो नहीं सकता
Mahesh Natakwala
अपना ही एक मौसम लिए फिरते हैं
लोग जो दिल को पुर-ग़म लिए फिरते हैं

चारा-गर जैसे हैं ये सुख़न-वर सभी
सबके ज़ख़्मों का मरहम लिए फिरते हैं
Read Full
Dileep Kumar
उठाओ पथ्थरों को दूर फेंको
बहुत आसान है ग़म को हराना
Meem Alif Shaz
ख़ुशियाँ उसी के साथ हैं जो ग़म गुसार है
ऐसे हरेक शख़्स ही दुनिया का यार है
Sunny Seher
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मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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