Gham Shayari - Dil ke dard aur tanha palon ki gehri shayari

Gham shayari reflects the silent pain hidden deep within the heart. It gives words to dard, loneliness, and the emotions we often struggle to express. Whether it's heartbreak, loss, or inner emptiness, these lines help you connect with your feelings and share them meaningfully.

gham shayari
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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dard shayari
आज तो दिल के दर्द पर हँस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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udasi shayari
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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tanha shayari
दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
Kaleem Aajiz
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tanhai shayari
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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dil toota shayari
दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे
Mirza Ghalib
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mayusi shayari
ज़िंदगी कितनी मसर्रत से गुज़रती या रब
ऐश की तरह अगर ग़म भी गवारा होता
Akhtar Shirani
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ranj shayari
ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का
Javed Akhtar
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guzra dard shayari
सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
Himayat Ali Shayar
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afsos shayari
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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gham shayari
ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझ को आदत है मुस्कुराने की
Abdul Hamid Adam
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dard shayari
ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है
Gulzar
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udasi shayari
अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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tanha shayari
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
Bashir Badr
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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती
हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
Charagh Sharma
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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सब कुछ पा कर थोड़ा सा कुछ कम भी रहता है
इन ख़ुशियों में एक तुम्हारा ग़म भी रहता है
Ritesh Rajwada
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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इस क़दर जज़्ब हो गए दोनों
दर्द खेंचूँ तो दिल निकल आए
Abbas Qamar
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
Faiz Ahmad Faiz
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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें
Ahmad Faraz
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जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
Balmohan Pandey
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सुन कर तमाम रात मेरी दास्तान-ए-ग़म
बोले तो सिर्फ़ ये कि बहुत बोलते हो तुम
Firaq Gorakhpuri
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हमारा दिल तो हमेशा से इक जगह पर है
तुम्हारा दर्द ही रस्ता भटक गया होगा
Zubair Ali Tabish
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सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
Jaun Elia
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ये बहुत ग़म की बात हो शायद
अब तो ग़म भी गँवा चुका हूँ मैं
Jaun Elia
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आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम
Azm Shakri
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कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को

दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हम सेे क्या काम पड़ गया दिल को
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Subhan Asad
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हम कुछ ऐसे उस के आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंज-ओ-नदामत, तन्हाई
उस को ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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Subhan Asad
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पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
Parveen Shakir
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दिल गया रौनक़-ए-हयात गई
ग़म गया सारी काएनात गई
Jigar Moradabadi
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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
Mirza Ghalib
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रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं
Mirza Ghalib
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दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
Mirza Ghalib
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दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँँ
Mirza Ghalib
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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
Mirza Ghalib
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वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
Nasir Kazmi
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ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या
ये दौलत तो घर बैठे आ जाती है
Shakeel Jamali
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ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें
Majrooh Sultanpuri
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अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है
Majrooh Sultanpuri
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ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता
Gulzar
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
Sahir Ludhianvi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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ग़म बयाँ करने का कोई और ढंग ईजाद कर
तेरी आँखों का ये पानी तो पुराना हो गया
Waseem Barelvi
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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आन के इस बीमार को देखे तुझ को भी तौफ़ीक़ हुई
लब पर उस के नाम था तेरा जब भी दर्द शदीद हुआ
Ibn E Insha
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दीदा ओ दिल ने दर्द की अपने बात भी की तो किस से की
वो तो दर्द का बानी ठहरा वो क्या दर्द बटाएगा
Ibn E Insha
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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
Bashir Badr
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं
Behzad Lakhnavi
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे
हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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यूँँ दिल को तड़पने का कुछ तो है सबब आख़िर
या दर्द ने करवट ली या तुम ने इधर देखा
Jigar Moradabadi
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ये किस मक़ाम पे लाई है ज़िंदगी हम को
हँसी लबों पे है सीने में ग़म का दफ़्तर है
Hafeez Banarasi
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न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
वो ख़ुद तड़प गए देखा जो बे-क़रार मुझे
Asad Bhopali
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उम्र गुज़री दवाएँ करते 'मीर'
दर्द-ए-दिल का हुआ न चारा हनूज़
Meer Taqi Meer
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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
Meer Taqi Meer
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सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का
कि खेल ख़त्म हुआ कश्तियाँ डुबोने का
Shahryar
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
Akhtar Shirani
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कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इस का कोई नहीं है हल शायद
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Gulzar
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ख़ुश भी हो लेते हैं तेरे बे-क़रार
ग़म ही ग़म हो इश्क़ में ऐसा नहीं
Firaq Gorakhpuri
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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी
Siddharth Saaz
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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मैं तुम्हें बद्दुआएं देता हूँ
ताकि तुम मेरा दर्द जान सको

तुम जिसे चाहते हो मर जाए
और तुम उस के बा'द ज़िंदा रहो
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Afkar Alvi
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ये ग़म हम को पत्थर कर देगा इक दिन
कोई आ कर हमें रुलाओ पहले तो
Siddharth Saaz
हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया
Hafeez Jalandhari
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
Shahzad Ahmad
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल
अफ़्सोस ये है उस ने मेरी बात काट दी
Tahir Faraz
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बदल गए मेरे मौसम तो यार अब आए
ग़मों ने चाट लिया ग़म-गुसार अब आए
Farhat Abbas Shah
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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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बहन का प्यार जुदाई से कम नहीं होता
अगर वो दूर भी जाए तो ग़म नहीं होता
Unknown
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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा
Abid Hashri
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रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे
उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे
Unknown
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किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर
आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत
Amanat Lakhnavi
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मेरे तो ग़म भी ज़माने के काम आते हैं
मैं रो पड़ूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं
Tariq Qamar
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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यही बहुत है मिरे ग़म में तुम शरीक हुए
मैं हॅंस पड़ूँगा अगर तुम ने अब दिलासा दिया
Imran Aami
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वो आँखें आप के ग़म में नहीं हुई हैं नम
दिया जलाते हुए हाथ जल गया होगा
Shadab Javed
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे
किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है

आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग
मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
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Nadir Ariz
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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
Faiz Ahmad Faiz
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उस को चाहा और चाहत पर क़ायम हैं
पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते
Shadab Asghar
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के
इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
Waseem Nadir
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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता
Mirza Ghalib
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न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए
ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए
Faryad Aazar
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गया
प्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया
Abroo Shah Mubarak
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दर्द सहने का हुनर तो पास सबके है मगर
दर्द कहने का हुनर बस शाइरों के पास है
Divy Kamaldhwaj
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
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Tehzeeb Hafi
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मिरी नादानी पर रोऊँ कहाँ जा कर
मेरा ग़म कोई ले भी तो नहीं सकता
Mahesh Natakwala
अपना ही एक मौसम लिए फिरते हैं
लोग जो दिल को पुर-ग़म लिए फिरते हैं

चारा-गर जैसे हैं ये सुख़न-वर सभी
सबके ज़ख़्मों का मरहम लिए फिरते हैं
Read Full
Dileep Kumar
बयाँ करने बैठूँ तो बस दर्द ही हैं
मुनासिब है कह दूँ कि मैं हूँ मज़े में
Priya Dixit
उठाओ पथ्थरों को दूर फेंको
बहुत आसान है ग़म को हराना
Meem Alif Shaz
ख़ुशियाँ उसी के साथ हैं जो ग़म गुसार है
ऐसे हरेक शख़्स ही दुनिया का यार है
Sunny Seher
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मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ
Read Full
Kazim Rizvi
कितना भी दर्द पिला दे ख़ुदा पी सकता हूँ
ज़िन्दगी हिज्र से भर दे मिरी जी सकता हूँ

हर दफ़ा दिल पे ही खा के हुई है आदत ये
बंद आँखों से भी हर ज़ख़्म को सी सकता हूँ
Read Full
Faiz Ahmad
ख़ुशी में भी ख़ुशी होती नहीं अब
तेरा ग़म ही सतह पर तैरता है
Umesh Maurya
तुम्हारे साथ था तो मैं गम-ए-उल्फ़त में उलझा था
तुम्हें छोड़ा तो ये जाना कि दुनिया ख़ूब-सूरत है
Nirbhay Nishchhal
अपने दीवाने को देकर दर्द ओ ग़म
नाज़ ख़ुद पे किस क़दर करता है वो
Ajeetendra Aazi Tamaam