Chaand Shayari - Romantic, dreamy lines inspired by the beauty of chaand

Chaand shayari beautifully captures the magic of the moon, symbolizing love, beauty, and longing. Whether it's a chandni raat or a silent sky, these verses reflect deep emotions and dreamy thoughts. Perfect for expressing romance, admiration, or peaceful solitude.

chaand shayari
सूरज सितारे चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
Rahat Indori
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chand shayari
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
Farhat Ehsaas
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chandni shayari
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
Ibn E Insha
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moon shayari
पूछा जो उन सेे चाँद निकलता है किस तरह
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँँ
Arzoo Lakhnavi
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chandni raat shayari
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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mah shayari
इश्क़ हमारा चाँद सितारे छू लेगा
घुटनों पर आ कर इज़हार किया हम ने
Darpan
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mahtaab shayari
ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते
तुम नहीं हो तो नज़ारे नहीं अच्छे लगते
Indira Varma
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chaand shayari
हर एक रात को महताब देखने के लिए
मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए
Azhar Inayati
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chand shayari
चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर
छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो
Bashir Badr
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chandni shayari
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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moon shayari
गले मिल कर मुझे बस चाँद से ये देखना है
ख़ुशी से मर गया हूँ या कि साँसें चल रहीं हैं
Saarthi Baidyanath
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उस ने खिड़की से चाँद देखा था
मैं ने खिड़की में चाँद देखा है
Zubair Ali Tabish
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किसे फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल है ये सवाल है
कोई वक़्त है भी कि जाल है ये सवाल है
Abbas Qamar
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इस दुनिया का हर मंसूबा हर कोशिश बेकार हुई
इक बच्चे ने हाथ बढ़ाया चाँद को छू कर देख लिया
Tariq Qamar
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फेंक कर रात को दीवार पे मारे होते
मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते
Unknown
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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अमीर-ए-शहर का रिश्ते में कोई कुछ नहीं लगता
ग़रीबी चाँद को भी अपना मामा मान लेती है
Munawwar Rana
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न वैसा चाँद फिर निकला न वैसी ईद फिर आई
किसी ने जब मेरी ईदी मेरे होंटों पे रख दी थी
Ritesh Rajwada
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ख़ुशबुओं से नहा के चाँद आया
किस क़दर जगमगा के चाँद आया

बद-नसीबी है मेरी आँखों की
मास्क मुँह पे लगा के चाँद आया
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Salman Zafar
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आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
Ahmad Faraz
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रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है
Rahat Indori
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शब की आग़ोश में महताब उतारा उस ने
मेरी आँखों में कोई ख़्वाब उतारा उस ने
Azm Shakri
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बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
Nida Fazli
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यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
Nida Fazli
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ख़मोश झील के पानी में वो उदासी थी
कि दिल भी डूब गया रात माहताब के साथ
Rehman Faris
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चंद उम्मीदें निचोड़ी थीं तो आहें टपकीं
दिल को पिघलाएँ तो हो सकता है साँसें निकलें
Gulzar
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मुंतज़िर हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा कर के
Rahat Indori
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चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सह
में जाते हैं
कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए
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Allama Iqbal
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद
कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
Gulzar
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फिर बालों में रात हुई
फिर हाथों में चाँद खिला
Adil Mansuri
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इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
Parveen Shakir
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थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे
Kaif Bhopali
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मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए
Rahat Indori
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रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
Parveen Shakir
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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वो मेरे लम्स से महताब बन चुका होता
मगर मिला भी तो जुगनू पकड़ने वालों को
Nomaan Shauque
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रात के जिस्म में जब पहला पियाला उतरा
दूर दरिया में मेरे चाँद का हाला उतरा
Kumar Vishwas
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जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए
बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए
Asad Bhopali
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चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
Farhat Ehsaas
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अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फिजूलखर्ची नहीं करेंगे

हमारे चंद अच्छे दोस्तों ने ये वा'दा ख़ुद से किया हुआ है
कि शक्ल अल्लाह ने अच्छी दी है सो बातें अच्छी नहीं करेंगे
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Rehman Faris
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चाँद तारे इक दिया और रात का कोमल बदन
सुब्ह-दम बिखरे पड़े थे चार सू मेरी तरह
Aziz Nabeel
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जान
चाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में
Mushafi Ghulam Hamdani
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चाँद बैठा हुआ है पहलू में
क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं
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Jaun Elia
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चाँद ने ओढ़ ली है चादर-ए-अब्र
अब वो कपड़े बदल रही होगी
Jaun Elia
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हर चंद कि हैं अदबार में हम
कहते हैं खुले बाज़ार में हम

हैं सब से बड़े संसार में हम
मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम
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Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता
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Abrar Kashif
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हम पे कर ध्यान अरे चाँद को तकने वाले
चाँद के पास तो मोहलत है सहर होने तक
Rehman Faris
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दूल्हा-दूल्हन को नहीं तकता कोई
क्यूँँ कि उस बारात में इक चाँद है
Shadab Javed
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ईद का चाँद तुम ने देख लिया
चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
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जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही
Amjad Islam Amjad
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वहाँ ईद क्या वहाँ दीद क्या
जहाँ चाँद रात न आई हो
Shariq Kaifi
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ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं
ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द
Unknown
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यूँँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ता'बीर
चंद पत्ते ही तो तोड़े हैं शजर से मैं ने
Khurram Afaq
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इक रात उस ने चंद सितारे बुझा दिए
उस को लगा था कोई उन्हें गिन नहीं रहा
Khurram Afaq
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छत पे सिगरेट ले के बैठा है
चाँद भी बे-क़रार है शायद
Satya Prakash Soni
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तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी
तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद
Nida Fazli
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प्यार की रात हो छत पर हो तेरा साथ तो फिर
चाँद को बीच में डाला नहीं जाता मुझ सेे
Waseem Barelvi
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यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो
ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे

ये जो चेहरे हैं यहाँ चाँद से चेहरे 'ताबिश'
ये मिरा इश्क़ मुकम्मल नहीं होने देंगे
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Abbas Tabish
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तुम आसमान पे जाना तो चाँद से कहना
जहाँ पे हम हैं वहाँ चांदनी बहुत कम है
Shakeel Azmi
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आधी आधी रात तक सड़कों के चक्कर काटिए
शा'इरी भी इक सज़ा है ज़िंदगी भर काटिए

कोई तो हो जिस से उस ज़ालिम की बातें कीजिए
चौदहवीं का चाँद हो तो रात छत पर काटिए
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Nisar Nasik
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तुम को हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है
पहले हम को चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला
Abhishar Geeta Shukla
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सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी
Dagh Dehlvi
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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
Jaan Nisar Akhtar
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आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर
Jaleel Manikpuri
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की
चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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रात भर ता'रीफ़ मैं ने की तुम्हारे रूप की
चाँद इतना जल गया सुन कर कि सूरज हो गया
Chandan Rai
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चाँद भी जिस के आगे फीका है
सिर्फ़ औरत ही वो सितारा है
Intzar Akhtar
लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो

फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो
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Shajar Abbas
ये मुझ सेे चाँद तारे कह रहे हैं
मता-ए-जाँ तुम्हें बाँहों में ले लूँ
Shajar Abbas
चाँद को देख कर ये लगता है
तुम मेरी जान आसमान में हो
Shajar Abbas
संग-ए-मरमर की मूरत नहीं आदमी
इस क़दर ख़ूब-सूरत नहीं आदमी

चंद क़िस्सों की दरकार है बस इसे
आदमी की ज़रूरत नहीं आदमी
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anupam shah
कहीं किसी भी बहाने मुझे बुला इक रोज़
ऐ चाँद तुझ को क़सम है ज़मीं पे आ इक रोज़

मुझे क़बूल है गर ख़ाक भी हो जाऊँ मैं
क़रीब आ के मुझे सीने से लगा इक रोज़
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Chandan Sharma
अगर बेदाग़ होता चाँद तो अच्छा नहीं लगता
मोहब्बत ख़ूब-सूरत दाग़ है, बेदाग़ से दिल पर
Umesh Maurya
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चाँद को दूरबीन से देखूँ
शाइरों का ये काम थोड़ी है
Saarthi Baidyanath
जो कल शब से तन्हा था कैसा होगा
वो निस्फ़ चाँद अब जाने किस का होगा
ALI ZUHRI
नज़ारे झूठ लगते हैं किनारे झूठ लगते है
अभी तेरे बिना ये चाँद तारे झूठ लगते हैं
Umesh Maurya
हुआ करती थी मेरी ईद जिस के दीद से साहिल
उतर आया है देखो चाँद वो ग़ैरों के आँगन में
A R Sahil "Aleeg"
तुम्हें ये चाँद दिलबर सा लगे है
मुझे दिलबर का झुमका लग रहा है
Shan Sharma
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
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Azhar Iqbal
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चाँद का फिर मेरा रस्ता देखती आँखें तुम्हारी
आज करवाचौथ के दिन काश हम तुम साथ होते
Gaurav Singh
उस चाँद को भी रश्क होता था उसी को देख कर
मैं भी खुले आकाश में तस्वीर उस की चूमता
Ankit Yadav
रात हो, चाँद हो, बारिश भी हो और तुम भी हो
ऐसा मुमकिन ही नहीं है कि कभी हो मिरे साथ
Faiz Ahmad
तू ने महताब निकलते हुए देखा है कभी
और महताब भी ऐसे किसी दरवाज़े से
Ashraf Yousafi
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे

इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
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Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है
Akbar Allahabadi
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इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो
Sudarshan Fakir
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चंद ख़्वाबों की हाथा-पाई में
नींद कल गिर गई थी बिस्तर से
Shiva awasthi
पहले डाली तेरे चेहरे पे बहुत देर नज़र
ईद का चाँद तो फिर बा'द में देखा मैं ने
Vijendra Singh Parwaaz
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कुछ फ़र्क़ क्यूँँ हो मुझ
में जो रौशन हुए हैं आप
जलता नहीं है चाँद सितारों को देख कर
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Tanoj Dadhich
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कि जैसे चाँद निकलेगा यहीं से
मैं ऐसे एक खिड़की देखता हूँ
Aks samastipuri
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हसीन यादों के चाँद को अलविदा'अ कह कर
मैं अपने घर के अँधेरे कमरों में लौट आया
Hasan Abbasi
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अब ख़ुदा नेमतें हमें बख़्शे
चाँद जैसी हमारी बेग़म हो
Amaan Pathan
चाँद ला सका नहीं कभी सनम है सच मगर
ला रहा हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर आफ़ताब अब
Amaan Pathan
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चाँदनी रात में तारों पे ग़ज़ल कहना है
आज फिर चाँद की आँखों पे ग़ज़ल कहना है

इतना आसाँ नहीं उस के लिए कुछ भी कहना
यूँँ समझ लीजिए ख़्वाबों पे ग़ज़ल कहना है
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Harsh saxena
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पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी
Sarvat Husain
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जब खिले फूल चमन में तो तिरी याद आई
चंद आँसू भी मसर्रत के बहाने निकले
Kumar Pashi
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जाँ दे के भी चाहूँ तो उसे पा न सकूँ मैं
वो चाँद का टुकड़ा जो दरीचे में जड़ा है
Asghar Gorakhpuri
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फिर वही रात वही चाँद वही तुम वही मैं
क्या किसी छत के मुक़द्दर में लिखे जाएँगे
Vibha Jain 'Khwaab'
वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा
किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
चंद पेड़ों को ही मजनूँ की दुआ होती है
सब दरख़्तों पे तो पत्थर नहीं आया करता
Ahmad Kamran
फूल महकेंगे यूँ ही चाँद यूँ ही चमकेगा
तेरे होते हुए मंज़र को हसीं रहना है
Ashfaq Hussain