Judai Shayari - Dil ke bichhadne aur dooriyon ka gehra ehsaas

Judai shayari expresses the silent pain of separation, where love remains but distance takes over. It captures the ache of bichhadna, unspoken emotions, and memories that refuse to fade. These lines beautifully reflect how hearts stay connected even when paths drift apart.

judai shayari
आओ गले मिल कर ये देखें
अब हम में कितनी दूरी है
Shariq Kaifi
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judaai shayari
ख़्याल-ए-हिज्र से डर जाते हैं हम अक्सर
और घबरा के तेरे लब को चूम लेते हैं
Parwez Akhtar
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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मुमकिना फ़ैसलों में एक हिज्र का फ़ैसला भी था
हम ने तो एक बात की उस ने कमाल कर दिया
Parveen Shakir
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इक तेरा हिज्र दाइमी है मुझे
वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
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आई होगी किसी को हिज्र में मौत
मुझ को तो नींद भी नहीं आती
Akbar Allahabadi
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लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले

माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझ सेे भी ज़्यादा चाहे तुझ को ऐसा यार मिले
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Bhaskar Shukla
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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं
हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं
Anand Raj Singh
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मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी
मगर ये हिज्र कितना चल रहा है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो
मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो
Jaun Elia
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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कभी न लौट के आया वो शख़्स, कहता था
ज़रा सा हिज्र है बस सरसरी बिछड़ना है
Subhan Asad
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ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई
Subhan Asad
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फ़ासला रख कर भी क्या हासिल हुआ
आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं
Shariq Kaifi
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सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है
शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा
Jigar Moradabadi
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मिरी ज़िंदगी तो गुज़री तिरे हिज्र के सहारे
मिरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना
Jigar Moradabadi
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जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है
Gulzar
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ
Jaun Elia
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शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
कि जोड़ दे कोई टुकड़ा शब-ए-जुदाई का
Ameer Minai
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थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब
Momin Khan Momin
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तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा
जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा
Shadab Javed
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
Ahmad Faraz
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
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Ismail Raaz
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया
रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया

मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को
या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
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Ismail Raaz
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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'मुनीर' अच्छा नहीं लगता ये तेरा
किसी के हिज्र में बीमार होना
Muneer Niyazi
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से
हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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अब तो मैं बाल बढ़ा सकता हूँ
हिज्र में कितनी सहूलत है मुझे
Nasir khan 'Nasir'
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तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है
उसे दुल्हन भी बनते देखना है
Anand Verma
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रेल की सीटी में कैसे हिज्र की तम्हीद थी
उस को रुख़्सत कर के घर लौटे तो अंदाज़ा हुआ
Parveen Shakir
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उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
Unknown
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भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अश'आर कहते थे
Siddharth Saaz
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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
Waseem Barelvi
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बहन का प्यार जुदाई से कम नहीं होता
अगर वो दूर भी जाए तो ग़म नहीं होता
Unknown
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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं
ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम

कितने आराम से हैं हम दोनों
देखा बेकार डर रही थी तुम
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Mehshar Afridi
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हिज्र की रातें इतनी भारी होती हैं
जैसे छाती पर ऐरावत बैठा हो
Tanoj Dadhich
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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की
Naeem Sarmad
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ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
वो दिन जो हम ने तिरे हिज्र में गुज़ारे थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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काट पाऊँगा मैं कैसे ज़िंदगी तेरे बग़ैर
तीन दिन का हिज्र मुझ को लग रहा है तीन साल
Afzal Ali Afzal
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ

वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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Kushal Dauneria
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जनम-दिन हिज्र का कुछ यूँँ मनाया
किया अनब्लॉक तुम को आज हम ने
Tanoj Dadhich
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हम मिल के आ गए मगर अच्छा नहीं लगा
फिर यूँँ हुआ असर कि घर अच्छा नहीं लगा

इक बार दिल में तुझ सेे जुदाई का डर बना
फिर दूसरा कोई भी डर अच्छा नहीं लगा
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Shriyansh Qaabiz
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हिज्र में ख़ुद को तसल्ली दी कहा कुछ भी नहीं
दिल मगर हँसने लगा आया बड़ा कुछ भी नहीं
Afkar Alvi
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अमीर इमाम के अश'आर अपनी पलकों पर
तमाम हिज्र के मारे उठाए फिरते हैं
Ameer Imam
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शाम थी हिज्र की हाल मत पूछना
आँख थकने लगे तो जिगर रो पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
हिज्र में इश्क़ यूँँ रखा आबाद
हिचकियांँ तन्हा तन्हा लेते रहे
Siraj Tonki
हिज्र में इश्क़ यूँँ रखा आबाद
हिचकियाँ तन्हा तन्हा लेते रहे
Siraj Tonki
कितना भी दर्द पिला दे ख़ुदा पी सकता हूँ
ज़िन्दगी हिज्र से भर दे मिरी जी सकता हूँ

हर दफ़ा दिल पे ही खा के हुई है आदत ये
बंद आँखों से भी हर ज़ख़्म को सी सकता हूँ
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Faiz Ahmad
तुम्हारा हिज्र पूरा हो गया है
मैं अब से शे'र कहना छोड़ दूँगा
Faiz Ahmad
किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे
हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
Sawan Shukla
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हिज्र में अब वो रात हुई है जिस
में मुझ को ख़्वाबों में
रेल की पटरी, चाकू, रस्सी, बहती नदियाँ दिखती हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से
पर जी रहे हैं और भी हम इत्मीनान से
Ankit Maurya
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सुकून देती थी तब मुझ को वस्ल की सिगरेट
अब उस के हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
Upendra Bajpai
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महीनों तक रहा करते थे सब मेहमान आँखों में,
मगर अब ख़्वाब भी आते नहीं वीरान आँखों में

ज़मान ए हिज्र कहने को रिवाज़ ए इश्क़ ही तो है,
मगर क्या क्या नहीं होता है इस दौरान आँखों में
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Darpan
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बता रहा है झटकना तेरी कलाई का
ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का

मैं ज़िंदगी को खुले दिल से खर्च करता था
हिसाब देना पड़ा मुझ को पाई-पाई का
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Azhar Faragh
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मर्म हँसने का समझ पाए ज़रा हम देर से
वस्ल जिस को कह रहे थे हिज्र की बुनियाद थी
Atul K Rai
उभर कर हिज्र के ग़म से चुनी है ज़िंदगी हम ने
वगरना हम जहाँ पर थे वहाँ पर ख़ुद-कुशी भी थी
Naved sahil
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अभी तो जान कहता फिर रहा है तू
तुझे हम हिज्र वाले साल पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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तुम्हारा बैग भी तय्यार कर के रक्खा है
अकेली हिज्र के आज़ार क्यूँ उठाऊँ मैं
Zahraa Qarar
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दर्द-ए-मुहब्बत दर्द-ए-जुदाई दोनों को इक साथ मिला
तू भी तन्हा मैं भी तन्हा आ इस बात पे हाथ मिला
Abrar Kashif
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
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Tehzeeb Hafi
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नाप रहा था एक उदासी की गहराई
हाथ पकड़कर वापस लाई है तन्हाई

वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है
हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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सब दे रहे हैं दिल मुझे अपना निकाल के
दरअस्ल मैं ने शे'र कहे हैं कमाल के

अब आप सोच लीजिए मजबूरियाँ मेरी
हिज्र-ओ-विसाल तय करूँँ सिक्का उछाल के
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Tanoj Dadhich
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उम्र शायद न करे आज वफ़ा
काटना है शब-ए-तन्हाई का
Altaf Hussain Hali
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ऐ दोस्त जुदाई में तेरी कुछ ऐसे भी लम्हे आते हैंसजों पे भी तड़पा करता हूँ काँटों पे भी राहत होती है
Saba Afghani
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क्यूँँ बुरा भला कहें किसी को भी अगरचे हम
बन गए हैं हिज्र में जो साहिब-ए-किताब अब
Amaan Pathan
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बस इतनी सी दूरी ये मैं हूँ ये मंज़िल
कहाँ आ के फूटे हैं पाँव के छाले
Qamar Jalalvi
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क्यूँँ हिज्र के सभी को क़िस्से सुना रहे हो
ग़म बेचते हो सब को ग़म की दुकान हो तुम
Amaan Pathan
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल
अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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हम तुम में कल दूरी भी हो सकती है
वज्ह कोई मजबूरी भी हो सकती है
Bedil Haidri
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वस्ल में रंग उड़ गया मेरा
क्या जुदाई को मुँह दिखाऊँगा
Meer Taqi Meer
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मुझे लिटा तो दो क़ब्र में तुम पर आँख मेरी खुली ही रखना
ज़रा सी दूरी पे हम सफ़र है मुझे पता है मुझे ख़बर है
Amaan Pathan
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जिन झूटे सच्चे ख़्वाबों की ता'बीर ग़म-ए-तन्हाई है
उन झूटे सच्चे ख़्वाबों से तुम कब तक दिल बहलाओगे
Mushfiq Khwaja
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क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
Firaq Gorakhpuri
यही दीवार-ए-जुदाई है ज़माने वालो
हर घड़ी कोई मुक़ाबिल में खड़ा रहता है
Shakeb Jalali
सब कुछ पहले जैसा लगने लगता है
हम में जैसे इक मैसेज की दूरी है
Anfal Rafique
हिज्र का बोझ है अल्फ़ाज़ से उठने का नहीं
रोने वालों को तसल्ली नहीं शाने दीजे
Ashfaq Nasir
हिज्र कटता है मेरा जून की गर्मी की तरह
एक लम्हा जहाँ सदियों की तरह होता है
Shakir Dehlvi
वो हसीं रात जो थी सोके गुजार दी मैं ने
अब इस हिज्र में न जाने कब नींद आए
karan singh rajput
इतनी महोब्बत के बा'द भी फासला बढ़ाओगे तुम
मतलब मिरी मजबूरी का पूरा फ़ाएदा उठाओगे तुम
karan singh rajput
वस्ल हिज्र वादे सब इक आह में शरीक थे
हम किसी की महफ़िल ए निकाह में शरीक थे
Aarush Sarkaar
की एक ये है मेरा दुख बट नहीं रहा मुझ सेे
है ये भी इक तेरा हिज्र कट नहीं रहा मुझ सेे
Shivraj Singh Gurjar
हिज्र दर-अस्ल आशिक़ों के लिए
एक तमग़े की तरह होता है
Saarthi Baidyanath
हमें भी हिज्र में आराम जब आया
तिरे लब पर कोई और नाम जब आया
Govind kumar
इक क़दम की थी दूरी वहाँ की जहाँ
आने में जाने कितने ज़माने लगे?
Alankrat Srivastava
तन्हाई हो, हिज्र हो, बातें करने को तरसे ये दिल,
इश्क़ हुआ वो जिस
में ये हालात मुसलसल रहते हों
Read Full
Hasan Raqim
ये भी कैसी मजबूरी है
दोनों के बीच में दूरी है

तय है उस का नेता बनना
जिस के हाथ में छूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '
मुझे तुम याद ना आना कभी भी
मैं तुम को भूल जाना चाहता हूँ

सताएं हिज्र की रातें तुम्हें भी
मैं इतना याद आना चाहता हूँ
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Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
न बहें तो क्या करें फिर आप ही कहिए ज़रा
आप सागर से नदी का फासला तो देखिए
Abhishek Shukla
सबका जो इन दिनों है मसीहा बना हुआ
उस सेे ये पूछना कि मोहब्बत का क्या हुआ?

हँसता हूँ मैं जो हिज्र में तो पूछते हैं सब
पतझड़ के दिन में पेड़ ये कैसे हरा हुआ?
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Rituraj kumar
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तुम्हारा हिज्र बड़े ही सुकून से गुज़रा
भटकते रहना था और बस मलाल करना था
Monis faraz
क्या होगा फिक्र ये करें क्यूँ हम ही ख़ामख़ाह
इस हिज्र में जलाएँ न अब हम जी ख़ामख़ाह

तुम सेे बिछड़ के दिल मिरा रोया है उम्र भर
ऐसा लगा कि ज़िंदगी हमनें जी ख़ामख़ाह
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Das Kanpuri
मैं पहले भी तो तुम से ये कह चुका हूँ
मुश्किल से शब-ए-हिज्र को सह चुका हूँ

कभी नींव पक्की मोहब्बत की थी जिस की
वही मैं किला हूँ जो अब ढ़ह चुका हूँ
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Kohar
कि जिस की बातों से सब को लुभा रहा है तू
ये किस के हिज्र का क़िस्सा सुना रहा है तू

न जाने क्यूँ किसी की एक भी नहीं सुनता
'मनीष' ख़ुद को ख़ुदा क्यूँ बना रहा है तू
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Manish Nauhwar
उस के हिज्र का इक लम्हा जो मैं ने बरसों बरस जिया
उस ने तो बस तागा खींचा मैं ने खूब उधेड़ा दुख
Shivam chaubey
इश्क़ का कैसे करे इज़हार दिल
हिज्र से डरता है मेरे यार दिल
Shajar Abbas
शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही
रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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अपनी कहानी फिर कभी पूरी सही
मुझ सेे बिछड़ना तेरी मजबूरी सही
karan singh rajput
ग़म के लब से मिला के अपने लब
जाँ सुनो ग़म को चूमना तुम भी

हिज्र में होना ना उदास कभी
हिज्र में मुझ सा झूमना तुम भी
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Chandan Sharma
जन्म दिन हिज्र का आने को है
बरसी-ए-इश्क़ है कुछ रोज़ में अब
Santy sharma
बड़ा ही ख़ुश्क है ये हिज्र-ए-आलम, ज़ख़ीरे दोनों अब कम पड़ रहे हैं
यूँँ मुरझाने लगे ख़्वाबों के जंगल, मिरी आँखों से पत्ते झड़ रहे हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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जान-ए-जाना तुम्हारे हिज्र के बा'द
मय-कदा बन गया ठिकाना मेरा
Shajar Abbas
तिरी-मेरी ये दूरी कह रही है
कहानी फिर अधूरी रह गई है

अभी आंगन में बैठे तो ख़याल आया
कि बातें सब ज़रूरी रह गई हैं
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Muhammad Fuzail Khan