Khyaal Shayari - Soft thoughts, memories, and dil ke ehsaas in words

Khyaal shayari captures the subtle thoughts and silent emotions that stay within the heart. It reflects those gentle moments of soch, yaad, and tasawwur that define our inner world. These verses beautifully express what often remains unspoken but deeply felt.

khyaal shayari
मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
Abhishek shukla
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soch shayari
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
Hasrat Mohani
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tasawwur shayari
पहले तो मेरी याद से आई हया उन्हें
फिर आइने में चूम लिया अपने-आप को
Shakeb Jalali
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ehsaas shayari
गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए
वगर्ना याद थीं हम को शिकायतें क्या क्या
Abdul Rahman Ehsaan Dehlavi
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fikr shayari
आँखों की नींद दोनों तरह से हराम है
उस बे-वफ़ा को याद करें या भुलाएँ हम
Nazeer Banarasi
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याद भी आता नहीं कुछ भूलता भी कुछ नहीं
या बहुत मसरूफ़ हूँ मैं या बहुत फ़ुर्सत में हूँ
Bharat Bhushan Pant
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बिछड़ गया हूँ मगर याद करता रहता हूँ
किताब छोड़ चुका हूँ पढ़ाई जारी है
Ali Zaryoun
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हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन'
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
Balmohan Pandey
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कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में
इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए
Anjum Rehbar
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तुम को हिचकी लेने से भी दिक़्क़त थी
मैं ने तुम को याद ही करना छोड़ दिया
Mehshar Afridi
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भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
मोहब्बत करने वाला इस लिए बर्बाद रहता है
Munawwar Rana
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दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
Salman Zafar
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मेरा ख़याल तेरी चुप्पियों को आता है
तेरा ख़याल मेरी हिचकियों को आता है
Kumar Vishwas
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छोड़ कर जाने का मंज़र याद है
हर सितम तेरा सितमगर याद है

अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है
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Salman Zafar
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ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख़्शी है
कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं
Munawwar Rana
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कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
Faiz Ahmad Faiz
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कितने नादाँ हैं तेरे भूलने वाले कि तुझे
याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे
Ahmad Faraz
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इस ज़िन्दगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब
इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम
Ahmad Faraz
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याद रखने में ही भलाई है
मर भी सकते हैं भूलने में उसे
Fahmi Badayuni
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ज़रा सी बात सही तेरा याद आ जाना
ज़रा सी बात बहुत देर तक रुलाती थी
Nasir Kazmi
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कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हम ने
हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं
Abbas Tabish
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याद भूले हुए लोगों को किया जाता है
भूल जाओ कि तुम्हें याद किया जाएगा
Charagh Sharma
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उस की याद आई है साँसों ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
Rahat Indori
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किसी को याद रख के भूल जाना
किसी का भूल जाना याद रहना
Rachit Dixit
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
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Tehzeeb Hafi
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तो क्या ऐसे ही रोना आ गया था
नहीं वो याद लहजा आ गया था
Shadab Javed
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मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया
Jaun Elia
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याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं
Jaun Elia
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हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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जाते जाते आप इतना काम तो कीजे मिरा
याद का सारा सर-ओ-सामाँ जलाते जाइए
Jaun Elia
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तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी
कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो
Jaun Elia
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तू इस तरह से मिला फिर मलाल भी न रहा
तेरे ख़याल में अपना ख़याल भी न रहा

कुछ इस अदास झुकी थी हया से आँख तेरी
हमारी आँख में कोई सवाल भी न रहा
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Subhan Asad
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ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर
तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई
Subhan Asad
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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई
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Subhan Asad
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अपनी तन्हाई मिरे नाम पे आबाद करे
कौन होगा जो मुझे उस की तरह याद करे
Parveen Shakir
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वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
Parveen Shakir
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चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस
लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस
Nomaan Shauque
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भूलना चाहा अगर उस को कभी
और भी वो याद आया देर तक
Nawaz Deobandi
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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से
Majrooh Sultanpuri
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दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
Nasir Kazmi
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एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
Firaq Gorakhpuri
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ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में
Firaq Gorakhpuri
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अब तो उन की याद भी आती नहीं
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं
Waseem Barelvi
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याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
कल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा
Javed Akhtar
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याद तो होंगी वो बातें तुझे अब भी लेकिन
शेल्फ़ में रक्खी हुई बंद किताबों की तरह
Parveen Shakir
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वही फिर मुझे याद आने लगे हैं
जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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यूँँही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना
तिरी याद तो बन गई इक बहाना
Sahir Ludhianvi
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रहता है इबादत में हमें मौत का खटका
हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद
Akbar Allahabadi
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
Bashir Badr
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ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं
Aalok Shrivastav
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तअल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना
कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में
तिरी याद आँखें दुखाने लगी
Adil Mansuri
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कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा
Amjad Islam Amjad
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
Nasir Kazmi
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वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
Dagh Dehlvi
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है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
Saghar Siddiqui
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नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
Hasrat Mohani
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तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक
Aalok Shrivastav
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थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब
Momin Khan Momin
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किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत
ख़ुद हम को मोहब्बत का सबक़ याद नहीं है
Hafeez Banarasi
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हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके
तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके
Hafeez Jalandhari
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याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
Jamal Ehsani
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है
सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
Meer Taqi Meer
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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
Josh Malihabadi
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ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह
Sudarshan Fakir
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फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
Sajid Premi
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रात यूँँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ इस तरह से याद आते रहे हो
कि अब भूल जाने को जी चाहता है
Akhtar Shirani
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याद आओ मुझे लिल्लाह न तुम याद करो
मेरी और अपनी जवानी को न बर्बाद करो
Akhtar Shirani
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मुद्दतें हो गईं बिछड़े हुए तुम से लेकिन
आज तक दिल से मिरे याद तुम्हारी न गई
Akhtar Shirani
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सहज याद आ गया वो लाल होली-बाज़ जूँ दिल में
गुलाली हो गया तन पर मिरे ख़िर्क़ा जो उजला था
Wali Uzlat
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वो तमाशा ओ खेल होली का
सब के तन रख़्त-ए-केसरी है याद
Faez Dehlvi
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
Iqbal Ashhar
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दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ
Sahir Ludhianvi
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वो नहीं मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के ना दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
Bashir Badr
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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तुम्हारी याद का रंग डाल कर के
कहा तन्हाई ने होली मुबारक !
Bhaskar Shukla
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जब भी कोई मंज़िल हासिल करता हूँ
याद बहुत आती हैं तेरी ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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तुम सेे बिछड़ जाने का ख़याल अच्छा है
क्योंकि अभी मेरा भी हाल अच्छा है

उस ने पूछा तुम्हें कितनी महोब्बत है मुझ सेे
मैं ने कहा मालूम नहीं सवाल अच्छा है
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karan singh rajput
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फ़िक्र-ए-ईजाद में गुम हूँ मुझे ग़ाफ़िल न समझ
अपने अंदाज़ पर ईजाद करूँँगा तुझ को
Jaun Elia
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अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर
अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था
अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
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Jaun Elia
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मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू
बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू
Muzammil Raza
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम
कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
Momin Khan Momin
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ
जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं
बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं

ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो
मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
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Azhar Iqbal
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गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है
होता है पहरों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से
Agha Hashr Kashmiri
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और कम याद आओगी अगले बरस तुम
अब के कम याद आई हो पिछले बरस से
Swapnil Tiwari
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ये भी तो जब्र-ए-वक़्त है तू मुझे याद भी नहीं
जैसे सँभल गए हो तुम वैसे सँभल गया हूँ मैं
Noon Meem Danish
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कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है
एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे
उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
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Aadil Rasheed
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उठा के लाते हैं सहरा से रोज़ ख़ुद को हम
बड़े सलीक़े से इक याद छोड़ आती है
Jaani Lakhnavi
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धूप में कौन किसे याद किया करता है
पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता
तो या'नी उस को अपने घर का रास्ता नहीं पता

ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे
पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
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Ruqayyah Maalik
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सोच कर पाँव डालना इस में
इश्क़ दरिया नहीं है दलदल है
Renu Nayyar
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ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे
Mirza Ghalib
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इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ
हम सितारों ने ये सोचा है कि हिजरत कर जाएँ

दौलत-ए-ख़्वाब हमारे जो किसी काम न आई
अब किसी को नहीं मिलने की वसिय्यत कर जाएँ
Read Full
Idris Babar
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सब शाह भी, घोड़े भी, पियादें भी है उस के
और इस पे वो चालें भी ग़ज़ब सोच रहा है
Aabi Makhnavi
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मैं अपने बा'द बहुत याद आया करता हूँ
तुम अपने पास न रखना कोई निशानी मेरी
Abbas Tabish
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जब भी आता है दिसम्बर ग़म के टाँके खुलते हैं
याद है यूँँ तेरा जाना और कहना ख़ुश रहो
Neeraj Neer
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