Religion Shayari Collection - Faith, spirituality, and divine connection expressed through soulful words

Religion shayari beautifully reflects the essence of faith, spirituality, and the deep bond between a soul and the divine. Whether it is about bhakti, imaan, or inner peace, these verses express devotion and truth in a poetic form. Perfect for those seeking sukoon and meaning, religion shayari connects emotions with belief.

dharm shayari
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए
तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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mazhab shayari
तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया
इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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imaan shayari
जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना
मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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aastha shayari
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ibadat shayari
तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं
ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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bhakti shayari
ख़ुदा को मान कि तुझ लब के चूमने के सिवा
कोई इलाज नहीं आज की उदासी का
Zafar Iqbal
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shraddha shayari
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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deen shayari
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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khuda shayari
जिस दिन मिरी जबीं किसी दहलीज़ पर झुके
उस दिन ख़ुदा शिगाफ़ मिरे सर में डाल दे
Kaif Bhopali
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bhagwan shayari
ज़िंदगी कहते हैं जिस को चार दिन की बात है
बस हमेशा रहने वाली इक ख़ुदा की ज़ात है
Unknown
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dharm shayari
ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है
Khumar Barabankvi
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mazhab shayari
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को
कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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बना कर हम ने दुनिया को जहन्नुम
ख़ुदा का काम आसाँ कर दिया है
Rajesh Reddy
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ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम
Unknown
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रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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Bhaskar Shukla
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यहीं तक इस शिकायत को न समझो
ख़ुदा तक जाएगा झगड़ा हमारा
Shariq Kaifi
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मरने वालों को भी मिलते नहीं मरने वाले
मौत ले जा के ख़ुदा जाने कहाँ छोड़ती है
Krishna Bihari Noor
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ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख़्शी है
कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं
Munawwar Rana
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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत
जिसे पैरों तले रौंदा गया है

तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म
तुम्हारा कौन सा अपना गया है
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Ali Zaryoun
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क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
Faiz Ahmad Faiz
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उस की याद आई है साँसों ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
Rahat Indori
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के 'हैलो' सुनते ही कट कर दिया है उस ने मेरा फ़ोन
ख़ुदा का शुक्र है आवाज़ तो पहचानता है वो
Zubair Ali Tabish
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कभी अल्लाह मियाँ पूछेंगे तब उन को बताएँगे
किसी को क्यूँ बताएँ हम इबादत क्यूँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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जानिए उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं
Jaun Elia
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई
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Subhan Asad
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता
Mirza Ghalib
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
Mirza Ghalib
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मज़हब से मेरे क्या तुझे मेरा दयार और
मैं और यार और मिरा कारोबार और
Meer Taqi Meer
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
Majrooh Sultanpuri
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देवताओं का ख़ुदा से होगा काम
आदमी को आदमी दरकार है
Firaq Gorakhpuri
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पड़ गया है ख़ुदा से काम मुझे
और ख़ुदा का कोई पता ही नहीं
Faizi
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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए
Gopaldas Neeraj
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रहता है इबादत में हमें मौत का खटका
हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद
Akbar Allahabadi
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कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
Ameer Minai
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पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं
तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं
Sudarshan Fakir
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अब तो जाते हैं बुत-कदे से 'मीर'
फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया
Meer Taqi Meer
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'मीर' के दीन-ओ-मज़हब को अब पूछते क्या हो उन ने तो
क़श्क़ा खींचा दैर में बैठा कब का तर्क इस्लाम किया
Meer Taqi Meer
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तुम्हें ये किस ने कहा रब को नहीं मानता मैं
ये और बात कि मज़हब को नहीं मानता मैं
Bhaskar Shukla
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जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता
Kaifi Azmi
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हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
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ख़ुदा ख़ुद को समझते हो तो समझो
मगर इक रोज़ मर जाना है तुम को
Shakeel Azmi
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आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
Behzad Lakhnavi
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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
Arzoo Lakhnavi
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सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने
वो फ़साना जो कभी हम ने सुनाया भी नहीं
Qateel Shifai
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मैदाँ में हार जीत का यूँँ फ़ैसला हुआ
दुनिया थी उन के साथ हमारा ख़ुदा हुआ
Jameel Malik
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वफ़ा जिस से की बे-वफ़ा हो गया
जिसे बुत बनाया ख़ुदा हो गया
Hafeez Jalandhari
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जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा
वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं
Hafeez Jalandhari
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बुत-कदे से चले हो काबे को
क्या मिलेगा तुम्हें ख़ुदा के सिवा
Hafeez Jalandhari
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हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब
उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं
Hafeez Jalandhari
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मैं ख़ुदा का नाम ले कर पी रहा हूँ दोस्तो
ज़हर भी इस में अगर होगा दवा हो जाएगा
Bashir Badr
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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ख़ुदा की क़सम उस ने खाई जो आज
क़सम है ख़ुदा की मज़ा आ गया
Dagh Dehlvi
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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
Bashir Badr
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तुझे करनी है तो मुसावात कर
कि बेहतर हमारे भी हालात कर

मिटा दिल में बनते ये सहराओं को
ख़ुदा अपने बंदों पे बरसात कर
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Siddharth Saaz
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तुम्हारा तो ख़ुदा से राबता है
तो देखो ना, हमारे दुख बता कर
Siddharth Saaz
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होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है
Shaikh Zahuruddin Hatim
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हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर ने गिर के परिंदों से इन्तेक़ाम लिया
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Balmohan Pandey
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जहान वालों से कह दो यहाँ से हट जाएँ
ख़ुदा के और मेरे दरमियाँ से हट जाएँ
Siraj Faisal Khan
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मिरे किरदार जाने दे नज़रअंदाज कर दे
ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत
Vikram Sharma
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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं
Charagh Sharma
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और आसान नहीं हो सकता फ़रियादों को पूरा करना
एक ही आस लगा रक्खी है, ख़ुदा सभी बंदों ने तुझ सेे
Siddharth Saaz
नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का
ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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तुम सेे बिछड़ के हम को यही लग रहा है अब
जैसे मिटा दिया है ख़ुदा ने लिखा हुआ
Siddharth Saaz
ख़ुदा ने फ़न दिया हम को कि लड़के इश्क़ लिखेंगे
ख़ुदा कब जानता था हम, ग़ज़ल में दर्द भर देंगे
Prashant Sharma Daraz
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पहले पानी को और हवा को बचाओ
ये बचा लो तो फिर ख़ुदा को बचाओ
Swapnil Tiwari
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दवा से हल न हुआ तो दुआ पे छोड़ दिया
तिरा मोआ'मला हम ने ख़ुदा पे छोड़ दिया
Khurram Afaq
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कहा था क्या और क्या बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो

हमारी मर्ज़ी कहाँ थी शामिल
तुम अपने मन से ख़ुदा बने हो
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Ritesh Rajwada
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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ये जानते हैं ठीक नहीं माँग रहे हैं
हम एक खंडहर को मकीं माँग रहे हैं

सब माँग रहे हैं ख़ुदा से तेरा जिस्म और
हम हैं, कि फ़क़त तेरी जबीं माँग रहे हैं
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Siddharth Saaz
आती है परेशानी तो आता है ख़ुदा याद
वर्ना नहीं दुनिया में कोई तेरे सिवा याद
Farhat Abbas Shah
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा
तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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अव्वल अव्वल ईजाद हुआ इश्क़ ख़ुदा से
फिर उस के बा'द इस जहाँ में रस्सियाँ बनी

स्कैच को बनाते वक़्त हम उदास थे बहुत
सो शकल हमारी देख कर उदासियाँ बनी
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Nawaaz
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हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
वही होता है जो, वो हो रहा है

ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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Shaad Imran
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ख़ुदा ने चाहा तो सब इंतिज़ाम कर देंगे
ग़ज़ल पे आए तो मतले में काम कर देंगे
Shuja Khawar
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हम नहीं वो जो करें ख़ून का दावा तुझ पर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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चलता रहने दो मियाँ सिलसिला दिलदारी का
आशिक़ी दीन नहीं है कि मुकम्मल हो जाए
Abbas Tabish
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उस ने फिर प्यार जताया है ख़ुदा ख़ैर करे
कोई तो नेक इरादा है ख़ुदा ख़ैर करे
Nami Nadri
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या तो भरम बना रहे इतना ख़ुदा करे
इनकार अपने होने से वरना ख़ुदा करे

मुश्किल है मेरा काम तो मिल बाँटकर करें
आधा करा दें राम जी आधा ख़ुदा करे
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Vineet Aashna
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ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
वो दिन जो हम ने तिरे हिज्र में गुज़ारे थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री 'ग़ालिब'
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे
Mirza Ghalib
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थे ख़ुदा को मानने वाले बड़ी तादाद में
है तअज्जुब पर ख़ुदा की मानता कोई न था
Rao Nasir
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मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है
ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे
Tehzeeb Hafi
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उम्र भर जिस ने न माँगा हो ख़ुदा से कुछ भी
उस ने बस तुम से मोहब्बत की दुआ माँगी है
Shadab Asghar
हर लड़के में एक ख़राबी होती है
उस को अपना इश्क़ इबादत लगता है
Saurabh Sharma 'sadaf'
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मिरे गुनाह की मुझ को सज़ा नहीं देता
मिरा ख़ुदा कहीं नाराज़ तो नहीं मुझ से
Shahid Zaki
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न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए
ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए
Faryad Aazar
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ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को
मुबारक मुबारक नया साल सब को
Mohammad Asadullah
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दोस्त मेरा ये मानना है एक
एक हम-सब हैं और ख़ुदा है एक

मुझ सेे हर शख़्स रुठ जाता है
मेरा होना भी मसअला है एक
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Vishal Singh Tabish
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हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तेरी आँखें बना डाली तेरा चेहरा बना डाला
Ankit Maurya
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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ख़ुदा के लिए अब न उस सेे मिलो तुम
तुम्हें अब हमारी जलन की क़सम है
Tanoj Dadhich
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हमेशा साथ सबके तो ख़ुदा भी रह नहीं सकता
बना कर औरतें उस ने ज़मीं को यूँँ किया जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
सुनते हैं के मिल जाती है हर चीज़ दुआ से
इक रोज़ तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से
Rana Akbarabadi
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मुहब्बत में हम ने सियासत न की
तभी इश्क़ में कोई बरकत न की

उसे मानता था मैं अपना ख़ुदा
कभी उस की लेकिन इबादत न की
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RAJAT AWASTHI
हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
सब समझते हैं ख़ुदा ख़ुद को यहाँ
कौन डरता है ख़ुदा से आजकल
Ravi 'VEER'
मर न जाऊँ एक दिन ग़म से कहीं
सर-ब-सर कर्ज़े में डूबा हूँ ख़ुदा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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आसमाँ में है ख़ुदा, क्या सब दुआएंँ आसमाँ तक जा रही हैं
मेरी इक फ़रयाद पूरी हो तो मैं मानूँ वहाँ तक जा रही हैं
Saahir
कितनी सराहत से ख़ुदा ने की तिरी कारीगरी
शफ़्फ़ाफ़ शीशे को तराशा, हूर का पैकर दिया
Aditya Pandey
ज़रूरत सब कराती है मोहब्बत भी इबादत भी
नहीं तो कौन बे-मतलब किसी को याद करता है
Umesh Maurya
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कितना भी दर्द पिला दे ख़ुदा पी सकता हूँ
ज़िन्दगी हिज्र से भर दे मिरी जी सकता हूँ

हर दफ़ा दिल पे ही खा के हुई है आदत ये
बंद आँखों से भी हर ज़ख़्म को सी सकता हूँ
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Faiz Ahmad
किस जहाँ में तू बैठ कर देखता है मुझ को ख़ुदा
क्यूँँ ज़मीं पर आ कर सभी ज़ख़्म मेरे भरता नहीं
Raj Tiwari
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है
हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
Meem Alif Shaz
माँ की करते हुए ख़िदमत मुझे आ जाए क़ज़ा
ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ सेे
''Akbar Rizvi"
उतर कर आसमानों से ज़मीं की ख़ाक पर बैठो
ख़ुदा ने सब सेे ऊँची आप को मसनद अता की है
Pawan mahabodhi
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