Faith Shayari - Dil ka bharosa, umeed aur rooh ki taqat

Faith Shayari reflects the power of belief, trust, and inner strength that keeps the heart steady in tough times. Whether it’s vishwas in love, life, or khuda, these lines express hope, patience, and the quiet courage to keep going when everything feels uncertain.

bharosa shayari
हैं बाशिंदे उसी बस्ती के हम भी
सो ख़ुद पर भी भरोसा क्यूँ करें हम
Jaun Elia
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vishwas shayari
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था
तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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imaan shayari
है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से
अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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yakeen shayari
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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aitbaar shayari
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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sabr shayari
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है
इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
Mehshar Afridi
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उसे भी धोका मिलेगा यक़ीन है मुझ को
भरोसा वो भी किसी पर तो कर रहा होगा
Aqib Jawed
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
Kaif Bhopali
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उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
Jaun Elia
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अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
Parveen Shakir
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किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ते निभाना किस क़दर आसान हो जाए
Waseem Barelvi
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मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं
Zehra Nigaah
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सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ
सो वो मुद्दत से अब नहीं आता
Meer Taqi Meer
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
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Abhishek shukla
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या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
Shahryar
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झिझकता हूँ उसे इल्ज़ाम देते
कोई उम्मीद अब भी रोकती है
Shariq Kaifi
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तुझे मेरी मोहब्बत पे ऐतिबार हो जाना
मुमकिन नहीं है गधे का समझदार हो जाना
Bhavesh kumar
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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल
Ammar Iqbal
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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'
Dushyant Kumar
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चलो माना कि रोना मसअले का हल नहीं लेकिन
करे भी क्या कोई जब ख़त्म हर उम्मीद हो जाए
Bhaskar Shukla
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हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे!

मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
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Balmohan Pandey
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
Ibrat Siddiqui
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तूफ़ान की उम्मीद थी आँधी नहीं आई
वो आप तो क्या उस की ख़बर भी नहीं आई

शायद वो मोहब्बत के लिए ठीक नहीं था
शायद ये अँगूठी उसे पूरी नहीं आई
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Khurram Afaq
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कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा
हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था
Shayra kirti
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तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती
मैं राख होने लगा हूँ दिए जलाते हुए
Azhar Iqbal
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं
हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है
Kunwar Bechain
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किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
Lutf Ur Rahman
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इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले
Nadim Nadeem
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मैं अब किसी की भी उम्मीद तोड़ सकता हूँ
मुझे किसी पे भी अब कोई ए'तिबार नहीं
Jawwad Sheikh
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तेरे आने की इक उम्मीद है और
इसी उम्मीद पर क़ाएम है दुनिया
Shubham Sarkar
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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
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Azhar Iqbal
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है
पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं
जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं
Unknown
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे
वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतिबार मुझे
Khumar Barabankvi
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जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
Anand Narayan Mulla
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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हर-चंद ए'तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
Jaan Nisar Akhtar
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वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
Aasi Ghazipuri
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किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
लुटा के बैठोगे सब्र-ओ-क़रार मेरी तरह
Fareed Parbati
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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है
लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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इसी उम्मीद से मैं देखता हूँ रास्ता उस का
वो आएगा ज़मी बंजर में इक दिन घर उगाने को
Kushal "PARINDA"
यक़ीं कैसे करूँँ वादों पे तेरे साथ रहने के
यही वादे किए होंगे उन्होंने भी जो बिछड़े हैं
Priya Dixit
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तुम्हारी ख़ानदानी रस्म रस्म-ए-बेवफ़ाई है
हमीं पागल थे जो तुम पर भरोसा कर लिया हम ने
Shajar Abbas
सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है
A R Sahil "Aleeg"
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
जिस की फ़ितरत ही बे वफ़ाई हो
उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा क्या करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है
हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
Meem Alif Shaz
भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझ को पूछा जा रहा है

ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
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Naeem Akhtar Khadimi
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प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं
बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं

उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर
मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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थी इक वक़्त अब शा'इरी बस बची है
यक़ीं करना मुझ
में मुहब्बत नहीं है
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Parul Singh "Noor"
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सब्र मेरा फ़िक्र में है रोज़-ओ-शब ये सोचता है
दूध में दोनों अँगूठी ढूँढ़ते कैसे लगेंगे
Raj
भरोसा तोड़ कर अच्छा किया तुम ने
मैं दुनिया पर भरोसा करने वाला था
Aatish Alok
अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया
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shaan manral
किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है
Shakeel Jamali
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तुम जितना तो कोई मुझ को ख़ास नहीं
लेकिन फिर भी क्यूँ तुम को विश्वास नहीं

मुझ सेे बेहतर लड़का तो मिल जाएगा
लेकिन मेरी माँ से बेहतर सास नहीं
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Tanoj Dadhich
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इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ
Meer Taqi Meer
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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है
Rakib Mukhtar
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इस दुनिया के कहने पर उम्मीद न रक्खो
पत्थर रख लो सीने पर उम्मीद न रक्खो
Vishal Singh Tabish
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मैं हर शख़्स के चेहरे को बस इस उम्मीद से तकता हूँ
शायद से मुझ को दो आँखें तेरे जैसी दिख जाएँ
Siddharth Saaz
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भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना
मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
Amaan Pathan
ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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ख़्वाब उम्मीद तमन्नाएँ तअल्लुक़ रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
Imran-ul-haq Chauhan
ख़ुद से मैं ये कहता हूँ कि सब ठीक है लेकिन
मुझ को मिरी बातों पे भरोसा भी नहीं है
Amaan Pathan
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ग़लती मिरी है मुझ को तिरा ऐतिबार था
मेरी यही सज़ा है मुझे शर्मसार कर
Amaan Pathan
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सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है
अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर
Yagana Changezi
जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार
शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे
Allama Iqbal
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जिन पे होता है बहुत दिल को भरोसा 'ताबिश'
वक़्त पड़ने पे वही लोग दग़ा देते हैं
Tabish Dehlvi
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बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को
भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून
पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
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Adam Gondvi
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क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ
Aasi Uldani
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वो उम्मीद क्या जिस की हो इंतिहा
वो वा'दा नहीं जो वफ़ा हो गया
Altaf Hussain Hali
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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करूँँ तो कैसे करूँँ तुझ पे मैं यक़ीन बता
नहीं है ख़ुद पे भी जब कोई ऐतिबार मुझे
Amaan Pathan
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उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था
अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते
Fani Badayuni
बहुत ताख़ीर से पाया है ख़ुद को
मैं अपने सब्र का फल हो गई हूँ
Humaira Rahat
जानता हूँ, है जहाँ ये झूठ लेकिन
मैं भरोसा तुम पे करना चाहता हूँ
Charagh
फिर उस ने खोल दिए सारे रास्ते मुझ पर
वो थक गया था मेरा सब्र आज़माते हुए
Shakir Dehlvi
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुम सेे मुँह मोड़ लेते हैं

थी झूठी सब क़स
में, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुम सेे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
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Shashank Tripathi
ये दौर बुरा है तो कल अच्छा भी आएगा
इस वक़्त ज़माने को उम्मीद ये रखनी है
Prashant Sitapuri
मुझे अगले पल का भरोसा नहीं कोई
लोग कहते है सो साल जियेंगे आप
karan singh rajput
दुख की बारिश है और ऐसे में
सब्र कच्चे मकान वाला है
Saarthi Baidyanath
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
ना किसी की आरज़ू है ना किसी का ग़म हमें
ना किसी से चाहिए उम्मीद का मरहम हमें
Aditya
अजी मेरा यक़ीं करिए, वही लड़का है ये जिस के
कभी ए बी सी डी में लड़खड़ाते थे ज़बाँ के पाँव
Aarush Sarkaar
मल्लाह जाने ये सफ़ीना ले चलेगा किस तरफ़
उम्मीद है मुझ को, सफ़र का तजरबा होगा हसीं
Zain Aalamgir
यक़ीं आता नहीं ये ज़ख़्म तुम को इश्क़ में आए
तुम्हें तो इक नज़र भर देखने से घाव भरते हैं
Nishant Choudhary
बातें करो तो ऐसी कि दुनिया यक़ीं करे
ये क्या कि तुम को मेरा कोई मिस्ल मिल गया
Haider Khan
इस ज़िन्दगी के खेल में
तू आख़िरी उम्मीद हैं
Govind kumar
भरोसा ख़ुद पे होता है जहाँ पर
वही पहुँचा है अक्सर आसमाँ पर

बहुत जल्दी समझ लो बात सारँग
कोई अपना नहीं होता यहाँ पर
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Kush Pandey ' Saarang '
बचा लाया हूँ ख़ुद को इक तबाही से
यक़ीं होने लगा था इस ज़माने पर
Prashant Sitapuri
महसूस कर रहा हूँ तेरा शुमार ख़ुद में
सो झाँकने लगा हूँ मैं बार-बार ख़ुद में

तेरी चमक से रौशन हर रहगुज़ार होगा
इतना तो मेरे जुगनू रख ऐतिबार ख़ुद में
Read Full
Karan Sahar
कर रहा हूँ बहुत बड़ी ग़लती
तुझ पे फिर से यक़ीन कर के मैं
Aashish kargeti 'Kash'
उम्मीद से हक़ीक़त कुछ कम बुरी लगेगी
गर आँख में रखोगे, हर दम नमी लगेगी
Zain Aalamgir