Hindustan Shayari - Desh, mitti, aur watan ke jazbaat se bhari shayari

Hindustan shayari reflects the deep love for one’s country, celebrating deshbhakti, unity, and the spirit of watan. These verses capture pride, sacrifice, and emotions connected to Bharat’s rich culture and history. Perfect for expressing patriotism, respect for soldiers, and love for the nation.

hindustan shayari
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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watan shayari
फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग
राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी
Aziz Nabeel
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desh shayari
ये सोचके तो दूसरी कोई मिट्टी को छु'आ नहीं
के बा'द मरने के हिन्दुस्तां में दफनाया जाऊँगा
karan singh rajput
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bharat shayari
बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए
तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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mulk shayari
तिरंगा दिल में है लबों पे हिंदुस्तान रखता हूँ
सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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tiranga shayari
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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sarhad shayari
मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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qaum shayari
फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए
Altaf Mashhadi
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mitti shayari
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
Jafar Malihabadi
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तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते
इस लिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
Waseem Barelvi
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की
मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क आँखें तो दिखाने दो
कहीं बच्चों के बोसे से भी माँ का गाल कटता है
Munawwar Rana
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मिट्टी और पानी भी हमें नाप कर मिलते हैं
तुम गमले में पालने को आसान समझते हो
Vishal Bagh
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दिल भी अजीब ख़ाना-ए-वहदत-पसन्द था
इस घर में या तो तू रहा या बे-दिली रही

उस ने तो यूँँ ही पेड़ बनाया था रेत पर
मिट्टी वहाँ हज़ार बरस तक हरी रही
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Vipul Kumar
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दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है
Nida Fazli
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ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह'
हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे
Majrooh Sultanpuri
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पारा-ए-दिल है वतन की सर
ज़मीं मुश्किल ये है
शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें
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Majrooh Sultanpuri
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मुल्क तो मुल्क घरों पर भी है क़ब्ज़ा उस का
अब तो घर भी नहीं चलते हैं सियासत के बग़ैर
Zia Zameer
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
Khalid Moin
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें
Unknown
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा
Unknown
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भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ
Lal Chand Falak
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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जब से तू ने ये बोला था "बदन का क्या है मिट्टी है"
तब से तेरी पीठ पे मुझ को हरसिंगार उगाने थे
Siddharth Saaz
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हम ने जिम्मेदारी दी है देश चलाने की
फेल हुए तो उन को लानत भी हम ही देंगे
Atul K Rai
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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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Zaki Azmi
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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मैं समझता हूँ मोल मिट्टी का
मेरे खेतों में सोना उगता है
Afzal Ali Afzal
कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
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कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा
मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
Vikram Gaur Vairagi
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है
मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
Siddharth Saaz
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हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ
हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए
Sahir Dehlavi
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तन्हा होना, गुम-सुम दिखना, कुछ ना कहना... ठीक नहीं
अपने ग़म को इतना सहना, इतना सहना... ठीक नहीं

आओ दिल की मिट्टी में कुछ दिल की बातें बो दें हम
बारिश के मौसम में गमले ख़ाली रहना... ठीक नहीं
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Dev Niranjan
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लकीरें खींच के मिट्टी पे बैठ जाता हूँ
यहाँ मकाँ था, ये बाज़ार, ये गली उस की
Ashraf Yousafi
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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है
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Abhishek shukla
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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे
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Kanval Dibaivi
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मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर ख़ाली है बाबूजी
मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी

मिट्टी बेच रहा हूँ जिस
में कोई जाल फ़रेब नहीं
सोना चाँदी दूध मिठाई सब जा'ली है बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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रात की भीगी-भीगी मिट्टी से कुछ उजाले उगा रही होगी
मेरी दुनिया में कर के अँधियारा वो दिवाली मना रही होगी
Tanveer Ghazi
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देख लेता है तो खिलते चले जाते हैं गुलाब
मेरी मिट्टी को ख़ुश-आसार किया है उस ने
Irfan Siddiqi
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देश मेरा जंग तो जीता मगर
लौट कर आया नहीं बेटा मेरा
Divy Kamaldhwaj
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अब तो गाँवो में भी ईंटों के महल बसने लगे
गाँव की मिट्टी से वो ख़ुशबू रूहानी ख़ो गई
Divy Kamaldhwaj
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली'
दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता

एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही
एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
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Ali Zaryoun
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लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो

फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो
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Shajar Abbas
भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
तुम मुझे उतनी ही प्यारी हो मेरी जाँ
जितना प्यारा है कश्मीर इस देश को
Alankrat Srivastava
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बाज़ बनना है तो फिर कद भूल जा
आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

किसलिए डरता है दीवारों से तू

समाँँ को देख सरहद भूल जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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ऐसा नहीं बस आज तुझे प्यार करेंगे
ता'उम्र यही काम लगातार करेंगे

सरकार करेगी नहीं इस देश का उद्धार
उद्धार करेंगे तो कलाकार करेंगे
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Tanoj Dadhich
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ये टूटी चटाई ये मिट्टी का बर्तन
हिकारत से नादान क्या देखता है

ग़रीबी मोहम्मद के घर में पली है
मेरे घर का सामान क्या देखता है
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Anjuman rahi raza
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फिर एक रूह को आना है उस के झाँसे में
कि उस ने फिर से बिछाया है जाल मिट्टी का
Amit Jha Rahi
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घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
Qaisar-ul-Jafri
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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चलो ऐ हिंद के सैनिक कि लहराएँ तिरंगा हम
जिसे दुनिया नमन करती है उस पर्वत की चोटी पर
ATUL SINGH
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तिरंगा शान है मेरी तिरंगा जान है मेरी
तिरंगा सब सेे ऊँचा हो यही पहचान है मेरी
Aves Sayyad
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो

गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
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Tajdeed Qaiser
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ये अलग बात कि मैं छोड़ चुका कूज़ा-गरी
तेरे जैसे तो मैं मिट्टी के बना सकता हूँ
Imran Aami
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है
तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है

बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम
मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
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Bashir Badr
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उस के कूज़ागर को बस उतनी ही मिट्टी कम पड़ी
जितनी मिट्टी लग रही थी दिल बनाने के लिए
Ravindra pareek gurgul
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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क़ौम-ओ-मज़हब क्या किसी का और क्या है रंग-ओ-नस्ल
ऐसी बातें छोड़ कर बस इल्म-ओ-फ़न की बात हो
Sayan quraishi
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं
हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला
Dr Mohsin Khan
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मैं इसी मिट्टी से उट्ठा था बगूले की तरह
और फिर इक दिन इसी मिट्टी में मिट्टी मिल गई
Munawwar Rana
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए

सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
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Neeraj Neer
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं
जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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माथे पे छाप रख दी है मिट्टी की आप ने
शमशीर भी दिखा न सकेगी ग़ुरूर अब
salman khan "samar"
सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा
सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा
Irfan Siddiqi
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ये कैसी सियासत है मिरे मुल्क पे हावी
इंसान को इंसाँ से जुदा देख रहा हूँ
Sabir Dutt
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मिट्टी पे नुमूदार हैं पानी के ज़ख़ीरे
इन में कोई औरत से ज़ियादा नहीं गहरा
Sarvat Husain
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दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं
Wajid Ali Shah Akhtar
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अपनी मिट्टी ही पे चलने का सलीक़ा सीखो
संग-ए-मरमर पे चलोगे तो फिसल जाओगे
Iqbal Azeem
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वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ
रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ
Akbar Allahabadi
कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh Vanza
कारवाँ जिन का लुटा राह में आज़ादी की
क़ौम का मुल्क का उन दर्द के मारों को सलाम
Bano Tahira Sayeed
मैं तो चाक पे कूज़ा-गर के हाथ की मिट्टी हूँ
अब ये मिट्टी देख खिलौना कैसे बनती है
Zeb Ghauri
वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
Allama Iqbal
ख़ाक हुआ तो वजूद फिर से मिट्टी के साथ बाँधा गया
मैं वो बदनसीब पत्थर था जो चिट्ठी के साथ बाँधा गया
Murli Dhakad
गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा
एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं
Nilesh Barai
भले फ़न की कोई सरहद नहीं होती
मगर फ़नकार का इक मुल्क होता है
Saarthi Baidyanath
लड़ने के लिए क़ौम मेरे साथ खड़ा है
सहने के लिए एक फ़क़त आदमी मैं हूँ
Saarthi Baidyanath
अभी कुछ क़र्ज़ बाक़ी है वतन का मेरी साँसों पर
अभी कुछ देनदारी है अभी मैं मर नहीं सकता
Saarthi Baidyanath
फ़क़त इक आबरू महँगी बहुत है
वगरना जिस्म तो मिट्टी है साहब
Kush Pandey ' Saarang '
परिंदों सरहदों पे ध्यान देना
हमारे मुल्क में ही जान देना

हमें नेता से क्यूँँ नफरत है सुन लो
उन्हें आता है केवल ज्ञान देना
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Kush Pandey ' Saarang '
आशिक़ों के नगर में रहते हो
या'नी मिट्टी के घर में रहते हो
Saarthi Baidyanath
हम उस मिट्टी के दाने हैं
जहाँ पग-पग खज़ाने हैं
Saarthi Baidyanath
वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी
Prashant Sitapuri
कभी बिस्मिल से पूछो तुम कभी अशफ़ाक़ से पूछो
वतन क्या चीज़ है यारों भगत आज़ादस पूछो
Prashant Sitapuri
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एक दिन बनेंगे ख़ाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम

भीतर ख़लाए साथ है
बाहरस ठीक-ठाक हम
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Nakul kumar
हमारे मुल्क में चारों तरफ़ है अम्न-ओ-अमान
बहुत दबाव में ये बात कह रहा हूँ मैं
Ramnath Shodharthi
शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
हमें या'नी वतन को अपनें आज़ाद रखना है
Vivek Chaturvedi
अभी जो मुल्क की सूरत
गरी है
हज़ारो साल की मेहनतकशी है
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Saarthi Baidyanath
झूठे नक़ली मुद्दों पर आ मिट्टी डालें
घर-घर में आज आग लगी है पानी डालें
Saarthi Baidyanath
भारत देवालय है, इस के प्रांगण में
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई रहते हैं
Saarthi Baidyanath
कल कल बहती भारत की सब नदियाँ याद करेंगी
ओ जन जन के नायक तुझ को सदियाँ याद करेंगी
Saarthi Baidyanath
रवादारी निभाने की क़सम खाएँ
नया भारत बनाने की क़सम खाएँ
Saarthi Baidyanath
हर किसी की ये ज़िम्मेदारी हो
क़ौम से सबकी क़ौमदारी हो
Saarthi Baidyanath
सुनो इक मुल्क ने रोटी का एटम बम बना कर
उसी से भूखे लोगों की हिफ़ाज़त कर रहा है
Saarthi Baidyanath
वतन के वास्ते सबके फ़राइज़ हैं
वतन की बात करना भी ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath