Sarhad Shayari - Borders, deshbhakti, sacrifice, and emotions beyond lines

Sarhad shayari captures the deep emotions tied to borders, patriotism, and sacrifice. It reflects the courage of soldiers, the love for one’s watan, and the silent stories written along every boundary line. These verses blend pride, pain, and honor into powerful poetic expressions.

sarhad shayari
फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग
राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी
Aziz Nabeel
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seema shayari
बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए
तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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border shayari
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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desh shayari
फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए
Altaf Mashhadi
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watan shayari
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
Jafar Malihabadi
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ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह'
हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे
Majrooh Sultanpuri
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पारा-ए-दिल है वतन की सर
ज़मीं मुश्किल ये है
शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें
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Majrooh Sultanpuri
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अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से
लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से
Akbar Allahabadi
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
Khalid Moin
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें
Unknown
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा
Unknown
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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अज़ल से मेरी हिफ़ाज़त का फ़र्ज़ है उन पर
सभी दुखों को मेरे आस-पास होना है
Rahul Jha
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हम ने जिम्मेदारी दी है देश चलाने की
फेल हुए तो उन को लानत भी हम ही देंगे
Atul K Rai
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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
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ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए
भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बाँधी
Unknown
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है
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Abhishek shukla
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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे

देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे
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Kanval Dibaivi
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देश मेरा जंग तो जीता मगर
लौट कर आया नहीं बेटा मेरा
Divy Kamaldhwaj
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली'
दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता

एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही
एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
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Ali Zaryoun
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लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो

फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो
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Shajar Abbas
तुम मुझे उतनी ही प्यारी हो मेरी जाँ
जितना प्यारा है कश्मीर इस देश को
Alankrat Srivastava
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बाज़ बनना है तो फिर कद भूल जा
आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

किसलिए डरता है दीवारों से तू

समाँँ को देख सरहद भूल जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
ऐसा नहीं बस आज तुझे प्यार करेंगे
ता'उम्र यही काम लगातार करेंगे

सरकार करेगी नहीं इस देश का उद्धार
उद्धार करेंगे तो कलाकार करेंगे
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Tanoj Dadhich
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तुम्हें कैसा लगेगा गर किसी पिंजरे में रख कर के
कोई तुम सेे कहे तेरी हिफ़ाज़त कर रहे हैं हम
Vashu Pandey
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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अपने बदन की तुम भी हिफ़ाज़त न कर सके
हम ने भी ख़ूब ग़ैर के चूल्हे से आग ली
Harsh saxena
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है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला
Dr Mohsin Khan
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए

सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
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Neeraj Neer
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सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा
सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा
Irfan Siddiqi
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मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िन्दगी की उम्र दराज़
Josh Malihabadi
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न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
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दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं
Wajid Ali Shah Akhtar
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वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh Vanza
वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
Allama Iqbal
गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा
एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं
Nilesh Barai
भले फ़न की कोई सरहद नहीं होती
मगर फ़नकार का इक मुल्क होता है
Saarthi Baidyanath
अभी कुछ क़र्ज़ बाक़ी है वतन का मेरी साँसों पर
अभी कुछ देनदारी है अभी मैं मर नहीं सकता
Saarthi Baidyanath
बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए
शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए
Shakl e Alfaaz
तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरू
इस ज़मीं के हैं हम इस
में मिल जाएँगे, पर रहेगा हमेशा वतन मेरे तू
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Hasan Raqim
वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी
Prashant Sitapuri
कभी बिस्मिल से पूछो तुम कभी अशफ़ाक़ से पूछो
वतन क्या चीज़ है यारों भगत आज़ादस पूछो
Prashant Sitapuri
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भूख जैसे मसअले का हल नहीं इस देश में
लोग फिर भी खाने की बर्बादी से रुकते नहीं
karan singh rajput
फूलों की हिफ़ाज़त में लगा दीजिए मुझ को
कांटा हूँ मेरा हक़ है मेरा काम यही है
Ramnath Shodharthi
जो लोग किया करते हैं यादों की हिफ़ाज़त
वो वक़्त की रफ़्तार का रोना नहीं रोते
Ramnath Shodharthi
शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
हमें या'नी वतन को अपनें आज़ाद रखना है
Vivek Chaturvedi
वतन के वास्ते सबके फ़राइज़ हैं
वतन की बात करना भी ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath
वतन में है नहीं कोई भी हिंदुस्तान के जैसा
मुझे मेरा वतन मेरी ज़मीन-ए-हिंद प्यारी है

कईं सारे यहाँ पर रंग भाषा और कलाओं के
हमारा मान और पहचान ये हिंदी हमारी है
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Ravi 'VEER'
हमारी देख के सब कैफ़ियत ये कहते हैं
ये शख़्स जो है गरीबुल वतन सा लगता है
Shajar Abbas
हर किसी का घर हो रौशन इस दिवाली
कोई सूना हो न आँगन इस दिवाली

इस दिवाली कोई भूखा भी न सोए
सब की थाली में हो भोजन इस दिवाली

हर दिया रौशन करे सरहद को जगमग
घुस न पाए कोई दुश्मन इस दिवाली

घर सजाकर करना स्वागत लक्ष्मी का
लक्ष्मी आएगी छन छन इस दिवाली

मन लगाकर करना पूजा तुम "शफ़क़" जी
फिर पटाख़े होंगे दन दन इस दिवाली
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
ग़मों के बा'द होंठों पर मुझे मुस्कान रखना है
हथेली पर हमें दुश्मन से आगे जान रखना है

अगर मैं ना रहा तो तुम भी सरहद को चले जाना
तिरंगे से लिपट आएँ यही अरमान रखना है
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Harshwardhan Aurangabadi
जो घर, गली, शहर, देश खोया ज़रूर लेंगे
नए रखो नाम हम पुराना ज़रूर लेंगे

सुनो कि तुम जितना सह सको उतना ज़ुल्म करना
ये याद रखना, के हम भी बदला ज़रूर लेंगे
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Abuzar kamaal
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जहाँ में अजब दिल-सिताँ देखता हूँ
वतन जब ये हिन्दोस्ताँ देखता हूँ
Umrez Ali Haider
दिवाने पन की अपने भी कोई सीमा नहीं यारो
जुनूँ में ख़ुद ही ख़ुद से ख़ुद का ही सर फोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
नफ़रतों की हार तय है ,प्रेम की बुनियाद है
इस लिए तो देश ये था और ज़िंदाबाद है
Aatish Alok
वतन का दुलारा गया आसमाँ को
कि कितनों का प्यारा गया आसमाँ को

ज़मीं ने सितारे लुटाए फ़लक पे
ज़मीं से सँवारा गया आसमाँ को
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Chandan Sharma
हथेली पे लिए जाँ फिरने वालो, अब
वतन को है ज़रूरत ख़ूँ की ख़ूँ दीजे
Irshad Siddique "Shibu"
मैं हुनर-मंद की फौज से आ गया बाहर
मैं अकल-मंद होता मगर आ गया बाहर
FARHAN ASHRAF
मात्र पचपन-साठ ही घर हैं हमारे गाँव में
हाँ मगर ऊँचे कई सर हैं हमारे गाँव में

खेतिहर उन
में ज़ियादा और अपनी फ़ौज के
नौ सिपाही पाँच अफ़सर हैं हमारे गाँव में
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Jatin shukla
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है हिंदुस्तान मेरी जाँ वतन पागल दीवानों का
के अंदाज़ा तू ओ नादाँ अभी कुछ कम लगाता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
तुम भला उस प्रेम की गहराई क्या समझोगे जानाँ
जो कभी ख़्वाबों में भी अपनी न सरहद लाँघता है
Harsh saxena
न जाने पढ़ाया यही मीडिया ने
इसी देश को तो लड़ा हम रहे हैं
Raunak Karn
वतन पर फ़िदा हो कभी हम
हमेंँ भी शहादत मिले फिर
MOHSIN JAHANGIR
वतन की ख़ाक पर हक़ है बहुत उन का बहुत उन का
कि जो हैं मिट गए इस को बनाने में वतन जैसा
Kaviraj " Madhukar"
ग़ज़ल कैसे में कह पाता, मुहब्बत की नहीं उस ने
गले कैसे मैं लग जाता, इजाज़त दी नहीं उस ने

मैं ये दिल दे के आया ख़ूब-सूरत उस हसीना को
भले बेचैन के दिल की हिफ़ाज़त की नहीं उस ने
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Sarthak Bechen
था वतन से प्यार उन को इस कदर
प्यार के दिन जाँ वतन को दे गए
Sanskar Shrivastav
जो इश्क़ को वतन कहे
हर रोज़ इश्क़ में जिए
Anansha
इस ज़माने में भी इक लड़का तुम्हें यूँँ चाहता है
अपने रब से वो तुम्हारी जैसी बेटी माँगता है

तुम भला उस प्रेम की गहराई क्या समझोगे जानाँ
जो कभी ख़्वाबों में भी अपनी न सरहद लाँघता है
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Harsh saxena
बेटे जो भेजे हैं सरहद से बुला लो साहब
कोख माँओं की उजड़ने से बचा लो साहब
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
बतौरे ख़ास उस की तो हिफ़ाज़त हो
किसी घर की शजर गर एक औरत हो

घरों में जिन के पूजी जाती हैं नारी
वहीं पर सिर्फ़ बरकत की इजाज़त हो
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Harsh Raj
उस तरफ़ से वो पुकरेगा हमें
जिस तरफ़ हैं तार सरहद पे लगे
Arohi Tripathi
सरहद लांँघी जा सकती हैं
सरहद अगर मुहब्बत में हो
Pankaj murenvi
इक तमन्ना अजब शहीद हुई
ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई

एक दो साल तो लगेंगे उसे
शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
मोहब्बत की लकीरों में नहीं शामिल मेरा नाम
वतन की आबरू पे मर मिटेंगे है यही पैग़ाम
Praveen Maurya
वो छोड़ गया है साथ हमारा कर के नम आँखें
कि हिफ़ाज़त जिस की गाहे करती थी हर-दम आँखें
Sandeep dabral 'sendy'
मज़हब पर लड़ने वालों होश में आ जाओ वरना
छोटा-मोटा झगड़ा इक दिन सरहद में बदलेगा
Sandeep dabral 'sendy'
अरे ख़ुद-कुशी करने वाले ज़रा रुक
वतन पर मरो ऐसे क्या मर रहे हो
Pritam sihag
जो वतन पर निसार हो जाए
वो भगत सिंह के जैसा लाल कहाँ
Navneet krishna
उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहीं
ये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहीं

उस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवस
हम सेे भी बदन की सरहद पार हुई नहीं
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Sabir Hussain
सादगी देख के हुए पागल
सादगी देख के मोहब्बत की

सादगी ने ही फिर फँसाया हमें
सादगी ने ही फिर हिफ़ाज़त की
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Vineet Dehlvi
ज़ालिम से डरने वालों ज़रा याद तो करो
थी सैंकड़ो की फ़ौज बहत्तर के सामने
Mohammad Aquib Khan
कि क्या बतलाऊंँ मैं कितनी मोहब्बत है
वतन से यार माँ जितनी मोहब्बत है
Irshad Siddique "Shibu"
खुशबुएँ लूटने वाला भी वही ठहरा है
जो कि मामूर था गुलशन की हिफ़ाज़त के लिए
Irshad 'Arsh'
जो सियासत यहाँ पे करते हैं
देशद्रोही हैं देश पाल कहाँ
Navneet krishna
बस नबी के शान की ख़ातिर हमीं
चल दिए तन्हा फ़कत मैदान में

दुश्मनों की फ़ौज जब हो सामने
उस घड़ी हो ताज़गी ईमान में
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Faizan Faizi
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
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"Nadeem khan' Kaavish"
हिफ़ाज़त कर रहा है तू मगर ये जान जानी है
यहाँ पर सबकी बस दो चार दिन की ही कहानी है

मैं था तेरे मुक़द्दर में नहीं तो सब्र कर ऐ यार
ये मेरा या न तेरा फ़ैसला है आसमानी है
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Sayeed Khan
जाने कितने फूल शहीद हुए हैं
यूँँ ही इश्क़ नहीं फैला दुनिया में
Irshad Siddique "Shibu"
मेरे वतन को इन सियासी लोगों ने ही खा लिया
ख़बर में अब ख़बर कहाँ, वही दो-चार रहते हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
वतन से मोहब्बत भी तो है ज़रूरी
वतन ही न होता तो हम भी न होते
Meem Alif Shaz
वतन के लिए हम भी लड़ते अगर हम
तुम्हारी तरह अपने पैरों से चलते
Meem Alif Shaz
दुआएँ साथ जिस के हो वतन की
वो क्या जाने कि रण में हार क्या है
ATUL SINGH
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इक तपस्या ये विविधता ही बनेगी शक्ति अपनी
इक ये परिभाषा बने बस देश भर में भक्ति अपनी
"Dharam" Barot
इश्क़ की इस क़ैदस मुझ को रिहाई कब मिलेगी
देश तो आज़ाद कब का बंदिशों से हो चुका है
Vikas Shah musafir
सभी का सर यहाँ है फ़ख़्र से ऊँचा मिरे भाई
वतन जो क़ैद था पहले अभी आज़ाद है प्यारे
Faizan Faizi
फ़क़त कुछ चंद लोगों ने ये जांँ दे कर बताया है
वतन की शा़न की ख़ातिर,सभी को एक रहना है
Faizan Faizi
छू न पाए उसे देख कर आ गए
उस बदन की हिफ़ाज़त कड़ी थी बहुत
Rachit Sonkar
आप भी ईमान की अब तो हिफ़ाज़त कीजिए
शिर्क के माहौल में रब की इबादत कीजिए
Danish Balliavi
लानत हो हुकूमत पे सदा हाकिम-ए-क़लमी
इंसाफ़ से महरूम हैं मज़लूम वतन के
Shajar Abbas
वतन से हर किसी को इश्क़ होता है
लिखे वेदिक वतन पर जाँ लुटाते चल
Vedic Dwivedi
सेठ अनपढ़ नेता अनपढ़ ये कहानी है बताई
देश में ऐसी पढ़ाई की दशा किस ने बनाई
"Dharam" Barot
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