Shaheed Shayari - Desh ke liye balidaan aur veerta ki shayari

Shaheed shayari captures the spirit of sacrifice, courage, and deep love for the nation. It reflects the emotions behind balidaan, honoring those who gave their lives for the country. These verses inspire pride, remembrance, and respect for the heroes who became amar in the hearts of people.

अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से
लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से
Akbar Allahabadi
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अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है
Jaani Lakhnavi
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मर के पाया शहीद का रुत्बा
मेरी इस ज़िन्दगी की उम्र दराज़
Josh Malihabadi
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न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
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है अगर तुम को यहाँँ होना अमर
तो कहो ना यार ग़ालिब सी ग़ज़ल
Alankrat Srivastava
बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए
शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए
Shakl e Alfaaz
जिस ने अपनी जंग लड़ी हो शिद्दत से
उस ने अपना नाम अमर कर लेना है
Abhinav Baishander
वफ़ा जो तुम निभा लेती यक़ीं जानो
मैं शाइ'र हूँ जहाँ भर में अमर होती
A R Sahil "Aleeg"
ता-क़यामत अमर नहीं होता
मैं सुख़नवर अगर नहीं होता
रूपम कुमार 'मीत'
वो बदलता जा रहा है सूरतें अपनी मगर
मैं चलाता जा रहा हूँ काम इक तस्वीर से

शहर को बदले उसे तो इक ज़माना हो गया
अब भला क्या काम उस को गाँव बैठे 'वीर' से
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Ravi 'VEER'
वो लाज हया वो नैनों की थी नुमाइश जो
उफ़ यार कहूँ इक इस आ'मार में ही थी जो
Chirag Agarwal 'kush'
इक तमन्ना अजब शहीद हुई
ज़िंदगी मौत की मुरीद हुई

एक दो साल तो लगेंगे उसे
शा'इरी तू भी तो जदीद हुई
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
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"Nadeem khan' Kaavish"
जाने कितने फूल शहीद हुए हैं
यूँँ ही इश्क़ नहीं फैला दुनिया में
Irshad Siddique "Shibu"
मैं ने इतने पत्थर फेंके पानी में
जितने पत्थर खाए यार जवानी में

रो देता हूँ मैं अक्सर वीरानी में
मैं भी क्या कर जाता हूँ नादानी में

जब कुछ किरदारों पर मैं ने ग़ौर किया
जाना सब झूठे हैं यार कहानी में

हमनें थोड़ा ज़ोर लगाया फिर क्या था
रिश्ता टूट गया था खींचा-तानी में

तुम ने सीता का दुख देखा हैरत है
राम भी तो मौजूद थे राम-कहानी में

'वीर' ज़माना आँखों की झीलों का है
कौन यहाँ पर डूब रहा है पानी में?
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Ravi 'VEER'
फिर से रावण को जलाने के लिए हम मर रहे हैं
इक तरीक़े से अमर उस को भई हम कर रहे हैं
Sahil Verma
हवा तो बस बहाना है दिया बुझने ही वाला था
अमर कोई नहीं सब कुछ यहाँ पर छोड़ जाना था

लगाई थी किसी अनजान ने आवाज़ तो देखा
दिखा था सिर्फ़ साया साथ जो चलने ही वाला था
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"Dharam" Barot
बुलाती अवध नगरी की राम आएँ
सभी है मगन गीत हम रोज़ गाएँ

कुटी राम की जो महल हो गई थी
उसे कर अमर राम घर आज आएँ
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Lalit Mohan Joshi
निभा लेती वफ़ा गर इश्क़ में तुम तो यक़ीं जानो
मैं शाइ'र हूँ किताबों में जहाँ भर में अमर होती
A R Sahil "Aleeg"
शूर भी था वीर भी वो
था धनुष का तीर भी वो
Vinod Ganeshpure
मुझे भी तो पिलाओ मैं नशा भी आज़माऊॅं
अमर हूँ मैं मुझे पी ज़हर भी तो मर गया है
Vishakt ki Kalam se
अभी बदन का ख़ून नया है अभी बहाना बाक़ी है
अभी लहू से भाल सजाना तिलक लगाना बाक़ी है

अभी कहाॅं वो ज़ेहन हुआ है जो छूने भर से ढह जाए
अभी अज़ल पर नाम वतन का अमर कराना बाक़ी है
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Krishna Mishra
प्यार था मैं ने अमर उस को किया है
दिल उसी के नाम मेरा कर दिया है
Vinod Ganeshpure
रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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Bhaskar Shukla
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है
Nawaz Deobandi
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ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह'
हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे
Majrooh Sultanpuri
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पारा-ए-दिल है वतन की सर
ज़मीं मुश्किल ये है
शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहें
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Majrooh Sultanpuri
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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
Kaifi Azmi
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मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
Khalid Moin
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फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग
राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी
Aziz Nabeel
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें
Unknown
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा
Unknown
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भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ
Lal Chand Falak
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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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लड़ सको दुनिया से जज़्बों में वो शिद्दत चाहिए
इश्क़ करने के लिए इतनी तो हिम्मत चाहिए

कम से कम मैं ने छुपा ली देख कर सिगरेट तुम्हें
और इस लड़के से तुम को कितनी इज़्ज़त चाहिए
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Nadeem Shaad
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सारी हिम्मत टूट गई, बच्चों से ये सुन कर
अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है

फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब
मुझ
में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
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Aman G Mishra
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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
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बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए
तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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तिरंगा दिल में है लबों पे हिंदुस्तान रखता हूँ
सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ सेे रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है
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Abhishek shukla
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है
कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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वो बहुत चालाक है लेकिन अगर हिम्मत करें
पहला पहला झूट है उस को यक़ीं आ जाएगा
Zafar Iqbal
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लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो

फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो
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Shajar Abbas
भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
बाज़ बनना है तो फिर कद भूल जा
आँख में रख लक्ष्य और हद भूल जा

किसलिए डरता है दीवारों से तू

समाँँ को देख सरहद भूल जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती
न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं
बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं

उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर
मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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कर के थोड़ी हिम्मत लिखना चाहता हूँ
नेताओं को लानत लिखना चाहता हूँ

जिस को पढ़कर सारे तुझ सेे प्यार करें
तेरी ऐसी सीरत लिखना चाहता हूँ
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Sanskar Shrivastav
चलो ऐ हिंद के सैनिक कि लहराएँ तिरंगा हम
जिसे दुनिया नमन करती है उस पर्वत की चोटी पर
ATUL SINGH
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तिरंगा शान है मेरी तिरंगा जान है मेरी
तिरंगा सब सेे ऊँचा हो यही पहचान है मेरी
Aves Sayyad
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बिछड़ते वक़्त भी हिम्मत नहीं जुटा पाया
कभी भी उस को गले से नहीं लगा पाया

किसी को चाहते रहने की सज़ा पाई है
मैं चार साल में लड़की नहीं पटा पाया
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Shadab Asghar
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मुझे यक़ीं है ये ज़हमत नहीं करेगा कोई
बिना गरज़ के मोहब्बत नहीं करेगा कोई

न ख़ानदान में पहले किसी ने इश्क़ किया
हमारे बा'द भी हिम्मत नहीं करेगा कोई
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Asad Taskeen
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत
ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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जँचने लगा है दर्द मुझे आप का दिया
बर्बाद करने वाले ने ही आसरा दिया

कल पहली बार लड़ने की हिम्मत नहीं हुई
मुझ को किसी के प्यार ने बुजदिल बना दिया
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Kushal Dauneria
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सब की हिम्मत नहीं ज़माने में
लोग डरते हैं मुस्कुराने में

एक लम्हा भी ख़र्च होता नहीं
मेरी ख़ुशियों को आने जाने में
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Vishal Singh Tabish
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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है नाज़ मुझ को अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सब सेे आला
Dr Mohsin Khan
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए

सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
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Neeraj Neer
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सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा
सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा
Irfan Siddiqi
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फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए
Altaf Mashhadi
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दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
Jafar Malihabadi
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दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं
Wajid Ali Shah Akhtar
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वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
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ऐ वतन इक रोज़ तेरी ख़ाक में खो जाएँगे सो जाएँगे
मर के भी रिश्ता नहीं छूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से
Rahat Indori
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कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh Vanza
वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
Allama Iqbal
ऐसा नहीं कि मैं ने मोहब्बत नहीं करी
इज़हार करने ही कि बस हिम्मत नहीं करी
Shaad Imran
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गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा
एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं
Nilesh Barai
हो गई तुम से मोहब्बत क्या करूँं तुम ही कहो
मैं ने न जाना था मेरी इतनी हिम्मत हो जाएगी
Parwez Akhtar
भले फ़न की कोई सरहद नहीं होती
मगर फ़नकार का इक मुल्क होता है
Saarthi Baidyanath
अभी कुछ क़र्ज़ बाक़ी है वतन का मेरी साँसों पर
अभी कुछ देनदारी है अभी मैं मर नहीं सकता
Saarthi Baidyanath
मुहब्बत गर नदी है तो किनारे हैं जी हम दोनों
बनो हिम्मत इक दूजे के सहारे हैं जी हम दोनों
Sandeep Gandhi Nehal
उस की याद दिलाती है
बारिश की हिम्मत देखो
Pawan
वो तो मुझ को भूल गया होगा लेकिन
मैं अब तक रूठा हूँ हिम्मत तो देखो
Pawan
तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरू
इस ज़मीं के हैं हम इस
में मिल जाएँगे, पर रहेगा हमेशा वतन मेरे तू
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Hasan Raqim
वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी
Prashant Sitapuri
कभी बिस्मिल से पूछो तुम कभी अशफ़ाक़ से पूछो
वतन क्या चीज़ है यारों भगत आज़ादस पूछो
Prashant Sitapuri
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शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
हमें या'नी वतन को अपनें आज़ाद रखना है
Vivek Chaturvedi
ज़माने की नज़र में वो बहुत बेकार होता है
जिसे भी ज़ात के बाहर किसीसे प्यार होता है

नहीं हिम्मत बग़ावत कर सके कोई ज़माने से
सो शादी के घरों में आज भी व्यापार होता है
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Ritik Bhatt 'ghulam'
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वतन के वास्ते सबके फ़राइज़ हैं
वतन की बात करना भी ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath
वतन में है नहीं कोई भी हिंदुस्तान के जैसा
मुझे मेरा वतन मेरी ज़मीन-ए-हिंद प्यारी है

कईं सारे यहाँ पर रंग भाषा और कलाओं के
हमारा मान और पहचान ये हिंदी हमारी है
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Ravi 'VEER'
लहरों की है आदत बग़ावत की
लेकिन मेरी कश्ती मेरी हिम्मत
Meem Alif Shaz
हमारी देख के सब कैफ़ियत ये कहते हैं
ये शख़्स जो है गरीबुल वतन सा लगता है
Shajar Abbas
वो उस्ताद है या फ़ाज़िल लगता है
वो ही शख़्स मुझ को क़ाबिल लगता है

हिम्मत बाँध कर आया हूँ मैं वरना
पहले-पहल मिलना मुश्किल लगता है
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Rudransh Trigunayat
हर किसी का घर हो रौशन इस दिवाली
कोई सूना हो न आँगन इस दिवाली

इस दिवाली कोई भूखा भी न सोए
सब की थाली में हो भोजन इस दिवाली

हर दिया रौशन करे सरहद को जगमग
घुस न पाए कोई दुश्मन इस दिवाली

घर सजाकर करना स्वागत लक्ष्मी का
लक्ष्मी आएगी छन छन इस दिवाली

मन लगाकर करना पूजा तुम "शफ़क़" जी
फिर पटाख़े होंगे दन दन इस दिवाली
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Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
ग़मों के बा'द होंठों पर मुझे मुस्कान रखना है
हथेली पर हमें दुश्मन से आगे जान रखना है

अगर मैं ना रहा तो तुम भी सरहद को चले जाना
तिरंगे से लिपट आएँ यही अरमान रखना है
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Harshwardhan Aurangabadi
कहाँ हिम्मत पहाड़ों में हमारा रास्ता रोकें
कलंदर लोग हैं शीशे से पत्थर तोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
जहाँ में अजब दिल-सिताँ देखता हूँ
वतन जब ये हिन्दोस्ताँ देखता हूँ
Umrez Ali Haider
वतन का दुलारा गया आसमाँ को
कि कितनों का प्यारा गया आसमाँ को

ज़मीं ने सितारे लुटाए फ़लक पे
ज़मीं से सँवारा गया आसमाँ को
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Chandan Sharma
हथेली पे लिए जाँ फिरने वालो, अब
वतन को है ज़रूरत ख़ूँ की ख़ूँ दीजे
Irshad Siddique "Shibu"
हुनर तो आज़मा, हिम्मत दिखा, डर मत, क़दम अपना उठा तू अब
ख़ुदा भी फ़ैसला अपना सुनाता है तुम्हारे फ़ैसले पर ही
A R Sahil "Aleeg"
मैं हुनर-मंद की फौज से आ गया बाहर
मैं अकल-मंद होता मगर आ गया बाहर
FARHAN ASHRAF
ए लो अख़बार भी क़ानून भी मुंसिफ़ भी बिके
किस में हिम्मत है हक़ीक़त को हक़ीक़त लिक्खे
Rekhta Pataulvi
ग़ज़ब हिम्मत सुब्ह माँ से विदा बेटी हुई होगी
बिछुड़ना माँ अभी उस सेे महज़ सपना समझती है

सितम गर ये मुझे झूठा कहा तुम ने कयामत है
क़सम खाकर कहूँ तो माँ अभी सच्चा समझती है
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Rudransh Trigunayat
मात्र पचपन-साठ ही घर हैं हमारे गाँव में
हाँ मगर ऊँचे कई सर हैं हमारे गाँव में

खेतिहर उन
में ज़ियादा और अपनी फ़ौज के
नौ सिपाही पाँच अफ़सर हैं हमारे गाँव में
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Jatin shukla
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है हिंदुस्तान मेरी जाँ वतन पागल दीवानों का
के अंदाज़ा तू ओ नादाँ अभी कुछ कम लगाता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
तुम भला उस प्रेम की गहराई क्या समझोगे जानाँ
जो कभी ख़्वाबों में भी अपनी न सरहद लाँघता है
Harsh saxena
वतन पर फ़िदा हो कभी हम
हमेंँ भी शहादत मिले फिर
MOHSIN JAHANGIR
वतन की ख़ाक पर हक़ है बहुत उन का बहुत उन का
कि जो हैं मिट गए इस को बनाने में वतन जैसा
Kaviraj " Madhukar"
अलग तुम बेवफ़ाओं की वकालत है
हमारी फिर किधर कैसी अदालत है

अगर ये है समझदारी जो तुझ में है
तो मुझ को गर्व है मुझ में जहालत है
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Harsh Raj
था वतन से प्यार उन को इस कदर
प्यार के दिन जाँ वतन को दे गए
Sanskar Shrivastav
जो इश्क़ को वतन कहे
हर रोज़ इश्क़ में जिए
Anansha