Shikwa Shayari - Dil ke shikwe, complaints, aur unspoken feelings in words

Shikwa shayari expresses the quiet complaints and unspoken grievances of the heart. It captures those moments when words are held back but emotions run deep—be it in love, life, or relationships. Through soft yet powerful lines, shikayat and gile-shikwe find a poetic voice.

गिले शिकवे ज़रूरी हैं अगर सच्ची मुहब्बत है
जहाँ पानी बहुत गहरा हो थोड़ी काई रहती है
Munawwar Rana
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वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक
Zubair Ali Tabish
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए
कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते
Jaun Elia
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ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा
Hafeez Jalandhari
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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
Shaad Arfi
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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
Aziz Nabeel
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अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे
Majeed Akhtar
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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उस को नंबर दे के मेरी और उलझन बढ़ गई
फोन की घंटी बजी और दिल की धड़कन बढ़ गई
Ana Qasmi
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जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हम सेे
कह गए हम को बे-वफ़ा हम सेे

राह तकते रहे थे फिर भी वो
नईं मिले आख़िरी दफ़ा हम सेे
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Shivam Mishra
बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
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Chandan Sharma
आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात
बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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हर एक चौखट खुली हुई थी हर इक दरीचा खुला हुआ था
कि उस की आमद पे दर यहाँ तक कि बेघरों का खुला हुआ था

ये तेरी हम्म ने हमें ही उलझन में डाल रक्खा है वरना हम पर
तमाम साइंस के फ़लसफ़ों का हर एक चिट्ठा खुला हुआ था
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Saad Ahmad
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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से
Waseem Barelvi
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पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा
Rais Amrohvi
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गरचे इस ने ज़ख़्म दिया है गहरा तुम से
दूसरा शिकवा दुनिया से है पहला तुम से
Gourav Kumar
तेरे चेहरे को लिखूँ चाँद या फिर चाँद को चेहरा
मेरी रातें इसी उलझन में सारी बीत जातीं हैं
Shakir Dehlvi
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
आसमान में उड़ने का ख़्वाब है और पैरों तले ज़मीं है
Shashank Tripathi
तुझ सेे गीला शिकवा करना बेकार है मेरी जाँ
तुझे झगड़ना आता है बस बात को समझना नहीं
karan singh rajput
अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं
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karan singh rajput
मिल चुके हैं ख़ाक में
और वो बेख़बर है कब से

अब निकल चुकी है ’जान’
और ’जान’ खफा है कब से
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Animesh Choubey
दिल के सारे गिले शिकवे, दफ़ा कीजिए
आप वफ़ा करने आए हैं, वफ़ा कीजिए
Kuldeep Nagar
तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को
किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
ठीक हैं ख़फ़ा होना जुदा होना ठीक नहीं है
इश्क़ होना ठीक हैं ख़ुदा होना ठीक नहीं है
Praveen Bhardwaj
दिल नहीं लग रहा है मेरा कही
तुम अभी भी ख़फ़ा हो क्या मुझ सेे
Ved prakash Pandey
है ये अजीब शिकवा कार ए जहाँ से मेरा
कुछ कर नहीं रहे हैं और वक़्त भी नहीं है
Shivam chaubey
आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
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Sandeep Thakur
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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कि शायद मैं भी बच जाता मुहब्बत के ख़राबे से
मैं ने उस रोज़ दिल की बात गर मानी नहीं होती
karan singh rajput
तुम्हारी ओर से हाँ में इशारा चाहता हूँ मैं
भुला दो तुम गिले शिकवे सहारा चाहता हूँ मैं

मैं ख़ुद से ही न मिल पाया तुम्हें खो कर मेरे हमदम
तुम्हें पाकर नहीं खोना दुबारा चाहता हूँ मैं
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shivanshu mishra Rochak
कुछ ख़ास ही मुझ सेे लगावट है उसे
बाक़ी किसी से वो खफ़ा होती नहीं
Sarvjeet Singh
ग़म हमें औलाद का है ग़ैर से शिकवा नहीं
अब तुम्हें हम क्या बताएं क्या परेशानी हुई
Rudransh Trigunayat
लफ़्ज़ों के इस्तिमाल में कच्चा हूँ इस लिए
समझो ये दिल की बात हमें तुम सेे प्यार है
Akash Rajpoot
तुम्हें मुझ सेे अगर शिकवा रहा, कुछ कहना मत मुझ सेे
मोहब्बत में हूँ जानाँ, मैं तुम्हारी आँखें पढ़ लूँगा
Manish jain
शिकवा सजा हुआ है ये लब पर गुलाब के
बोसा हमारा आज 'शजर' ने नहीं लिया
Shajar Abbas
न कोई शिकवा शिकायत, न रोना-धोना, न कोशिश करूँँगा मैं रोकने की
फ़क़त इतना कह दो, इस बेवफ़ाई की क्या वजह है? ख़ता आख़िर क्या है मेरी
A R Sahil "Aleeg"
न वो ख़ुश मुझ सेे न मैं ख़ुश , ख़फा वो भी है, मैं भी हूँ
मुसलसल ही चल रही है लड़ाई अपनी ख़ुदा से
A R Sahil "Aleeg"
साँप और नेवले की कहानी हुई ज़िन्दगी अब मेरी
रब ख़फ़ा, सब ख़फ़ा, मर भी सकता नहीं जी भी पाता नहीं
A R Sahil "Aleeg"
रेशम जैसे लोग हैं हम
उलझन में ही रहते हैं
Spilledink
रहा है इस साल भी रब ख़फ़ा मुझ सेे, मैं भी रब से
न बदला अपनी दुआ मैं, न रब ने अपना इरादा
A R Sahil "Aleeg"
तू ख़फ़ा है और मेरा आजकल
दोस्तों से राब्ता होता नहीं
Dileep Kumar
कई अरबों की आबादी, इश्क़ हो इक से जुनूनी, और
वो भी जब बे-वफ़ा बन जाए, ख़ुदा, शिकवा तो बनता है
A R Sahil "Aleeg"
यार समझो मिरी बात को
तुम ख़फ़ा हो मगर हम नहीं
Arohi Tripathi
वो बे-वफ़ा रहे पर मुझ को वफ़ा रहेगी
आख़िर वो कब तलक ही मुझ सेे जुदा रहेगी

मुझ को यक़ीन इक दिन वो आ मिलेगी मुझ सेे
तितली भी फूल से यूँँ कब तक ख़फ़ा रहेगी
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Ravi 'VEER'
दिल में लाखों शिकायतें हैं पर
बे-वफ़ाओं से क्या गिला शिकवा
Ajeetendra Aazi Tamaam
हमें तो ठीक से तो शा'इरी भी अब नहीं आती
पता तो है नहीं कैसे ग़ज़ल शिकवा उतर आया
Raunak Karn
आप की सरकार है जी आप ही फ़रमाइए
हम अगर बोले तो फिर हम सेे खफ़ा हो जाओगे
Ajeetendra Aazi Tamaam
करूँँ शिकवा क्या ख़ुदा से दुआ जो लौटा दी उस ने
नबी-मुर्सल नूह की भी दुआ वो लौटा चुका है
A R Sahil "Aleeg"
ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है
मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
Shivam Mishra
उदासी कौन लाया है मिरे घर
मिरा भाई मुझी से अब ख़फ़ा है
Meem Alif Shaz
ज़रूरी है ज़माना भी ख़फ़ा हो
हमें तो अब बदलना है ज़रूरी
Meem Alif Shaz
तंग आ चुके हैं अपनी ही जब ज़िंदगी से हम
शिकवा करें ए जान-ए-जाँ फिर क्या किसी से हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
हर महफ़िल में नज़र आता है गुम सुम
उलझन है या मोहब्बत या तन्हाई
Meem Alif Shaz
शब-ए-हिज्राँ में गुज़री उम्र है सारी
नहीं मालूम मुझ को शहर ये क्या है

कि दिल की बात काग़ज़ पर सजाता हूँ
नहीं मालूम मुझ को बहर ये क्या है
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Prince
उस को किसी और से शिकायत हो तो शिकवा भी करे
बंदा परेशाँ जो अगर ख़ुद से हो तो क्या ही करे
Kartik tripathi
किसी से जब हमें शिकवा नहीं तो
किसी की फिर शिकायत क्यूँ करें हम
Irshad 'Arsh'
मेरी दीवानगी से वो ख़फ़ा था
सफ़र में साथ छोड़ेगा पता था
Aatish Indori
जो था क़िस्मत में मेरी वो मिला मुझ को
न शिकवा है किसी से नइँ गिला मुझ को
Shivam Mishra
हर तरफ़ से बिखर गया हूँ मैं
ढूँढ़ लो अब किधर गया हूँ मैं

एक उलझन लिपट चली मुझ से
इस जहाँ में जिधर गया हूँ मैं
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shaan manral
वो मुझ से भी खफ़ा है, होने दो
ये तो दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
क्या क्या है मुझ को प्यार से शिकवा, सुनाऊँगा
इक दिन मैं दिल की बात उसे जा सुनाऊँगा
Hasan Raqim
चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुम सेे लेकिन
मिट्टी की प्यास पे बादल ये बरस जाता है
Pritam sihag
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब
हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बे-वफ़ा हैं अब
Shivam Mishra
जो कहा था वो किया तो क्या खता मुझ सेे हुई है
बे-वफ़ा से की वफ़ा फिर वो खफ़ा मुझ सेे हुई है

जिस नज़र से ज़िंदगी को देख मरता मर चुका है
उस नज़र से की मोहब्बत क्या जफ़ा मुझ सेे हुई है
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Chetan
ख़ुशबू फूलों से ख़फ़ा बैठी है राज
वो गया है बाग़ से कुछ इस तरह
Raj Tiwari
आ गया हम को जौन जैसा फ़न
जिस को मिलना ज़रा ख़फ़ा करना
pankaj pundir
दीवार ने सब को जुदा कर ही दिया
भाई को भाई से ख़फ़ा कर ही दिया
Meem Alif Shaz
मेरे साथ दफ़्न हो न जाए दिल में जो भी है
सोचा जाते जाते शिकवा तुम सेे करता जाऊँ मैं
Prince
मुझ से ख़फ़ा है तो होने दो
ये दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
यही हसरत लिए फिरता हूँ अक्सर
कोई मेरे भी दिल की बात सुन ले
Sohil Barelvi
कभी वो दिन निकल आए कभी वो रात हो जाए
कभी ऐसा नहीं होता कि उन सेे बात हो जाए

कभी सोचा नहीं था ये कि तुम हम सेे खफ़ा होगे
कभी होगी लड़ाई जो हमारी मात हो जाए
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Afzal Sultanpuri
यार तू बेवजह ही मुझ सेे ख़फ़ा है
बेवफ़ाई आजकल रस्म-ए-वफ़ा है
Aatish Indori
इतनी जल्दी तो दिल की बात नहीं होगी इस दोस्ती में
हूँ मैं इक ऐसा फूल कि जो खिलने में वक़्त लगाता है
Sumer Soni
जब पूरा दिन उलझन से लड़ने में लग जाता है
कोई शाम को घर जा कर कैसे कुछ मीठा बोले
Meem Alif Shaz
ख़्वाब को साथ मिल कर सजाने लगे
घर कहीं इस तरह हम बसाने लगे

कर दिया है ख़फ़ा इस तरह से हमें
मान हम थे गए फिर मनाने लगे
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Ayush Shukla
किसी से ख़फ़ा मैं हुआ ही नहीं
कभी मुझ को ये हक़ मिला ही नहीं
Vaseem 'Haidar'
इतनी आशाएँ मत जोड़ो अब मुझ सेे
खफ़ा खफ़ा रहता है मेरा रब मुझ सेे

तुम को भी वैसे ही छोड़ के जाना है
जैसे दूर गए हैं सब के सब मुझ सेे
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Ashish Rajput
बस एक शिकवा है तुम सेे के मुझ सेे मिलने कभी
हक़ीक़तों में नहीं ख़्वाब में तो आना था
Shahzan Khan Shahzan'
कोई रंज नहीं है न कोई शिकवा है
तू ने जो कुछ भी मेरे साथ किया है
Abdulla Asif
कल तलक हम भी तुम्हारी जान थे, लेकिन
आज मर भी जाएँ तो शिकवा नहीं तुम को
AYUSH SONI
अपनी ख़ुशी से कोई शिकवा ही नहीं
ये कैसे आए जब यहाँ ग़म रहता है
Meem Alif Shaz
मुझे छोड़ दो, मुझ को शिकवा नहीं है
ये टूटा तो है यार बिखरा नहीं है
jaani Aggarwal taak
ख़ुद से नाराज़ ज़माने से ख़फ़ा रहते हैं
जाने क्या सोच के हम सब से जुदा रहते हैं
Gulshan
बस देखते ही रह गए जब सामना हुआ
शिकवा हुआ न उन सेे कोई भी गिला हुआ
Ajeetendra Aazi Tamaam
नहीं मुझ को कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत है
जिसे अपना बनाना है उसे अपना बना लो तुम
Ali Nazim Adam
उस दिन खफ़ा होने की कैसी रात थी
वो पास बैठी थी न कोई बात थी
Meem Alif Shaz
ख़ता जिस की भी हो छोड़ो ये बातें और गिले शिकवे
नहीं बिगड़ा है अब भी कुछ सुनो अब लौट आओ तुम
A R Sahil "Aleeg"
क्यूँ चुप है तू कोई सवाल तो कर
मेरे दिल का भी कुछ ख़याल तो कर

थोड़ा ग़ुस्सा, कोई शिकवा, या फिर
यूँँ ही चुप रहने का मलाल तो कर
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Meem Alif Shaz
मैं बना हूँ जो अब ज़रा सा कुछ
दोस्त भी है बुझा बुझा सा कुछ

अब मुलाक़ात भी नहीं करता
वो मुझे लगता है ख़फ़ा सा कुछ
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Meem Alif Shaz
तुम को हम से उलझन कौन हो तुम
इश्क़ के जानी दुश्मन कौन हो तुम

जिस को दिया था कंगन तुम वो नहीं
लौटा रही हो कंगन कौन हो तुम
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Rovej sheikh
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मैं अकेला तो नहीं हूँ इस सफ़र में ज़िन्दगी
ख़्वाब, ज़िम्मेदारी, उलझन साथ चलते हैं मिरे
Meem Alif Shaz
बड़ी उलझन थी जीवन में बहुत गहरा अँधेरा था
तेरे क़दमों में जब सोया बड़ा दिलकश सवेरा था

मुझे यूँँ कामयाबी की ज़मानत मिल गई घर से
निकलते वक़्त मेरे सर पे माँ ने हाथ फेरा था
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Mohd Ashahad
कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत भी नहीं उस सेे
जफ़ा हो या सितम सब इश्क़ का इन'आम लिख देना
A R Sahil "Aleeg"
न कर तू इश्क़ से शिकवा
रहम ये कर नहीं सकता
A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ मज़हब रब सनम और आशिक़ी इस की 'इबादत
इस में शिकवा कुफ़्र है और इल्तिज़ा जुर्म-ए-कबीरा
A R Sahil "Aleeg"
पत्थरों से कोई शिकवा ही नहीं है मेरे दोस्त
बात ये है तू ने फेंके थे हमारी ही तरफ़
Meem Alif Shaz
भुलाकर हर गिला शिकवा मिलो सब यार होली में
जुड़ें हर टूटते दिल के वफ़ा के तार होली में

हो जाए नफ़रती हर रंग फीका इन फ़िज़ाओं में
खिले बस एक रंगत ही गुलाल-ए-प्यार होली में
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Vivek Vistar
उस की आँखों की उलझन में उलझे हैं अब तक जैसे
दसवीं में ट्रिग्नोमेट्री की उलझन में जो उलझे थे
Shreesh Mishra
अगर दिल भी ख़फ़ा है कुछ हुआ होगा
तिरी बातों से कोई दिल दुखा होगा

हवा तो क़ैद है अब बद्दुआओं से
दिया तेरा तुझी से ही बुझा होगा
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Meem Alif Shaz
उस के दिल से निकालने पर क्या शिकवा करना
मुझ को बचपन से बाहर रहने की आदत है
Prit
हाए न जाने कैसी उलझन
नाग हज़ारों एक है चंदन
Toyesh prakash
दिल में वहशत है एक उलझन है
आख़िरी रात तो नहीं है मेरी
Almas Rizvi
मुसलसल ज़ेहन में उलझन रहेगी,
पड़ोसी से अगर अनबन रहेगी
Shakir Dehlvi
ज़िन्दगी से हम ख़फ़ा हो के कहाँ जाएँगे शाज़
हम जहाँ जाएँगे ये दुश्वारियाँ होगी वहाँ
Meem Alif Shaz
और क्या यार चाहता हूँ मैं
बस तेरा प्यार चाहता हूँ मैं

जो चले उम्र भर मेरे बाहम
दोस्त दो चार चाहता हूँ मैं

दोस्ती हो या दुश्मनी यारब
आर या पार चाहता हूँ मैं

जिस सेे शिकवा न हो किसी को भी
हाँ वो किरदार चाहता हूँ मैं

जो मिटा दे जहाँ से नफरत को
ऐसी सरकार चाहता हूँ मैं

जीत भी जाऊँ गर ज़माने को
आपसे हार चाहता हूँ मैं

वक़्त आख़िर है आ भी जा ज़ालिम
सिर्फ़ दीदार चाहता हूँ मैं
Read Full
Kumar Aryan