Afsos Shayari - Dil ke pachtawa, regret aur khoi hui baaton ki shayari

Afsos shayari reflects the quiet pain of regret and unspoken emotions. It captures those moments when words were left unsaid or decisions led to loss. Through simple yet deep lines, afsos expresses pachtawa, memories, and the lingering ache of what could have been.

afsos shayari
इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो
Bashir Badr
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अफ़सोस हो रहा है तेरी शक्ल देख कर
क्या कोई तेरा चाहने वाला नहीं रहा
Abbas Tabish
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल
अफ़्सोस ये है उस ने मेरी बात काट दी
Tahir Faraz
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उस को चाहा और चाहत पर क़ायम हैं
पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते
Shadab Asghar
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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ
Waseem Nadir
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बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गया
प्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया
Abroo Shah Mubarak
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बन कर कसक चुभती रही दिल में मिरे इक आह थी
ऐ हम–नफ़स मेरे मुझे तुझ सेे वफ़ा की चाह थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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ये मयख़ाने में बैठ अफ़सोस अब क्यूँ
तेरे हिस्से भी तो जवानी लिखी थी
Amaan Pathan
ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े
बस दूर ही से देख लिया और चल पड़े

दिल में फिर इक कसक सी उठी मुद्दतों के बा'द
इक उम्र के रुके हुए आँसू निकल पड़े
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Shahzad Ahmad
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ज़ुदा हम हो गए अफ़सोस कैसा
फ़लक धरती से कब लिपटा दिखा है
Atul K Rai
हाँ शख़्स था तो मैं सही, उम्मीद करने ख़्वाब की
अफ़सोस के ख़ल्क़त रही है ख़्वाब की ख़ातिर ग़लत
Zain Aalamgir
ये ज़मीं की कसक है कि उस ने सनम
बन के पर्वत है बादल को चूमा हुआ
Alankrat Srivastava
नहीं हो तुम तो क्या अफ़सोस तो है
इसी के साथ कर लेंगे गुज़ारा
Ramnath Shodharthi
दुनिया जो कहती थी वो किए जा रहे थे हम
अफ़सोस आप ने जो कहा था नहीं किया
Dharmesh Solanki
'शजर' अफ़्सोस गुलशन में गुलों का
बदन ख़ारों ने छलनी कर दिया है
Shajar Abbas
ख़ुद को हमारी आँख से ओझल किया गया
इस तरह हम को दोस्तों पागल किया गया

अफ़सोस है शजर मुझे गुलशन को इश्क़ के
हिजरत का कर के फ़ैसला मक़्तल किया गया
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Shajar Abbas
जानाँ अफ़सोस मेरी मय्यत पर
थोड़ा सा तो जता दिया होता
Parvez Zaami
दूर होकर क्या उसे अफ़सोस होगा
कह रहा है जो तुझे अफ़सोस होगा
Vijay Anand Mahir
किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया
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Puneet Mishra Akshat
बहुत अफ़सोस होता है ख़ज़ाने को लुटा बैठे
मोहब्बत जिस से करते हैं उसी को हम गँवा बैठे
Salman ashhadi sahil
गर जो मैं हार जाऊँ तो अफ़सोस करना नहीं
जंग मेरी ख़ुदा से है इंसाँ से थोड़ी न है
A R Sahil "Aleeg"
माज़ी का पछतावा और मुस्तक़बिल का अंदेशा
ता-सिन इंसाँ को बस ख़ूँ के आँसू रुलवाती है
A R Sahil "Aleeg"
तुम्हारा नाम लेने से बड़ी तकलीफ़ होती है
मिरी ख़ुशियाँ तुम्हीं से थीं बहुत अफ़सोस है मुझ को
Ambar
मैं त'अर्रूफ़ कर रहा हूँ उस के आईने से अब
छोड़ कर अफ़सोस क्या वो कर रहा होगा मुझे
Shiv
अब ज़ख़्म गुनाहों पर अफ़्सोस किया जाए
तकलीफ़ अज़िय्यत पर अफ़्सोस किया जाए
Sagar Sahab Badayuni
मैं किस तरह ख़ुश हूँ बर्बाद यहाँ होकर
मेरी ख़ुशियों तुम पर अफ़सोस किया जाए
Sagar Sahab Badayuni
ये शौक सुख़न से अब तो काम नहीं होगा
मेरी शा'इरी तुम पर अफसोस किया जाए
Sagar Sahab Badayuni
किसलिए अफ़सोस करना वत्स शाश्वत कौन है
बा'द मुरझाने के फूल इक फिर नया खिल जाएगा

तू भी मैं भी ये भी वो भी सब हैं मोहरे खेल के
शून्य से उपजा है जीवन शून्य में मिल जाएगा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
हमारी बात से सब बस ख़फ़ा होते सही में अब
हमारा दिल कहे अब बस यहाँ कोई दिवाना हो

हटे बादल यहाँ से और फिर से यार वो मौसम
अरे झंकार दर्दों का कसक फिर से सुहाना हो
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Raunak Karn
ये और बात है तू खाता रहा क़सम
अफ़सोस अब भरोसा लेकिन नहीं रहा
Shadab khan
एक कसक है मेरे सीने में तुझ सेे दूरी की
मिलने तुझ सेे ज़ख़्मों को नोंचता हुआ जाऊँगा

दुख दर्द देख कर हमदर्द न हो जाओ तुम मेरे
तुम सेे मिलने मैं आँसू पोंछता हुआ जाऊँगा
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Pankaj murenvi
अंजाम यही है कि वो छोड़ रहा मुझ को
बर्बाद मुक़द्दर पर अफसोस किया जाए
Sagar Sahab Badayuni
इक कसक दिल में कहीं उठती है
बे-सबब शे'र नहीं होता है
Shadan Ahsan Marehrvi
हाँ इश्क़ में जब से मिरा दिल ये तुम्हारा हो गया
अफ़सोस तब से मौत का मुझ पे इशारा हो गया
Danish Balliavi
मुझे कुछ पल लगा ऐसा कि तुम मेरी अमानत थी
मुझे अफ़सोस इतना सोचने की क्या ज़रूरत थी
Danish Balliavi
हम भी रोते हैं सनम तुझ से मुहब्बत कर के
हम को अफ़सोस भी होता है ये ग़फ़लत कर के
Danish Balliavi
बात इतनी भी न कर बा'द में पछतावा हो
लोग बातों में भी इक बात बना लेते हैं
Hameed Sarwar Bahraichi
मिटते मिटते मिटती है हो अगर कसक कोई
ज़ख़्म चाहे जैसा हो, भरते भरते भरता है
Daagh Aligarhi
हुस्न की बस्ती में अफ़सोस शजर हज़रत-ए-दिल
आतिश-ए-इश्क़ में दामन को जला बैठे हैं
Shajar Abbas
आरजू ख़ाक हो चुकी है सब
और अफ़सोस भी नहीं मुझ को
Sabir Pathan
तुझे अफ़सोस सद-अफ़सोस हो मुझ से बिछड़ने का
तमन्ना है अजल मुझ को जवानी में ही ले जाए
Meem Maroof Ashraf
चार भित्ति, ज़मीं, कुतुब, इक छत
कुछ गज़ाला के, कुछ सबा के ख़त

घर में क़ब्ज़ा जमा के बैठे हैं
हिज्र,मातम, चुभन, कसक, ख़ल्वत
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A R Sahil "Aleeg"
मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ
नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर
Gulshan
इश्क़ ग़म वस्ल हिज्र टीस कसक
गुफ़्तुगू सब यही ग़ज़ल की है
A R Sahil "Aleeg"
मेरी तकलीफ़ कौन समझेगा
मुझ को तकलीफ़ ही नहीं कोई

आँख से आब बह रही है और
मुझ को अफ़सोस भी नहीं कोई
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Sabir Pathan
मुझ को अफ़सोस मेरी सम्त न तू लौट सका
मैं कि देता रहा हर बार सदाएँ तुझ को
Shahzan Khan Shahzan'
कसक कोई जो दिल में है कहीं बाक़ी न वो रह जाए
न जाने कोई लम्हा फिर न अश्कों में कहीं बह जाए
Manohar Shimpi
ग़म, जफ़ा, छल, चुभन, कसक, ज़िल्लत
इश्क़ में कुछ नया नहीं मिलता
A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ की पेटी में ग़म, ज़िल्लत, ख़ल्वत, कसक सभी मिलते
लेकिन वस्ल का सिक्का भी हो यार ज़रूरी थोड़ी है
A R Sahil "Aleeg"
दुख जफ़ा जुल ख़लिश कसक ज़िल्लत
इश्क़ में कुछ नया अता करते
A R Sahil "Aleeg"
कितना आसान था तुझे पाना
फिर भी तू ना मिला मुझे अफ़सोस
Sayeed Khan
है ये अफ़सोस हम तेरे नहीं क़ाबिल
चली है जान पर हम अब भी मुतबादिल
Sohit Singla
अब उस के मरने पर यूँँ इतना अफ़सोस जताते हो
जब वो ज़िंदा था तब उस का हाल कभी पूछा था क्या?
Sarvjeet Singh
सभी कुछ छीन लो मुझ सेे ये मेरा दर्द मत छीनो
कसक के बिन मेरी ये शा'इरी मर जाएगी तन्हा
Nityanand Vajpayee
जिन का था तख़रीबकारों में शुमार
वो हुए हैं बाग़बाँ अफ़सोस है
Shadab Shabbiri
पहचान जो कभी भी नहीं चाहता था मैं
अफ़सोस अब वही मिरी पहचान हो गई
Mohit Subran
हाए अफ़सोस बे-हयाई को
नाम फ़ैशन का दे रहे हैं हम
Shajar Abbas
ख़्वाब कितने हमें दिखाती है
हाए अफ़सोस ये अठारह भी
Meem Maroof Ashraf
पछतावा करना इतना आसान नहीं
शाम हो जाती है सूरज को बुझने में
Meem Alif Shaz
तुम्हारी ही तरह वादे भी झूठे थे तुम्हारे और
मुझे अफ़सोस है मैं ने तेरा हर वा'दा सच माना
ABhishek Parashar
बा'द में बिखरे अगर और भी होगा अफ़सोस
मैं न बच्चों को नए ख़्वाब सजाने दूँगा
''Akbar Rizvi"
अफ़सोस उस पर क्या करूँँगा मैं
जो हाथ में है ही नहीं मेरे
Manoj Devdutt
हुआ फिर सामना तुम सेे अजब ये ज़िंदगानी है
जगी दिल में कसक फिर से कि फिर आँखों में पानी है

ख़ता मेरी मैं आया लौट कर जो शहर को अपने
तुम्हारा क्या रुलाने की तुम्हें आदत पुरानी है
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Rehaan
ये तू किस दुश्मनी की दिल में कसक लाया है
ज़ख़्म भरने के लिए यार नमक लाया है
Rovej sheikh
सोचा था कि इस साल तो मिल जाएगी राहत
अफ़सोस कि इस साल भी जीना ही पड़ेगा
SHIV SAFAR
उम्र-भर वो मेरा दिल दुखाते रहे
और हम थे कि रिश्ता निभाते रहे

मुझ को अफ़सोस है इश्क़ के नाम पर
वो फ़क़त मुझ को उल्लू बनाते रहे
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ABhishek Parashar
अफ़सोस हो भी क्यूँँ मुझे
जो भी किया दिल के लिए
Vinod Ganeshpure
कोई यूँँ ही नहीं रोता है रातों में
सबके दिल में कोई तो कसक होती है
Sahil Verma
तू तो फिर ठीक है नागिन ने डसा है तुझ को
मुझ को अफ़सोस है तितली से डसे जाने का
Marghoob Inaam Majidi
किसी इक रोज़ तुम अफ़सोस मेरा भी करोगे
कभी तुम भी लिखोगे नाम मेरा शा'इरी में
Vishakt ki Kalam se
कोई याद कहानी आई है
ग़म की रात पुरानी आई है

उठती आज कसक दिल में लगता
कोई याद पुरानी आई है
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Neeraj Yadav 'Neer'
कच्चे घर की रौनक़ें पीपल की छाँव छोड़कर
बस गए सब शहर में अफ़सोस गाँव छोड़कर
Shajar Abbas
बा'द में अफ़सोस करने से है अच्छा
वक़्त रहते हम जुदा हो जाएँ जानाँ
ABhishek Parashar
अफ़सोस था और होंठों पे मुस्कान खिली थी
ये इश्क़ की मे'राज थी या ज़िंदा-दिली थी

अंगुश्तरी तोहफ़े में उसे इस लिए दी है
वो याद करेगी किसी सय्यद से मिली थी
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Shajar Abbas
अफ़सोस मुझ को छोड़ के जाने से पेश-तर 
वो जा चुका था मुझ को ख़बर बा'द में हुई
Meem Maroof Ashraf
मुझे लगता था बस तुम ही समझती हो
मगर अफ़्सोस है तुम भी समझती हो
Anand
मन्ज़र कोई नहीं है नहीं रंग-ओ-बू मगर
शादाब मेरा नाम है अफ़सोस कीजिए
Shadab Shabbiri
ग़ैर तो ग़ैर थे जो कुछ भी वो कहते कहते
हाए अफ़्सोस कि तुम ने भी ग़लत मान लिया
Saif Dehlvi
कुछ ख़्वाहिशें थीं बात थी जो अनकही रही
अफ़सोस मुख़्तसर सी मिरी ज़िंदगी रही
Arbab Shaz
बस एक ही अफ़सोस पूरी ज़िंदगी होगा मुझे
आवारगी में वक़्त ज़ाया' कर नहीं पाया मेरा
Yuvraj Singh Faujdar
हुस्न के दम पे हो चाहे पर बड़ी बेबाक हो तुम
मैं बड़े अफ़सोस में हूँ साथ में ही ख़ाक हो तुम

यूँँ अज़िय्यत में मुझे तुम छोड़ कर जा तो रही हो
जिस्म के भूखों को जानो इतनी भी चालाक हो तुम
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Anubhav Gurjar
हमारे पास सब कुछ था वफ़ा भी प्यार भी अफ़सोस
हमारे बीच में यारो ख़ुदा का मसअला भी था
Shivam Prajapati
काग़ज़ की कश्ती कभी हम भी बनाया करते थे
वो बचपन में जहाज़ हम भी उड़ाया करते थे

अफ़सोस वो तो दिन ही चला गया है अब 'महमूद'
वगर्ना हम भी इनसे कहाँ बाज़ आया करते थे
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Mahmood munja
इश्क़ और इश्क़ यही काम किया सारी उम्र
और अफ़सोस ख़सारा ही हुआ इस में भी
A R Sahil "Aleeg"
अफ़सोस करना ही नहीं आता हमें
हासिल किया जो छोड़ जाना है यहीं
Vinod Ganeshpure
नज़र-अंदाज़ कर लो तुम मुझे लेकिन
तुम्हें अफ़सोस भी इक दिन करा देंगे
Vinod Ganeshpure
तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर
कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा
Shadab Shabbiri
हसीन लड़की से दिल लगाना भी इक ख़ता है मुझे पता है
अगर सज़ा में मिले क़ज़ा तो अलग मज़ा है मुझे पता है
Jatin shukla
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ये गूँगों की महफ़िल है निकलना ही पड़ेगा
क्या इतनी ख़ता कम है कि हम बोल पड़े हैं
Waseem Barelvi
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क्या जाने किस ख़ता की सज़ा दी गई हमें
रिश्ता हमारा दार पे लटका दिया गया

शादी में सब पसंद का लाया गया मगर
अपनी पसंद का उसे दूल्हा नहीं मिला
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Afzal Ali Afzal
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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दर्द-ए-मुहब्बत दर्द-ए-जुदाई दोनों को इक साथ मिला
तू भी तन्हा मैं भी तन्हा आ इस बात पे हाथ मिला
Abrar Kashif
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ग़मों में जी रहे है रिंद सारे
खता मत पूछ याँ सागर गिरा है
Nilesh Barai
एक खिड़की है, एक गली है, एक पता है
सौ बार गुजर के भी भुल जाना मेरी खता है
Animesh Choubey
सब एक खता पर मुझ को कहने लगे क्या क्या
मैं ने तो ये समझा था सब मुझ को समझते हैं
Prashant Sitapuri
तुम्हारे ख़्वाब में आना नहीं है
मगर हाँ दूर भी जाना नहीं है

ख़ता ये है कि तुम को चाहता हूँ
सज़ा ये है तुम्हें पाना नहीं है
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Jatin shukla
फिर से इस इश्क़ की ख़ता अब कौन करे
भर चुके ज़ख़्म जो, हरा अब कौन करे
A R Sahil "Aleeg"
न कोई शिकवा शिकायत, न रोना-धोना, न कोशिश करूँँगा मैं रोकने की
फ़क़त इतना कह दो, इस बेवफ़ाई की क्या वजह है? ख़ता आख़िर क्या है मेरी
A R Sahil "Aleeg"
कभी ग़फ़लत में या वहशत में, दिल तोड़ा हो किसी का
ख़ता मुझ सेे ये, हुआ ही नहीं है सरज़द अभी तक
A R Sahil "Aleeg"
तुम चाहो तो फिर मिल सकते हो मुझ से
दिल टूटा है लेकिन मैं वैसा ही हूँ
Meem Alif Shaz
जो कहा था वो किया तो क्या खता मुझ सेे हुई है
बे-वफ़ा से की वफ़ा फिर वो खफ़ा मुझ सेे हुई है

जिस नज़र से ज़िंदगी को देख मरता मर चुका है
उस नज़र से की मोहब्बत क्या जफ़ा मुझ सेे हुई है
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Chetan
एक ख़ता तुम ने की एक ख़ता मैं ने की
फिर ये झगड़ा कैसा हाथ मिलाओ साहिब
Meem Alif Shaz
ये ख़ता है तो क्यूँ ये ख़ता है
जिस
में जाँ हम ही तुम पे फ़िदा हैं
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Danish Balliavi
हम को भी ख़ता करने का इन'आम मिला है
इक झूठ से बचने का भी इल्ज़ाम मिला है
Meem Alif Shaz
कब तक रहूँ मैं एक दिल टूटा हुआ
कब तक सहूँ मैं दर्द तेरे हिज्र का
Sohrab Hussain
ग़म-ए-जुदाई के सागर में डूब जाने दे
पिला दे नीट कि साक़ी न अब मिला पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam