Narazgi Shayari - Dil ki narazgi, khafa lamhe aur rishton ki baatein

Narazgi shayari reflects those quiet moments when the heart feels hurt, ignored, or misunderstood. It captures the emotions of being khafa, expressing unspoken complaints, and the subtle distance in relationships. Whether it's love, friendship, or life, these lines give voice to feelings we often hide.

वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक
Zubair Ali Tabish
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रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
Ahmad Faraz
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए
कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते
Jaun Elia
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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
Shaad Arfi
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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
Aziz Nabeel
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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से
Dagh Dehlvi
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अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे
Majeed Akhtar
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किसी ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो
दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है
Shahid Zaki
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हम सेे
कह गए हम को बे-वफ़ा हम सेे

राह तकते रहे थे फिर भी वो
नईं मिले आख़िरी दफ़ा हम सेे
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Shivam Mishra
बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
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Chandan Sharma
आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से
Waseem Barelvi
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पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा
Rais Amrohvi
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गरचे इस ने ज़ख़्म दिया है गहरा तुम से
दूसरा शिकवा दुनिया से है पहला तुम से
Gourav Kumar
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
आसमान में उड़ने का ख़्वाब है और पैरों तले ज़मीं है
Shashank Tripathi
तुझ सेे गीला शिकवा करना बेकार है मेरी जाँ
तुझे झगड़ना आता है बस बात को समझना नहीं
karan singh rajput
अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं
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karan singh rajput
मुझे उस की हर अदाकारी, याद है
रूठना-मनाना हर किस्सा-कहानी, याद है

तस्वीरें फ़ोन से हटा दी है मैं ने मगर
उस का नंबर आज भी मुँह जबानी, याद है
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Yashvardhan Jain
मिल चुके हैं ख़ाक में
और वो बेख़बर है कब से

अब निकल चुकी है ’जान’
और ’जान’ खफा है कब से
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Animesh Choubey
तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को
किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
ठीक हैं ख़फ़ा होना जुदा होना ठीक नहीं है
इश्क़ होना ठीक हैं ख़ुदा होना ठीक नहीं है
Praveen Bhardwaj
दिल नहीं लग रहा है मेरा कही
तुम अभी भी ख़फ़ा हो क्या मुझ सेे
Ved prakash Pandey
है ये अजीब शिकवा कार ए जहाँ से मेरा
कुछ कर नहीं रहे हैं और वक़्त भी नहीं है
Shivam chaubey
आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
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Sandeep Thakur
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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उस सेे शिकायत होती है
जिस सेे मुहब्बत होती है

ख़ुद रूठना ख़ुद मानना
लड़की की आदत होती है
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karan singh rajput
तेरे हाथों की मेहन्दी से रंजिश मुझे
देख उस
में है चेहरा किसी और का
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Santy sharma
वो रूठना भी क्या है यार
जो फिर कभी लौटा नहीं
Yogamber Agri
कुछ ख़ास ही मुझ सेे लगावट है उसे
बाक़ी किसी से वो खफ़ा होती नहीं
Sarvjeet Singh
ग़म हमें औलाद का है ग़ैर से शिकवा नहीं
अब तुम्हें हम क्या बताएं क्या परेशानी हुई
Rudransh Trigunayat
तुम्हें मुझ सेे अगर शिकवा रहा, कुछ कहना मत मुझ सेे
मोहब्बत में हूँ जानाँ, मैं तुम्हारी आँखें पढ़ लूँगा
Manish jain
इक मुद्दत से इस दिल में एक बे-दर्दी का आलम है
जाने कैसी रंजिश है ये जाने ये कैसा ग़म है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
शिकवा सजा हुआ है ये लब पर गुलाब के
बोसा हमारा आज 'शजर' ने नहीं लिया
Shajar Abbas
न कोई शिकवा शिकायत, न रोना-धोना, न कोशिश करूँँगा मैं रोकने की
फ़क़त इतना कह दो, इस बेवफ़ाई की क्या वजह है? ख़ता आख़िर क्या है मेरी
A R Sahil "Aleeg"
न वो ख़ुश मुझ सेे न मैं ख़ुश , ख़फा वो भी है, मैं भी हूँ
मुसलसल ही चल रही है लड़ाई अपनी ख़ुदा से
A R Sahil "Aleeg"
साँप और नेवले की कहानी हुई ज़िन्दगी अब मेरी
रब ख़फ़ा, सब ख़फ़ा, मर भी सकता नहीं जी भी पाता नहीं
A R Sahil "Aleeg"
रहा है इस साल भी रब ख़फ़ा मुझ सेे, मैं भी रब से
न बदला अपनी दुआ मैं, न रब ने अपना इरादा
A R Sahil "Aleeg"
तू ख़फ़ा है और मेरा आजकल
दोस्तों से राब्ता होता नहीं
Dileep Kumar
कई अरबों की आबादी, इश्क़ हो इक से जुनूनी, और
वो भी जब बे-वफ़ा बन जाए, ख़ुदा, शिकवा तो बनता है
A R Sahil "Aleeg"
यार समझो मिरी बात को
तुम ख़फ़ा हो मगर हम नहीं
Arohi Tripathi
वो बे-वफ़ा रहे पर मुझ को वफ़ा रहेगी
आख़िर वो कब तलक ही मुझ सेे जुदा रहेगी

मुझ को यक़ीन इक दिन वो आ मिलेगी मुझ सेे
तितली भी फूल से यूँँ कब तक ख़फ़ा रहेगी
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Ravi 'VEER'
दिल में लाखों शिकायतें हैं पर
बे-वफ़ाओं से क्या गिला शिकवा
Ajeetendra Aazi Tamaam
हमें तो ठीक से तो शा'इरी भी अब नहीं आती
पता तो है नहीं कैसे ग़ज़ल शिकवा उतर आया
Raunak Karn
आप की सरकार है जी आप ही फ़रमाइए
हम अगर बोले तो फिर हम सेे खफ़ा हो जाओगे
Ajeetendra Aazi Tamaam
करूँँ शिकवा क्या ख़ुदा से दुआ जो लौटा दी उस ने
नबी-मुर्सल नूह की भी दुआ वो लौटा चुका है
A R Sahil "Aleeg"
उदासी कौन लाया है मिरे घर
मिरा भाई मुझी से अब ख़फ़ा है
Meem Alif Shaz
ज़रूरी है ज़माना भी ख़फ़ा हो
हमें तो अब बदलना है ज़रूरी
Meem Alif Shaz
तंग आ चुके हैं अपनी ही जब ज़िंदगी से हम
शिकवा करें ए जान-ए-जाँ फिर क्या किसी से हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
उस को किसी और से शिकायत हो तो शिकवा भी करे
बंदा परेशाँ जो अगर ख़ुद से हो तो क्या ही करे
Kartik tripathi
किसी से जब हमें शिकवा नहीं तो
किसी की फिर शिकायत क्यूँ करें हम
Irshad 'Arsh'
मेरी दीवानगी से वो ख़फ़ा था
सफ़र में साथ छोड़ेगा पता था
Aatish Indori
जो था क़िस्मत में मेरी वो मिला मुझ को
न शिकवा है किसी से नइँ गिला मुझ को
Shivam Mishra
वो मुझ से भी खफ़ा है, होने दो
ये तो दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
क्या क्या है मुझ को प्यार से शिकवा, सुनाऊँगा
इक दिन मैं दिल की बात उसे जा सुनाऊँगा
Hasan Raqim
चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुम सेे लेकिन
मिट्टी की प्यास पे बादल ये बरस जाता है
Pritam sihag
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब
हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बे-वफ़ा हैं अब
Shivam Mishra
जो कहा था वो किया तो क्या खता मुझ सेे हुई है
बे-वफ़ा से की वफ़ा फिर वो खफ़ा मुझ सेे हुई है

जिस नज़र से ज़िंदगी को देख मरता मर चुका है
उस नज़र से की मोहब्बत क्या जफ़ा मुझ सेे हुई है
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Chetan
ख़ुशबू फूलों से ख़फ़ा बैठी है राज
वो गया है बाग़ से कुछ इस तरह
Raj Tiwari
आ गया हम को जौन जैसा फ़न
जिस को मिलना ज़रा ख़फ़ा करना
pankaj pundir
दीवार ने सब को जुदा कर ही दिया
भाई को भाई से ख़फ़ा कर ही दिया
Meem Alif Shaz
मेरे साथ दफ़्न हो न जाए दिल में जो भी है
सोचा जाते जाते शिकवा तुम सेे करता जाऊँ मैं
Prince
मुझ से ख़फ़ा है तो होने दो
ये दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
कभी वो दिन निकल आए कभी वो रात हो जाए
कभी ऐसा नहीं होता कि उन सेे बात हो जाए

कभी सोचा नहीं था ये कि तुम हम सेे खफ़ा होगे
कभी होगी लड़ाई जो हमारी मात हो जाए
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Afzal Sultanpuri
यार तू बेवजह ही मुझ सेे ख़फ़ा है
बेवफ़ाई आजकल रस्म-ए-वफ़ा है
Aatish Indori
ख़्वाब को साथ मिल कर सजाने लगे
घर कहीं इस तरह हम बसाने लगे

कर दिया है ख़फ़ा इस तरह से हमें
मान हम थे गए फिर मनाने लगे
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Ayush Shukla
किसी से ख़फ़ा मैं हुआ ही नहीं
कभी मुझ को ये हक़ मिला ही नहीं
Vaseem 'Haidar'
इतनी आशाएँ मत जोड़ो अब मुझ सेे
खफ़ा खफ़ा रहता है मेरा रब मुझ सेे

तुम को भी वैसे ही छोड़ के जाना है
जैसे दूर गए हैं सब के सब मुझ सेे
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Ashish Rajput
बस एक शिकवा है तुम सेे के मुझ सेे मिलने कभी
हक़ीक़तों में नहीं ख़्वाब में तो आना था
Shahzan Khan Shahzan'
कोई रंज नहीं है न कोई शिकवा है
तू ने जो कुछ भी मेरे साथ किया है
Abdulla Asif
कल तलक हम भी तुम्हारी जान थे, लेकिन
आज मर भी जाएँ तो शिकवा नहीं तुम को
AYUSH SONI
रही होगी हवा की कुछ तो रंजिश
चराग़ों को बुझा देती है आ कर

कभी कर लूँ यहाँ पर मैं सुसाइड
ये ख़ामोशी डरा देती है आ कर
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Manish Yadav
अपनी ख़ुशी से कोई शिकवा ही नहीं
ये कैसे आए जब यहाँ ग़म रहता है
Meem Alif Shaz
मुझे छोड़ दो, मुझ को शिकवा नहीं है
ये टूटा तो है यार बिखरा नहीं है
jaani Aggarwal taak
ख़ुद से नाराज़ ज़माने से ख़फ़ा रहते हैं
जाने क्या सोच के हम सब से जुदा रहते हैं
Gulshan
बस देखते ही रह गए जब सामना हुआ
शिकवा हुआ न उन सेे कोई भी गिला हुआ
Ajeetendra Aazi Tamaam
नहीं मुझ को कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत है
जिसे अपना बनाना है उसे अपना बना लो तुम
Ali Nazim Adam
उस दिन खफ़ा होने की कैसी रात थी
वो पास बैठी थी न कोई बात थी
Meem Alif Shaz
लफ़्ज़ों की हिद्दत से पिघला था मोम की मानिंद
लगा के पहरे होंठों पे फिर पत्थर बना दिया

हसीन लम्हों से भर देता मैं दामन उन का
इक तूफ़ाँ-ए-रंजिश ने पर आँचल उड़ा दिया
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Prakash Pandey
क्यूँ चुप है तू कोई सवाल तो कर
मेरे दिल का भी कुछ ख़याल तो कर

थोड़ा ग़ुस्सा, कोई शिकवा, या फिर
यूँँ ही चुप रहने का मलाल तो कर
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Meem Alif Shaz
मैं बना हूँ जो अब ज़रा सा कुछ
दोस्त भी है बुझा बुझा सा कुछ

अब मुलाक़ात भी नहीं करता
वो मुझे लगता है ख़फ़ा सा कुछ
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Meem Alif Shaz
आख़िर क्या रंजिश है नींद की आँखों से कि नहीं आती
बिस्तर के हर कोने में तकिया रख-रख के देख लिया
Prakash Pandey
कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत भी नहीं उस सेे
जफ़ा हो या सितम सब इश्क़ का इन'आम लिख देना
A R Sahil "Aleeg"
न कर तू इश्क़ से शिकवा
रहम ये कर नहीं सकता
A R Sahil "Aleeg"
इश्क़ मज़हब रब सनम और आशिक़ी इस की 'इबादत
इस में शिकवा कुफ़्र है और इल्तिज़ा जुर्म-ए-कबीरा
A R Sahil "Aleeg"
पत्थरों से कोई शिकवा ही नहीं है मेरे दोस्त
बात ये है तू ने फेंके थे हमारी ही तरफ़
Meem Alif Shaz
भुलाकर हर गिला शिकवा मिलो सब यार होली में
जुड़ें हर टूटते दिल के वफ़ा के तार होली में

हो जाए नफ़रती हर रंग फीका इन फ़िज़ाओं में
खिले बस एक रंगत ही गुलाल-ए-प्यार होली में
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Vivek Vistar
अगर दिल भी ख़फ़ा है कुछ हुआ होगा
तिरी बातों से कोई दिल दुखा होगा

हवा तो क़ैद है अब बद्दुआओं से
दिया तेरा तुझी से ही बुझा होगा
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Meem Alif Shaz
उस के दिल से निकालने पर क्या शिकवा करना
मुझ को बचपन से बाहर रहने की आदत है
Prit
जब उस से मुज़्तर पर बोला
अजीब रंजिश थी आँखों में
Manohar Shimpi
हर इंसान के अंदर इतनी ख़्वाहिश हो
धूप ज़ियादा हो जाए तो बारिश हो

किसी बहाने याद रखे वो शख़्स मुझे
इश्क़ अगर नामुमकिन है तो रंजिश हो
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Armaan khan
ज़िन्दगी से हम ख़फ़ा हो के कहाँ जाएँगे शाज़
हम जहाँ जाएँगे ये दुश्वारियाँ होगी वहाँ
Meem Alif Shaz
और क्या यार चाहता हूँ मैं
बस तेरा प्यार चाहता हूँ मैं

जो चले उम्र भर मेरे बाहम
दोस्त दो चार चाहता हूँ मैं

दोस्ती हो या दुश्मनी यारब
आर या पार चाहता हूँ मैं

जिस सेे शिकवा न हो किसी को भी
हाँ वो किरदार चाहता हूँ मैं

जो मिटा दे जहाँ से नफरत को
ऐसी सरकार चाहता हूँ मैं

जीत भी जाऊँ गर ज़माने को
आपसे हार चाहता हूँ मैं

वक़्त आख़िर है आ भी जा ज़ालिम
सिर्फ़ दीदार चाहता हूँ मैं
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Kumar Aryan
इश्क़ में उस को ख़ुदा माना तो शिकवा-जफा़ क्यूँ
जो ख़ुदा हो वो किसी एक का कब होता है
A R Sahil "Aleeg"
बस याद रख कर के मिरा शिकवा गिला
तुम ने दिया है यारी का अच्छा सिला
Sahil Verma
पहन के धूप रहता है यहाँ मज़दूर
पसीने का मगर शिकवा नहीं करता
Meem Alif Shaz
मुझ को सूरज से शिकवा नहीं
चाँदनी दिन में दिख जाएगी
Abdulla Asif
माँग कर पैसे ख़फ़ा मैं ने किया
दोस्तों को बे-वफ़ा मैं ने किया
Aatish Indori
ख़ामुशी से जुदा हो गए उन से हम
कोई झगड़ा नहीं कोई शिकवा नहीं
Daqiiq Jabaalii
बहुत अच्छा हुआ तो क्या करोगी
ज़रा रूठोगी या शिकवा करोगी

मिरे हालात समझोगी अगर तुम
मिरी जानाँ मुझे बोसा करोगी

हवाएँ आ रही हैं ये कहाँ से
अकेले में किसे पूछा करोगी

अगर होता यक़ीं मुझ पर जरा सा
तुम्हें लगता था क्या ऐसा करोगी

मुसाफ़िर जा रहा है हाथ ख़ाली
अता करना है या रुस्वा करोगी

सज़ा होनी है अब इक बेगुनाह को
सुनो ऐसे में क्या सज्दा करोगी
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Dinesh Sen Shubh
सितम वो ही करे दाद-ए-जफ़ा भी
बहुत सारे हुए उस से ख़फ़ा भी
Manohar Shimpi
बे-वफ़ाई का या दिल तोड़ने का शिकवा क्यूँ
इश्क़ में होता नहीं कोई तहक्कुम जाएज़
A R Sahil "Aleeg"
ये रोज़ रोज़ मनाने से लाख अच्छा है
ख़फ़ा हो हम सेे अगर तुम तो फिर ख़फ़ा ही रहो
Toyesh prakash
एक ही बात से वो ख़फ़ा हो गई
इस लिए अपनी साँसें सज़ा हो गई

रात भर उस के हाथों पे मेहँदी रचाई
सुब्ह आई तो हम से जुदा हो गई
Read Full
Meem Alif Shaz
किसी को न शिकवा शिकायत रहे
सभी को सभी से मोहब्बत रहे

तिरंगे के नीचे रहें अम्न से
ख़ुदाया तिरंगा सलामत रहे
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Shadab Shabbiri
बहुत आसान है मुझ से ख़फ़ा होना
कि फ़ौरन झूठ की गर्दन दबाता हूँ
Meem Alif Shaz