Aashiq Shayari - Dil se mohabbat karne wale aashiqon ki heartfelt shayari

Aashiq shayari beautifully captures the emotions of someone deeply in love. From intense ishq to silent longing, these verses reflect the heart of a true lover. Whether you want to express your feelings or simply enjoy poetic romance, this collection speaks directly to the dil of every aashiq.

aashiq shayari
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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aashiqui shayari
मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को
मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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mohabbat shayari
मोहब्बत में इक ऐसा वक़्त भी दिल पर गुज़रता है
कि आँसू ख़ुश्क हो जाते हैं तुग़्यानी नहीं जाती
Jigar Moradabadi
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ishq shayari
हम से क्या हो सका मोहब्बत में
ख़ैर तुम ने तो बे-वफ़ाई की
Firaq Gorakhpuri
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deewana shayari
मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग
मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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lover shayari
तोहफ़ा, फूल, शिकायत, कुछ तो ले कर जा
इश्क़ से मिलने ख़ाली हाथ नहीं जाते
Tanoj Dadhich
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premi shayari
न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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aashiq shayari
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो
हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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aashiqui shayari
कीजे इज़हार-ए-मोहब्बत चाहे जो अंजाम हो
ज़िंदगी में ज़िंदगी जैसा कोई तो काम हो
Priyamvada ilhan
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mohabbat shayari
वा'दा करो कि हाथ छुड़ा कर न जाओगे
वा'दा करो कि सात जनम तक रहेगा इश्क़
Mukesh Jha
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के
बदन तो चू
मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं होश-मंद हूँ ख़ुद भी सो मेरी ग़ज़लों में
न रक़्स करता है आशिक़ न बाल खींचता है
Charagh Sharma
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रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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Bhaskar Shukla
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कभी कभी तो झगड़ने का जी भी चाहेगा
मगर ये जंग मोहब्बत से जीती जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन'
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
Balmohan Pandey
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है
तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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ये तू जो मोहब्बत में सिला माँग रहा है
ऐ शख़्स तू अंदर से भिकारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
Faiz Ahmad Faiz
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गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ
मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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शहर-वालों की मोहब्बत का मैं क़ायल हूँ मगर
मैं ने जिस हाथ को चूमा वही ख़ंजर निकला
Ahmad Faraz
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किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी
बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए
Ahmad Faraz
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क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो
हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरे हैं
Ajaz tawakkal
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कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हम ने
हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं
Abbas Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है
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Umair Najmi
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कितने हसीं हो माशा-अल्लाह
तुम पे मोहब्बत ख़ूब जचेगी
Zubair Ali Tabish
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क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या
Jaun Elia
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मुझे अब तुम से डर लगने लगा है
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या
Jaun Elia
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किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
पर आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्तिआ'त समझ
Umair Najmi
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कुछ इस लिए भी तेरी आरज़ू नहीं है मुझे
मैं चाहता हूँ मेरा इश्क़ जावेदानी हो
Vipul Kumar
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इस दिल की ईंट ईंट तेरे बा'द हिल गई
तू चल दिया तो इश्क़ की बुनियाद हिल गई
Charagh Sharma
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इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल
इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया
Jigar Moradabadi
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गुदाज़-ए-इश्क़ नहीं कम जो मैं जवाँ न रहा
वही है आग मगर आग में धुआँ न रहा
Jigar Moradabadi
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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Mirza Ghalib
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या
मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या

तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना
कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
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Ankita Singh
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मकीन-ए-दिल को ख़ानुमा-ख़राबियों से इश्क़ था
क़याम ढूँढ़ता रहा तुम्हारी छत के बा'द भी
Pallav Mishra
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इश्क़ हो जाए किसी से कोई चारा तो नहीं
सिर्फ़ मुस्लिम का मोहम्मद पे इजारा तो नहीं
Kunwar Mohinder Singh Bedi Sahar
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आख़िरी जंग मैं लड़ने के लिए निकला हूँ
फिर रहे या न रहे तेरा दिवाना आना
Mubarak Siddiqi
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या
Meer Taqi Meer
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आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये
Meer Taqi Meer
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मिरे सलीक़े से मेरी निभी मोहब्बत में
तमाम उम्र मैं नाकामियों से काम लिया
Meer Taqi Meer
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सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
Allama Iqbal
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अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग
तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का
Ibn E Insha
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वहशत-ए-दिल के ख़रीदार भी नापैद हुए
कौन अब इश्क़ के बाज़ार में खोलेगा दुकाँ
Ibn E Insha
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मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए
Khalid Moin
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इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम
Allama Iqbal
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दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे

ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे

मैं ढूँढ़ रहा हूँ मिरी वो शम्अ' कहाँ है
जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे

आख़िर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिल की
का'बा नहीं बनता है तो बुत-ख़ाना बना दे

'बहज़ाद' हर इक गाम पे इक सज्दा-ए-मस्ती
हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानाना बना दे
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Behzad Lakhnavi
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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है
Arzoo Lakhnavi
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मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है
बढ़ी जब बे-ख़ुदी फिर कौन डरता है गुनाहों से
Arzoo Lakhnavi
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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं

तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं
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Aalok Shrivastav
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हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूँँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
Ameer Minai
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
Jamal Ehsani
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या
हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते
Asad Bhopali
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मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
Bashir Badr
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इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़
ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
Anwar Shaoor
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मोहब्बत के इक़रार से शर्म कब तक
कभी सामना हो तो मजबूर कर दूँ
Akhtar Shirani
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मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ
नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा
Akbar Allahabadi
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अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं
Dagh Dehlvi
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दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती
Nida Fazli
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दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
इतनी ख़ूब-सूरत ये ज़िंदगी नहीं होती
Hastimal Hasti
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ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह
Sudarshan Fakir
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जबकि मैं ने इश्क़ में मरने का वा'दा कर लिया
तब लगा मुझ को कि मैं ने इश्क़ ज़्यादा कर लिया
Siddharth Saaz
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इश्क़ में ख़ुद-कुशी नहीं करते
इश्क़ में इंतिज़ार करते हैं
Rajesh Reddy
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तू ने जिस बात को इज़हार-ए-मुहब्बत समझा
बात करने को बस इक बात रखी थी हम ने
Ameer Imam
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ख़ुश भी हो लेते हैं तेरे बे-क़रार
ग़म ही ग़म हो इश्क़ में ऐसा नहीं
Firaq Gorakhpuri
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कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में
Nazeer Banarasi
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इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है
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Ammar Iqbal
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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं
Dagh Dehlvi
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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Jaun Elia
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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी
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Jaun Elia
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इश्क़ मेरी ज़बान से निकला
और मैं ख़ानदान से निकला
Siraj Faisal Khan
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बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न ने शौक़ के हंगा
में तो देखे थे बहुत
इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
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Asrar Ul Haq Majaz
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तुम सेे बिछड़ जाने का ख़याल अच्छा है
क्योंकि अभी मेरा भी हाल अच्छा है

उस ने पूछा तुम्हें कितनी महोब्बत है मुझ सेे
मैं ने कहा मालूम नहीं सवाल अच्छा है
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karan singh rajput
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ये मोहब्बत भी किन दिनों में हुई
दिल मिलाने थे हाथ से भी गए
Kafeel Rana
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ये ठीक है कि तुम सेे मोहब्बत नहीं मुझे
ये भी है ठीक तुम को मगर चाहती हूँ मैं
Sabeen Saif
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता
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Abrar Kashif
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सब तेरे ही इश्क़ के बीमार थे चारों तरफ़
कुछ तेरे छूने से अच्छे हो गए, कुछ रह गए
Siddharth Saaz
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ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है
Jigar Moradabadi
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नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का
ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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कहने देती नहीं कुछ मुँह से मोहब्बत मेरी
लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी
Dagh Dehlvi
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है
सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है

हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना
भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
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Ritesh Rajwada
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कभी ये भी नहीं पूछा है गर्दन पे निशाँ कैसा
हमें अंधी मोहब्बत थी हमें अंधा भरोसा था
Shayra kirti
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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना

जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को
इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना
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Liaqat Jafri
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इस मरज़ से कोई बचा भी है
चारा-गर इश्क़ की दवा भी है
Unknown
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इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के

उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
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Khan Janbaz
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किसी के इश्क़ में बर्बाद होना
हमें आया नहीं फ़रहाद होना
Manish Shukla
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इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले
Nadim Nadeem
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे
फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो
Jawwad Sheikh
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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन
इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा
दिलों के खेल में ये जीत हार कुछ भी नहीं
Akhtar Saeed Khan
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अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है
Jaani Lakhnavi
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मोहब्बत से हमें इनकार कब है
मगर वो सैलरी भी पूछते हैं
Gagan Bajad 'Aafat'
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ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
Ghulam Mohammad Qasir
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ज़िन्दगी से ऐसे काटा सीन उस ने इश्क़ का
देखता है कोई जैसे फ़िल्म गाने काट कर
Ankit Maurya
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भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए
बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए
Iftikhar Falak Kazmi
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दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां

ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
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Aalok Shrivastav
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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
Mirza Athar Zia
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चुप हुए तो घर से निकले जा के दफ़्तर रो पड़े
इश्क़ ऐसी जंग है जिस में सिकंदर रो पड़े

बस दिलों पर कब किसी का चल सका है इश्क़ में
फिर से डायल कर के हम वो एक नंबर रो पड़े
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Prashant Sharma Daraz
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तू मेरा इश्क़-विश्क था वरना
हम तुझे जीत लेते धोखे से
Shadab Asghar
बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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