Zakhm Shayari - Dil ke ghaav aur chhupe dard ko bayan karti shayari

Zakhm shayari reflects the silent pain hidden deep within the heart. It captures those emotional wounds that words often fail to express. Whether it’s heartbreak, betrayal, or life’s harsh realities, these lines give voice to your inner dard and unspoken feelings.

zakhm shayari
आज तो दिल के दर्द पर हँस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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ghaav shayari
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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chot shayari
दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
Kaleem Aajiz
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dard shayari
मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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zakham shayari
दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे
Mirza Ghalib
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dil zakhmi shayari
ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को
सोचता हूँ कि कहूँ तुझ से मगर जाने दे
Nazeer Baaqri
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chot dil shayari
कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िन्दगी एक नज़्म लगती है
Gulzar
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dard-e-dil shayari
तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं
ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
Kaleem Aajiz
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zakhm shayari
ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है
Gulzar
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ghaav shayari
अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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chot shayari
दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले
हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
Kaif Bhopali
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dard shayari
ज़ख़्म क्या होगा जहाँ में और कोई दूसरा
बाप के शाने अगर मरघट को बेटा चल पड़े
Ravi 'VEER'
मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
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Prakhar Kanha
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इस क़दर जज़्ब हो गए दोनों
दर्द खेंचूँ तो दिल निकल आए
Abbas Qamar
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तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
Faiz Ahmad Faiz
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अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमें तो बात करें
Faiz Ahmad Faiz
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कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
Faiz Ahmad Faiz
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते
मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन
इक उदासी भी साथ लाती है

ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के
जाने किस किस की याद आती है
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Farhat Ehsaas
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने
बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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ठीक से ज़ख़्म का अंदाज़ा किया ही किस ने
बस सुना था कि बिछड़ते हैं तो मर जाते हैं
Shariq Kaifi
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हमारा दिल तो हमेशा से इक जगह पर है
तुम्हारा दर्द ही रस्ता भटक गया होगा
Zubair Ali Tabish
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तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए
आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी
Zubair Ali Tabish
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कम अगर हो भी गया कौन सी हद तक होगा
दर्द है टूट के आधा तो नहीं हो सकता
Astitwa Ankur
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बहुत बेकार मौसम है मगर कुछ काम करना है
कि ताज़ा ज़ख़्म मिलने तक पुराना ज़ख़्म भरना है
Abbas Tabish
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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मैं चोट कर तो रहा हूँ हवा के माथे पर
मज़ा तो जब था कि कोई निशान भी पड़ता
Abhishek shukla
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ये इत्तिफ़ाक़ ज़रूरी नहीं दोबारा हो
मैं तुम को सोचने बैठूँ तो ज़ख़्म भर जाएँ
Abhishek shukla
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ज़िन्दगी, यूँँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे, कोई जंग हारी जा रही है

जिस जगह पहले से ज़ख़्मों के निशां थे
फिर वहीं पे चोट मारी जा रही है
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Azm Shakri
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आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम
Azm Shakri
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ज़ख़्म जो तुम ने दिया वो इस लिए रक्खा हरा
ज़िंदगी में क्या बचेगा ज़ख़्म भर जाने के बा'द
Azm Shakri
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कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को

दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हम सेे क्या काम पड़ गया दिल को
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Subhan Asad
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हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा
Parveen Shakir
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पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
Parveen Shakir
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क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
ज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला
Parveen Shakir
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दिल के तमाम ज़ख़्म तेरी हाँ से भर गए
जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए
Kumar Vishwas
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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
Mirza Ghalib
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दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
Mirza Ghalib
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दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँँ
रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँँ
Mirza Ghalib
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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
Mirza Ghalib
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हर एक सितम पे दाद दी हर ज़ख़्म पे दुआ
हम ने भी दुश्मनों को सताया बहुत दिनों
Nawaz Deobandi
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मसअला ख़त्म हुआ चाहता है
दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है
Shakeel Jamali
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हम को अग़्यार का गिला क्या है
ज़ख़्म खाएँ हैं हम ने यारों से
Sahir Hoshiyarpur
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो
इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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आन के इस बीमार को देखे तुझ को भी तौफ़ीक़ हुई
लब पर उस के नाम था तेरा जब भी दर्द शदीद हुआ
Ibn E Insha
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दीदा ओ दिल ने दर्द की अपने बात भी की तो किस से की
वो तो दर्द का बानी ठहरा वो क्या दर्द बटाएगा
Ibn E Insha
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है
सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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सौ ज़ख़्म भर चुके हों मगर कह सकें ग़ज़ल
इतनी कमी तो आज भी रहती है तेरे बिन
Astitwa Ankur
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उस ने नासूर कर लिया होगा
ज़ख़्म को शाएरी बनाते हुए
Ammar Iqbal
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ऊपर उठती हुई एक गर्म हवा है मिरा दर्द
मेरा लहजा कभी फ़रियाद नहीं हो सकता
Farhat Ehsaas
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अभी से मेरे रफ़ूगर के हाथ थकने लगे
अभी तो चाक मिरे ज़ख़्म के सिले भी नहीं

ख़फ़ा अगरचे हमेशा हुए मगर अब के
वो बरहमी है कि हम से उन्हें गिले भी नहीं
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Parveen Shakir
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ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
Ameer Minai
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यूँँ दिल को तड़पने का कुछ तो है सबब आख़िर
या दर्द ने करवट ली या तुम ने इधर देखा
Jigar Moradabadi
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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है

वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है
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Dushyant Kumar
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हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर को क्या करूँँ
Hafeez Jalandhari
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उम्र गुज़री दवाएँ करते 'मीर'
दर्द-ए-दिल का हुआ न चारा हनूज़
Meer Taqi Meer
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लोग काँटों से बच के चलते हैं
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं
Unknown
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते

बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं
अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
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Ismail Raaz
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कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद

दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इस का कोई नहीं है हल शायद
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Gulzar
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
Iqbal Ashhar
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एक ज़ख़्म ऐसा न खाया कि बहार आ जाती
दार तक ले के गया शौक़-ए-शहादत मुझ को
Kaifi Azmi
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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं
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Jaun Elia
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पुरानी चाहत के ज़ख़्म अब तक भरे नहीं हैं
और एक लड़की पड़ी है पीछे बड़े जतन से
Ashu Mishra
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मैं तुम्हें बद्दुआएं देता हूँ
ताकि तुम मेरा दर्द जान सको

तुम जिसे चाहते हो मर जाए
और तुम उस के बा'द ज़िंदा रहो
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Afkar Alvi
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ख़ुदा ने फ़न दिया हम को कि लड़के इश्क़ लिखेंगे
ख़ुदा कब जानता था हम, ग़ज़ल में दर्द भर देंगे
Prashant Sharma Daraz
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कभी सहर तो कभी शाम ले गया मुझ से
तुम्हारा दर्द कई काम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
Shakeel Badayuni
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किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
चारा-गर अब ख़ुद ही बेचारे नज़र आने लगे
Shakeel Badayuni
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कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया
Hafeez Jalandhari
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
Shahzad Ahmad
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किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
Lutf Ur Rahman
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चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है
Azhar Nawaz
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
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Farhat Abbas Shah
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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हमारी उम्र के लड़के ग़ज़ल तो लिख रहे हैं पर
ये इतना दर्द ले के जी रहे हैं ठीक थोड़ी है
Ramesh Singh
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बिछड़े तो रख रखाव भी करना नहीं पड़ा
ताज़ा किसी को घाव भी करना नहीं पड़ा

बस देख कर ही उस को परिंदे उतर गए
उस को तो आओ आओ भी करना नहीं पड़ा
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Azbar Safeer
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए
शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है

दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है
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Vikram Gaur Vairagi
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा
ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
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Zia Mazkoor
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किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी
हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
Nomaan Shauque
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे
तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी

डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे
और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
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Tehzeeb Hafi
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तीनों ज़िद्दी हैं कि हम तुझ सेे कहेंगे भी नहीं
तू छूएगा भी नहीं ज़ख़्म भरेंगे भी नहीं
Shadab Javed
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चोट खाई थी एक बार मगर
उम्र भर को बिखर गए हैं हम
Munazzah Noor
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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यूँँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया
हम ने दिल खोल कर दिखाई चोट
Fani Badayuni
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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
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बोसा होंटों का मिल गया किस को
दिल में कुछ आज दर्द मीठा है
Muneer Shikohabadi
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वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता
दर्द कुछ होते हैं ता-उम्र रुलाने वाले
Sada Ambalvi
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दर्द की बात किसी हँसती हुई महफ़िल में
जैसे कह दे किसी तुर्बत पे लतीफ़ा कोई
Ahmad Rahi
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दर्द सहने का हुनर तो पास सबके है मगर
दर्द कहने का हुनर बस शाइरों के पास है
Divy Kamaldhwaj
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बयाँ करने बैठूँ तो बस दर्द ही हैं
मुनासिब है कह दूँ कि मैं हूँ मज़े में
Priya Dixit
ज़ख़्म लगे हैं कितने दिल पर याद करूँँ या तुम को देखूँ
शाद नहीं हूँ मैं तुम को नाशाद करूँँ या तुम को देखूँ

उम्र गए पे तेरी सूरत और मिरी आँखें टकराईं
उम्र गए में सोची वो फ़रियाद करूँँ या तुम को देखूँ
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
ज़िस्त की जान जाते भी देखा हूँ मैं
मौत को साँस आते भी देखा हूँ मैं

सब तो हँसते ही हैं मेरे हालात पे
दर्द को मुस्कुराते भी देखा हूँ मैं
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SHIV SAFAR
कभी पहले नहीं था जिस क़दर मजबूर हूँ मैं आज
नज़र आऊँ न ख़ुद क्या तुम सेे इतना दूर हूँ मैं आज

तुम्हारे ज़ख़्म को ख़ाली नहीं जाने दिया मैं ने
तुम्हारी याद में ही चीख़ के मशहूर हूँ मैं आज
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SHIV SAFAR
वो बड़े प्यार से कहते हैं कि आप अपने हैं
और अपनों को ही तो ज़ख़्म दिए जाते हैं
Akash Rajpoot
कितना भी दर्द पिला दे ख़ुदा पी सकता हूँ
ज़िन्दगी हिज्र से भर दे मिरी जी सकता हूँ

हर दफ़ा दिल पे ही खा के हुई है आदत ये
बंद आँखों से भी हर ज़ख़्म को सी सकता हूँ
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Faiz Ahmad
किस जहाँ में तू बैठ कर देखता है मुझ को ख़ुदा
क्यूँँ ज़मीं पर आ कर सभी ज़ख़्म मेरे भरता नहीं
Raj Tiwari
मिला है दुख सदा मुझ को मेरा दुख से ये नाता है
मिरे ख़ुद घाव में मरहम लगा कर दुख सुलाता है
Tiwari Jitendra
अपने दीवाने को देकर दर्द ओ ग़म
नाज़ ख़ुद पे किस क़दर करता है वो
Ajeetendra Aazi Tamaam
लबों के पास आ कर मुड़ गए फिर
ग़ज़ब का दर्द देते हो मियाँ तुम
Ashish Awasthi