Tevar Shayari - Bold attitude, swag aur self-respect se bhari shayari

Tevar Shayari reflects bold attitude, confidence, and unapologetic self-expression. It captures the essence of swag, self-respect, and strong personality in poetic form. Whether it's showing your andaaz or expressing your inner power, these lines speak with impact.

tevar shayari
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
Jaun Elia
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attitude shayari
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
Ameer Qazalbash
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अच्छी लड़की ज़िद नहीं करते
देखो इश्क़ बुरा होता है
Ali Zaryoun
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दिल ऐसा कि सीधे किए जूते भी बड़ों के
ज़िद इतनी कि ख़ुद ताज उठा कर नहीं पहना
Munawwar Rana
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उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
Faiz Ahmad Faiz
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उस हिज्र पे तोहमत कि जिसे वस्ल की ज़िद हो
उस दर्द पे ला'नत की जो अश'आर में आ जाए
Vipul Kumar
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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ
Subhan Asad
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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ

हमारे बीच ज़माने की बद-गुमानी है
मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ
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Subhan Asad
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जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें
बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए
Parveen Shakir
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हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है
Mirza Ghalib
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
Majrooh Sultanpuri
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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से
Majrooh Sultanpuri
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हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा
चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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कमी न की तिरे वहशी ने ख़ाक उड़ाने में
जुनूँ का नाम उछलता रहा ज़माने में
Firaq Gorakhpuri
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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं
Javed Akhtar
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मैं जिसे प्यार का अंदाज़ समझ बैठा हूँ
वो तबस्सुम वो तकल्लुम तिरी आदत ही न हो
Sahir Ludhianvi
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ग़ज़ब है वो ज़िद्दी बड़े हो गए
मैं लेटा तो उठ के खड़े हो गए
Akbar Allahabadi
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वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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एक से एक जुनूँ का मारा इस बस्ती में रहता है
एक हमीं हुशियार थे यारो एक हमीं बद-नाम हुए
Ibn E Insha
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धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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Nawaz Deobandi
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है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
Saghar Siddiqui
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दिल की ज़िद इस लिए रख ली थी कि आ जाए क़रार
कल ये कुछ और कहेगा मुझे मालूम न था
Arzoo Lakhnavi
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आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
Ameer Minai
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अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है
मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है
Aanis Moin
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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं
Hastimal Hasti
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उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ
अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे
Hafeez Banarasi
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अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं
कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी
Asad Bhopali
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बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दी
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Jaun Elia
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तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई
मिलेंगे फूल सब इस
में ग़ज़ल गुलदान है यारों

पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे
हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों
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Tanoj Dadhich
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फ़िक्र-ए-ईजाद में गुम हूँ मुझे ग़ाफ़िल न समझ
अपने अंदाज़ पर ईजाद करूँँगा तुझ को
Jaun Elia
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कुछ न मैं समझा जुनून ओ इश्क़ में
देर नासेह मुझ को समझाता रहा
Meer Taqi Meer
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हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं
तेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैं

तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त
डुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं
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Abrar Kashif
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ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है
Jigar Moradabadi
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करे जो क़ैद जुनूँ को वो जाल मत देना
हो जिस
में होश उसे ऐसा हाल मत देना

जो मुझ सेे मिलने का तुम को कभी ख़याल आए
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है
Zia Mazkoor
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दर्द सहने का अलग अंदाज़ है
जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी
दोस्त की दोस्त मान लेते हैं
Dagh Dehlvi
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हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है
जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
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दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं
वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां

ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है
सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
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Aalok Shrivastav
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तीनों ज़िद्दी हैं कि हम तुझ सेे कहेंगे भी नहीं
तू छूएगा भी नहीं ज़ख़्म भरेंगे भी नहीं
Shadab Javed
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हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
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Fareeha Naqvi
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पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़
फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़

ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें
कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
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Azbar Safeer
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जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
वो हौसले ज़माने के मेआ'र हो गए
Ali Jawwad Zaidi
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अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है
Ankit Maurya
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चल गया होगा पता ये आप को
बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को

इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
तू समझती क्या है अपने आप को
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Kushal Dauneria
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मुझ को भी ज़िद करने का हक़ दो साहब
मेरे भीतर भी इक बच्चा रहता है
Atul K Rai
तेरे बग़ैर ख़ुदा की क़सम सुकून नहीं
सफ़ेद बाल हुए हैं हमारा ख़ून नहीं

न हम ही लौंडे लपाड़ी न कच्ची उम्र का वो
ये सोचा समझा हुआ इश्क़ है जुनून नहीं
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Shamim Abbas
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तुम मिरी आँख के तेवर न भुला पाओगे
अन-कही बात को समझोगे तो याद आऊँगा
Wasi Shah
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सरसरी अंदाज़ से देखोगे तो महफ़िल ही महफ़िल
ग़ौर से देखोगे तो हर आदमी तन्हा लगेगा
Shuja Khawar
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जब ज़रूरत थी उसी वक़्त मुझे क्यूँँ न मिला
बस इसी ज़िद में गँवा बैठा हूँ पाया हुआ शख़्स
Shahzad Nayyar
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बचा लिया मुझे ग़र्क़ाब होने से उस ने
जुनून ए इश्क़ है लाया नदी के पार मुझे
Amaan Pathan
इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना
सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी
Mahir ul Qadri
ये काएनात मेरे सामने है मिस्ल-ए-बिसात
कहीं जुनूँ में उलट दूँ न इस जहान को मैं
Akhtar Usman
ज़मीन इतनी नहीं है कि पाँव रख पाएँ
दिल-ए-ख़राब की ज़िद है कि घर बनाया जाए
Tariq Naeem
मेरी उँगलियों में पड़ गई है गिरहें तेरे गेसुओं की
आजकल किसी भी बात पर अकड़ जाती है
Murli Dhakad
हम खड़े रहते हैं मुजरिम की तरह महफ़िल में
उन का अंदाज़ वकीलों की तरह होता है
Shakir Dehlvi
नींद ज़रूरी है कोई ख़्वाब देखने के लिए
वो छत पे आई है महताब देखने के लिए

कोई समझाये उसे की वो कोई हक़ीम नहीं
वो ज़िद कर रही है मेरा अज़ाब देखने के लिए
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MANOBAL GIRI
कुछ बातें अलग हैं उस की, अंदाज़ निराले हैं उस के
आँखें अजब हैं उस की, और बाल काले हैं उस के
Bittu khan
कही पर कहूँ, या अनकही पर कहूँ
साक़ी बता मैं किस अंदाज़ पर कहूँ
Animesh Choubey
ये सच है शौक़ भी पहले जुनून होता था
मगर जुनून भी अब शौक़ बन गया देखो
Saarthi Baidyanath
चाँद नहीं शामिल होता उन की ज़िद में
वक़्त गिरा देता है जिन के छत साहब
Atul K Rai
यही इक हल बचा है अब मिरी नाराज़गी का
उसे बोलो मिरे अंदाज़ में मुझ को मनाए
Haider Khan
अव्वल, अव्वल सबने आने की ज़िद है
क्या सबने मेहनत फ़र-फ़र कर लेना है?
Abhinav Baishander
नहीं आ रहे है नज़र चाँद तारे शब को क्यूँँ
उसे देख कर साथ मेरे अकड़ टूटे उन की
Vedant Trivedi
मिला कर ख़ाक में मुझ को वो इस अंदाज में बोले
खिलौना था वो मिट्टी का कहाँ रखने के क़ाबिल था
Arpit shukla
देखना है अगर जुनून-ए-इश्क़
लहरों पे नाचते सफ़ीने देख
Chandan Sharma
हमें भी कर दे इस ज़िद से रिहा तू
ज़रा मिल कर दे बस ख़ुद से जुदा तू
Nikunj Rana
यूँँ नज़र-अंदाज़ मत कर पेड़ को
लौट कर आना है इस के साए में
Jitendra Tiwari
रंजिशों की आतिशों में सारी बस्ती जल रही थी
वो फ़क़त अपनी ही ज़िद में घर को फूँके जा रहे थे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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मैं रोया रात भर ज़िद में, मुझे मिलने की चाहत थी
मेरी आँखें लगी थी जब, मेरे से रू-ब-रू तुम थी
Harshwardhan Aurangabadi
हम से तर्क-ए-तअल्लुक तुम्हारी थी ज़िद
अब ये तकिए भिगोने से क्या फ़ाइदा
Shajar Abbas
इक बार बस तू ज़ोर से आवाज़ देता
जो मैं अड़ा था ज़िद पे तू ही हार लेता
Sarvjeet Singh
ब-ज़िद हैं आस्तीं के साँप डसने को तो डसने दो
बड़े अफ़ज़ल हैं हम भी साँपों के फन तोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
उतर न पाएगा ता उम्र इन के सर से जुनूँ
ये नौजवान अगर देख लेंगे आँखें तेरी
Shajar Abbas
हम उस के 'ऊँ हूँ' 'तो क्या' 'नईं' पर इस लिए भी रुके हैं
महबूब ज़िद्दी न हो तो फिर आशिक़ी बे-मज़ा है
Intzar Akhtar
दिवाने पन की अपने भी कोई सीमा नहीं यारो
जुनूँ में ख़ुद ही ख़ुद से ख़ुद का ही सर फोड़ लेते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
इश्क़ की अब, इंतिहा क्या? इब्तिदा क्या?
शय ये ला-हासिल व ला-फ़ानी जुनूँ है
A R Sahil "Aleeg"
मत करो ज़िद मेरी जाँ दिल में मेरे रहने की
शहर-ए-ख़ामोशाँ से ज़्यादा यहाँ ख़ामोशी है
Shajar Abbas
चमन में मैं ने गुल की पत्तियों का
नए अंदाज़ से बोसा लिया है
Shajar Abbas
मोहब्बत हो या हो दुश्मन ग़ुलामी हम नहीं करते
झुकाने की जहाँ ज़िद हो सलामी हम नहीं करते
Aditya
मेरी ख़ामोशियों में भी फ़साना ढूँढ़ लेती है
बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूँढ़ लेती है

हक़ीक़त ज़िद किए बैठी है चकनाचूर करने को
मगर हर आँख फिर सपना सुहाना ढूँढ़ लेती है
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Yaduvanshi Shubham
देखो चाँद की ज़िद मत करना पागल हो
ऐसी बातें फिल्मों में ही होती हैं
Subrat Tripathi
ख़ुदा से तो कभी दुनिया, कभी ख़ुदस लड़ा हूँ मैं
जुनूँ-ए-इश्क़ में मत पूछ, दिल कितनों के तोड़े हैं
A R Sahil "Aleeg"
हम तुम्हारी जालसाज़ी पर नहीं रोए
हम को रोना था सहेली पर नहीं रोए

हम ने कंधा चाहा था उस ने हथेली दी
एक ज़िद थी हम हथेली पर नहीं रोए
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Saahir
मज़लूम को कुछ लोग बुरा कहने लगे हैं
ज़ालिम को बजा कहने का अंदाज़ तो देखो
Rekhta Pataulvi
दुख बच्चे के जैसा ज़िद्दी होता है
फ़रमाइश पूरी होने तक रोता है
Saarthi Baidyanath
छोड़ ये ज़िद के हसीं और हसीं होना है
सब को इक रोज़ ही जब ज़ेरे ज़मीं होना है

बा'द उस के कभी मरने की जो नौबत आ जाए
इतना पागल भी मुहब्बत में नहीं होना है
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Mohd Asad
हम ने माना नहीं रब की मर्ज़ी को तब
अपनी ज़िद को ही हम ने फिर रब कह दिया
Reet
हर एक बात पे करते हो क़त्ल-ए-आम की बातें
तुम्हीं बताओ अब अंज़ाम-ए-गर्मी-ए-जुनूँ क्या है
Ajeetendra Aazi Tamaam
हम जो जगते है रात भर अक्सर
शे'र कहने की ज़िद है और कुछ नइ
Gaurav Singh
अच्छे ख़ासे सत्ता के गलियारों में दागी हो जाते हैं
कुर्सी की ख़ातिर अपनों के ही तेवर बाग़ी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
यहाँ पर गुल खिले है जब मिरे जानाँ मोहब्बत के

अगर ढूँढो तो मिल जाए ख़ुदा भी अब किताबों में
किताबों में नहीं मिलते यहाँ बस राज़ उल्फ़त के
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Sandeep Rajput
हम तो तेरे चाहने वाले हुआ करते थे इक रोज़
तू हमें कैसे नज़र अंदाज़ कर सकता है सब में
Shiv
आरज़ू-ए-ज़िन्दगी ले आई इतनी दूर अब
देखना है ये जुनूँ मेरा कहाँ तक जाता है
Mahesh Natakwala
सितम हुए हैं ऐसे भी
दुखी हैं मेरे जैसे भी

दुआ समझ या ज़िद ख़ुदा
वो शख़्स दे दे कैसे भी
Read Full
Adnan Raza
अरे! माँ तो हमेशा बोलती है बात सच आख़िर
अरे! बेटा सभी माँ पे यहाँ तेवर बदलता है
Raunak Karn
आप को इल्म भी है इस का ज़रा
आप क्या क्या जुनूँ में बकते हैं

आप को हक़ है रूठ जाने का
आप चाहें तो रूठ सकते हैं
Read Full
Shajar Abbas
मैं वाक़िफ़ जुदा रास्तों से नहीं थी
ये ज़िद साथ चलने की वरना न करती
Priya Dixit
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चराग़ हूँ मैं ज़िद-ए-रौशनी न छोड़ूँगा
हवाएँ कितनी लगाती रहें तमाचे मुझे
Amaan Haider
हवाओं की ज़िद एक ज़ोरों से चलना
दियों ने भी ठाना है जलते रहेंगे
Shubhangi kalii
हल्के हल्के ही से तेरा जुनून निकलेगा
फिर भी आई याद अब आँखों से ख़ून निकलेगा
Shadab khan
पूरी उम्र गुज़ारी हम ने एक खिलौने की ज़िद पर
या'नी पूरी उम्र ही हम ने दिल को बच्चा रक्खा है
Shruti chhaya
आवाज़-ए-क़ैस सुन के सभी आशिक़-ए-जहाँ
दश्त-ए-जुनूँ की सिम्त को आमादा हो गए
Shajar Abbas
वो कहती थी मोहब्बत मत करो तुम दोस्ती कर लो
मेरी ज़िद थी मोहब्बत के बिना फिर दोस्ती कैसी
Umesh Maurya