Intiqam Shayari - Gussa, badla aur tootay bharose ki gehri expressions

Intiqam shayari captures the raw emotion of revenge, betrayal, and broken trust. It reflects the आग of gussa and the silent promise of badla hidden deep within the heart. These verses give voice to feelings that arise after dhokha, where words become sharp and powerful.

badla shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना
पूछना पड़ता है हर वक़्त, तुम्हीं हो ना दोस्त?
Inaam Azmi
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सँभलता हूँ तो ये लगता है जैसे
तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूँ
Shariq Kaifi
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
Faiz Ahmad Faiz
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते
मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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उस की टीस नहीं जाती है सारी उम्र
पहला धोखा पहला धोखा होता है
Shariq Kaifi
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इस आ
समाँ को मुझ सेे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूँ अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
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Ali Rumi
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है
नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है

उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है
मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
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Tehzeeb Hafi
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ठीक से ज़ख़्म का अंदाज़ा किया ही किस ने
बस सुना था कि बिछड़ते हैं तो मर जाते हैं
Shariq Kaifi
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ये इत्तिफ़ाक़ ज़रूरी नहीं दोबारा हो
मैं तुम को सोचने बैठूँ तो ज़ख़्म भर जाएँ
Abhishek shukla
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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हर एक सितम पे दाद दी हर ज़ख़्म पे दुआ
हम ने भी दुश्मनों को सताया बहुत दिनों
Nawaz Deobandi
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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इस दौर-ए-मुंसिफ़ी में ज़रूरी नहीं 'वसीम'
जिस शख़्स की ख़ता हो उसी को सज़ा मिले
Waseem Barelvi
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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा
Dushyant Kumar
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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पुरानी चाहत के ज़ख़्म अब तक भरे नहीं हैं
और एक लड़की पड़ी है पीछे बड़े जतन से
Ashu Mishra
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तुम सेे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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हम ने जिस मासूम परी को अपने दिल की जाँ बोला था
उस ने हम को धोखा देकर और किसी को हाँ बोला था

सारे वादे भूल गई तुम कोई बात नहीं जानेमन
लेकिन ये कैसे भूली तुम मेरी माँ को माँ बोला था
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Tanoj Dadhich
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए
ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए

आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में
एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
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Farhat Abbas Shah
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यक़ीन उस ने दोबारा बना लिया लेकिन
वो मेरे ज़ेहन से धोखा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है
दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है

दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना
मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है
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Vikram Gaur Vairagi
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा
ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे
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Zia Mazkoor
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किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी
हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
Nomaan Shauque
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ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
Ashu Mishra
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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इश्क़ में धोखा खाने वाले बिल्कुल भी मायूस न हो
इस रस्ते में थोड़ा आगे मयख़ाना भी आता है
Darpan
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो
सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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हम भी तुम को धोखा दें ये ठीक नहीं
आँख के बदले आँख कहाँ तक जायज़ है
Gaurav Singh
वो बड़े प्यार से कहते हैं कि आप अपने हैं
और अपनों को ही तो ज़ख़्म दिए जाते हैं
Akash Rajpoot
ख़ास तो कुछ भी नहीं बदला तुम्हारे बा'द में
पहले गुम रहता था तुम में, अब तुम्हारी याद में

मोल हासिल हो गया है मुझ को इक-इक शे'र का
सब दिलासे दे रहे हैं मुझ को "जस्सर" दाद में
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Avtar Singh Jasser
चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR
मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
Abhay Aadiv
कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई ख़ानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता
उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
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Kashif Sayyed
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ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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जितने भी हैं ज़ख़्म तुम्हारे सिल देगी
होटल में खाने का आधा बिल देगी

सीधे मुँह जो बात नहीं करती है जो
तुम को लगता है वो लड़की दिल देगी
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Shadab Asghar
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जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल
जिस की सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे
Ankit Maurya
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तोड़ कर तुझ को भला मेरा भी क्या बन जाता
उल्टा मैं ख़ुद की मुहब्बत प सज़ा बन जाता

जितनी कोशिश है तिरी एक तवज्जोह के लिए
उस सेे कम में तो मैं दुनिया का ख़ुदा बन जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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दश्त छोड़े हुए अब तो अर्सा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझ को औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
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Rishabh Sharma
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अक्सर ही ज़ख़्म इश्क़ में पाले हैं औरतें
पर कितने टूटे मर्द सँभाले हैं औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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ज़ख़्म है दर्द है दवा भी है
जैसे जंगल है रास्ता भी है

यूँँ तो वादे हज़ार करता है
और वो शख़्स भूलता भी है

हम को हर सू नज़र भी रखनी है
और तेरे पास बैठना भी है

यूँँ भी आता नहीं मुझे रोना
और मातम की इब्तिदा भी है

चूमने हैं पसंद के बादल
शाम होते ही लौटना भी है
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Karan Sahar
हम समुंदर है हम को न रस्ते बता
हम मुसाफ़िर नहीं जो भटक जाएँगे

दुश्मनी यार किस किस से लेंगे भला
तेरे पहलू से हम ही सरक जाएँगे
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Nadeem Shaad
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मेरे बस में नहीं इलाज उस का
ज़ख़्म देखा है मैं ने आज उस का

जितना आगे का आदमी है वो
रद न कर दे उसे समाज उस का
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Azhar Faragh
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ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को
सोचता हूँ कि कहूँ तुझ से मगर जाने दे
Meer Nazeer Baqri
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कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला
Ghulam Mohammad Qasir
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इक निशानी भी फ़रामोश नहीं की उस की
एक भी ज़ख़्म को आराम नहीं आने दिया
Sarwar Khan Sarwar
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भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा
Sarvat Husain
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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किस ने देखे हैं तिरी रूह के रिसते हुए ज़ख़्म
कौन उतरा है तिरे क़ल्ब की गहराई में
Rais Amrohvi
ज़माना दोस्त है किस किस को याद रक्खोगे
ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझ से दुश्मनी हो जाए
Qabil Ajmeri
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दे निशानी कोई ऐसी कि सदा याद रहे
ज़ख़्म की बात है क्या ज़ख़्म तो भर जाएँगे
Bashar Nawaz
राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर
दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा
Altaf Hussain Hali
भरता भी क्यूँँ कि ज़ख़्म था तेरे फ़िराक़ का
फिर हम ने तेरी याद को मरहम समझ लिया
Ajmal Siraj
दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है
कोई मौसम हो मिरा ज़ख़्म हरा रहता है
Shakeb Jalali
गरचे इस ने ज़ख़्म दिया है गहरा तुम से
दूसरा शिकवा दुनिया से है पहला तुम से
Gourav Kumar
ज़ख़्म भी लगाते हो फूल भी खिलाते हो
कितने काम लेते हो एक मुस्कुराने से
Nusrat Siddiqui
वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे
Ahmad Faraz
शहज़ादी तेरे माथे पर ये ज़ख़्म रहेगा
लेकिन इस को चूमने वाला फिर नहीं होगा
Sarvat Husain
लूटा दी दौलत उम्र भर की
फिर भी वो दिल से गरीब रहे

ज़ख़्म देते रहे अपने हर पल
जो जितने दिल के क़रीब रहे
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Anurudh kumar shastri
उस लड़की के जाने से बस ये बदला
प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
अब मुझे कोई गिला नहीं है तुम भी मेरे हो वो भी मेरा
सभी से अपना वास्ता है सभी से अपनी दुश्मनी है
Parwez Akhtar
किसी को क्या पता सीने के कितने ज़ख़्म गहरे हैं
सिवा तेरी मुहब्बत के कोई मरहम नहीं होगा
Shubham Seth
ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन
ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
किसी ने हिज्र अता कर के ज़िन्दगी छीनी
किसी ने ज़ख़्म दिए जो भरे नहीं अब तक

सखी सभी को मुयस्सर हैं क़ुर्बतें तेरी
बस एक हम हैं जो तुझ से मिले नहीं अब तक
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Md Akhter Ansari
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
यूँँ कब तक साथ निभाओगी
अब तो धोखा दे दो मुझ को
Pawan
दुश्मनी थी फ़क़त यही उन सेे
की नहीं दोस्ती ता-उम्र उन सेे
Vivek Chaturvedi
इश्क़ में कितना ग़म मिलता है
तुम समझे थे कम मिलता है

इश्क़ का रस्ता है ही ऐसा
धोखा कदम कदम मिलता है
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Vikash sharma
के बिछड़ कर उस सेे मेरा प्यार बदला तो नहीं
आज भी तस्वीर उस की चूम के सोता हूँ मैं
karan singh rajput
दुश्मनों को भी हम धोखा नहीं देने वाले
अगर करेंगे क़त्ल तो भी बता कर करेंगे
Praveen Bhardwaj
उस लड़की के जाने से बस ये बदला
प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
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मिले हैं ज़ख़्म इतने कि बता भी मैं नहीं सकता
किसी से बा'द तेरे दिल लगा भी मैं नहीं सकता
ATUL SINGH
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ज़ियादा कुछ नहीं बदला उदासी में
हो जाता रोज़ इक मतला उदासी में
Kailash Singh Rathore " baaz
ज़ख़्म जो दे रहा है पैहम वो
था कभी चारा-गर मोहब्बत में
Avinash Chaudhary
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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Aman G Mishra
उसी से दुश्मनी करने लगा था
जिसे मैं घर में लाना चाहता था
Tiwari Jitendra
अगर ख़ुशियाँ मुकद्दर में रही तो ग़म भी आएँगे
अगर आएँगे हिस्से ज़ख़्म तो मरहम भी आएँगे
Ravi 'VEER'
ये ज़ख़्म तो है वक़्त और मोहब्बत का
मियाँ इसे कभी अयाँ नहीं करते
A R Sahil "Aleeg"
ये ग़म-ए-इश्क़ फिर ज़ख़्म-ए-बेवफ़ाई के बाइस ही
तीस की उम्र में नब्बे का कुहन-साल दिखता है
A R Sahil "Aleeg"
मुआ'फ़ी मत दो, मगर उस सेे कोई बदला न लो तुम
किसी से बदला न लेना ही, बदला सब सेे बड़ा है
A R Sahil "Aleeg"
किसी के इश्क़ का सौदा हुआ है
किसी के साथ फिर धोखा हुआ है

कोई अब तक अकेले जी रहा है
किसी को दूसरा लड़का हुआ है
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Ashraf Ali
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वही मैं हूँ, वही ग़म है, वही दुनिया,
कलेंडर बदला है बस कुछ नहीं बदला,
Aves Sayyad
इक दिसंबर था, जनवरी थी इक
साल बदला तो मिल गए दोनों
Lokendra Faujdar 'Aham'
तुम ने कहा के चाहती थी तुम हमें बहुत
तुम को हमारी चाह थी मतलब नहीं रही

है प्यार आज भी वही, बदला है कुछ तो ये
पहले तुम्हारी आरज़ू थी अब नहीं रही
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Dipendra Singh 'Raaz'
वो लड़की मेरे दिल में अब भी आती है
जिस के आ जाने से जान चली जाती है

इक बात बताओ ऐ धोखा देने वाली
तेरी याद मुझे अब तक क्यूँँ तड़पाती है
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Kabir Altamash
कि जिस सेे चाहिए बोसा मुझे
उसी से मिल रहा धोखा मुझे

उसे मैं ने कभी समझा नहीं
दिया उस ने बहुत मौका मुझे
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Kaviraj " Madhukar"
देना ही है जो कुछ तो उसे ज़ख़्म दीजिये
एहसान भूल जाएगा कम्बख़्त आदमी
Dharamraj deshraj
फ़क़त इक तुम्हारी मुआफ़ी से दिल के
नहीं भर सकेंगे कभी ज़ख़्म कोई
A R Sahil "Aleeg"
हो ख़ताकार तुम मोहब्बत की
अब सज़ा-ए-फ़िराक़ वाजिब है
Shajar Abbas
अब कौन अभी से इक नादान दिवाना हो
जब लफ़्ज़ ज़बाँ का अब भी ज़ख़्म पुराना हो
Anansha
वफ़ा चाहा मगर धोखा हुआ
चलो जो भी हुआ अच्छा हुआ
Irshad Siddique "Shibu"
यादों के कलेंडर में अभी साल न बदला
बदले हैं नगर हम ने मगर हाल न बदला
SHIV SAFAR
दोस्ती की अभी अभी उन सेे
ज़ख़्म हम को अभी से मिलते हैं
Dharamraj deshraj
आप को मैं बदला बदला लग रहा हूँ
हर किसी को ऐसा लगता रहता हूँ मैं
Rovej sheikh
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मैं दुश्मनी को रोज़ भुलाता चला गया
अपनी ख़ुशी को ख़ूब बढ़ाता चला गया
Meem Alif Shaz
हैं दफ़्न राज़ शा'इरी में तो कई यहाँ मगर
सवाल पूछ कर यूँँ ज़ख़्म को हरा नहीं करो
A R Sahil "Aleeg"
मियाँ उस ने अभी तक उस गली से घर नहीं बदला
कि उस की कॉल की उम्मीद में नंबर नहीं बदला
Sandeep dabral 'sendy'
पढ़ रहा था वो मेरे चेहरे को
मैं ने फिर जल्दी से चेहरा बदला
Anjali Sahar
तू जो बदला तो ये ज़रूरी था
फेर लूँ ख़ुद से हर ख़याल तेरा
Ishq Allahabadi
मैं अपने ज़ख़्म गर दिखा दूँ ना
तो तुम भी इश्क़ से तौबा कर लो
Gulshan
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उस सेे बिछड़े इक ज़माना हो गया
ज़ख़्म इस दिल का पुराना हो गया

उस की यादों से कहो अब बख़्स दें
बेहद इस दिल को सताना हो गया
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Gulshan
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