DP Shayari - Express your personality with the perfect shayari for your profile picture.

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थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे
Kaif Bhopali
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अक्स-दर-अक्स बिखरना है मुझे
जाने क्या टूट गया है मुझ में
Khalid Moin
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फ़र्क़ इतना है कि तू पर्दे में और मैं बे-हिजाब
वर्ना मैं अक्स-ए-मुकम्मल हूँ तिरी तस्वीर का
Asad Bhopali
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चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
Farhat Ehsaas
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मिरा ही अक्स मुझ पर हँस रहा है
मुझे इस आइने को तोड़ना है
Avinash Chaudhary
उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में
जो ख़ुद को देखती हूँ अक्स तेरा ही उभरता है
Kiran K
तजस्सुस है मुझे बर अक्स होगा ये जहाँ कैसा
मुझे बस इक दफ़ा शीशे के दूजे पार जाना है
Aditya Pandey
ऐसा न हो कि प्यार का मज़मून भाँप कर
ख़त खोलिए तो उस
में उदासी के अक्स हों
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Gaurav Singh
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अपनी आँखों से तेरा अक्स हटाने के लिए
जो तुझे देख लें, वो बा'द में क्या देखते हैं?
Harman Dinesh
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के
रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा

जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन
चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
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Azhar Iqbal
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वो एक अक्स कि पल भर नज़र में ठहरा था
तमाम उम्र का अब सिलसिला है मेरे लिए
Rajinder Manchanda Bani
वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा
किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
मंज़िल कि जुस्तजू में गुम हो रहा हमेशा
किस अक्स को तलाशूँ अँधियार में यहाँ मैं
Zain Aalamgir
कैसे ईद मनाते चाँद बिना देखे
डीपी से रब की तस्वीर नदारद थी
Atul K Rai
ऐसा न हो कि प्यार का मज़मून भांपकर
ख़त खोलिए तो उस
में उदासी के अक्स हो
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Gaurav Singh
ऐसा न हो कि प्यार का मज़मून भांपकर
ख़त खोलिए तो उस
में उदासी के अक्स हो
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Gaurav Singh
अक्स भी उस का नाचीज़ ही लग रहा
मसअला ये भी है की वो ख़ुद ख़ास है
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
ठहर कर अक्स अपना आईने में देखते हैं हम
तुम्हारे देखने से देखने लाइक़ हुए हैं हम
Aarush Sarkaar
आज कल आइने में देखना ही छोड़ दिया
मेरी सूरत में तेरा अक्स नज़र आता है
Prit
के मैं हूँ, नहीं पर वो तलबगार है मेरा
के इश्क़ में दिल जिस के गिरफ़्तार है मेरा

अब अक्स नज़र आता है, हर शख़्स में उस का
अब लगता नहीं कोई वफ़ादार है मेरा
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Shashank Shekhar Pathak
मैं हूँ वो आइना जिस
में के शख़्सियत तेरी
हुई जो रू-ब-रू तो टूट फूट जाएगी
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Ananya Rai Parashar
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ब्लॉक कर देना मुझे जाने से पहले
डीपी देखूंगा तो मेरा दिल दुखेगा
karan singh rajput
तिलिस्मी हो गई ग़ज़लें, सदा के वास्ते मेरी
पड़ा जब अक्स ग़ज़लों पर तिरे दस्त-ए-हिनाई का
Zaman Zaidi ZAMAN
अक्स आज भी दिखता है इन आँखों में
दोस्त मेरे कहते हैं तू आज भी उस का है
A R Sahil "Aleeg"
गुमान हम को नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
जो हम सेे दुश्मनी करते तो सर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
चलना है तेरे क़दमों के रक़्स पर
तेरे अश्क पर क़दमों के अक्स पर
Jasmeet singh 'Meet'
अक्स उतरता है उस का जब पानी में
आँखें पड़ जाती हैं सब हैरानी में

बिन सोचे, मैं दिल दे बैठा था उस को
जान भी जा सकती थी इस नादानी में
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Deepak Maurya
ऐ मेरे दोस्त मुझे तो ये भी दुख है
तेरी डीपी में मेरी तस्वीर नहीं
Surya Tiwari
हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे
दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है
Kanha Mohit
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कहती है सब को नो कर मुझ को यश कर
इश्क़ अगर है तो फिर मिल न गले कस कर

उस की डीपी इतनी ज़ूम करी मैं ने
उस की फ़ोटो बोल पड़ी पोटर बस कर
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Vijay Potter Singhadiya
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जिस तरफ़ भी हाथ डाला ग़म निकल आए
हो रफ़ू कैसे बदन की दम निकल आए

खा रहा था अक्स तेरा जो रहा मुझ
में
थे नहीं महफूज़ ख़ुद में हम निकल आए
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
आप का अक्स मुझ
में अमृत था
आप का हिज्र दिल पे आरी है
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SWAPNIL YADAV 'NIL'
फ़क़त इक शख़्सियत को भूलने में
कई लोगों से रिश्ते बन रहें हैं
Chandan Sharma
किसी की मंज़िलों का अक्स बनके भी तो देख
किसी को रास्ता होकर गुज़र भी जाने दे
Hasan Raqim
इस बार दुआ है के ख़ुदा छीन ले तुझ को
बर-अक्स मुयस्सर मुझे होता है दुआ का
Dipendra Singh 'Raaz'
तू देख तो सही ज़रा शीशे में क़ल्ब के
तुझ को मिलेगा अक्स मिरा देख तो सही
Wajid Husain Sahil
वक़्त लगता है नतीजों को यहाँ आने में
अक्स दिखता न कभी चलते हुए पानी में
Sandeep dabral 'sendy'
दिल लगाकर दिल दुखा देती है वो
अपने होने का पता देती है वो

देखती है ऑनलाइन जब मुझे
अपनी डीपी को हटा देती है वो
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Manoj Sharma "Chandan"
ज़िंदगी काटी हिज्र में लेकिन
मौत के दस्तरस नहीं काटी

उस ने डीपी ही बदली जज साहिब
इश्क़ में उस ने नस नहीं काटी
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Kuldeep Tripathi KD
किसी का अक्स छलका है शुआ'ओं से बना यारों
उसी का हुस्न लगता है दु'आओं से बना यारों
Manohar Shimpi
लाज़िम है मेरी ग़ज़लों में तेरी परछाईं का होना
ना-मुमकिन है तेरी नज़्मों में मेरा अक्स समाया हो
Salma Malik
इक मैं हूँ जिस सेे डीपी तक नईं बदली जाती
इक वो है जो हर इक दिन महबूब बदलता है
Irshad Siddique "Shibu"
यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उस ने
अपनी तस्वीर ही डीपी से हटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
तेरी ही धड़कनों को दिल में जाँ बाशिन्दा रक्खा है
बनाया था तेरा जो अक्स वो ताबिन्दा रक्खा है

ये ग़म तुझ सेे बिछड़ने का किसी मातम सा लगता है
मगर ये ग़म ही है जिस ने कि अब तक ज़िन्दा रक्खा है
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Rehaan
सादगी ने तेरी हम को भी तो धोके में रखा
धुंद को हम चाँदनी का अक्स ही कहते रहे
Meem Alif Shaz
देखूँ जो ख़ुद को दिखता है बस उस का अक्स
सो सारे आईने जला के बैठा हूँ

उस ने कहा था लौट कर आऊँगा मैं
जब से नज़र दर पे लगा के बैठा हूँ
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Gulfam Ajmeri
मैं मैं नहीं रहा हूँ तुझ सेे लगा के दिल को
जो जो भी बन गया हूँ हर अक्स वो तिरा है
Sohit Singla
न लहजे में तेरे नरमी न आँखों में मुहब्बत है
मुहब्बत को भी मातम सा मनाता हो कोई जैसे

मेरा ही अक्स मुझ को छोड़कर होता है रुख़सत यूँँ
वो समझौतों की चादर फिर बिछाता हो कोई जैसे
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Divya Gosain
वहाँ कोई इशारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन
बिना उस के गुज़ारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन

कि मुझ सेे दूर इतनी जा चुका है अक्स ही मेरा
जहाँ उस को पुकारा भी नहीं अब जा सकेगा सुन
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Inshpa Ilahabadi
आख़िरी शख़्स तू आज भी याद है
दिल मिरा अक्स तू मौत के बा'द है
Vinod Ganeshpure
इक तरफ़ ये चुनाव भी है और
इक तरफ़ शख़्सियत बड़ी है ये
Vinod Ganeshpure
है मेरी ये जो शख़्सियत नाम के ही उलट यूँँ
मैं ख़ामोश सा रहता हूँ और वो बेबाक़ सा भी
Naviii dar b dar
अदावत हाथ के पत्थर ने शीशे से निभानी है
मेरे ही अक्स को मुझ से ज़रा सी बद-गुमानी है
Meenakshi Masoom
मेरे सामने से गुज़र गए मेरी शख़्सियत को नकार कर
मुझे इस का कोई गिला नहीं ये तो वक़्त-वक़्त की बात है
arjun chamoli
तेरा अक्स अब भी मेरी इन आँखों में लहराता है
जैसे आसमाँ में कोई बादल ख़ुद ठहर जाता है
arjun chamoli
रात यूँँ बिखरी पड़ी है अक्स पूनम सी हसीं
तीरगी में ही मज़ा है छू ले दिल कहता रहा
Shivam Ritwik
जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे
वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या

मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले
बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
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ALI ZUHRI
ख़्वाब में इक बार फिर देखी वो आँखें
अक्स वो रुख़्सार के प्यारी वो आँखें

हो भी जाए क़ैदस आज़ाद हम पर
क्या करें जब देख लें तेरी वो आँखें
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Aditya Maurya
सौ अक्स अगर देखने का शौक़ है 'अरबाब'
शीशे की तरह आप बिखर क्यूँँ नहीं जाते
Arbab Shaz
जिस किसी भी शख़्सियत से हम मिले हैं
दिल बड़ा निकला हमारा उन सभी से
Vinod Ganeshpure
जहाँ सुकूँ मिले उस ज़ाविए में ढाल मुझे
तिरा ही अक्स हूँ बच्चों की तरह पाल मुझे

मैं हर क़दम पे तिरे साथ ही रहूँगा दोस्त
तू आँख मीच के इक बार तो उछाल मुझे
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Harsh Kumar Bhatnagar
या तो दिन भर काम कर लो शख़्सियत आबाद कर लो
या लगाकर बहर अपना शे'र ज़िंदाबाद कर लो

क्या मिलेगा जब मोहब्बत में समय बर्बाद कर लो
इस सेे अच्छा मर ही जाओ ख़ुद को तुम आज़ाद कर लो
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Vr Hardik Jaiswal
उस आइने में हम तो सँवर भी नहीं सकते
जिस आइने में अक्स तुम्हारा नहीं होगा
Rakesh Mahadiuree
ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है
divya 'sabaa'
ये किस का अक्स है हर सू समाया
छुपा है कौन मेरी पुतलियों में
Shiva awasthi
अक्स किरदार का भी दिखता है
आप समझे न महज़ लफ़्ज़ इसे
A R Sahil "Aleeg"
वो अक्स जिस की एक भी मुमकिन नहीं मिसाल
जो बन के मेरे ज़ेहन में पैकर ठहर गया
divya 'sabaa'
अच्छे हो कर लौट गए सब घर लेकिन
मौत का चेहरा याद रहा बीमारों को
Shariq Kaifi
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भुला के दूल्हा जिसे बैठता है मंडप में
वो चेहरा आख़िरी फेरे में याद आता है
Shanawar Kiratpuri
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कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता
हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
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इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा
इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
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रोना हो आसान हमारा
इतना कर नुक़्सान हमारा

बात नहीं करनी तो मत कर
चेहरा तो पहचान हमारा
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Shariq Kaifi
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उम्र गुज़री उस का चेहरा देखते
और जी लेते तो दुनिया देखते
Vipul Kumar
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शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
Shakeel Jamali
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कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
Ibn E Insha
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ
वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
Muneer Niyazi
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एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है
इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता
Javed Naseemi
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
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Kaif Bhopali
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तेरा लिक्खा जो पढ़ूँ तो तेरी आवाज़ सुनूँ
तेरी आवाज़ सुनूँ तो तेरा चेहरा देखूँ
Bhaskar Shukla
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उतर गया है चेहरा तेरे जाने से
लॉक नहीं खुलता है अब मोबाइल का
Tanoj Dadhich
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चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें
Tehzeeb Hafi
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कुछ ने आँखें कुछ ने चेहरा देखा है
सब ने तुझ को थोड़ा थोड़ा देखा है
Tousief Tabish
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा
मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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हमारे सीने पे उँगलियों से तुम अपना चेहरा बना रहे थे
तुम्हें कुछ उस की ख़बर नहीं थी हमारे दिल में जो चल रहा था
Nadim Nadeem
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घूमता रहता है हर वक़्त मेरी आँखों में
एक चेहरा जो कई साल से देखा भी नहीं
Riyaz Tariq
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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दर्द चेहरा पहन के आया था
तेरा चेहरा था सो क़ुबूल किया
Aslam Rashid
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हम ऐसों को बना कर के ख़ुदा उकता गया था फिर
तेरी आँखें बना डाली तेरा चेहरा बना डाला
Ankit Maurya
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन
इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
Shriyansh Qaabiz
हसीं ख़्वाबों को अपने साथ में ढोती हुई आंँखे
बहुत प्यारी लगी हम को तेरी सोती हुई आंँखे

मोहब्बत में ये दो क़िस्से सुना है रोज़ होते हैं
कभी हँसता हुआ चेहरा कभी रोती हुई आंँखे
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Naimish trivedi
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे
एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे

उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का
हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
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Shikha Pachouly
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