Mood Off Shayari - Express your upset mind and restless heart through deep poetic words.

When words fail to describe the frustration within, poetry steps in. Our collection of mood off shayari captures that heavy feeling of a restless mind and an upset heart perfectly.

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो
Arzoo Lakhnavi
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उस की बेचैनी बढ़ाना चाहती हूँ
सुनिए कह कर चुप लगाना चाहती हूँ
Pooja Bhatia
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मेरी बेचैनी का आलम मेरी बेचैनी से पूछो
मेरे चहरे से पूछोगे कहेगा ठीक है सब कुछ
Aqib khan
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दुखी रहने की आदत यूँंँ बना ली है कि अब कोई
ख़ुशी का ज़िक्र भी कर दे तो फिर तकलीफ़ होती है
Dipendra Singh 'Raaz'
मुझ को सूली पे चढ़ाकर भी दुखी है दुनिया
वो मेरी मौत नहीं आँखों में डर माँगती है
Meraj Faizabadi
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ये मोहब्बत में बड़ी हार समझ लो मेरी
आज मैं उस की ख़ुशी में दुखी मालूम पड़ा
Haresh Vanza
ख़ामोशी, बेचैनी, यादें तेरी, मेरा ख़ालीपन
कितना कुछ है कमरे में तेरे और मेरे सिवा
Prashant Shakun
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जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा
वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं

दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी
वो ज़बान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं
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Ashish Anand
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हमेशा हँसती रहो ख़ुश रहो दुखी न रहो
कली हो खिलती हुई तुम बुझी बुझी न रहो
Dharmesh Solanki
मलाल सूरज को, नूर दे सितारा भी
दुःखी रहूँ, तुझ को गैर दे गया मुस्काँ
Zain Aalamgir
इक बेचैनी सी है मन में क्या होगा ये रब जाने
यार मिरे कोई पूछो रब से वो तो है सब जाने
Kabir Altamash
ख़ौफ़, ख़ामोशी, बेचैनी ने था जकड़ा
हाथ मेरा तेरे हाथों ने था पकड़ा

प्यार है तो फिर झगड़ा भी करना सीखो
इत्तना सा बस हम दोनों में था झगड़ा
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Udit Narayan Mishra
वो इस कारण दुखी है
कि हर इंसाँ सुखी है
Jitendra Tiwari
कोई तो हो मेरे या रब जो मुझ को देख कर बोले
'शजर' तुम इस तरह तन्हा दुखी अच्छे नहीं लगते
Shajar Abbas
तुम बस ज़रा सा मुस्कुरा दो दोस्तो
मेरे जनाज़े पर दुखी तो सब ही हैं
Rachit Sonkar
दुखी होने लगे जब हम ग़ज़ल कह दी
हुई आँखें मिरी जब नम ग़ज़ल कह दी

नज़र आया, लगा अपना, मुझे कोई
न बोले, आ गए घर हम ग़ज़ल कह दी

बिछड़ के जा रहा था दूर ख़ुद से मैं
तभी ऐसा बना आलम ग़ज़ल कह दी

टपकता था लबों से पानी बारिश का
बदन भीगा, हसीं मौसम ग़ज़ल कह दी

उसे मालूम हो क्या हाल मेरा है
लिखे सारे-के-सारे ग़म ग़ज़ल कह दी

क़लम ने ख़ूब फिर ता'रीफ़ की 'माहिर'
किया अच्छा जो ये हमदम ग़ज़ल कह दी
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Vijay Anand Mahir
तुम्हें ये सब समझने में अभी थोड़ा समय तो है
किसी ने ज़िंदगी कैसे दुखी हो कर निकाली थी
Amanpreet singh
सितम हुए हैं ऐसे भी
दुखी हैं मेरे जैसे भी

दुआ समझ या ज़िद ख़ुदा
वो शख़्स दे दे कैसे भी
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Adnan Raza
थोड़ा दुखी जो कल भी था, थोड़ा उदास आज हूँ
ख़ुश तो नहीं हूँ मैं मगर आदमी खुशमिजाज हूँ
RAJAT AWASTHI
रातों की बेचैनी हम से पूछो
पूरी फ़िक्र बिछाकर सो जाते हैं
Meem Alif Shaz
इश्क़ में ख़ुद-कुशी नहीं करनी
इश्क़ हम को दुखी नहीं करता
ABhishek Parashar
खोने का तुझ को डर निकले,
बेचैनी से हम मर निकले,

साँसों में तब साँसें आईं,
जब दिल के तुम अंदर निकले
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Divya 'Kumar Sahab'
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जीत भी मंज़ूर मुझ को हार भी
मैं दुखी हूँ और मेरा किरदार भी

कब लिखी उस ने ख़ुशी इस रोल में
है परेशाँ वो कहानी कार भी
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Vijay Potter Singhadiya
बर्फ़ीली यादों से सीने में बेचैनी है
उन के आते ही मौसम में गर्मी आएगी
Meem Alif Shaz
तन्हाई, ख़ामोशी, बेचैनी, सब कुछ तो है
तेरी मोहब्बत ने भी ख़ूब नवाज़ा है हम को
Meem Alif Shaz
दूर इस लिए नहीं किया कि ख़ून पीता था
देखा इक उड़स ज़ियादा पीने से था मर गया
100rav
मुझ सेे पहले किसी से मिली आती है
वस्ल में हिज्र की ख़ुश्बू सी आती है

मैं बिछड़ कर दुखी हूँ तू ऐसा न सोच
ऐसे मौसम में तो शा'इरी आती है
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Prit
जश्न, शोक, जो कुछ भी हो मनाना पड़ता है
जैसे हम नहीं हों वैसे दिखाना पड़ता है

एक दिन ख़ुशी से जो बीत जाए तो हम को
चार दिन दुखी हो कर के चुकाना पड़ता है
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Harsh Raj
मेरे हँसने पे जो समझे दुखी हूँ मैं
मुझे इक शख़्स ऐसा दे मेरे मौला
Murari Mandal
दिल जो तोड़ा तुम ने इस में क्या नया है
कब हवा को जलते दीए अच्छे लगते

इन दुखी अश'आर का वो ही सबब है
जिस ने बोला आप हँसते अच्छे लगते
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Jagveer Singh
बड़ी बेचैनी से वो छत पे आती है
गली में या'नी कोई अब भी रहता है
Mohd Arham
मुहब्बत है क्या तुम ख़ुदा से ये पूछो
दुखी कौन था कर्बला से ये पूछो

वो तो जंग करनी नहीं थी वगरना
यक़ीं नइँ तो ज़ू-अल-जना से ये पूछो
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Vaseem 'Haidar'
ये मत सोचो केवल मैं हूँ
इस दुनिया में सब ही दुखी हैं
Ambar
अंधों की बेचैनी को तुम क्या जानो दुनियावालों
तुम ने तो दोनों आँखों से ख़ूब उजाले देखे हैं
DEVANSH TIWARI
कोई बेचैनी से चेहरा तेरा मुरझाया हुआ है
देख के हालत तेरी दिल मेरा घबराया हुआ है
Manohar Shimpi
उन से पूछिए जिन्हें सज़ा पसंद है बहुत
हम तो हैं दुखी हमें दवा पसंद है बहुत

हम को तो नहीं है रास्ते में चाँद की तलब
साथ हो तुम्हारा तो दिया पसंद है बहुत
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Meem Alif Shaz
हम मुब्तला-ए-ग़म कभी होंगे नहीं
होगा दुखी दुख हम दुखी होंगे नहीं
Manoj Devdutt
जैसा सोचा तुम ने मैं वैसा नहीं हूँ
पर बदल जाऊँ वो मैं चेहरा नहीं हूँ

अब ज़माने से मैं रहता हूँ दुखी पर
मसअला ये है कि मैं लगता नहीं हूँ
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Shubham Upwan
दिए बना तो रहा हूँ मगर दुखी हूँ मैं
दिए के होने का मतलब है रात फिर होगी
ADITYA TIWARI
एक लड़की थी जो हर दुख जान लेती थी
मैं जो कहता था वो ही सच मान लेती थी

उस के जाने से दुखी क्यूँ हो रहा हूँ मैं
वो तो वो ही करती थी जो ठान लेती थी
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Sumit Yadav
दिल तो सुख़न-गोई से बहला सकते हैं
उस का क्या हो रूह को जो बेचैनी है
shampa andaliib
दिल की बेचैनी का कुछ तो हो सबब
याद आए कोई ग़म हो कोई तो
Hamza ali
तुम ने ऐसी कह दी बात
बेचैनी में काटी रात
Khalid Nadeem Budauni
रास्ते में यक-ब-यक यादों का मंज़र आ गया
दिल की बेचैनी से लगता है दिसंबर आ गया
Mayank Shukla
साँस मेरे सीने से इक-इक उखड़ जाएगी तब भी
देखना दिल में मचलती एक बेचैनी मिलेगी
Mohit Subran
ये मेरी आख़िरी शाम भी तो हो सकती है
जिस को मैं जी रहा हूँ बड़ी बेचैनी के साथ
Bilal Official
आज कल नींद नहीं नयनों में आती मेरे
दिल की बेचैनी है इक लड़की बढ़ाती मेरे

चाहता हूँ कि उसे दिल से भुला दूँ लेकिन
याद उस की कभी दिल से नहीं जाती मेरे
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KAVI SURESH AKELA
अना हिर्स-ओ-हवस नफ़रत दुखी रखते हैं मुझ को गर
नहीं समझा हूँ मैं फिर अपने ही ग़म-ख़्वार की बातें
Manish Pithaya
तुझ को पहचानना ही मुश्किल है
ये तेरा आईना नहीं मैं हूँ


ये जो रहती है दिल में बेचैनी

कोई और सानेहा नहीं मैं हूँ
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MIR SHAHRYAAR
आयत हुई पूरी लेकिन मत हो दुखी
अध्याय का अंत है पुस्तक का नहीं
Amit Rajvanshi 'Guru'
मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब
मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

ऐ शख़्स अब तो मुझ को सब कुछ क़ुबूल है
ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई
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Jaun Elia
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वैसे एक शिकवा था तुम सेे
अच्छा छोडो ईद मुबारक
Zubair Ali Tabish
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए
कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
अब कोई शिकवा हम नहीं करते
Jaun Elia
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हालात ने किसी से जुदा कर दिया मुझे
अब ज़िंदगी से ज़िंदगी महरूम हो गई
Asad Bhopali
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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
Shaad Arfi
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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
Aziz Nabeel
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तुझे करनी है तो मुसावात कर
कि बेहतर हमारे भी हालात कर

मिटा दिल में बनते ये सहराओं को
ख़ुदा अपने बंदों पे बरसात कर
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Siddharth Saaz
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे
हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है
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Mehshar Afridi
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बुरे हालात है पर यार अब भी
गले मिलता है, सेहत पूछता है
Gagan Bajad 'Aafat'
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अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर'
एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे
Majeed Akhtar
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मैं बदलते हुए हालात में ढल जाता हूँ
देखने वाले अदाकार समझते हैं मुझे
Shahid Zaki
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से
रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
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Chandan Sharma
ज़िस्त की जान जाते भी देखा हूँ मैं
मौत को साँस आते भी देखा हूँ मैं

सब तो हँसते ही हैं मेरे हालात पे
दर्द को मुस्कुराते भी देखा हूँ मैं
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SHIV SAFAR
ये तुम भी जानते हो कि हालात नर्म है
कहने को कह रहा हूँ कि सब ठीक ठाक है
shaan manral
बदले मौसम हालात यहाँ
है ख़ुशियों की बारात यहाँ

होली खेलेंगे हम भी पर
खेलेंगे तेरे साथ यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
तुम्हारे बा'द ये हालात हैं कि लगता है
तुम्हारे साथ मुलाक़ात एक ग़लती थी
Hasan Raqim
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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भूला नहीं हूँ आज भी हालात गाँव के
हाँ, शहर आ गया हूँ मगर साथ गाँव के

दुनिया में मेरा नाम जो रौशन हुआ अगर
जलने लगेंगे बल्ब भी हर रात गाँव के
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Tanoj Dadhich
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल
जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
Unknown
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मैं ने रक्खा है हमेशा ही तबस्सुम लब पर
रो दिया क्यूँँ मिरे हालात समझने वाला
Qamar Jalalabadi
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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से
Waseem Barelvi
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पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा
Rais Amrohvi
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ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा
जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते
Meraj Faizabadi
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मेरे हालात को बस यूँँ समझ लो
परिंदे पर शजर रक्खा हुआ है
Shuja Khawar
फिर उस के बा'द ख़बर आई वो बहुत ख़ुश है
जुदा हुए थे तो हालात एक जैसे थे
Usama Zoraiz
फिर रहे हैं सभी चेहरों पे नक़ाबें डाले
किस को हालात का आईना दिखाया जाए
Khwaja Shauq
गरचे इस ने ज़ख़्म दिया है गहरा तुम से
दूसरा शिकवा दुनिया से है पहला तुम से
Gourav Kumar
तुझ सेे गीला शिकवा करना बेकार है मेरी जाँ
तुझे झगड़ना आता है बस बात को समझना नहीं
karan singh rajput
अभी तक मैं अगर उस के दिल से उतरा नहीं
फिर मेरे लिए तो इस सेे ज़्यादा कुछ बुरा नहीं

एक जैसे सात चेहरे तो मुमकिन है लेकिन
मिरे ख़याल से तुम जैसा कोई दूसरा नहीं

वो रूठके अगर चाहती है ,, मैं मनाऊं उसे
तो फिर ये प्यार है उस का ,, नख़रा नहीं

महोब्बत करना चाहते हो करो शौक़ से करो
मियाँ मैं कहता हूँ इस
में कुछ भी बुरा नहीं

मिरे दोस्त ये किस की तस्वीर उठा लाए हो
ये सूट तो उसी का है, मगर चेहरा नहीं

मैं इश्क़ के मोहल्ले में गया था तन्हाई बहुत थी
ये तो अच्छा हुआ मैं ज़्यादा दिन ठहरा नहीं

"करन" तुम मोहब्बत में पूरे पागल हो जाओगे
ये सारी दुनिया का शिकवा है सिर्फ़ मेरा नहीं
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karan singh rajput
युही अ
गर ज़ुल्फ़ों में उलझाती रहोगी तुम
सुधरेंगें कैसे मेरे बिगड़े हालात इस तरह
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Harsh Jani
जो न तुम सेे हो सकी, महताब बातें जानता है
गुफ़्तगू हालात दिल की रात कर लेगी बयाँ अब
Zain Aalamgir
तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को
किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
साथ आओ चल के देखते हैं
हालात बदल के देखते हैं
Tausif Alam
है ये अजीब शिकवा कार ए जहाँ से मेरा
कुछ कर नहीं रहे हैं और वक़्त भी नहीं है
Shivam chaubey
तस्वीर करती है बयाँ, तबके मिरे हालात को
है उन दिनों की बात, हम हँसते दिखाई देते थे
Zain Aalamgir
हार कर हौसले लौट कर जाते हैं
ऐसे हालात में लोग घर जाते हैं

मैं मुहब्बत की उस आख़िरी मोड़ पर
जा रहा हूँ जहाँ जाके मर जाते है

ज़िन्दगी क्या है बस साँसों का काफिला
साँस रुकने लगे लोग डर जाते हैं
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Gaurav Singh
तन्हाई हो, हिज्र हो, बातें करने को तरसे ये दिल,
इश्क़ हुआ वो जिस
में ये हालात मुसलसल रहते हों
Read Full
Hasan Raqim
तुझे आबाद रहने की दुआ दे के
मेरे हालात पर रोता रहा मैं
karan singh rajput
किस सेे बयाँ अपने हालात करूँँ
आप नहीं मैं किस सेे बात करूँँ
Vikas Sangam