Sabr Shayari Collection - Patience, waqt, aur intezaar ke jazbaat ki shayari

Sabr shayari reflects the quiet strength of patience, where silence speaks louder than words. It captures the emotions of waiting, trusting waqt, and holding on when life tests you the most. These lines bring sukoon and remind you that every struggle has its right time to bloom.

sabr shayari
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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रात का इंतिज़ार कौन करे
आज कल दिन में क्या नहीं होता
Bashir Badr
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मेरे होंठों के सब्र से पूछो
उस के हाथों से गाल तक का सफ़र
Mehshar Afridi
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जिस दिन तुम्हारे ख़त का मुझे इंतिज़ार था
उस दिन तमाम पंछी कबूतर लगे मुझे
Ali Rumi
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उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
Jaun Elia
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सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ
सो वो मुद्दत से अब नहीं आता
Meer Taqi Meer
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ
तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल
Ammar Iqbal
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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'
Dushyant Kumar
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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
Ibrat Siddiqui
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हर कोई सब्र की तलक़ीन किया करता है
पर कोई ये तो बताए कि करूँँ मैं, कैसे?
Afzal Ali Afzal
हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं
जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं
Unknown
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता
मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह
लुटा के बैठोगे सब्र-ओ-क़रार मेरी तरह
Fareed Parbati
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सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है
A R Sahil "Aleeg"
सब्र मेरा फ़िक्र में है रोज़-ओ-शब ये सोचता है
दूध में दोनों अँगूठी ढूँढ़ते कैसे लगेंगे
Raj
अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया
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shaan manral
इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ
Meer Taqi Meer
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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है
Rakib Mukhtar
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तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको
तमाम खेल मुहब्बत में इंतिज़ार का है
Munawwar Rana
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है
अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर
Yagana Changezi
क्यूँँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है
Hafeez Jalandhari
सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ
Aasi Uldani
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बहुत ताख़ीर से पाया है ख़ुद को
मैं अपने सब्र का फल हो गई हूँ
Humaira Rahat
फिर उस ने खोल दिए सारे रास्ते मुझ पर
वो थक गया था मेरा सब्र आज़माते हुए
Shakir Dehlvi
और इक इंतिज़ार हिस्से में
कोई आसान काम दे मुझ को
Nilesh Barai
तुम मशरूफ इंशा करते हो आधी रात को याद
तुम्हारे इंतिज़ार में आख़िर कब तक जागे कोई
karan singh rajput
तुम्हारी एक झलक के लिए दिल बे-क़रार रहेगा
कभी पटना आओ मुझे तुम्हारा इंतिज़ार रहेगा

अगर कभी थक जाओ मोहब्बत से तो बता देना
हमारी मोहब्बत में भी छुट्टी वाला इतवार रहेगा
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MANOBAL GIRI
मुलाक़ात कुछ इस कदर हुई उन सेे की कुछ बात हो न पाई
वो डूबी रही मेरी आँखों में और सारी रात सो न पाई

उन के इश्क़ में बेचैन हम रात भर करवटे बदलते रहे
वस्ल के इंतिज़ार में तमाम रात हम फ़क़त टहलते रहे
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MANOBAL GIRI
दुख की बारिश है और ऐसे में
सब्र कच्चे मकान वाला है
Saarthi Baidyanath
तेरे इंतिज़ार के लम्हें कितने लंबे हो गए
घर के बाहर रुके और लाइट के खंबे हो गए
RUSHIKESH PAWAR
आ जा के बे-क़रारियाँ हद से गुज़र गई
अब ज़ख़्म इंतिज़ार का नासूर हो गया
Sultan
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा
मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
सब्र नायाब हुआ जा रहा है रोज़ ब रोज़
क्या ख़बर किसलिए हर शख़्स बहुत जल्दी में है
Ramnath Shodharthi
जो इन्तेज़ार करना जानता है
वही तो प्यार करना जानता है
Saarthi Baidyanath
सियाह शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी
मुझे अँधेरों कि आदत तबाह कर देगी

मैं तेरे दुख में बराबर शरीक हूँ सो मुझे
उदास शब कि अज़ीयत तबाह कर देगी

जो सब्र और तहम्मुल के साथ ईश़्क करे
उसे तुम्हारी मोहब्बत तबाह कर देगी

जो इश्क़ सब्र की दीवार तोड़ दे जानाँ
उसे बदन की ज़रूरत तबाह कर देगी

दुआ सलाम से आगे अगरचे बात बढ़े
तो फिर ये वस्ल की राहत तबाह कर देगी

हसीन चेहरे की आदत है छोड़ जाने की
सो ऐसे शख्श़ की सोहबत तबाह कर देगी
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Md Akhter Ansari
अभी-अभी तो इश्क़ से मिली है इफ़ाक़त
अगरचे सब्र ओ क़रार पाया नहीं है
A R Sahil "Aleeg"
शुक्र है अल्लाह का जो आ गया सब्र
वरना इक दिन तर्क हम इस्लाम करते
Sayeed Khan
हर साल इंतिज़ार मुलाक़ात का हुआ
हर साल मिल न पाए दिसबंर से जनवरी
Dipanshu Shams
चौथी सिगरेट जला के बैठा हूँ
मैं तेरा इंतिज़ार करते हुए
Upendra Bajpai
दुआ तर्क करने को हम सब्र करना नहीं कहते
दुआ पर डटे रहने का नाम ही सब्र होता है
A R Sahil "Aleeg"
सब्र से काम ले रहा था मैं
और फिर मौत आ गई मुझ को

मैं उसे भूलना तो चाहता था
और दिल-ए-रोग खा गई मुझ को
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Afzal Sultanpuri
ये सब्र -ओ -ज़ब्त अब और मुझ सेे ख़ुदा होता नहीं हैं
मुझे तू आज़माना अब छोड़, कुन कह दे दुआ पर
A R Sahil "Aleeg"
बात सब्र की हम सेे तुम न करो तो ठीक रहेगा अब
इक वा'दे के पीछे सारी उम्र खपा दी है हम ने
Sandeep dabral 'sendy'
तेरे बग़ैर गवारा नहीं बहिश्त मुझे
मैं पुल सिरात पे बैठा हूँ इंतिज़ार में हूँ
Nirmal Nadeem
ख़ुद-कुशी का तो इरादा था नहीं
इश्क़ में मरने का वा'दा था नहीं

सब्र और बर्दाश्त मुझ
में थी नहीं
वरना ग़म तेरा ज़ियादा था नहीं
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Sayeed Khan
इश्क़ में हो तुम तो जंग को जारी रक्खो
सब्र के साथ ये भी जीती जा सकती है
Surya Tiwari
ख़ुद को थोड़ा सा बचा लेता हूँ मैं कल के लिए
सब्र के फल के लिए ज़िन्दगी के हल के लिए

मिन्नतें की थी जो रो रो के जिस इक पल के लिए
एक पल भी वो नहीं रुक सका इक पल के लिए
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Faiz Ahmad
सोच कर ये सब्र मैं ने कर लिया ग़म से मिला क्या
रंज, मातम के अलावा और अपने बस में था क्या
Sayeed Khan
अब तो पानी भी बंद है मुझ पर
कर अता मुझ को सब्र तू या रब
Shadan Ahsan Marehrvi
चूम लेना लबों को मिलो गर कभी
सब्र का फल मिले मुझ को भी आपसे
Kanha Mohit
इक सिलसिला तवील रहा इंतिज़ार का
अब हाल क्या सुनाएँ दिल-ए- बेक़रार का
Navneet krishna
तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया
shaan manral
इश्क़ के बीमार का वाजिब मुक़द्दर मय-कदा
राह मुश्किल है न हो हर मील पर गर मय-कदा

आदमी होते ‘तहम्मुल’ रोज़ जाते काम पर
गर गली ये छोड़ देते है जहाँ पर मय-कदा
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
रूम पर आप हैं और सब्र हमारा देखो
बंद खिड़की नहीं की और न ही पर्दा खींचा
Aatish Indori
उस एक शख़्स का रहा बरसों से इंतिज़ार
सीने से जो लगाए तो अपना लगा कहे
Sohil Barelvi
हिफ़ाज़त कर रहा है तू मगर ये जान जानी है
यहाँ पर सबकी बस दो चार दिन की ही कहानी है

मैं था तेरे मुक़द्दर में नहीं तो सब्र कर ऐ यार
ये मेरा या न तेरा फ़ैसला है आसमानी है
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Sayeed Khan
कहीं ये सब्र खा जाए न हम को
किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं
Rohit Gustakh
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सब्र करिए दिल को मेरे सब्र आने पर
दास्तान-ए-इश्क़ का हासिल सुनाऊँगा

जंग इक ऐसी कि जिस
में हारना तय था
मैं लड़ा ऐसे कि मानो जीत जाऊँगा
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Mohit Dixit
सब्र कैसे मुझे यहाँ होगा
तुम मिरे हो नहीं कहीं भी अब
Vaseem 'Haidar'
सब्र कैसे मुझे यहाँ होगा
तुम मिरे हो नहीं कहीं भी अब
Vaseem 'Haidar'
तजुर्बा ये भी कहता है के थोड़ा सब्र तो रक्खो
मोहब्बत और मंजिल मिलने में कुछ वक़्त लगता है
Shashank Tripathi
धर्म के रस्ते पे चलिए धैर्य रखिए और फिर
जीत कर लंका अयोध्या लौटिए आराम से
Atul K Rai
ज़रा सा धैर्य रखने की ज़रूरत थी मुहब्बत में
जो घबराते नहीं तुम तो हमारा नाम हो जाता
Akash Gagan Anjaan
जब भी उस को बोलता हूँ प्यार का इज़हार कर
बोलती है सब्र कर तू सब्र कर तू सब्र कर
Kanha Mohit
नहीं है चाह जिस्मों की न दौलत चाहिए तेरी
मिले दिल में जगह तेरे वहीं दुनिया बसा लूँगा

मुहब्बत ही नहीं तुम सेे मिरी जान-ए-जिगर हो तुम
ज़रा सा सब्र तो कर लो तुम्हें अपना बना लूँगा
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Jitendra "jeet"
नहीं अब सब्र होता है हमें इतना रुलाती है
मैं उस को भूलना चाहूँ मगर वो याद आती है

उसे चाहा यही मैं ने हमेशा ख़ुश रहे लेकिन
तड़पती है वहाँ अफ़ज़ल यहाँ हम को सताती है
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Afzal Sultanpuri
सभी को ही कहा है झूठ की आराम है हम को
न होता जॉन हम को सब्र तो तुम्हीं को पढ़ते हैं
Aditya Maurya
शादी तू कर लेती तो फिर सब्र आ जाता हमें
बे-वफ़ा हो के तू तन्हा रहती है दिल दुखता है
Meem Alif Shaz
सजदे करो लाखों मगर मालूम है ना इश्क़ है
गर मिल गए तो ठीक वरना जानलेवा इश्क़ है

संगम के पानी की तरह तुम सेे मेरा दिल मिल गया
ये जान कर भी सोचती हो क्या भरोसा इश्क़ है

पूछा किसी ने माँ से चुप कब से है तेरा लाडला
कहने लगी जिस दिन मुझे इसने कहा था इश्क़ है

मन्नत से शायद अपको जन्नत तो मिल भी सकती है
पर वो मिलेगा जब उसे एहसास होगा इश्क़ है

शिद्दत जुनूँ दीवानगी काफ़ी नहीं हैं इश्क़ में
करना पड़ेगा सब्र 'मोहित' मोक्ष पाना इश्क़ है
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Kanha Mohit
कीं कोशिशें हज़ार उसे भूल जाऊँ मैं
वो भी मय-ए-कुहन है उतरती नहीं मगर

एक उम्र काट दी उसी के इंतिज़ार में
कमबख़्त शाम-ए-हिज्र गुज़रती नहीं मगर
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Faiz Ahmad
सब्र का फल रहा न शीरीं अब
देर की तो न गाड़ियाँ ठहरी
Shan Sharma
ज़रा धैर्य रखिए सघन वन दिखेगा
ये पेड़ों के पत्ते गिराने के दिन हैं
Atul K Rai
ये अश्क-ओ-दर्द ये सब्र-ओ-क़रार खो दूँगा
मैं तेरे हिज्र की लज़्ज़त भी यार खो दूँगा

रहे ये सब्र सलामत मुझे तो डर ये है
मैं तुझ को पा के तेरा इंतिज़ार खो दूँगा
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Wajid Husain Sahil
छोड़ भी दे अब दु'आओं में माँगना
सब्र रख जो भी ख़ुदा देता है तुझे
Kanz Al Rida
मुसलसल कोई घाइल तो नहीं है
मगर जो आज है कल तो नहीं है

तुझे गर सब बुरा कहते हैं तो सोच
ज़माना यूँँही पागल तो नहीं है

मिला है ग़म तो थोड़ा सब्र भी कर
अँधेरा ये मुसलसल तो नहीं है
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Meem Alif Shaz
उस को तो इन्तज़ार का मतलब नहीं पता
मतलब कि उस को प्यार का मतलब नहीं पता
Umesh Maurya
जो ज़ख़्म दर्द की तावील बन के आया था
वो गोया सब्र की तकमील बन के आया था

था अज़्म तो मेरा असहाबे-फी़ल सा लेकिन
मेरा नसीब अबाबील बन के आया था
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Wajid Husain Sahil
मोहब्बत काम अच्छा कर रही है
मुझे अब सब्र करना आ रहा है
Sanskar Shrivastav
मंज़िलों के लिए रास्ता चाहिए
रास्ता हो तो फिर हौसला चाहिए

जंग इंसाफ़ की जीतने के लिए
सब्र का इक बड़ा क़ाफ़िला चाहिए
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Meem Alif Shaz
हर ज़ेहन जो बेसब्री का हंगाम है
अब सब्र ही यारों बना गुलफ़ाम है
Betaab Murtaza
इश्क़ में सब्र की तुम दवा मत करो
इस मुलाक़ात को तुम क़ज़ा मत करो
Meem Alif Shaz
बेबसी बेचैन करती है तुम्हें
बेबसी की इंतिहा ही सब्र है

पहले ख़ुद मरने को बेबस कर दिया
पूछती हो अब ये किस की कब्र है
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Gopesh "Tanha"
कितनी उम्मीद और की जाए
सब्र का ही चराग़ बुझता है

दे चुकी है वो अपना दिल जिस को
एक लड़का है जो वहीं का है
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Vaseem 'Haidar'
आप अब सब्र करें बहर-ए-ख़ुदा मत रोएँ
बेटियाँ रोती हैं तो बाप का दिल दुखता है
Shajar Abbas
अल्लाह सब्र दे मुझे दुख से निकाल दे
फिर ज़ोर दे रहा हूँ उसी हादसे पे मैं
Sohil Barelvi
दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता
ग़म न होता ख़ुशी नहीं होती

गर हमें सब्र-ओ-ज़ब्त आ जाता
अपनी जन्नत यही ज़मीं होती
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Anjali Sahar
सब्र करता नहीं यहाँ कोई
और फल चाहते हैं मीठा लोग
Mohd Arham
मैं ग़लत हूँ तुम सही हो गर यही हो मानते
बात मेरी जान लो तुम कुछ नहीं हो जानते

सब्र करना कह रहे थे कर लिया सब देख कर
इश्क़ में जिस्मों को चूमा खूब हम पहचानते
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Arohi Tripathi
बस इसी बात की ख़ुशी है मुझे
सब्र वालों के साथ है अल्लाह
Aktar ali
इंतिज़ार-ए-इश्क़ की इस प्यास का क्या कीजिए
सुर्ख़ सूखे होंठों को महबूब की दरकार है
Dr Bhagyashree Joshi
चलिए आज आप का हुनर पता लगाते हैं
हँसिए सब्र आप का तो आज आज़माते हैं

हार जाएँगे गले तो ऐसे हम लगाते हैं
आ के लगिए वहम आप का अभी मिटाते हैं
Read Full
Vr Hardik Jaiswal
सब्र का बाँध जो टूटा तो ज़बाँ से निकला
इश्क़ का तीर तभी जा के कमाँ से निकला
Arbab Shaz
दिल-ए-ना-सब्र पे ये रात सितम-अफ़्ज़ा थी
याद आई तेरी आँखों में सितारे चमके
Jag Mohan
सब्र सीखना होगा आप को मुहब्बत में
तेज़ आँच पे उबली चाय मैं नहीं पीता
Saurabh
ख़्वाब रूठे कोई उम्मीद टूटे जो भी हो
अब नहीं रोती मुझे आ गया है सब्र माँ
'Sabaa'
सब्र करना जहाॅं पे था मुश्किल
शुक्र शब्बीर ने किया उस पर
Najib Murad
अख़बार भी ये चाहता है हम छपें
दिल कह रहा रख सब्र ख़ुद को वक़्त दे
Vinod Ganeshpure
सब्र का फल अब न मीठा इल्म मुझ को दे गए
मैं जड़ों को सींचता था वो गुलों को ले गए
arjun chamoli
जो लेते सब्र का हैं इम्तिहाँ मेरा
वो वाक़िफ हैं मेरी इस सादगी से भी
Naviii dar b dar
गर नहीं आज आया तो कल आएगा
तेरे हिस्से भी मेहनत का फल आएगा

रात कितनी भी काली हो 'सागर' तिरी
कर ज़रा सब्र सूरज निकल आएगा
Read Full
SAAGAR SINGH RAJPUT
इस क़दर रोए सामने उन के
फिर भी इक पल नहीं तका हम को

सारे जज़्बात मर रहे हैं अब
सब्र की अब बता दुआ हम को
Read Full
Saba Rao
उस ओर जा रहे हो तो लैला को बोलना
मजनूँ का सब्र टूट गया इक किसान पर
Rakesh Mahadiuree
ऐ रब तू कहीं तो बस्ता मंदिर में है तो मस्जिद में भी
ये माया है या जादू है कि तुझे भी सब्र-ओ-क़रार नहीं
Sanjay Bhat
सब्र का है इम्तिहाँ और जब्र भी है इंतिहा
पास वो आते नहीं और दूर भी जाने न दें
arjun chamoli
शमशीर सब्र की मैं लिए जूझता रहा
तब दौर-ए-पुर फ़ितन से मिली फ़त्ह जंग में
Nityanand Vajpayee
हमारे सब्र की अब इंतिहा है
तू हैबत का हमारी स्वाद चख अब
Nityanand Vajpayee