Ummeed Shayari - Dil ko roshan karne wali hope aur positivity bhari shayari

Ummeed shayari reflects the quiet strength of hope that keeps us moving forward even in difficult times. These lines capture the beauty of believing in better days, offering comfort, motivation, and a gentle reminder that every darkness carries a spark of light.

ummeed shayari
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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asha shayari
मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है
हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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umeed shayari
कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
Nida Fazli
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hope shayari
भँवर से कैसे बच पाया किसी पतवार से पूछो
हमारा हौसला पूछो, तो फिर मँझधार से पूछो
Priyanshu Tiwari
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aas shayari
मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा
हौसला हार के बैठूँगा तो मर जाऊँगा
Saqi Amrohvi
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है
इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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ख़्वाब के आस पास रह रह कर
थक गया हूँ उदास रह रह कर
Shahbaz Rizvi
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
Kaif Bhopali
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मैं तुझे खो के भी ज़िंदा हूँ ये देखा तू ने
किस क़दर हौसला हारे हुए इंसान में है
Abbas Tabish
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सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें
कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
Abhishek shukla
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अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
Parveen Shakir
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हर एक बात को चुप-चाप क्यूँँ सुना जाए
कभी तो हौसला कर के 'नहीं' कहा जाए
Nida Fazli
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किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ते निभाना किस क़दर आसान हो जाए
Waseem Barelvi
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मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या
Ada Jafarey
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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं
Zehra Nigaah
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हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमा' जलाने का हौसला न हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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हम घूम चुके बस्ती बन में
इक आस की फाँस लिए मन में
Ibn E Insha
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
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Abhishek shukla
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बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया
तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया
Aanis Moin
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झिझकता हूँ उसे इल्ज़ाम देते
कोई उम्मीद अब भी रोकती है
Shariq Kaifi
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तू कहीं आस-पास था वो तिरा इल्तिबास था
मैं उसे देखता रहा फिर मुझे नींद आ गई
Rais Farog
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महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास
अपना ख़याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे
Ameer Qazalbash
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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से
Akhtar Shirani
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अज़ल से मेरी हिफ़ाज़त का फ़र्ज़ है उन पर
सभी दुखों को मेरे आस-पास होना है
Rahul Jha
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चलो माना कि रोना मसअले का हल नहीं लेकिन
करे भी क्या कोई जब ख़त्म हर उम्मीद हो जाए
Bhaskar Shukla
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और आसान नहीं हो सकता फ़रियादों को पूरा करना
एक ही आस लगा रक्खी है, ख़ुदा सभी बंदों ने तुझ सेे
Siddharth Saaz
हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे!

मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
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Balmohan Pandey
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तेरे वादे से प्यार है लेकिन
अपनी उम्मीद से नफ़रत है

पहली ग़लती तो इश्क़ करना थी
शा'इरी दूसरी हिमाक़त है
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Mehshar Afridi
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अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है

नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
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Khurram Afaq
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तूफ़ान की उम्मीद थी आँधी नहीं आई
वो आप तो क्या उस की ख़बर भी नहीं आई

शायद वो मोहब्बत के लिए ठीक नहीं था
शायद ये अँगूठी उसे पूरी नहीं आई
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Khurram Afaq
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तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती
मैं राख होने लगा हूँ दिए जलाते हुए
Azhar Iqbal
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न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था
Firaq Gorakhpuri
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एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं
हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है
Kunwar Bechain
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किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की
चारा-गर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला
Lutf Ur Rahman
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इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले
Nadim Nadeem
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मैं अब किसी की भी उम्मीद तोड़ सकता हूँ
मुझे किसी पे भी अब कोई ए'तिबार नहीं
Jawwad Sheikh
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तेरे आने की इक उम्मीद है और
इसी उम्मीद पर क़ाएम है दुनिया
Shubham Sarkar
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ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है
कई दिनों से कोई आस पास भी कम है

हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर
तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
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Farhat Abbas Shah
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
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Fahmi Badayuni
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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
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Azhar Iqbal
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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Daagh Aligarhi
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दुख कम मिलें इस साल तुम को उस बरस से
ये साल तुम को हौसला दे ये दुआ है
Siddharth Saaz
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चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई
Shakeel Badayuni
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मैं आँधियों के पास तलाश-ए-सबा में हूँ
तुम मुझ से पूछते हो मिरा हौसला है क्या
Ada Jafarey
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की
चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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इसी उम्मीद से मैं देखता हूँ रास्ता उस का
वो आएगा ज़मी बंजर में इक दिन घर उगाने को
Kushal "PARINDA"
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
जिस की फ़ितरत ही बे वफ़ाई हो
उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा क्या करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
प्यार करने की हिम्मत नहीं उन के पास और हम सेे किनारा भी होता नहीं
बात सीधे कही भी नहीं जा रही और कोई इशारा भी होता नहीं

उस को उम्मीद है ऐश होगी बसर साथ में जब रहेगी मिरे वो मगर
मुझ पे जितनी मुहब्बत बची है सखी इतने में तो गुज़ारा भी होता नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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देखो ऐसे क़रीब आने की आस मत लगाओ तुम
तन्हाई से रब्त बढ़ाओ फिर मेरे पास आओ तुम
Rohit tewatia 'Ishq'
वो दुनिया से बिल्कुल जुदा देखते हैं
जो कम-ज़र्फ़ में हौसला देखते हैं
Dileep Kumar
चिलचिलाती धूप है और पैर में चप्पल नहीं
जिस्म घाइल है मगर ये हौसला घाइल नहीं
Tanoj Dadhich
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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए
मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है
Shakeel Jamali
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में
सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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घर से निकले थे हौसला कर के
लौट आए ख़ुदा ख़ुदा कर के

ज़िंदगी तो कभी नहीं आई
मौत आई ज़रा ज़रा कर के
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Rajesh Reddy
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आस-पास देखा था मैं ने फूट के रोने से पहले
जैसे कोई जेबें देखे कपड़े धोने से पहले

हम तकिए के नीचे रखते हैं यूँँ तेरी तस्वीरें
जैसे सिरहाने रखते हैं पानी सोने से पहले
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Tanoj Dadhich
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शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
रोज़ ये बात मुझे सब्र का फल कहता है
Rakib Mukhtar
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ये करिश्मा हुआ चूमने से उसे
तीरगी पर खुली रौशनी की समझ
Neeraj Neer
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इस दुनिया के कहने पर उम्मीद न रक्खो
पत्थर रख लो सीने पर उम्मीद न रक्खो
Vishal Singh Tabish
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मैं हर शख़्स के चेहरे को बस इस उम्मीद से तकता हूँ
शायद से मुझ को दो आँखें तेरे जैसी दिख जाएँ
Siddharth Saaz
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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में
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Anis shah anis
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मुझ को जीने का हौसला दीजे
वरना रिश्तों का फ़ाएदा क्या है
Praveen Sharma SHAJAR
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शब-ए-फ़िराक़ में अश'आर आशकार हुए
मुझे नहीं है सनम तुझ सेे अब गिला कोई
Amaan Pathan
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मैं ने दफ़नाये वालिदैन अपने
मुझ से पूछो कि हौसला क्या है
Amaan Pathan
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तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
Fana Nizami Kanpuri
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मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू
मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो

ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या
मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
Fani Badayuni
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शिकायत उस से नहीं अपने आपसे है मुझे
वो बे-वफ़ा था तो मैं आस क्यूँँ लगा बैठा
Sabir Zafar
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
ख़्वाब उम्मीद तमन्नाएँ तअल्लुक़ रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
Imran-ul-haq Chauhan
वक़्त ख़ुश ख़ुश काटने का मशवरा देते हुए
रो पड़ा वो आप मुझ को हौसला देते हुए
Riaz Majeed
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वो उम्मीद क्या जिस की हो इंतिहा
वो वा'दा नहीं जो वफ़ा हो गया
Altaf Hussain Hali
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आस लगाए हो जिस सेे मिलने की तुम
मेरे दर पर वो रोज़ाना आता है
Amaan Pathan
उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था
अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते
Fani Badayuni
ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को
अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं
Amaan Pathan
तमाम दिन के दुखों का हिसाब करना है
मैं चाहता हूँ कोई मेरे आस-पास न हो
Tahir Faraz
अच्छों पर बुरों की हमेशा नज़र रहती है
रौशनी हमेशा अँधेरों से घिरी रहती है
Bhavesh kumar
ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर
अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
Murli Dhakad
इक आख़िरी रस्म निभा लो कि अब ये रिश्ता तोड़ देते हैं
तुम तो जा ही चुकी हो हम भी अब तुम सेे मुँह मोड़ लेते हैं

थी झूठी सब क़स
में, थे झूठे सब वादे, और वो तुम्हारे फ़रेबी इरादे
उम्मीद-ए-वफ़ा तुम सेे नहीं, वफ़ा का ज़िम्मा भी ख़ुद ही पे छोड़ देते हैं
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Shashank Tripathi
ये दौर बुरा है तो कल अच्छा भी आएगा
इस वक़्त ज़माने को उम्मीद ये रखनी है
Prashant Sitapuri
यूँँ ही उम्मीद से ख़ुद को बांधा रहा, जैसे ख़्वाबों के कपड़ो का धागा रहा
रेत आँखों के कोनो में यूँ जम गई, रात सोइ रही में तो जागा रहा
Amit Joshi anhad
घड़ी भर साथ चलता फिर अकेला छोड़ जाता है
ये मेरा हौसला मंज़िल पे रस्ता छोड़ जाता है
Prashant Sitapuri
हौसला रख, देख हंस कर
छोड़ ग़म को, जी ख़ुशी से
Kohar
ना किसी की आरज़ू है ना किसी का ग़म हमें
ना किसी से चाहिए उम्मीद का मरहम हमें
Aditya
ग़ैर से उम्मीद ही क्या
कर मुहब्बत भी ख़ुदी से
Kohar
आस टूटी मगर मुस्कुराते रहे
साँस छूटी मगर मुस्कुराते रहे

तुम भी रोने लगोगी यही सोच कर
रेल छूटी मगर मुस्कुराते रहे
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Priyanshu Tiwari
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर
ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं
Shakir Dehlvi
अपनी चाहत को पाने की आस में हम ने
लो फिर कह दिया चलो एक साल और
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
आँख मेरी उदास रहती है
ज़िन्दगी देवदास रहती है

धड़कनों से पता चला मेरी
वो यहीं आस पास रहती है
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Aashish kargeti 'Kash'
रखो उम्मीद मत हम सेे अब वस्ल की जाना
तुम्हारा मुंतज़िर था जो वो मर गया कब का
gulab muntazir
ये हक़ीक़त और ये उम्मीद, यकसाँ क्यूँ नहीं है
मुफ़लिसी जब हो मुक़द्दर, चल रही साँसे सज़ा हो
Zain Aalamgir
हम घिस रहे थे इश्क़ की उम्मीद में दिल का चराग़
क़िस्मत मुबारक हो वहाँ से दर्द का जिन्न निकला है
Intzar Akhtar
उम्मीद रहे बाकी, बाकी सब चला जाए
कोई छला हुआ आख़िर कितना छला जाए

माचिस तीली चिंगारी से कोई राबता नहीं
कोई उस के हाथ पकड़े और मुझे जला जाए
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Shobhit Dixit
थे हज़ारों दुख तो वैसे उन के जीवन में मगर
राम को था हौसला कि साथ लक्ष्मण है मेरे
Sanskar Shrivastav
आसमाँ के टूटते तारो से मत मांगो मुरादे
हौसला दो तुम उसे वो झिलमिलाना हारा होगा
SIDDHARTH SHARMA
तुम्हारे शहर से आई हुई 'बस' को जो देखा तो
मैं तकता ही रहा इस आस में के तुम भी उतरोगी
Dipendra Singh 'Raaz'
कौन से दिल से मैं परवाज़ की उम्मीद करूँँ
क़ैद कर के मुझे सय्याद ने पर काट दिए
Shajar Abbas
उस सेे उम्मीद-ए-वफ़ा किस तरह करता मैं शजर
बे वफ़ाओं के क़बीले की वो शहज़ादी थी
Shajar Abbas
जनम दिन पर घड़ी दी थी उन्होंने
हमें उम्मीद थी वो वक़्त देंगे
Harsh saxena
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कुछ ऐसे, चराग़ों को मेरे, ज़रा नम कर दे
अँधेरे बढ़ा मत, हाँ बस रौशनी कम कर दे
pankaj pundir
तेरे घर की खुली इन खिड़कियों में जा फँसे हैं
घनी ज़ुल्फ़ों में तेरी हम उलझ कर रह गए हैं

न कोई है हमारा, है न हम में हौसला फिर
दुआ पर जाने किस की, उम्र अपनी जी रहे हैं
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Aves Sayyad
बैठी हैं मुद्दतों से लौ आस की जलाए
दो मुंतज़िर निगाहें ऐवान-ए-तीरगी में
Kiran K