Heart Touching Father Shayari - Unspoken love, sacrifice, and strength of a father’s heart

Father shayari reflects the silent love, strength, and sacrifices of a father. From guiding hands to unspoken emotions, these lines capture the essence of pita ka pyaar and respect. Whether you want to express gratitude or share heartfelt feelings, this collection connects deeply with every bond between a father and child.

pita shayari
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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papa shayari
हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब
पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने
Meraj Faizabadi
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baap shayari
बीस बरस तक बाप उधड़ता है थोड़ा थोड़ा
तब सिलता है इक बेटी की शादी का जोड़ा
Tanoj Dadhich
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abbuu shayari
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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walid shayari
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं माँ से
Tahir Shaheer
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father love shayari
बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक
माँ दुआ है जो सदा साया-फ़गन रहती है
Sarfraz Nawaz
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father sacrifice shayari
हड्डियाँ बाप की गूदे से हुई हैं ख़ाली
कम से कम अब तो ये बेटे भी कमाने लग जाएँ
Rauf Khair
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father respect shayari
वो वक़्त और थे कि बुज़ुर्गों की क़द्र थी
अब एक बूढ़ा बाप भरे घर पे बार है
Moin Shadab
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pita ka pyaar shayari
चाहे जितनी हो हिमालय की ऊँचाई
बाप के कंधे से ऊँचा कुछ नहीं है
Saarthi Baidyanath
pita shayari
बाप के कांधे पे है बेटे की मय्यत
एक मय्यत ढो रही दूजे की मय्यत
Sonia rooh
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papa shayari
मेरे माँ बाप अनपढ़ हैं मगर वो
मेरे चेहरे को पढ़ना जानते हैं
Mohammad Aquib Khan
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baap shayari
ज़ख़्म क्या होगा जहाँ में और कोई दूसरा
बाप के शाने अगर मरघट को बेटा चल पड़े
Ravi 'VEER'
abbuu shayari
इश्क़ बाज़ी से अगर फ़ुर्सत मिले तो दोस्तों
बाप के कंधों पे कितना बोझ है ये देख लो
Akash Rajpoot
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है
ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है

एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने
कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
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Waseem Barelvi
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हम ऐसी कुल किताबें क़ाबिल-ए-ज़ब्ती समझते हैं
कि जिन को पढ़ के लड़के बाप को ख़ब्ती समझते हैं
Akbar Allahabadi
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देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया
Afzal Khan
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे
अपनी दुनिया बुरी लग गई

जिस को आबाद करते हुए
मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
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Tehzeeb Hafi
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अपने बच्चों से बहुत डरता हूँ मैं
बिल्कुल अपने बाप के जैसा हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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मुझ को छाँव में रखा और ख़ुद भी वो जलता रहा
मैं ने देखा इक फ़रिश्ता बाप की परछाईं में
Unknown
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उन के होने से बख़्त होते हैं
बाप घर के दरख़्त होते हैं
Unknown
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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मुद्दत के बा'द ख़्वाब में आया था मेरा बाप
और उस ने मुझ सेे इतना कहा ख़ुश रहा करो
Abbas Tabish
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इन का उठना नहीं है हश्र से कम
घर की दीवार बाप का साया
Unknown
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मेरा भी एक बाप था अच्छा सा एक बाप
वो जिस जगह पहुँच के मरा था वहीं हूँ मैं
Rais Farog
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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
Hammad Niyazi
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ
सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया
Hammad Niyazi
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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
Anjum Saleemi
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बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
Iftikhar Arif
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तेरी यादें लिपट जाती हैं मुझ से घर पहुँचते ही
कि जैसे बाप से आ कर कोई बच्ची लिपटती है
Afzal Ali Afzal
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नज़रें हो गड़ीं जिन की वसीयत पे दिनो-रात
माँ-बाप कि 'उम्रों कि दुआ ख़ाक करेंगे
Asad Akbarabadi
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न जाने कौन सी दौलत अता करता है रब इनको
किसी भी बाप को मुफ़्लिस कभी देखा नहीं मैं ने
Saheb Shrey
घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
Qaisar-ul-Jafri
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किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए
कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया
Anjum Saleemi
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उस के वालिद नवाब हैं भाई
उस को हक़ है हमें भुलाने का
Deepak Sharma Deep
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कुछ बेटियाँ बिन बाप के भी काटती हैं ज़िंदगी
कुछ बेटियों के सिर पे दोनों हाथ माँ के होते हैं
Bhoomi Srivastava
गर ये अच्छी क़िस्मत है तो लानत ऐसी क़िस्मत पर
अपने फोन में देख रहे हैं, बाप को बूढ़ा होते हम
Siddharth Saaz
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पूछती है सच बताएँ, गर किसी से इश्क़ है
सच तो ये है, हाँ मुझे अब हर किसी से इश्क़ है

फिर रहा है बेटी के रिश्ते के ख़ातिर क्यूँ वो बाप
पूछ लेता काश, ऐ दुख़्तर, किसी से इश्क़ है
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Adnan Ali SHAGAF
मिरे माँ बाप जन्नत से नज़र रखते हैं मुझ पर अब
मिरे दिल में यतीमों के लिए इक ख़ास कोना है
Amaan Pathan
ग़म मत करो किसी का जो भी गया गया वो
मम्मी के दिल के टुकड़े पापा की जान हो तुम
Amaan Pathan
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किसी माँ बाप से पूछो कभी बेटी का ये दुख
देखने वाले जिसे देख के रद करते हैं
Saud Usmani
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ग़मों को बेच रहा हूँ मैं इस लिए शायद
कहा था बाप ने पैसा बहुत ज़रूरी है
Amaan Pathan
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बेटे मसरूफ़ रहे माल के बटवारे में
बेटियाँ बाप की मय्यत से लिपट कर रोईं
Mahmood Ahmad Hashmi
ये तेरी गली के बच्चें भी शैतानों के बाप है
कहते है कि सारे जीजू में सब सेे अच्छे वाले आप है
MANOBAL GIRI
कहा उस बाप ने मुझ सेे न जाए ये कोरोना
शहर से लौट आए देख लो बच्चे हमारे
Shubham Seth
कमाई बाप की सारी चली जाती है बेटों में
मगर बेटा उन्हीं को बेसहारा छोड़ जाता है
Prashant Sitapuri
माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम
सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना
Prashant Sitapuri
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जब तलक था बाप ज़िंदा घर में भाई एक थे
उस के जाते ही ज़मीं पर सबके हिस्से आ गए
Prashant Sitapuri
क़र्ज़ लदेगा लड़की के बाबूजी पर
बाप मगर लड़के का बेंचा जाएगा
Atul K Rai
मिले मौका यूँँ ज़िम्मेदारियों को बचपना छीने
ख़ुदाया छीन ले सब कुछ कभी माँ-बाप ना छीने
Aarush Sarkaar
माँ बाप के आँसुओं की वजह क्या जाने
जो बेटा छुट्टियों में भी घर नहीं आता
Anurag Ravi
बाप की उँगली जब तक हाथ में मेरे है
बाघ की ताकत मान लो साथ में मेरे है
Kush Pandey ' Saarang '
ख़ुदा, हर बाप में एक बेटी होती है
कि हर बेटी के अंदर एक बाप होता है
Prit
यहाँ हर शख़्स की पहचान वालिद हैं
मियाँ बच्चे की असली जान वालिद हैं

सभी मतलब से मिलते हैं यहाँ साहब
फ़क़त मेरे लिए यक-जान वालिद हैं
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Kush Pandey ' Saarang '
क्या भला हम को पता हो किसी मौसम के सितम
बाप साया किए हम पर जो खड़ा रहता है
Haider Khan
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ख़ुदा जाने ख़ुदा कैसा ख़ुदा को किस ने देखा है
कहो, तुम भी ख़ुदा माँ–बाप को ही मानते हो ना
Prit
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पत्ते बिछड़ कर शाख़ से करते शजर वीरान सा
माँ-बाप को बच्चे बहुत जल्दी करे बूढ़ा यहाँ
Zain Aalamgir
दग़ाबाज़ी में भी ख़ुशबू वफ़ादारी की आएगी
वो मुझ को बाप की इज़्ज़त की ख़ातिर छोड़ जाएगी

उसे मालूम है मेरा पसंदीदा है काला रंग
मुझे लगता नहीं अब वो कभी काजल लगाएगी
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Richa Choudhary Sahar
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अपने वालिद की रख गई इज़्ज़त
मुझ सेे अगले जनम का वा'दा किया
Dharmesh Solanki
लगा हूँ जो मैं खर्चे अब मेरे घर के उठाने में
लगेगा उम्र-भर क्या बाप के आधा कमाने में
Amol
झूला बाप का कंधा था तब माँ का आँचल ख़ुशहाली थी
ईद मनाते थे हर दिन ही तब हर रात दिवाली थी
Shreya Shivmurti
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर
ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं
Shakir Dehlvi
ऐसा लगता है मुझे ईद का दिन है 'अकबर'
जब भी माँ बाप के चेहरे पे ख़ुशी होती है
''Akbar Rizvi"
एक बाप उतरा है ज़िस्मफ़रोशी के धंधे में
दस घण्टों की ख़ातिर मेरा ज़िस्म आप का मालिक
Saahir
हार कर ख़ुद-कुशी जो करते हैं उन सेे कहना
अच्छा होता नहीं माँ-बाप को बेवा करना
Mohammad Aquib Khan
जब बच्चों के हाथों वालिद की शामत आ जाएगी
पैगंबर ने फरमाया था कि कयामत आ जाएगी
Sohaib Alvi
बेटा ज़रा सा जो कमाने लग गया
फिर बाप से दूरी बनाने लग गया
Dileep Kumar
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वक़्त अपना दो, बूढ़े माँ-बाप को, है ये हक़ उन का
तुम भी बच्चे रहोगे, बूढ़े कभी वो नहीं होंगे
A R Sahil "Aleeg"
एक पक्षी देखता है पेड़ को कटते हुए
बेटा अपने माँ-पिता को बूढ़ा होते देखता
Sanskar Shrivastav
अँधेरे में कमा कर रौशनी सबके लिए लाए
दिया बन कर जले जब बाप तब त्योहार होता है
Saheb Shrey
कमाने लग गए हैं चार बेटे
मगर इक बाप भारी लग रहा है
Piyush Mishra 'Aab'
दिल ये करता है के पंखे से लटक जाऊँ मैं
फिर ख़याल आता है माँ बाप का रुक जाता हूँ
Shajar Abbas
सिर्फ़ इक बेटा बनकर रहूँ उम्र भर
बाप के जूते पॉलिश करूँँ उम्र भर
Kinshu Sinha
कहने को मिरा घर भी, जन्नत है मगर इस
में
माँ बाप का कमरा है, माँ बाप नहीं मेरे
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Gaurav Singh
बाप के आगे उस का जवान बेटा मर जाए
कोरोना इस सेे ज़्यादा दुख और क्या देगा
Nirbhay Nishchhal
उस सेे ज़्यादा भार भला होगा किस पर
दे औलाद को कंधा बाप जो लौटा हो
Sameer Goyal
अच्छे-अच्छों के हालत माली हो जाते हैं
माँ के चले जाने से घर ख़ाली हो जाते हैं

बढ़ जाती ज़िम्मेदारी वालिद के शाने पर
सब को छाया देने को डाली हो जाते हैं
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Sandeep dabral 'sendy'
बाप के आराम के दिन आ गए
बेटे को आख़िर कमाना आ गया
shaan manral
के जूता बाप का पैरों में आ जाए जो बेटे के
समझ लो उस को जिम्मेवार भी होना पड़ेगा अब
Kushal "PARINDA"
इक मतला इक ताज़ा शे'र सुना लेते हैं
बेकारी है तो अब लोग मज़ा लेते हैं

शे'र तो क्या तुम यार ग़ज़ल ही चुरा लो मेरी
वालिद का जूठा तो बच्चे खा लेते हैं
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Vijay Potter Singhadiya
नहीं जाना कभी उस घर जहाँ इज़्ज़त नहीं होती
बिना माँ-बाप के घर में कभी रहमत नहीं होती
Kushal "PARINDA"
अदब से पेश आओ बाप माँ से तुम
ये जो रूठें, ख़ुदा भी रूठ जाएगा
Irshad Siddique "Shibu"
कर भी रहा है मुश्किलों से बाप बेटी को विदा
है दायज़ा का बोझ जो दिल से नहीं जा पा रहा
Sagar Sahab Badayuni
है बाप का संघर्ष ही
औलाद की तो प्रेरणा
"Dharam" Barot
देख कर मुस्कुराते बच्चों को
बाप सारी थकान भूल गया
Amaan Haider
आँधी तूफ़ाँ से लड़ती टूटी हुई कश्ती
दुनिया में है ही नहीं वालिद जैसी हस्ती
Prit
अँधेरे में कमा कर रौशनी सब के लिए लाए
दिया बनकर जले जब बाप तब त्यौहार होता है
Saheb Shrey
वालिद को खोने के बा'द हुआ एहसास मुझे
बिन सूरज के इस दिन की कोई औक़ात नहीं
Irshad Siddique "Shibu"
तेरे घर में जितनी भी शराफ़त है
तेरे वालिद की वही तो दौलत है
Meem Alif Shaz
सुनो, जो नवाबों सा लहजा है मेरा
ये सब बाप के ही बदौलत है मेरे
Satyam Bhaskar "Bulbul"
मेरे वालिद पे क़र्ज़ा था मेरी ता'लीम को ले कर
उसी लाला का अब मुझ को तो कर्ज़ा भी चुकाना है
Vikas Shah musafir
पता सब को ही छत, दीवार का ये दुख
पता किस को पिलर को होता था ये दुख

बड़े जब होते है बच्चे पता चलता
उन्हें क्या होता है माँ बाप का ये दुख
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"Dharam" Barot
हमें जहन्नमी किताबों तक में भी कहा गया
हमीं ने अपने बाप पर भी हाथ तक उठाया है
Sohaib Alvi
जिस बेटे से माँ-बाप राज़ी हों
उस बेटे से अल्लाह राज़ी हो
Kumar Aryan
अल्लाह उस सेे राज़ी है जो
माँ बाप की ख़िदमत करता है
Kumar Aryan
गुजरने पे यूँँ अपनी हर अमानत अपने बच्चों के हवाले कर के जाते हैं
सभी के बाप अपनी सब विरासत अपने बच्चों के हवाले कर के जाते हैं
Danish Balliavi
बड़े बेटे की मय्यत ने यूँँ तोड़ा बाप का कांँधा
किसी की याद में फिर गिर पड़ा आबाद घर मेरा
"Nadeem khan' Kaavish"
बाप का सर से जो साया क्या उठा
ग़म के साए हक़ जताने लग गए
Irshad Siddique "Shibu"
मैं जब भी झाँकता हूँ ख़ुद में तो एहसास होता है
कि अपने बाप की उम्मीद पानी कर रहा हूँ मैं
"Nadeem khan' Kaavish"
वालिद ने काँधे पर मेरे क्या हाथ रख दिया
और चार चाँद लग गए तब से वक़ार में
Rohit tewatia 'Ishq'
वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा
यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे
Kuldeep Tripathi KD
बाप को डर सताने लगा पंखों को देख कर
हार कर बाज़ी बेटा जो घर आया है इश्क़ की
Sandeep dabral 'sendy'
वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं
मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं

ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब
ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं

जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ
जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं

कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो
जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं
Read Full
Irshad Siddique "Shibu"
उम्र भर मेरी दु'आओं में असर बाक़ी रहे
बाप की शक्ल में सर पर ये शजर बाक़ी रहे
Shajar Abbas
मुझे वो माँ मिली जिस को हमारी फ़िक्र रहती है
मिला वो बाप जो हरदम भला ही सोचता रहता
Kaviraj " Madhukar"
बाप से पहले यहाँ से कोई जाने न लगे
पुत्र अर्थी कभी भी बाप के शाने न लगे
Sandeep dabral 'sendy'
हर ख़ुशी ग़म के सहारे कौन है इनका यहाँ
उम्र के दोनों किनारे कौन है थमता यहाँ
बाँट ली बच्चों ने दौलत पर यहीं तो रह गए
बाप माँ किस को पुकारे कौन है अपना यहाँ
Read Full
Arkam zahid
चल पड़े थे अकेले सवेरे लिए
लड़-झगड़ के जहाँ से वो मेरे लिए

क़ीमती है नहीं कोई उन के सिवा
बाप ज़्यादा ज़रूरी है मेरे लिए
Read Full
Murari Mandal