Raaz Shayari - Dil ke chhupe hue raaz aur gehri baaton ki shayari

Raaz Shayari beautifully captures the hidden truths and unspoken feelings of the heart. These lines express what often stays unsaid—dil ke raaz, silent emotions, and secret thoughts that define deep connections. Perfect for those moments when words are few but feelings run deep.

चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
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Anand Raj Singh
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क्यूँँ इक तरफ़ निगाह जमाए हुए हो तुम
क्या राज़ है जो मुझ से छुपाए हुए हो तुम
Shakeel Badayuni
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तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया
मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में
Allama Iqbal
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वो एक राज़ जो मुद्दत से राज़ था ही नहीं
उस एक राज़ से पर्दा उठा दिया गया है
Aziz Nabeel
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सभी से राज़ कह देता हूँ अपने
न जाने क्या छुपाना चाहता हूँ
Shariq Kaifi
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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
Vikram Gaur Vairagi
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ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
सब ने माना मरने वाला दहशत-गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज-दुलारा लिक्खा था
Ahmad Salman
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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है
न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है

क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को
नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है
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Paplu Lucknawi
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अव्वल तो तेरी दोस्ती पर शक नहीं कोई
और दूसरा ये मुझ को तेरे राज़ पता हैं
Tanoj Dadhich
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ये गहरा राज़ है इस का बदन को खा ही जाती है
मोहब्बत पाक होकर भी हवस तक आ ही जाती है
ALI ZUHRI
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जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है
वो लड़की राज़ नहीं है कोई पहेली है

हाँ मेरा हाथ पकड़ कर झटक दिया उस ने
सहारा दे के बताया कि तू अकेली है
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Tajdeed Qaiser
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तुम सब समझ चुके हो नहीं राज़ ये कोई
क्यूँ देखने लगे हैं तुम्हें तिश्नगी से हम
Amaan Pathan
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तअज्जुब उन को है क्यूँँ मेरी ख़ुद-कलामी पर
हर आदमी का कोई राज़-दाँ ज़रूरी है
Sagheer Malal
उन को डर है कि कोई राज़ न खुल जाए कहीं
और मुझ में वो तलब है कि कोई सच न दबे
Haresh Vanza
तू ही इक शख़्स है क़िस्से में अलावा मेरे
तुझ से भी राज़ छुपाया तो कहाँ खोलूँगा
Mumtaz Gurmani
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़ तर्क-ए-आरज़ू
मैं ने दुनिया छोड़ दी तो मिल गई दुनिया मुझे
Seemab Akbarabadi
इक रोज़ हमारे बिखरते रिश्ते का राज़ खोल दिया उस ने
इल्ज़ाम मुझ पे डाल कर, जुदा होने को बोल दिया उस ने

उस सेे मोहब्बत इतनी कि ख़ामोशी से सुनता रहा तोहमतें
बड़ी बेरुखी से "निहार" मेरी मोहब्बत को तोल दिया उस ने
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Shashank Tripathi
क़ब्र मेरी थी मगर नाम तेरा था उस पर
राज़-ए-दिल संग-तराशों को बताया किस ने
Saarthi Baidyanath
क्या कहा के याद करना छोड़ दूँ अब मैं तुम्हें
साफ़ ही कह दो के जीना छोड़ दो अब 'राज़' तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
गले से लग कर तुम्हीं ज़माने पे राज़ खोलो
तुम्हारा होने की किस को किस को सफ़ाई देंगे
shahnawaaz khan
खेल का हिस्सा थे जब तक खेल बस इक खेल था
राज़ सारे खुल गए जब मैं तमाशाई हुआ
shahnawaaz khan
किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
यहाँ पर गुल खिले है जब मिरे जानाँ मोहब्बत के

अगर ढूँढो तो मिल जाए ख़ुदा भी अब किताबों में
किताबों में नहीं मिलते यहाँ बस राज़ उल्फ़त के
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Sandeep Rajput
राज़ खुलता है घर जलाने को
घर कभी आग से नहीं जलता
gaurav saklani
कितने राज़ हसीं वो खोलें
जब ग़ुस्से में मुझ सेे बोलें
Reshma Shaikh
जो दोस्तों से भी छुपाया मैं ने तुम वो राज़ थी
हमें तो बे-वफा़ई भी सिखाई, तेरे इश्क़ ने

तुम्हें ख़याल में भी जब छुआ तो बा-वुजू़ छुआ
शराबी को सिखाई पारसाई, तेरे इश्क़ ने
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Faiz Ahmad
बदल कर सितम-गर तरक़्क़ी हुई और
बहुत कुछ हुआ पाँच सालों के अंदर

दफ़्न कर दिए है सभी राज़ ख़ुद के
किताबों में मेरी सवालों के अंदर
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Aashish kargeti 'Kash'
हैं दफ़्न दिल में जो राज़ सारे मिलो तो तुम पर अयाँ करूँँगा
तमाम चाहत तमाम उल्फ़त तमाम हसरत बयाँ करूँँगा

है एक जंगल हमारे भीतर जो इक सदी से सुलग रहा है
ख़ुशी का छलका कभी जो आँसू बुझा के इस को धुआँ करूँँगा
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Ashraf Ali
हैं दफ़्न राज़ शा'इरी में तो कई यहाँ मगर
सवाल पूछ कर यूँँ ज़ख़्म को हरा नहीं करो
A R Sahil "Aleeg"
राज़ जो तेरा था अपना कर लिया
फिर से कोई काम अच्छा कर लिया
Meem Alif Shaz
सच कह रहीं हूँ मुझ को मुहब्बत हुई नहीं
तस्वीर ये वही है जो मुझ सेे बनी नहीं

हर आदमी के दिल में कई राज़ हैं छिपे
ये दास्ताँ वही जो किसी ने सुनी नहीं
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Ritika reet
ज़बाँ चुप भी रहे तो यार आँखें बोल उठती हैं
मोहब्बत के यहाँ ये राज़ सारे खोल उठती हैं
Sandeep dabral 'sendy'
किताबों ने दबा कर के रखें है राज़ सीने में
ज़रा इनको कभी खोलो मज़ा आएगा जीने में
Mahesh Natakwala
इक राज़ से हमें अनजाना बना रखा है
उस ने तो ग़ैर को दीवाना बना रखा है
Satyam Bhaskar "Bulbul"
ता'उम्र वही राज़ छुपाते ही रहे हम
ता'उम्र निगाहों से छलकता ही रहा जो
anupam shah
किसी को राज़-ए-दिल अपना बताऊॅं भी तो आख़िर क्यूँ
ज़माना सुन तो सकता है समझ लेकिन नहीं सकता
SHIV SAFAR
दिल का बस इक राज़ चुपके से बताना है मुझे
बारिशों में साथ तेरे जाँ नहाना है मुझे
Danish Balliavi
सभी राज़-दाँ हैं जहाँ में हमारे
किसी से भी अब कोई ख़तरा नहीं है
Sohil Barelvi
दिलों का राज़ रब ही जानता है
मुलव्विस कौन हैं इस मुख़्बिरी में
Reshma Shaikh
बहते अश्क याँ लोगों से छुपाए नइँ जाते
टूटे ख़्वाब पलकों पर फिर सजाए नइँ जाते

दफ़्न जितने रक्खो असरास उतना अच्छा है
सब को राज़ यूँँ अपने याँ बताए नइँ जाते
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Sandeep dabral 'sendy'
किसी को अपना सारा राज़ ऐ नादान हरगिज़ यूँँ बताया भी नहीं जाता
ये दुनिया है यहाँ तो हर किसी पे यूँँ भरोसा ये जताया भी नहीं जाता
Danish Balliavi
वो अपने पास हमें क्यूँ बुलाने वाला है
वो दिल का राज़ हमें सब बताने वाला है
Danish Balliavi
किसी को हो कोई भी मर्ज़ सब को कहता फिरता हूँ
श़िफा का राज़ तेरे नाम की दवा ज़रूरी है
Harsh Raj
जान लेने है राज़ जब उस के
और करनी है ख़ुद-कुशी मैं ने
Jitendra "jeet"
हम को सलाम करता है तो जता जता कर
जो रोज़ ख़ूब पीता भी है छुपा छुपा कर

उस की अजीब फ़ितरत है राज़ खोलने की
जो राज़ पूछता है हम को हँसा हँसा कर

उस शख़्स की अना उस को बस डुबा ही देगी
जो ज़हर बोलता है सब को ड़रा ड़रा कर

वो ज़ख़्म तो कभी भरते ही नहीं दवा से
जो ज़ख़्म बस दिए जाते हैं सुना सुना कर

हम तो गए थे अपना दुखड़ा उसे सुना ने
हम को थका दिया उस ने बस बिठा बिठा कर

इस बार ज़िन्दगी हम से रूठ ही न जाए
इस बार मौत ले जाएगी रुला रुला कर
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Meem Alif Shaz
किसी को हो कोई भी मर्ज़ सब को कहता फिरता हूँ
श़िफा का राज़ तेरे नाम की दवा ज़रूरी है
Harsh Raj
यही इक राज़ था मेरा
मुझे सब से छुपाना था

कि हर तस्वीर में हँस कर
उदासी को छुपाना था
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ABhishek Parashar
राज़ राज़ होता है काफ़ी ख़ास होता है
एक राज़ ये भी है मुझ को भी मोहब्बत थी
Meem Alif Shaz
आज ये राज़ भी मैं बता देता हूँ
क्यूँँ तुझे देख के मुस्कुरा देता हूँ

आग लगती है जो देखने से तुझे
मुस्कुरा कर उसी को हवा देता हूँ
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S M Afzal Imam
"वो अकेला है"
वो अकेला है

न जाने कितनी तन्हाइयो को उस ने झेला है
ग़मों से उस ने बे झिझक बोला है

वो अकेला है
मिलती नहीं उसे कोई तान

जब ढलती है शाम
कहता नहीं कोई बात

फिर भी नहीं रहता शांत
वो अकेला है

उस ने तपती अग्नि में खेला है
उस के जीवन की अजीब लीला है

न जाने कैसा अलबेला है
उस का राज़ चुप्पियों ने ही खोला है

वो अकेला है
कहता है कि चाह नहीं है

फिर भी आह भरता है
जताता है कि कोई राह नहीं है

फिर भी चलता रहता है
वो अकेला है
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Swapna Yadav
जिस दम सभी के सामने राज़-ए-वफ़ा खुला
सुन कर हमारी बात वे पत्थर से हो गए
Rohit Asthana Prabhav
ये तुम पर रहा कुछ भी अंजाम कर दो
मुझे शोहरतें दो या बदनाम कर दो

दिखा दो मेरे ज़ख़्म सारे जहाँ को
मेरे राज़ सारे सरे-आम कर दो

सरे बज़्म पहलू से लग कर मेरे तुम
इरादे रक़ीबों के नाकाम कर दो

मुझे ले ही आए हो बाज़ार में तो
मेरी हसरतें सारी नीलाम कर दो

मेरी उँगलियाँ अपने होंटों से छू कर
मेरे जिस्म को इश्क़ का जाम कर दो
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Rizwan malik faani
जो राज़ दिल में है दबा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
मैं ज़िंदगी को भी दगा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर

तेरा वो बोसा अब भी मेरी अक़्ल से जाता नहीं
हर इक निशां तेरा मिटा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
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Janib Vishal
हैं दफ़्न राज़ शा'इरी में तो कई यहाँ मगर
सवाल पूछ कर यूँँ ज़ख़्म को हरा तो मत करो
A R Sahil "Aleeg"
क्या तुझे राज़-ए-निहाँ बतलाऊँ
दर्द इन्साँ के लिए नेमत है
RIZWAN ALI RIZWAN
दिल के राज़ आँखों में आने लग जाऍं
दिल को चुप गर आँखें कराने लग जाऍं
Raj Tiwari
अब के रमज़ान खुले राज़ कई रोज़ों के साथ
कम से कम एक क़सम तो मिले खाने के लिए
Raj
मौत वो राज़ जिस को जानने को
कितने लोगों ने ज़िन्दगी लुटा दी
Mohit Subran
फूल खिलते ही बता देती है ख़ुशबू क्या क्या
वो जो हँस दे तो निहाँ राज़ खुला करते हैं
Rohit tewatia 'Ishq'
राज़ तो आख़िर खुलना है अब
दो रोगी इक चारा-गर है
Sohil Barelvi
झील सी आँखों में कितने राज़ हैं मत पूछिए
राज़ इतने हैं कि उन पर शोध कर सकता हूँ मैं
Shakir Dehlvi
राज़ है स्कूल की इस दोस्ती में कुछ न कुछ
दोस्त वो जब जब मिला तो उम्र पंद्रह हो गई
Divya 'Kumar Sahab'
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कभी फूलों से कहता है कभी भॅवरों से कहता है
कभी ये दिल मेरा चुप चाप ही हर दर्द सहता है

यक़ीं मानो मैं अपना राज़ ए दिल तुम को बताता हूँ
जो मेरे दिल का दुश्मन है वो मेरे दिल में रहता है
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Zeeshan kaavish
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है
ये कहना अहल-ए-अदब की ज़बान थोड़ी है

अदब तू उन को सिखाने की बात मत कर 'राज़'
तू उन के जैसा अदब में महान थोड़ी है
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Danish Balliavi
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तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है
मैं ने इक राज़ को ही दिल में बसा रक्खा है

आ ही जाता है तू हर बार मिरे ख़्वाबों में
तेरी ही याद ने दीवाना बना रक्खा हैं
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Parvez Shaikh
छोड़ कर कपड़ा बदन का भी वो क्यूँ भाग गए
जो कभी कहते थे मैदान नहीं छोड़ेंगे

दिख गया तू कोई सुनसान इलाके में गर
'राज़' सच में वो तेरी जान नहीं छोड़ेंगे
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Danish Balliavi
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ये राज़ की थी बात पर अब कहता हूँ
तुम से बिछड़ कर रोया मैं भी था बहुत
Jagat Singh
गुल चाहते हैं तितलियों पे करना राज़
माली को सब ये ही नहीं अच्छा लगा
Sachin Sharma
डूब ही जानी है कश्ती रेत के सहरा में भी दोस्त
तुम जरा हम-राज़ अपनों को बना कर के तो देखो
Deep kamal panecha
तबीयत मेरी थोड़ी नासाज़ है चलता हूँ मैं
वजह पूछना मत कोई राज़ है चलता हूँ मैं
Shivang Tiwari
ले के सहारा सच्चाई का मंचों पर
अंदर की सब राज़ दलाली खोल दिया

नेहा जी ने अंबर जी को सलीक़े से
मुँह पे यूँँ सरकारी औरत बोल दिया
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Danish Balliavi
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कोई कहे न कहे मैं तो राज़ खोलूँगा
तू मेरा प्यार है मैं सब को जा के बोलूँगा
Toyesh prakash
भलाई का ज़माना जा चुका है दोस्त
यहाँ अब बस बुराई राज़ करती है
ABhishek Parashar
भला इस सेे भी कम में तुम ही कैसे मान लोगे
जला कर राज़ सारे तुम भी मेरी जान लोगे
Vishakt ki Kalam se
दीवारें सुनती ही नहीं अब देखती भी हैं जनाब
गर राज़ की ही बातें करनी है तो फिर जंगल चलो
Meem Alif Shaz
कुछ राज़ बताऊँगा अश'आर सुनाते में
बस चाय बना लूँ मैं फिर बात बनाएँगे
salman khan "samar"
न पूछो हाल इस दिल का यहाँ पर राज़ गहरे हैं
नहीं दिखते किसी को ये यहाँ पर लाख पहरे हैं
Vishakt ki Kalam se
यही है ख़ासियत इन की यही इन की ख़राबी है
हो जो भी राज़ इन के पास उस को खोल देती हैं

ज़बाँ चाहे छुपा के बैठ जाए बात गहरे में
मगर ये आँखें जो हैं आँखें सब कुछ बोल देती हैं
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Mohit Subran
इक दर्द ने घर कर लिया इक दर्द तन्हा रह गया
इक दर्द ने आवाज़ दी इक दर्द चुप सा रह गया

इक दर्द ने फिर साँस ली कुछ देर हम से बात की
कुछ राज़ अपना वो कहा कुछ वो दबाया रह गया
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Sahir banarasi
जहाँ तक भी नज़र ये जा रही है
वहाँ तक राज़ करना है हमें बस
Vishakt ki Kalam se
जताना भी नहीं आता बने अंजान फिरते हैं
बनारस के मिरे मेहमान खाते पान फिरते हैं

न जाने कब किसी के राज़ को बैनर बना देते
कि टेढ़ी खोपड़ी के हैं लिए दस कान फिरते हैं
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Aman Vishwakarma 'Avish'
या नशे में या दुआ में हर ज़बाँ खुलती है आख़िर
सिर्फ़ यज़्दाँ और साक़ी राज़ सबके जानते है
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
तरन्नुम साज़ का मेरे उसे नासाज़ लगता है
मेरी ख़ामोशियों में भी उसे इक राज़ लगता है

ख़ुदा अब बख़्श भी दे दिल को मेरे उल्फ़तें उस की
तुझे भी रास आता उस का ही अंदाज़ लगता है
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Surendra Bhatia "Salil"
ज़िंदगी का राज़-ओ-इल्म मिलता एक तहरीर में
वो मिलेगा ज़िंदगी में जो लिखा तक़दीर में
arjun chamoli
माँ मुझे कहती रही है बात कम कर
राज़ दिल का हर किसी को मत बता तू
Vinod Ganeshpure
ख़ामोश भी रहने न दिया आज भी मुझ को
आँखों में तिरे राज़ है कुछ ख़ास यक़ीं कर
salman khan "samar"
बात को सुलझाया जा सकता था
राज़ को उलझाया जा सकता था
Vinod Ganeshpure
ज़िंदगी का राज़-ओ-इल्म बस है इक तहरीर में
वो मिलेगा ज़िंदगी में जो लिखा तक़दीर में
arjun chamoli
कौन सवाल कर रहा कौन मिरा है आश्ना
दिल ये छुरी से चीर गर राज़ तुझे है जानना
arjun chamoli
ख़ुदा का राज़ वही जाने जिस को ख़ुद बताए ये
बंदों के भेस में आ के ख़ुद से पर्दा उठाए ये

इन चमकी आँखों से हरगिज़ देखा नहीं जाता
दिखा उसी को है दिलबर जिसे ख़ुद दिखलाए ये
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DILBAR
दब गई दिल की आवाज़ भी
आग भी ख़्वाब भी राज़ भी
Abhay Aadiv
हैरान भी बहुत हैं परेशान भी बहुत
यूँँ लग रहा है जैसे हैं अहल-ए-ग़दीर हम

ये राज़ खुलने वाला है दुनिया पे जल्द ही
साकित है वक़्त और हैं हरकत-पज़ीर हम
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Abdulla Asif
राज़ को अब राज़ रहने दो
यारों के भी यार होते हैं
Bhanwar Mandan
राज़ है राज़ को राज़ ही रहने दो
क्या हुआ गर सनम बे-वफ़ा हो गया
UJJWAL LEKCHAND MESHRAM
तू मरना नहीं इश्क़ में डूबने को
है ये काम मर के भी पछताने वाले

बताया नहीं राज़ चैन-ओ-सुकूँ का
वफ़ा और दौलत को ठुकराने वाले
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Kartik Bhalerao
न समेट मुझ को तू इस कदर कहीं तेरा हाथ जला न दूँ
तू ज़बान काट के रख मिरी मैं ये राज़ सब को बता न दूँ

मैं तुझे मनाने के वास्ते ये जहान तक से भी हूँ लड़ा
कभी डर नहीं था सलीब का मुझे डर था तुझ को गँवा न दूँ
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Harsh Kumar Bhatnagar
मेरी दुनिया को ये राज़ मालूम है
तुम कहीं ख़ुद से भी बे-ख़बर तो नहीं
Sanjay Bhat
बेटे छिपा के रखते हैं ग़म अपनी आँख में
छिपता नहीं है माँ से मगर बेटियों का राज़
Harsh Kumar Bhatnagar
सोते हैं चप्पलों का जो तकिया बना के रोज़
वो लोग जानते हैं सदा मौसमों का राज़
Harsh Kumar Bhatnagar
दिल चुरा कर गया दिल लगा कर गया
ग़म का नग़्मा यहाँ गुनगुना कर गया

कोई तो राज़ दिल में दबाए वो था
जो भी अपनी वफ़ा को मिटा कर गया
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Zohair Ahmad Sahil
चाँद के आगे से बादल हटा दूँ क्यूँँ प्यारे
आँखों का देखा मैं सब को जता दूँ क्यूँँ प्यारे

वो है दिलकश तो मुझे पर्दा तो करना ही है
राज़ की बातें मैं तुझ को बता दूँ क्यूँँ प्यारे
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Amit Rajvanshi 'Guru'
वो जिन का तेज़ हवाओं से दोस्ताना था
उन्हीं के सामने हम को दिया जलाना था

तमाम राज़ मिरे दुश्मनों को सौंप आया
वो जिस का रोज़ मिरे घर में आना जाना था
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Ansar Ethvi
ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम
Unknown
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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ये सच है नफ़रतों की आग ने सब कुछ जला डाला
मगर उम्मीद की ठण्डी हवाएँ रोज़ आती हैं
Munawwar Rana
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है
दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है

सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ
मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
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Tehzeeb Hafi
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