Eid Shayari Collection - Khushi, dua, aur milan ki festive shayari collection

Eid Shayari beautifully captures the joy, warmth, and spiritual essence of this blessed festival. It reflects emotions of gratitude, togetherness, and heartfelt dua shared with loved ones. Whether you're sending Eid Mubarak wishes or expressing festive happiness, these shayari lines add a poetic touch to your celebrations.

eid shayari
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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eid mubarak shayari
तेरे होंठो से गर इक काम लेना हो
तेरे होंठो से हम बस इक दुआ लेंगे
Siddharth Saaz
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khushi shayari
इक और किताब ख़त्म की फिर उस को फाड़ कर
काग़ज़ का इक जहाज़ बनाया ख़ुशी हुई
Ameer Imam
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dua shayari
तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
Mirza Ghalib
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barkat shayari
बाप ज़ीना है जो ले जाता है ऊँचाई तक
माँ दुआ है जो सदा साया-फ़गन रहती है
Sarfraz Nawaz
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milan shayari
ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का
Javed Akhtar
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tyohar shayari
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Ahsan Marahravi
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ये तुम ने कैसा बना कर हमें किया है गुम
ख़ुशी से झूम उठेगा जिसे मिलेंगे हम
Swapnil Tiwari
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मैं क्या करूँँ मेरे क़ातिल न चाहने पर भी
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है
Ahmad Faraz
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इस आ
समाँ को मुझ सेे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूँ अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
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Ali Rumi
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लंबा हिज्र गुज़ारा तब ये मिलने के पल चार मिले
जैसे एक बड़े हफ़्ते में छोटा सा इतवार मिले

माना थोड़ा मुश्किल है पर रोज़ दुआ में माँगा है
जो मुझ सेे भी ज़्यादा चाहे तुझ को ऐसा यार मिले
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Bhaskar Shukla
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ये शहर वो है कि कोई ख़ुशी तो क्या देता
किसी ने दिल भी दुखाया नहीं बहुत दिन से
Farhat Ehsaas
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को

दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हम सेे क्या काम पड़ गया दिल को
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Subhan Asad
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना
एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है

हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है
कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
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Kumar Vishwas
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हर एक सितम पे दाद दी हर ज़ख़्म पे दुआ
हम ने भी दुश्मनों को सताया बहुत दिनों
Nawaz Deobandi
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तिरे लबों में मिरे यार ज़ाइक़ा नहीं है
हज़ार बोसे हैं उन पर प इक दुआ नहीं है
Pallav Mishra
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सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
Javed Akhtar
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ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
Sahir Ludhianvi
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चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिले
तू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है
Naqsh Lyallpuri
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क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा
ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
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दिल नज़र बन जाएगा ग़म हर ख़ुशी हो जाएगी
आप के जाते ही दुनिया दूसरी हो जाएगी
Shakeel Badayuni
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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कमी कमी सी थी कुछ रंग-ओ-बू-ए-गुलशन में
लब-ए-बहार से निकली हुई दुआ तुम हो
Ali Sardar Jafri
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ख़ुशी की बात और है ग़मों की बात और
तुम्हारी बात और है हमारी बात और
Anwar Taban
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है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं
Saghar Siddiqui
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
Hafeez Banarasi
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हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो
हाए जिगर में दर्द है हाए जिगर को क्या करूँँ
Hafeez Jalandhari
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ये चुपके चुपके न थमने वाली हँसी तो देखो
वो साथ है तो ज़रा हमारी ख़ुशी तो देखो
Shariq Kaifi
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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ
Sahir Ludhianvi
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इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
Akhtar Shirani
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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से
Akhtar Shirani
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उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी
दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
Mohammad Alvi
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है
ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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गाहे गाहे बस अब यही हो क्या
तुम सेे मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या
Jaun Elia
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किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की
किसी की ख़लिश में मज़ा है किसी का
Unknown
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उम्र के आख़िरी मक़ाम में हम
मिल भी जाए तो क्या ख़ुशी होगी

क्या सितम तुम को देखने के लिए
हम को दुनिया भी देखनी होगी
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Vikram Sharma
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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए
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Zaki Azmi
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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली
तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
Satya Prakash Soni
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माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है
आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है
Anjum Saleemi
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दवा से हल न हुआ तो दुआ पे छोड़ दिया
तिरा मोआ'मला हम ने ख़ुदा पे छोड़ दिया
Khurram Afaq
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यार माँगा था मोहब्बत की दुआ माँगी थी
और इस दिल के हिफ़ाज़त की दुआ माँगी थी

अब तो कुछ उस का बिगाड़ा भी नहीं जा सकता
मैं ने ख़ुद उस के सलामत की दुआ माँगी थी
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Ritesh Rajwada
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है
दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम

आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है
लग रहा है घुले हुए हो तुम
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Ritesh Rajwada
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया
Hafeez Jalandhari
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लब पे आता था जो दुआ बन कर
दिल में रहता है अब ख़ला बन कर

कितना इतरा रहा है अब वो फूल
तेरे बालों का मोगरा बन कर
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Haider Khan
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क़ुबूल है जिन्हें ग़म भी तेरी ख़ुशी के लिए
वो जी रहे हैं हक़ीक़त में ज़िन्दगी के लिए
Nasir Kazmi
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उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना
ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे
Dilawar Ali Aazar
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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है
हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
Ahmad Mushtaq
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मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है
ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे
Tehzeeb Hafi
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दुआ में माँग लूँ मैं उस को लेकिन
फ़क़त पाना मेरा मक़सद नहीं है
Shadab Asghar
उम्र भर जिस ने न माँगा हो ख़ुदा से कुछ भी
उस ने बस तुम से मोहब्बत की दुआ माँगी है
Shadab Asghar
तुम इन लबों की हँसी और ख़ुशी पे मत जाना
ये रोज़ रोज़ हमें भी फ़रेब देते हैं
Shadab Asghar
मुबारक मुबारक नया साल आया
ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया
Akhtar Shirani
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दुख कम मिलें इस साल तुम को उस बरस से
ये साल तुम को हौसला दे ये दुआ है
Siddharth Saaz
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है
Ameer Qazalbash
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है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम
मैं ये क्यूँँ पूछूँ कब मिलेंगे आप
Nizam Rampuri
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ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी
डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
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दरवाज़े पर दस्तक देने से पहले
मेरे हाथ दुआ में ख़ुद उठ जाते हैं
Tanoj Dadhich
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रखी थी ले के कॉपी हम ने उस की
ख़ुशी से झूम उठा बस्ता हमारा
Ankit Maurya
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सुनते हैं के मिल जाती है हर चीज़ दुआ से
इक रोज़ तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से
Rana Akbarabadi
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दफ्न ताबूत में कर तिरी हर ख़ुशी
जश्न कैसे मनाते है मय्यत पे भी

ख़ास तारीख़ थी इम्तिहाँ की मगर
आज बारात उस की बुला ली गई
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Shilpi
मुहब्बत में हम ने सियासत न की
तभी इश्क़ में कोई बरकत न की

उसे मानता था मैं अपना ख़ुदा
कभी उस की लेकिन इबादत न की
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RAJAT AWASTHI
हमारे दोस्तों और अक़रिबा की जानिब से
मता-ए-जान को ईद-उल-अज़हा मुबारक हो
Shajar Abbas
तिरा दिल मुस्कुराएगा दुआ है
हमें भी तो भरोसा है ख़ुदा पर
Meem Alif Shaz
माँ की करते हुए ख़िदमत मुझे आ जाए क़ज़ा
ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ सेे
''Akbar Rizvi"
ख़ुशी में भी ख़ुशी होती नहीं अब
तेरा ग़म ही सतह पर तैरता है
Umesh Maurya
तेरे आने की ख़ुशी है न है फ़ुर्क़त का ग़म
ग़म ये है बीत गए प्यार के सावन कितने
Shashank Shekhar Pathak
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ज़माना ज़ुल्म करता है ख़ुशी से
कभी तुझ को कभी मुझ को सताए
Meem Alif Shaz
नज़रें हो गड़ीं जिन की वसीयत पे दिनो-रात
माँ-बाप कि 'उम्रों कि दुआ ख़ाक करेंगे
Asad Akbarabadi
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फ़र्त-ए-ख़ुशी से अपनी जो भी रश्क करते हैं
उन को तिरी बनाई वो जन्नत तलब नहीं
Sabir Hussain
जिस ने बेचैनियाँ दी हैं मुझे बेचैन रहे
मैं ने रो-रो के ख़ुदा से ये दुआ माँगी है
Shajar Abbas
दुखी रहने की आदत यूँंँ बना ली है कि अब कोई
ख़ुशी का ज़िक्र भी कर दे तो फिर तकलीफ़ होती है
Dipendra Singh 'Raaz'
मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
Atul K Rai
तेरी ख़ातिर ख़ुदा से हम दुआ करते
नहीं करते भला हम और क्या करते
Arohi Tripathi
अश्क माँ के जो ख़ुशी से गिरे तो हैं मोती
और छलके जो ग़मों से तो लहू हो जाए
S M Afzal Imam
हुनर से काम लिया पेंट ब्रश नहीं तोड़ा
बना लिया तेरे जैसा ही कोई रंगों से

मुझे ये डर है कि मिल जाएगी तो रो दूँगा
मैं जिस ख़ुशी को तरसता रहा हूँ बरसों से
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Rahul Gurjar
कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते

वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूँ दुआ करते करते
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Shadab Asghar
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दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूँ
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए
Iftikhar Arif
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जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
Munawwar Rana
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है दुआ जल्दी जन्नत अता हो तुझे
तू मेरे इश्क़ का इश्क़ है ऐ रक़ीब
Prit
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मुझ पे पड़ती नहीं बलाओं की धूप
सर पे साया-फ़िगन है माँ की दुआ
Amaan Haider
दुआ में माँग लूँ मैं उस को लेकिन
फ़क़त पाना मेरा मक़सद नहीं है
Shadab Asghar
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ख़ुशी समेट के रखना फ़िज़ूल है असलम
अजीब चीज़ है ये बाँटने से मिलती है
Javed Aslam
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी
तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे
Shakeel Badayuni
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मिरी आरज़ू का हासिल तिरे लब की मुस्कुराहट
हैं क़ुबूल मुझ को सब ग़म तिरी इक ख़ुशी के बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
ज़रूरत बने आदमी आदमी की

कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

ये सारी तपस्या का कारण यही है
मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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Aman G Mishra
मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है
ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है
Shadan Ahsan Marehrvi
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हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था
मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था
Shabeena Adeeb
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ख़ुदा का शुक्र अदा कर वो बे-वफ़ा निकला
ख़ुशी मना कि तिरी जान की बहाली हुई
Shakeel Jamali
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तुम्हारे बा'द इस आँगन में फूल खिलने पर
ख़ुशी हुई भी तो ये दुख हुआ कि दें किस को
Mohit Dixit
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हम ऐसे लोग भी जाने कहाँ से आते हैं
ख़ुशी में रोते हैं जो ग़म में मुस्कुराते हैं

हमारा साथ भला कब तलक निभाते आप
कभी कभी तो हमीं ख़ुद से ऊब जाते हैं
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Mohit Dixit
मुझ को गया था छोड़ के वो कितने तैश में
लेकिन ख़ुशी से रह न सका एक साल भी
Ankit Maurya
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत
ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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गले में उस के ख़ुदा की अजीब बरकत है
वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है
Bashir Badr
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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ईद भी आ गई मिरे मौला
मेरा घर अब तलक सजा ही नहीं
Amaan Pathan
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लगाओ गले से फिर उन दोस्तों को
वही ईद फिर से मनाओ कभी तुम
Amaan Pathan
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इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से
ये क्यूँँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं
Khumar Barabankvi
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना
क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह

कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए
करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
Read Full
Qateel Shifai
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अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की
मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई
Nushur Wahidi
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मैं ने पूछा कि है क्या शग़्ल तो हँसकर बोले
आज कल हम तेरे मरने की दुआ करते हैं
Jalal Lakhnavi
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तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई
कभी ये तुम ने न पूछा तेरी ख़ुशी क्या है
Ahsan Marahravi
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नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं
तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए
Zehra Nigaah
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