Khvaab Shayari - Sapno aur dil ke khayalon ki soulful shayari

Khvaab shayari beautifully expresses dreams, desires, and the silent world of imagination. It reflects sapne, heartfelt wishes, and emotions that often remain unspoken. These verses connect with hope, love, and the gentle depth of inner feelings.

khvaab shayari
मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे
कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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khwab shayari
फिर उठी आख़िर सदा तौहीद की पंजाब से
हिन्द को इक मर्द-ए-कामिल ने जगाया ख़्वाब से
Allama Iqbal
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sapna shayari
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
Iftikhar Raghib
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sapne shayari
हर एक रात को महताब देखने के लिए
मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए
Azhar Inayati
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khayaal shayari
अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगे
ख़्वाब हो जाओगे अफ़्सानों में ढल जाओगे

हम-सफ़र ढूँडो न रहबर का सहारा चाहो
ठोकरें खाओगे तो ख़ुद ही सँभल जाओगे
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Iqbal Azeem
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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उलटे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
Shakeel Jamali
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मैं सो रहा हूँ तेरे ख़्वाब देखने के लिए
ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए
Shakeel Azmi
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एक मुझे ख़्वाब देखने के सिवा
चाय पीने की गंदी आदत है
Balmohan Pandey
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ख़्वाब के आस पास रह रह कर
थक गया हूँ उदास रह रह कर
Shahbaz Rizvi
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उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
Ahmad Faraz
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ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते
जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते
Ahmad Faraz
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ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो
Rahat Indori
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और तो क्या था बेचने के लिए
अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं
Jaun Elia
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तेरी आँखों के लिए इतनी सज़ा काफ़ी है
आज की रात मुझे ख़्वाब में रोता हुआ देख
Abhishek shukla
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सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
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मेरी नींदें उड़ा रक्खी है तुम ने
ये कैसे ख़्वाब दिखलाती हो जानाँ

किसी दिन देखना मर जाऊँगा मैं
मेरी क़स
में बहुत खाती हो जानाँ
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Subhan Asad
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शब की आग़ोश में महताब उतारा उस ने
मेरी आँखों में कोई ख़्वाब उतारा उस ने
Azm Shakri
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यही तलब है जो जीना सिखाए जाती है
तुम्हारे ख़्वाब न देखें तो कब के मर जाएँ
Subhan Asad
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नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
Bashir Badr
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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
Mirza Ghalib
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यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
Nida Fazli
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तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
Gulzar
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इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया
Akbar Allahabadi
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मेरे भी दिल में राख उड़ती है
तेरे भी ख़्वाब इस असर में हैं
Nusrat Zehra
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इस कदर ख़्वाब हैं वस्ल के आँख में
आबले पाँव के हम को दिखते नहीं
Bhaskar Shukla
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं
अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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आ ही गए हैं ख़्वाब तो फिर जाएँगे कहाँ
आँखों से आगे उन की कोई रहगुज़र नहीं
Aalok Shrivastav
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दिल जिन को ढूँढ़ता है न-जाने कहाँ गए
ख़्वाब-ओ-ख़याल से वो ज़माने कहाँ गए
Ambreen Haseeb Ambar
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इक हसीं ख़्वाब कि आँखों से निकलता ही नहीं
एक वहशत है कि ता'बीर हुई जाती है
Ambreen Haseeb Ambar
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नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में
Adil Mansuri
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किसी ने ख़्वाब में आ कर मुझे ये हुक्म दिया
तुम अपने अश्क भी भेजा करो दु'आओं के साथ
Afzal Khan
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नहीं देखी है शकल तक उस की
ख़्वाब में किस की शकल देखूँ मैं
Jaun Elia
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मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है
हाथ रख दे मेरी आँखों पे कि नींद आ जाए
Waseem Barelvi
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सारे सपने बाँध रखे हैं गठरी में
ये गठरी भी औरों में बट जाएगी
Aziz Nabeel
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गुज़र रहा हूँ किसी ख़्वाब के इलाक़े से
ज़मीं समेटे हुए आसमाँ उठाए हुए
Aziz Nabeel
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब
लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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हर एक नींद को परख रहा हूँ मैं
तुम्हारे​ एक ख़्वाब का जला हुआ
Swapnil Tiwari
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जैसे देखा हो आख़िरी सपना
रात इतनी उदास थीं आँखें
Siraj Faisal Khan
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जब से हासिल हुआ है वो मुझ को
ख़्वाब आने लगे बिछड़ने के
Siraj Faisal Khan
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दश्त जैसी उजाड़ हैं आँखें
इन दरीचों से ख़्वाब क्या झांकें
Siraj Faisal Khan
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
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Jaun Elia
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ये क़त्ल-ए-आम और बे-इज़्न क़त्ल-ए-आम क्या कहिए
ये बिस्मिल कैसे बिस्मिल हैं जिन्हें क़ातिल नहीं मिलता

वहाँ कितनों को तख़्त ओ ताज का अरमाँ है क्या कहिए
जहाँ साइल को अक्सर कासा-ए-साइल नहीं मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश
इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर

बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को
मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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याराँ वो जो है मेरा मसीहा-ए-जान-ओ-दिल
बे-हद अज़ीज़ है मुझे अच्छा किए बग़ैर

मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
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Jaun Elia
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
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Abrar Kashif
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मुद्दत के बा'द ख़्वाब में आया था मेरा बाप
और उस ने मुझ सेे इतना कहा ख़ुश रहा करो
Abbas Tabish
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कभी तो आँख लगते ही मुसलसल ख़्वाब आते थे
अभी तो ख़्वाब ही अक्सर मुझे सोने नहीं देते
Tariq Faiz
मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
Farhat Abbas Shah
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बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
Iftikhar Arif
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सब कहते हैं क्या कहते हैं कहने दो
ख़्वाब तुम्हारे आँख हमारी देखेंगे
Ritesh Rajwada
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तुम्हारे साथ जो देखे थे मैं ने
वो सारे ख़्वाब बाग़ी हो रहे हैं
Ritesh Rajwada
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ

ख़्वाब आएँ तो नींद यूँँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं
हमें जो ख़्वाब तेरे आ रहे हैं

तेरे शैदाई पागल हो चुके हैं
तिरी तस्वीर चू
में जा रहे हैं
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Siddharth Saaz
बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो
Ghulam Mohammad Qasir
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हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना
Unknown
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हम उसे आँखों की दहलीज़ न चढ़ने देते
नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे ले कर

एक दिन उस ने मुझे पाक नज़र से चूमा
उम्र भर चलना पड़ा मुझ को सहारे ले कर
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Aalok Shrivastav
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा

आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
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इस से पहले कि ज़मीं-ज़ाद शरारत कर जाएँ
हम सितारों ने ये सोचा है कि हिजरत कर जाएँ

दौलत-ए-ख़्वाब हमारे जो किसी काम न आई
अब किसी को नहीं मिलने की वसिय्यत कर जाएँ
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Idris Babar
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सुनहरी लड़कियों इनको मिलो मिलो न मिलो
ग़रीब होते हैं बस ख़्वाब देखने के लिए
Abbas Tabish
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रो रही हूँ कि तुम दिख न पाए कहीं
हाए ये ख़्वाब सिंदूर है माँग में
Neeraj Neer
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वो मिरे सामने दुल्हन की तरह बैठे हैं
ख़्वाब अच्छा है मगर ख़्वाब में क्या रक्खा है
Muzaffar Razmi
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हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ
Rehana Roohi
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क्या क़यामत है कि आरिज़ उन के नीले पड़ गए
हम ने तो बोसा लिया था ख़्वाब में तस्वीर का
Unknown
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लब-ए-ख़याल से उस लब का जो लिया बोसा
तो मुँह ही मुँह में अजब तरह का मज़ा आया
Jurat Qalandar Bakhsh
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मुझे ये तक मुयस्सर है कि तुझ को छू भी सकता हूँ
कई लोगों का तो सपना है तुझ को देखते रहना
Siddharth Saaz
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कि तुम को देखने के बा'द यारा
तुम्हारे ख़्वाब सब देखा करेंगे
Kaviraj " Madhukar"
मेरे बाबा ने मेरी ज़िंदगी ख़ुशहाल करने को
सब अपनी ख़ुशियाँ वारी हैं सब अपने ख़्वाब बेचे हैं
Shajar Abbas
और क्या ही था हमारे पास देने को तुम्हें
ख़्वाब मेरे आँख के तुम को मुबारक हो सनम
Subrat Tripathi
अगर मिले कभी फ़ुर्सत तो देख लेना इन्हें
तुम्हारी आँखों में कुछ ख़्वाब छोड़े जाता हूँ
Shajar Abbas
बेचैन फिरता हूँ मैं अक्सर ख़्वाब में
होती नहीं आबाद मेरी नींद भी
Piyush Mishra 'Aab'
इक ओर तेरा ख़्वाब जो हर रात आता है
दूजा वो अपना वस्ल जो हो ही नहीं रहा
Aqib khan
उम्र कम पड़ जाएगी हर ख़्वाब गर पूरा हुआ
और गर पूरा न हो तो काटती है ज़िंदगी
Ajeetendra Aazi Tamaam
जो मैं उस के हिस्से में सारा हुआ तो
फिर इक बार वो सब दुबारा हुआ तो

तिरे ख़्वाब तो ऐश ओ आराम के हैं
मिरे साथ जो बस गुज़ारा हुआ तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
हक़ीक़तों की तल्ख़ियाँ भी मीठे ख़्वाब की तरह
मुझे शराब दे रही है वो गुलाब की तरह
Rachit Sonkar
न सिर्फ़ ये कि जहन्नुम ख़िताब में भी नहीं
अली के मानने वालों के ख़्वाब में भी नहीं
Muzdum Khan
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वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका
कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ
Iqbal Ashhar
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली
लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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तुम अपनी बात पे क़ाएम हो आख़िरी दम तक
हटाओ छोड़ो ये ख़्वाब-ओ-ख़याल की बातें
Haider Khan
इक मुहब्बत से भरी उस ज़िंदगी के ख़्वाब हैं
पेड़ दरिया और पंछी तेरे मेरे ख़्वाब हैं
Neeraj Nainkwal
जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
Munawwar Rana
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वो हाल था कि बस मिरा उठना मुहाल था
लेकिन फिर एक ख़्वाब की तकमील से उठा
Kashif Husain Ghair
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मुझे चाह थी किसी और की, प मुझे मिला कोई और है
मेरी ज़िन्दगी का है और सच, मेरे ख़्वाब सा कोई और है

तू क़रीब था मेरे जिस्म के, बड़ा दूर था मेरी रूह से
तू मेरे लिए मेरे हमनशीं कोई और था कोई और है
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Avtar Singh Jasser
एक था वक़्त जब आँखों में था ख़्वाबों का हुजूम
अब तो इक ख़्वाब टटोले से नहीं मिलता है
Dipendra Singh 'Raaz'
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है
मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़्वाब पलकों की हथेली पे चुने रहते हैं
कौन जाने वो कभी नींद चुराने आए

मुझ पे उतरे मेरे अल्हाम की बारिश बन कर
मुझ को इक बूॅंद समुंदर में छुपाने आए
Read Full
Khalil Ur Rehman Qamar
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है
नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे
कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे
Jameel Malik
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यतीमों की तरह बस पाल रक्खा है इन्हें हम ने
हमें जो दुख मिले हैं वो हमारे दुख नहीं लगते

किसी की आँख में रह कर किसी के ख़्वाब देखे हैं
हजारों कोशिशें की पर किनारे दुख नहीं लगते
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Rohit Gustakh
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इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ
उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ
Meer Taqi Meer
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हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो
ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है
Ankit Maurya
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मेरे हाथों में कुछ गुलाब तो हैं
जो न मुमकिन रहे वो ख़्वाब तो हैं
Shaista mufti
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मिलने का वा'दा उन के तो मुँह से निकल गया
पूछी जगह जो मैं ने कहा हँस के ख़्वाब में
Unknown
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सखी को हमारी नज़र लग न जाए
उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
Sahil Verma
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ज़ख़्म उन के लिए मेहमान हुआ करते हैं
मुफ़लिसी जो तेरे दरबान हुआ करते हैं

वो अमीरों के लिए आम सी बातें होंगी
हम ग़रीबों के जो अरमान हुआ करते हैं
Read Full
Mujtaba Shahroz
तलब करें तो ये आँखें भी इन को दे दूँ मैं
मगर ये लोग इन आँखों के ख़्वाब माँगते हैं
Abbas rizvi
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मेरी आँखें और दीदार आप का
या क़यामत आ गई या ख़्वाब है
Aasi Ghazipuri
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उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
Irfan Siddiqi
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बरसों से जो सँभाल के रक्खा था एक ख़्वाब
मलबे के नीचे दब गया जब आया ज़लज़ला

वो बीच ज़लज़ले के उसे ढूँढ़ने में गुम
बेटा नहीं रहा ये बा'द में पता चला
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Amaan Pathan
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इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िन्दगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
Fani Badayuni
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फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले
Sahir Ludhianvi
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तू नहीं तो तिरा ख़याल सही
कोई तो हम-ख़याल है मेरा
Saqi Amrohvi
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ख़्वाब उम्मीद तमन्नाएँ तअल्लुक़ रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
Imran-ul-haq Chauhan