Self Respect Shayari - Words that reflect dignity, self-worth, and inner strength

Self respect shayari expresses the quiet power of knowing your worth and standing firm in your values. These lines reflect khuddari, dignity, and inner strength, reminding you to never compromise your identity. Whether in love, life, or struggles, this poetry inspires confidence and self-belief.

चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ
हर पर्दा पर्दा नइँ होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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ऐ "दाग़" बुरा मान ना तू उस के कहे का
माशूक की गाली से तो इज़्ज़त नहीं जाती
Dagh Dehlvi
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लड़ सको दुनिया से जज़्बों में वो शिद्दत चाहिए
इश्क़ करने के लिए इतनी तो हिम्मत चाहिए

कम से कम मैं ने छुपा ली देख कर सिगरेट तुम्हें
और इस लड़के से तुम को कितनी इज़्ज़त चाहिए
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Nadeem Shaad
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ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं
देर से पट्टी खोलेंगे

चेहरा पढ़ने वाले चोर
गठरी थोड़ी खोलेंगे
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Khurram Afaq
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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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तुम्हें लगा है कि मेरे होते, तुम्हें भी दिल में जगह मिलेगी
बड़ी ही इज़्ज़त से कह रहा हूँ ,चलो उठो अब मेरी जगह से
Shadab Asghar
ज़िंदा रहने की ये तरक़ीब निकाली हम ने
बात बिगड़ी हुई कुछ ऐसे सँभाली हम ने

उस सेे समझौता किया है उसी की शर्तों पे
जान भी बच गई इज़्ज़त भी बचा ली हम ने
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Divyansh Shukla
सुन ओ कहानीकार कोई ऐसा रोल दे
ऐसे अदा करूँं मेरी इज़्ज़त बनी रहे
Afzal Ali Afzal
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कम से कम मैं ने छुपा ली देख कर सिगरेट तुम्हें
और इस लड़के से तुम को कितनी इज़्ज़त चाहिए
Nadeem Shaad
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उस ने मेरे छोटेपन की इस तरह इज़्ज़त रखी
मैं ने दीवारें उठाईं उस ने उन पर छत रखी
Kunwar Bechain
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ज़माने भर में है इज़्ज़त हमारी
मगर घर में कोई इज़्ज़त नहीं है
Saarthi Baidyanath
दग़ाबाज़ी में भी ख़ुशबू वफ़ादारी की आएगी
वो मुझ को बाप की इज़्ज़त की ख़ातिर छोड़ जाएगी

उसे मालूम है मेरा पसंदीदा है काला रंग
मुझे लगता नहीं अब वो कभी काजल लगाएगी
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Richa Choudhary Sahar
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अपने वालिद की रख गई इज़्ज़त
मुझ सेे अगले जनम का वा'दा किया
Dharmesh Solanki
फ़ितरत अगर हो काँच सी, दर-ओ-दीवार की
परदे हवा से कब तलक इज़्ज़त बचाएँगे
Aadil Sulaiman
इज़्ज़त-दारों ने ये बात बताई है
इज़्ज़त की पहली सीढ़ी रुस्वाई है
Jitendra Tiwari
कहने को मैं काफ़ी कुछ कह सकता था
लेकिन उस की इज़्ज़त भी तो रखनी थी
Jitendra Tiwari
इज़्ज़त-ए-नफ़्स गर बचानी हैं
तो अमीरों से दूरियाँ रखो
Shajar Abbas
ख़ुदा की हम पे ये रहमत रही है
भले कम ही सही इज़्ज़त रही है

रही होगी यहाँ आसाँ तुम्हारी
हमारी ज़िन्दगी आफ़त रही है
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Kush Pandey ' Saarang '
जल्दबाज़ी नहीं इज़हार-ए-मोहब्बत की हमें
वो बनी है अभी तो दोस्त हमारी अच्छी

गई गुज़री सी लिए फिरते हैं इज़्ज़त कुछ लोग
सब को ही लगती है चीज़ अपनी पुरानी अच्छी
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Amaan mirza
मुझ को उस ने दे के तोहफ़े में घड़ी
ये कहा कि वक़्त की इज़्ज़त करो
Shajar Abbas
उन को केवल अपनी इज़्ज़त प्यारी थी
हम पर रिश्ते की भी ज़िम्मेदारी थी
Jitendra Tiwari
हिक़ारत,से क्यूँ देखते हो, तवाइफ़ को भी बख़्श इज़्ज़त
हवस-आश्ना मर्द का वो ग़लाज़त उठाती है साहब
A R Sahil "Aleeg"
बे वफ़ा शख़्स तेरा नाम भी मुँह से लेना
इज़्ज़त-ए-नफ़्स की तौहीन समझता हूँ मैं
Shajar Abbas
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उस को इज़्ज़त के ख़ौफ़ ने रोका
वरना वो भाग जाती मेरे साथ
Sayeed Khan
जान-ए-मन तुझ सेे मोहब्बत है मोहब्बत की क़सम
राँझा-ओ-क़ैस की फ़रहाद की चाहत की क़सम

ख़ुद से बढ़कर तुझे चाहा था तुझे चाहूँगा
ऐ मेरी जान तेरी इज़्ज़त-ओ-अज़मत की क़सम
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Shajar Abbas
ऐ बे वफ़ा तेरी इज़्ज़त का पास है वरना
मैं तेरा नाम ज़माने में आम कर देता
Shajar Abbas
घूम रहा हूँ मैं, अपनी इज़्ज़त और आन बचाए
यार बुरा हूँ, अच्छे लोगों से भगवान बचाए
Vijay Potter Singhadiya
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नहीं लगता यहाँ इक पल गँवाने में
उमर कट जाती है इज़्ज़त कमाने में

ख़ुशी से तुम लगा लेना गले उस को
अगर मिल जाए हम जैसा ज़माने में
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Sandeep dabral 'sendy'
जितनी इज़्ज़त पहले मिलती है
उतनी शादी बा'द नहीं मिलती

दोबारा इक शे'र सुना ने से
पहले जितनी दाद नहीं मिलती
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Vijay Potter Singhadiya
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कोई कान्हा अब नहीं आते यहाँ इज़्ज़त बचाने
याद रखना लाज अपनी ख़ुद बचाने का समय है
Shubhangi kalii
मुझ में कोई जान नहीं बसती तेरी
या'नी मुझ को जानी जानी मत करना

अपनी इज़्ज़त अपने हाथों होती है
अपनी इज़्ज़त पानी पानी मत करना
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Jonty Dubey
अपने होंठों पर फूलों को रख लो ना
सब याद करेंगे तुम को इज़्ज़त होगी
Meem Alif Shaz
तेरी महनत की इज़्ज़त को गिरा दिया है
पैसों के लालच ने तुझ को हरा दिया है
Meem Alif Shaz
साहब मेरे को इतनी तवज्जोह तो दीजिए
जो पीठ पीछे आप की इज़्ज़त भी कर सकूँ
shaan manral
नहीं जाना कभी उस घर जहाँ इज़्ज़त नहीं होती
बिना माँ-बाप के घर में कभी रहमत नहीं होती
Kushal "PARINDA"
मेरी इज़्ज़त तुम्हारे हाथों है,
मेरी यारी की नींव ये होगी
Nirbhay Nishchhal
सभी से मिल रहा था यार उस को मान आख़िर
मगर घर में उसी की यार अब इज़्ज़त नहीं थी

हमारे ही लिए तो पास उस के वक़्त था तब
मिला जो आज उस सेे तो उसे फ़ुर्सत नहीं थी
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Raunak Karn
हम को तुम्हारी बातें अच्छी नहीं लगी हैं
आगे से हम सेे थोड़ा इज़्ज़त से बात करना
Rachit Sonkar
अपने छोटों की तुम करो इज़्ज़त
ये ही तुम को बुलंदियांँ देंगे
Meem Maroof Ashraf
ख़्वाब दिखाता है ख़ुद उन सेे दूर भी करता है
इज़्ज़त कहता है फिर चकना चूर भी करता है

रोज़ कहेगा जाँ तेरे बिन मेरा क्या होगा
रोज़ मुझे मर जाने पर मजबूर भी करता है
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Shayra kirti
इश्क़ में टूट जाती है इज़्ज़त
सोच कर ही क़दम उठाना तुम
Meem Alif Shaz
इज़्ज़त अलग ही होती है फिर दोस्त यार में
गर आदमी लगा हो किसी रोज़गार में
Rohit tewatia 'Ishq'
अमानत में ख़यानत लुत्फ़ देती है
मगर इज़्ज़त भी सारी छीन लेती है
Meem Alif Shaz
उस को छूना है लेकिन आँखों से
उस की हया ही तो उस की इज़्ज़त है
Meem Alif Shaz
चाहे कमी कर लेना औरत को मुहब्बत देने में
लेकिन कमी मत करना तुम औरत को इज़्ज़त देने में
Daqiiq Jabaalii
जिसे इज़्ज़त नहीं दिल की उसे यक़सर ज़ुदा कर दो
किसी को फूल देना है तो फिर उस को दिखा कर दो

परिंदे मर रहे हैं क़ैद में तुम को ख़बर है क्या
ज़रा उन पर तरस खाओ मेरी मानो रिहा कर दो
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"Nadeem khan' Kaavish"
आज की ये नस्ल क्या जाने मूलूकिय्यत हमारी
ठीक होगा जो बुज़ुर्गों से सुने इज़्ज़त हमारी
mohsin hasan
दुश्मन की इज़्ज़त करती हो
पर हम से नफ़रत करती हो

हम ने वो सब छोड़ दिया है
जिस की तुम हसरत करती हो
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Kaviraj " Madhukar"
नए लड़के अदब को भूल कर भी
अभी तक सबकी इज़्ज़त कर रहे हैं
Ashish kaviguru
किसी ने दिल दुखाया तो किसी ने छीन ली इज़्ज़त
किया है चाक दिल को दोस्ती की आड़ में मेरे
Sabir Pathan
हम इतने सस्ते होते तो पैसों में आने लगते
बेहद कम जिन की इज़्ज़त उन जैसों में आने लगते

हम ऐसे वैसे लोगों से तो मिलते जुलते कम हैं
वरना अब तक हम भी ऐसे वैसों में आने लगते
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Kaviraj " Madhukar"
वो जिस ने शान से दौलत नहीं इज़्ज़त कमाई है
अगर वो मार दे थप्पड़ तो उस
में भी भलाई है

मैं जिस की बात करता हूँ वो तो है बाप का इक रूप
बहुत है ख़ुशनसीब इंसाँ मिला जिस को भी भाई है
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ZafarAli Memon
मेरी तो तुझ से सिर्फ़ मोहब्बत की माँग थी
क्या मिल गया तुझे मेरी इज़्ज़त उछाल कर
shaan manral
कौन देता ग़रीब को इज़्ज़त
तू अमीरों को ही बधाई दे
Shadab khan
कामयाबी को मेरी क़िस्मत करूँँगी
कोई इज़्ज़त देगा तो इज़्ज़त करूँँगी
Sahil Verma
दुखाकर दिल तिजोरी भर रहें हो जो
कमाने से मगर बरकत नहीं होगी

ज़रूरत हो कभी जितनी कहो उतना
कभी चिल्लाने से इज़्ज़त नहीं होगी
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Avijit Aman
हाथ मुफ़्लिस के कहीं से जो ख़ज़ाने लग जाएँ
लोग इज़्ज़त से उसे पास बिठाने लग जाएँ
Wajid Husain Sahil
है कितना हसीं देख लो इज़्ज़त का ये पर्दा
हर शख़्स से इस की अदा क़ीमत नहीं होती
Shakir Sheikh
इज़्ज़त से जब भी मुझ को पुकारा नहीं गया
मैं मुड़के उस गली में दुबारा नहीं गया

उस सेे कहा था ख़ौफ़ में मुझ पर यक़ीन कर
फिर मुझ सेे उस का ख़ौफ़ उतारा नहीं गया
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Mayank Tiwari
न ही उल्फ़त न ही दौलत की ख़ातिर
हमारा हो जा तू इज़्ज़त की ख़ातिर

मुझे आदत है तेरे ज़ाइक़े की
तू मेरे पास आ लज़्ज़त की ख़ातिर
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"Nadeem khan' Kaavish"
मुफ़्त की शय की कोई क्यूँँकर करे इज़्ज़त भला
दरिया की क़ीमत वो जाने जिस ने सहरा देखा है
Prit
लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की
इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की

जिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ा
उस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की
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Ali Nazim Adam
इज़्ज़त शान-ओ-शौकत ईगो छोड़ के तुम
गर मेरे हो जाओ कितना अच्छा हो
Ambar
बन गया है शहर तो अब गाँव इनको चाहिए
काट देते हैं शजर फिर छाँव इनको चाहिए

आँख में इज़्ज़त नहीं है लड़कियों के वास्ते
और पायल के लिए फिर पाँव इनको चाहिए
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Divya 'Kumar Sahab'
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बहुत ही प्यार से पुरखों की मेहनत बेच डालेगा
निकम्मा शख़्स है यारों वो इज़्ज़त बेच डालेगा

उसे है बेचने का शौक़ उस को रोक लो वरना
वो इक दिन मुल्क की सारी विरासत बेच डालेगा
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Danish Balliavi
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ब्याह रचाया उस सेे कल इज़्ज़त लूट उस की परसों
बरी हुआ हूँ गुनाह कर के और ईनाम मिला है
KUNAL
हाँ 'इज़्ज़त-आबरू की तेरे शामत आने वाली है
किए पर दीन की तेरे बग़ावत आने वाली है
Jagat Singh
बस इतना याद रखना इज़्ज़त हो तुम किसी की
जो मेरे साथ गुज़री तुम उस को भूल जाना
Manish Yadav
हर कोई कब पाने की चाहत करता है
पाने वाला ही अक्सर शिद्दत करता है

तुम उस सेे आज़ादी की बातें करते हो
जो ज़ंजीरों की काफ़ी इज़्ज़त करता है
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Ansar Ethvi
तुम भी सच कहने की क़ीमत क्या जानो
दस लोगों के बीच में इज़्ज़त क्या जानो
Meem Alif Shaz
इन
में फ़क़त हवस है मुहब्बत न देंगे ये
इज़्ज़त तो लूट लेंगे ये इज़्ज़त न देंगे ये
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Daqiiq Jabaalii
इज़्ज़त-ओ-आबरू के डर से फिर इक वालिद ने
अपनी बेटी की मोहब्बत का गला घोंट दिया
Dipendra Singh 'Raaz'
मुँह पर सच कहने की आदत है
याँ इज़्ज़त है तुम्हारी रहने दो
Shivam Prajapati
इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ में
तू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ में

महफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांड
कव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में
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Amaan mirza
वो हर ख़्वाहिश को इज़्ज़त बख़्श देता है
ख़ुदा सब को मोहब्बत बख़्श देता है
Saarthi Baidyanath
मान जाओ न मुहब्बत से रखूँगा तुम को
वा'दा करता हूँ हिफ़ाज़त से रखूँगा तुम को

तोड़ कर चाँद सितारे तो नहीं ला सकता
इतना कह सकता हूँ इज़्ज़त से रखूँगा तुम को
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Daqiiq Jabaalii
जो लुटी एक बेटी की इज़्ज़त यहॉं
वो ख़बर बन गई आज अख़बार की
Gulshan Panwar
कोई नन्हीं परी ब्याही गई फिर
किसी के बाप की इज़्ज़त बची फिर

फिर आना जन्म ले कर दूसरा तुम
करूँँगा मैं तुम्हीं से दोस्ती फिर
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Murari Mandal
हम जैसे ग़रीबों को जो इज़्ज़त नहीं मिली
तो हम ने अपने नाम में हज़रत लगा लिया
Saif Dehlvi
प्यासे जो इज़्ज़त बेचे हैं उन को समझाओ
मैं दरिया हूँ नदियाँ मुझ सेे आ कर मिलती हैं
Rahul Patel
तुम्हें भी देखना था दर्द मेरा
तुम्हें नज़रें मिलानी चाहिए थी

मिला कुछ भी नहीं इज़्ज़त से हम को
हमें दौलत कमानी चाहिए थी
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Ravi 'VEER'
हाथ माँ बाप का रहे सर पर
उस को इज़्ज़त वक़ार मिलता है

लोग वो ख़ुशनसीब होते हैं
जिन को बहनों का प्यार मिलता है
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Sameer Khan
ख़ुदा से दो बेटियाँ या माँ बाप से बहन माँगने वाले
वो ख़ुद कभी बेटियों की इज़्ज़त से दोस्त खेला नहीं करते
Priyanshu Sharma
दौलत का पर्दा ज़ीस्त के ऐबों पे डालकर
इज़्ज़त-मआब हो गए सब ऐबदार लोग
Shajar Abbas
किस ने कहा चाहत की भूखी होती है
यार न ये इज़्ज़त की भूखी होती है

मैं हूँ इन के रग रग से वाक़िफ़ मुर्शद
हर लड़की दौलत की भूखी होती है
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Danish Balliavi
ये मसअला नहीं है मियाँ धर्म का कोई
मशरूत हूँ मैं कुंबा की इज़्जत के नाम पर
'Sabaa'
मैं भी आदम हूँ कि मुझ को भी बुरा लगता है
मेरे मालिक मुझे इज़्ज़त से बुलाया कीजे
Rakesh Mahadiuree
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तू ऐ राकेश सचमुच एक इज़्ज़त दार इंशा है
तेरा महबूब तुझ को मिलता तो परनाम करता है
Rakesh Mahadiuree
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अपमान जब भी है हुआ जो आज तक
बदला लिया इज़्ज़त उन्हें दे कर बहुत
Vinod Ganeshpure
बीमारी बे-इज़्ज़त होगी
मैं मर जाऊँगा तानों से
Bhanwar Mandan
देखते लोग अगर हम को तो नफ़रत करते
क्या फ़रिश्ते कभी जिन्नों से मुहब्बत करते

मुफ़्लिसी ने हमें बदनाम किया है वरना
देखते आज हमें और वो इज़्ज़त करते
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Kaffir
माना कि तुम को शाइरों से राब्ता नहीं
पर आ गए हैं दर पे तो इज़्ज़त ही कीजिए
Rakesh Mahadiuree
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क्या अब यही है सच कि मुहब्बत नहीं रही
मतलब यही के तुम को भी हसरत नहीं रही

कल रात तुम ने हम को निकाला जो बज़्म से
यारों में बात क्या रहे इज़्ज़त नहीं रही

जिस जिस भी कूचे में गए खाए हैं ज़ख़्म ही
अब और दिल लगाने की हसरत नहीं रही

तन्हाई भी है दर्द भी है तेरा ग़म भी है
अब मेरे कमरे में कोई ख़ल्वत नहीं रही

अब तो सितम ये है के सितमगर ने कह दिया
अब और सितम को तेरी ज़रूरत नहीं रही

हम जिस के पहलू से चले आए हैं दश्त में
वो दर नहीं रहा कि वो निस्बत नहीं रही

बाज़ार-ए-इश्क़ में भी पुकारे गए मगर
वो दिन नहीं रहे के वो क़ीमत नहीं रही
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Gulfam Ajmeri
औरतों को फ़िक्र हैं इज़्ज़त की
जान तो मर्दों को भी प्यारी हैं
Kartik Bhalerao
अपनी इज़्ज़त सॅंवारने के लिए
मुझ को बदनाम करना अच्छा है
Bilal Official
देखो इज़्ज़त यहाँ हुलिए से ही मिलती है तो
फिर भिखारी को यूँँ मौक़ा न दिया जा सकता
Surbhi Sharma
पहन शाखों में बाइज़्जत हमारी आँख की सुर्ख़ी
तुम्हारी राह तकता है हमारी राह का सेमल
Shiva awasthi
मेरे दिल को हलाल कर रोना
मेरी इज़्ज़त उछाल कर रोना

देखना चाहता हूँ मरते वक़्त
आँखों में आँखें डाल कर रोना
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jaani Aggarwal taak
आज इज़्ज़त शहर में देखो हमारी
सर उठा कर ज़िंदगी हम ने गुज़ारी
Vinod Ganeshpure
सारी दुनिया पीछे होती
तुम गर हम को इज़्ज़त देते
Prakamyan Gautam
इज़्ज़त शोहरत शान-ओ-शौक़त सब है मेहनत की रहमत
ग़फ़लत से अव्वल इंसाँ को बर्बादी ही मिलती है
Nityanand Vajpayee
इज़्ज़त-ए-नफ़्स है ग़नीमत है
क्यूँँ गुज़रना है उस की गलियों से
'June' Sahab Barelvi
निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
Akbar Allahabadi
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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ
मगर जो बीच में कम-बख़्त शा'इरी है ना
Afzal Khan
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किसी बे-वफ़ा से बिछड़ के तू मुझे मिल गया भी तो क्या हुआ
मेरे हक़ में वो भी बुरा हुआ मेरे हक़ में ये भी बुरा हुआ
Mumtaz Naseem
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माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
Altaf Hussain Hali
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
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Tehzeeb Hafi
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ओ सखी मन उस का तो तन भी उसी का
हक़ है उस को ग़ैर ये आँगन न चू
में
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Neeraj Neer
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