Taareef Shayari Collection - Dil se nikli khoobsurat tareef aur admiration wali shayari

Taareef shayari is all about expressing admiration, beauty, and heartfelt appreciation through poetic words. Whether it's praising someone's husn, nature, or personality, these lines bring warmth and positivity. Explore the finest taareef shayari to celebrate emotions and make someone feel truly special.

tareef shayari
न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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आप की सादा दिली ख़ुद आप की तौहीन है
हुस्न वालों को ज़रा मग़रूर होना चाहिए
Abbas Qamar
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है
तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
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Tehzeeb Hafi
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तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले
तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शा'इरी से पहले
Kaif Bhopali
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
Firaq Gorakhpuri
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
Ibn E Insha
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तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
Sahir Ludhianvi
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अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ
Arzoo Lakhnavi
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हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
Jigar Moradabadi
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया
Asad Bhopali
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इक हुस्न-ए-बेमिसाल की तम्सील के लिए
परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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Jaun Elia
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इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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हुस्न ने शौक़ के हंगा
में तो देखे थे बहुत
इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
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Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़ को पूछता नहीं कोई
हुस्न का एहतिराम होता है
Asrar Ul Haq Majaz
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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है
Asrar Ul Haq Majaz
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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का
Meer Taqi Meer
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उस हुस्न के सच्चे मोती को हम देख सकें पर छू न सकें
जिसे देख सकें पर छू न सकें वो दौलत क्या वो ख़ज़ाना क्या
Ibn E Insha
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न करो बहस हार जाओगी
हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी

ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते
Rais Farog
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बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले
ये हुस्न की दौलत है लुटाई नहीं जाती
Unknown
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लुटाते हैं वो दौलत हुस्न की बावर नहीं आता
हमें तो एक बोसा भी बड़ी मुश्किल से मिलता है
Jaleel Manikpuri
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हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
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Kazim Rizvi
मन के हारे हुए इंसान को हुस्न-ए-शय से
कोई मतलब नहीं कोई भी सरोकार नहीं
shaan manral
हुस्न उन का सादगी में कुछ अलग महका किया
मैं ने धड़कन से कहा धड़को मगर आराम से
Ishq Allahabadi
इक बार अपनी माँ को मोहब्बत से देख ले
जिस को भी हुस्न-ए-ताम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने
यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने

इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने
ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
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Kushal Dauneria
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मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
चल गया होगा पता ये आप को
बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को

इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़
तू समझती क्या है अपने आप को
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Kushal Dauneria
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नज़र न आए मुझे हुस्न के सिवा कुछ भी
वो बे-वफ़ा भी अगर है तो बे-वफ़ा न लगे
Hasan naim
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तुम को तो बस हुस्न के नंबर मिलते हैं
उस का सोचो जिस को पढ़ना पड़ता है
Kafeel Rana
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हुस्न ऐसा है कि देखो तो लगे ताज-महल
इस पे वो शख़्स सँवरता भी ग़ज़ल जैसा है
Manazir Ashiq Harganvi
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ख़ुद हुस्न से न पूछिए ता'रीफ़ हुस्न की
दीवाने से ये पूछिए दीवाना क्यूँँ हुआ
Ameer Imam
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ख़ुद हुस्न से न पूछिए ता'रीफ़ हुस्न की
दीवाने से ये पूछिए दीवाना क्यूँँ हुआ
Aamir Azher
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हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त
हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले
Aks samastipuri
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तुम बिजलियाँ रखो तो रखो हुस्न की यहाँ
हम भी तराज़ू में ये दिल-ए-ज़ार रख चुके
Amaan Pathan
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कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है
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Jaun Elia
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बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
Safi Lakhnavi
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वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था
कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए
Rajinder Manchanda Bani
ये तिरी ख्वाइश है जाँ तुझे किस के साथ रहना है
एक तिरा हुस्न देखता है एक तुझ
में प्यार देखता है
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karan singh rajput
हुस्न-ए-क़यामत रही तारी, दिखा फिर मो'जिज़ा जब
था गुलिस्ताँ नापसंद, हो इश्क़ सहरा से गया तब
Zain Aalamgir
इश्क़ वालों को बुरा कहना भी
हुस्न वालों की पज़ीराई है
Saarthi Baidyanath
हुस्न का जो ग़ुरूर होता है
ख़ाक इक दिन ज़रूर होता है
Sandeep Gandhi Nehal
फ़क़ीरी को ख़ुदाई हुस्न देना है हमें 'लाजो
इसी फ़ाके का हम को यार अब रोज़ा बनाना है
Aarush Sarkaar
उतरते हुस्न पे तुम को गुमाँ था
घमंडी बस हमें कहती रही तुम
Kush Pandey ' Saarang '
हुस्न चाहे किसी ज़बान का हो
इश्क़ उर्दू ज़बान वाला है
Saarthi Baidyanath
तेरे हुस्न के क़सीदे पढ़ने पर ख़ुदा मज़बूर हुआ है
तेरे होने से ही ये शहर-ए-लखनऊ मशहूर हुआ है
Utkarsh kumar pandey
हुस्न पर ग़ुरूर होना लाज़मी तो है मगर
हुस्न ढलता भी है और ग़ुरूर टूटता भी है
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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एक लड़की है मुस्कुराती है
मोजिज़े हुस्न के दिखाती है
Parvez Zaami
हर्फ़ दर हर्फ़ हुस्न का जलवा
तुम मुरस्सा ग़ज़ल के जैसी हो
Saarthi Baidyanath
इक रोज़ कर रहा था तेरे हुस्न का बयान
हर शख़्स माँगने लगा आँखें उधार में
Fauzan Aoon Azmi
आप मुझ को देखना हुस्न-ए-एहतियात से
देख लेना आप की निगाह देखी जाएगी
Abuzar kamaal
ये प्यार, इश्क़, कौन कहता है के है ख़ता कोई
ऐ दोस्त! थोड़ा तो मगर अख़्त्यार होना चाहिए

मर जाना सिर्फ़ हुस्न पर तो अक़्लमंदी है नहीं
महबूब कोई हो मगर हुश्यार होना चाहिए
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Shashank Shekhar Pathak
हुस्न का क्या है किसी रोज़ भी ढल जाएगा
अपने किरदार को आईना बनाए रखना
Shajar Abbas
हाँ तेरे हुस्न को रुस्वा किया है
मैं तेरे हुस्न से उकता गया हूँ
Parwez Akhtar
लोग मरते हैं हुस्न पर तेरे
और मैं सादगी पर मरता हूँ
Shajar Abbas
तीर चलाओ आँख से लेकिन थोड़ा नर्मी बरतो तुम
जंग नहीं हारा हूँ फिर भी दिल पे कब्जा कर लो तुम

हर कोई दीवाना होकर तेरे आगे पीछे है
या'नी के इस हुस्न से अपने जो चाहो वो कर दो तुम
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Kush Pandey ' Saarang '
तुझे हम ख़ुश रखेंगे ज़िंदगी भर
ये वा'दा है, मगर दावा नहीं है

ग़ज़ल में बस उदासी भर रखी है
ज़रा भी हुस्न का चर्चा नहीं है
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Shaad Imran
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हुस्न की मत नुमाइश किया कीजिए
यूँँ न बे-पर्दा छत पर दिखा कीजिए
Zafar Siddqui
तुम्हारे हुस्न की ता'रीफ़ लिखने बैठूँ अगर
क़सम ख़ुदा की हज़ारों बरस भी कम होंगे
Shajar Abbas
कभी दरिया कभी तारों का मंज़र क़ैद करता हूँ
किसी क़े हुस्न का जादू नज़र भर क़ैद करता हूँ

मैं शाइ'र हूँ मुझे अल्लाह ने ऐसा हुनर बख्शा
मैं काग़ज़ की लकीरों में समुंदर क़ैद करता हूँ
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Altaf Iqbal
चराग़-ए-रौशनी हो कर दर-ए-दिल तक न पहुँचा हूँ
नज़र में हुस्न की यारो अभी तक भी बुझा सा हूँ

ख़बर करना ज़रा क़ासिद हसीं साँसों की धड़कन को
हवा दामन से गर दे वो महकता मैं उजाला हूँ
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Maviya abdul kalam khan
मटकती चाल मतवाली हमारी जान ले लेगी
छनकती कान की बाली हमारी जान ले लेगी

छुपा कर चाँद सा मुखड़ा करो तुम हुस्न पर्दे में
नहीं तो होंठ की लाली हमारी जान ले लेगी
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Jatin shukla
वो उस के गाल पे दरबान-ए-हुस्न बैठा है
कोई उसे सुनो तिल का निशान मत कहना
Shajar Abbas
हुस्न का जब जब किया मैं ने तसव्वुर दोस्तों
सामने तस्वीर मेरे इक परी की बन गई
Shajar Abbas
महज़ ये हुस्न क़यामत नहीं ख़ुदा की क़सम
तेरे लबों का तब्बसुम भी इक क़यामत है
Shajar Abbas
रब ने उस को तिल दिया यूँँ फूल से रुख़सार पे
हुस्न का कोई तो पहरेदार होना चाहिए
Shajar Abbas
कहते हैं सामिईन उसे जाम-ए-जम-ए-हुस्न
वो जाम बिन पिए ही जो बहकाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
वफा के हुस्न के काँटों के फूल के क़िस्से
मुझे तो लग रहे हैं सब फ़ुज़ूल के क़िस्से

फिर उस का नाम है आया ज़बान पर मेरी
सुना रहा था किसी को स्कूल के क़िस्से
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Akash Rajpoot
हुस्न की बात नहीं करता हूँ
वक़्त बर्बाद नहीं करता हूँ
Afzal Sultanpuri
ज़रूरत क्या भला उस आइने में झाँकने की है
मुझे लगता है जैसे हुस्न आ कर रुक गया तुम पर
Ravi 'VEER'
शा'इरी क्या ख़ाक होगी यार उस के हुस्न पर
बस कहूँगा वो ज़मीं का चाँद लगता है मुझे
Ravi 'VEER'
नहीं हुस्न से हम को कोई भी मतलब
जो दिल ख़ूब-सूरत हो तो बात कीजे
Irshad Siddique "Shibu"
ये तेरा हुस्न उफ़ पल पल मुझे घाइल ही करता है
तेरे ही इश्क़ का बस है करम जो मैं कि ज़िंदा हूँ

मुझे आवाज़ दे दे तो मैं आख़िर क्यूँ न आऊँगा
अरे मैं तो तेरा पाला हुआ आशिक़ परिंदा हूँ
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Adnan Ali SHAGAF
हुस्न की तौहीन कर दी वक़्त की बर्बादी की
तेरे ठुकराए हुओ ने किस सेे किस सेे शादी की
Amaan Javed
देख कर सामने हूर के हुस्न को
लग गए काम पर शा'इरी और मैं
Radheshyam Tiwari
हुस्न के सर पे क्या इश्क़ में खेलना
इश्क़ के सर पे तुम हुस्न जीते मेरा
Aashish kargeti 'Kash'
क्यूँ न चूमूँ तुम्हारे नक्श-ए-क़दम
बानी-ए-इंक़लाब-ए-हुस्न हो तुम
Shajar Abbas
उम्र भर इस हुस्न के गुलज़ार में खोया रहूँ
मैं हमेशा आप के दीदार में खोया रहूँ
Avtar Singh Jasser
हुस्न की मालिका इजाज़त दो
आप के हुस्न पे ग़ज़ल कह दूँ
Shajar Abbas
हसीन चाँद को देखूँ तो ऐसा लगता है
तुम्हारे हुस्न-ए-समुंदर का एक क़तरा है

तुम्हारे हुस्न को देखूँ तो ऐसा लगता है
हसीन चाँद तुम्हें देख कर चमकता है
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Shaikh Sohail
तू हुस्ना हुस्न को महफ़ूज़ रखना
मैं आशिक़ हूँ नज़र से चूम लूँगा
Jatin shukla
कसीदे क्या पढूँ मैं हुस्न की ता'रीफ़ में उस के मियाँ तुम समझो बस इतना
नज़र-भर के अगर सूरज-मुखी भी उस को देखे तो उसी की ओर हो जाए
Sandeep dabral 'sendy'
अदा है ख़ूब पैकर में तिरी जाँ जानती हो क्या
न जाने हुस्न ये कितने कलमकारों को ले डूबा
Suraj "pathik"
ये जवानी है दिलनशीं साहब
मसअला इल्म-ए-हुस्न का है बस
Suraj "pathik"
हुस्न लुटाएगा ख़ुशबू कब तक हम ने
नदियों को भी जंगल होते देखा है
Sandeep kushwaha
तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम
मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
तेरे इस हुस्न पे लानत बहुत है
अगर आशिक़ तेरा बहका नहीं है
Ankit gupta
शरारत नज़ाकत मलाहत अदाएँ
तिरे हुस्न में हम ने क्या क्या न देखा
Shaikh Sohail
नज़र में हुस्न लाखों थे
हमें पर वो ही प्यारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
इक हुस्न-ए-क़त्ल-ए-आम को कितना ग़ुरूर है
बेखौफ़ बोलता है कि वो बे-क़ुसूर है
Ajeetendra Aazi Tamaam
जो दिल जीत लगाएगा उस को याँ आदत अपनी
वो सौंपेगीं उस को हुस्न की दौलत, इशरत अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
हुस्न की मजबूरियाँ कैसे बताएँ
गाल का तिल सब से वो कैसे छुपाएँ
Meem Alif Shaz
हुस्न से पर्दा-ए-इस्मत को हटा बहर-ए-ख़ुदा
मुझ सेे नाबीना को तू तिश्ना-ए-दीदार न रख

ख़्वाब-ए-फ़र्दा में ये कहता हूँ रक़ीब-ए-जाँ से
तू मेरी जान के रुख़्सार पे रुख़्सार न रख
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Shajar Abbas
ऐसे बैठे हैं हम उस की चौखट पर
प्यासा जैसे बैठा रहता पनघट पर

पर्दा करना हुस्न छुपाना नइँ होता
पहरे का आरोप ग़लत है घूँघट पर
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Jatin shukla
वो गुलाब चाँद से हुस्न पे तिरे लग रहा था कमाल का
वो सफ़ेद रंग पे लाल रंग मिसाल हुस्न-ओ-जमाल का
Raj Tiwari