Mehboob Shayari - Romantic lines celebrating your beloved and heartfelt ishq emotions

Mehboob shayari beautifully captures the essence of love, longing, and devotion toward your beloved. Whether it’s expressing ishq, admiration, or the magic of their presence, these lines bring emotions straight from the heart. Perfect for sharing your feelings, confessing love, or simply celebrating your special someone.

mehboob shayari
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए
तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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mahboob shayari
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
Firaq Gorakhpuri
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sanam shayari
बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए
तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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jaan shayari
तिरंगा दिल में है लबों पे हिंदुस्तान रखता हूँ
सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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dilbar shayari
अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
Mahshar Badayuni
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habib shayari
तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता
Mirza Ghalib
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yara shayari
अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जाँ से
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं माँ से
Tahir Shaheer
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lover shayari
ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान
मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है
Abbas Tabish
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mehboob shayari
एक वा'दा कर रहा हूँ आप से
हर किया वा'दा निभाऊँगा सनम
Divy Kamaldhwaj
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mahboob shayari
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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sanam shayari
सर्द झोंकों से भड़कते हैं बदन में शो'ले
जान ले लेगी ये बरसात क़रीब आ जाओ
Sahir Ludhianvi
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jaan shayari
गले मुझ को लगा लो ऐ मेरे दिलदार होली में
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में
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Bhartendu Harishchandra
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बस यूँँ ही मेरा गाल रखने दे
मेरी जान आज गाल पर अपने
Jaun Elia
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मेरी तो जान सी गई लेकिन
उस को तो खेल सा लगा ब्रेकअप
Vivek Bijnori
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हम जान से जाएँगे तभी बात बनेगी
तुम से तो कोई राह निकाली नहीं जाती
Wasi Shah
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जान लेना कि नया हाथ बुलाता है तुम्हें
गर कोई हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना
Ameer Imam
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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या
हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे
Ali Zaryoun
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उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
ऐ मेरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
Ahmad Faraz
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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते
Ahmad Faraz
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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जान भी अब दिल पे वारी जाएगी
ये बला सर से उतारी जाएगी

एक पल तुझ बिन गुज़रना है कठिन
ज़िन्दगी कैसे गुज़ारी जाएगी
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Anjum Rehbar
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अगर महबूब की आँखें है दुनिया
तो मेरे पास फिर दुनिया नहीं है
Ritesh Rajwada
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
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Tehzeeb Hafi
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कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मेरी जान तेरे बस का नहीं
Jaun Elia
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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
Jaun Elia
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किस तरह मेरी जान ये किरदार बने है
जो तुझ सेे मिले है वो तेरा यार बने है
Vikram Gaur Vairagi
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जब तलक अनजान थे महफ़ूज़ थे
जान लेना जानलेवा हो गया
Vishal Bagh
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अजीब हालत है जिस्म-ओ-जाँ की हज़ार पहलू बदल रहा हूँ
वो मेरे अंदर उतर गया है मैं ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ
Azm Shakri
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हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा
Parveen Shakir
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शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था
मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था
Pallav Mishra
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रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह
बैठे हैं उन्हीं के कूचे में हम आज गुनहगारों की तरह
Majrooh Sultanpuri
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मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
Arsh Malsiyani
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मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले
मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं
तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं
Sudarshan Fakir
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'मीर' हम मिल के बहुत ख़ुश हुए तुम से प्यारे
इस ख़राबे में मिरी जान तुम आबाद रहो
Meer Taqi Meer
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सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे
बहुत दिन से वो पत्थर हैं न हँसते हैं न रोते हैं
Bashir Badr
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थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे
तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे
Kaif Bhopali
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देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है

गोर किस दिल-जले की है ये फ़लक
शो'ला इक सुब्ह यां से उठता है
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Meer Taqi Meer
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तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है
सीना किस का है मिरी जान जिगर किस का है
Ameer Minai
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बदन लिए तलाशता फिरू हूँ रात दिन उसे
सुना है जान भी मेरी कहीं इसी शहर में है
Bhaskar Shukla
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर
Ameer Minai
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शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जान
चाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में
Mushafi Ghulam Hamdani
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है आप के होंटों पे जो मुस्कान वग़ैरा
क़ुर्बान गए उस पे दिल ओ जान वग़ैरा
Anwar Masood
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माँगे तो अगर जान भी हँस के तुझे दे दें
तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती
Wasi Shah
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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं
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Jaun Elia
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ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह

गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था
किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
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Jaun Elia
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चुरायगा उसी से आँख क़ातिल
ज़रा सी जान जिस बिस्मिल में होगी
Dagh Dehlvi
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शिकारी चीज़ क्या है जान लेना चाहिए था
तड़पता इक परिंदा जाल में छोड़ा गया था
Atul K Rai
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना
ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना

ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है
कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
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Ali Zaryoun
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गर उदासी, चिड़चिड़ापन, जान देना प्यार है
माफ़ करना, काम मुझ को और भी हैं दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
एक नया आशिक़ है उस का, जान छिड़कता है उसपर
मुझ को डर है वो भी इक दिन मय-ख़ाने से निकलेगा
Siddharth Saaz
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मैं तुम्हें बद्दुआएं देता हूँ
ताकि तुम मेरा दर्द जान सको

तुम जिसे चाहते हो मर जाए
और तुम उस के बा'द ज़िंदा रहो
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Afkar Alvi
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सुब्ह तक वज्ह-ए-जाँ-कनी थी जो बात
मैं उसे शाम ही को भूल गया
Jaun Elia
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याराँ वो जो है मेरा मसीहा-ए-जान-ओ-दिल
बे-हद अज़ीज़ है मुझे अच्छा किए बग़ैर

मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
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Jaun Elia
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तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है,
दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है

एक शब्द तुम को अंधेरे का ख़ौफ़ दिला कर,
बा'द में ख़ुद भी जान बूझकर डर जाना है
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Vishal Singh Tabish
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चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना
चारा-गर की जान बचाओ पहले तो
Siddharth Saaz
इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे
मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे

मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
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Farhat Abbas Shah
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बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न हो

हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो
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Khurram Afaq
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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ
मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया

तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था
तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया
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Ritesh Rajwada
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है
सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है

हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना
भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
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Ritesh Rajwada
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ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर
कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
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इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है
ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते
Ahmad Faraz
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
Shahzad Ahmad
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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है
अपने एहसान का एलान बहुत करता है

आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा
वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
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Jawwad Sheikh
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चढ़ते हुवे ए शम्स दिखा ताव भी मगर
ये जान ले कि शाम ढले डूब जाएगा
Afzal Ali Afzal
यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन
इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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प्यार मुहब्बत बा'द की बातें जान कभी ये सोचा है
किस ने तेरा साथ दिया था कौन नशे में ख़त्म हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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वरना तो बे-वफ़ाई किसे कब मुआ'फ़ है
तू मेरी जान है तो तुझे सब मुआ'फ़ है
Vikram Gaur Vairagi
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वही शागिर्द फिर हो जाते हैं उस्ताद ऐ 'जौहर'
जो अपने जान-ओ-दिल से ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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सब सेे अपनापन दिखलाने वाला मैं
अपने घर में ग़ैर हुआ हूँ जान लो तुम
Vikas Sahaj
है अब भी बिस्तर-ए-जाँ पर तिरे बदन की शिकन
मैं ख़ुद ही मिटने लगा हूँ उसे मिटाते हुए
Azhar Iqbal
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उदास रहने से ग़ज़लों में जान आती है
सो पूरा ध्यान लगाकर उदास रहने लगे
Nadim Nadeem
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मैं ने अपनी ग़ज़लें खारिज कर डाली
सोचो मेरी जान तुम्हारा क्या होगा
Talib Toofani
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राहों में जान घर में चराग़ों से शान है
दीपावली से आज ज़मीन आसमान है
Obaid Azam Azmi
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इक और इश्क़ की नहीं फ़ुर्सत मुझे सनम
और हो भी अब अगर तो मेरा मन नहीं बचा
Afzal Ali Afzal
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हल्की-हल्की सी हँसी, साफ इशारा भी नहीं
जान भी ले गए और, जान से मारा भी नहीं
Sawan Shukla
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जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं
ज़िंदगानी का क्या भरोसा है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई
Sabahat Urooj
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रूठे लोगों को मनाने में मज़ा आता है
जान कर आप को नाराज़ किया है मैं ने
Fawad Ahmad
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उधारी सर से ऊपर बढ़ चुकी है
हमारी जान जोखिम में पड़ी है

हमीं अपमान सहकर जी रहे हैं
अना की लाश पंखे पर मिली है
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Vikas Sahaj
आज फिर इज़हार करते हैं सनम
आपसे ही प्यार करते हैं सनम

आप को क्या इश्क़ से परहेज़ है
आप क्यूँ इनकार करते हैं सनम
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Divy Kamaldhwaj
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जान ले लो जान तुम मेरी यक़ीनन
जान लेना तो मिरी फितरत नहीं है
Shashank Shekhar Pathak
यहाँँ अनजान हो तुम भी यहाँँ अनजान हैं हम भी
किसी की जान हो तुम भी किसी की जान हैं हम भी

बड़े नादान हो तुम भी बड़े नादान हैं हम भी
अतः वीरान हो तुम भी अतः वीरान हैं हम भी
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Vivek Vistar
मेरे महबूब मत बेचैन होना
तेरे क़ासिद ने ख़त पहुँचा दिया है
Shajar Abbas
क़ल्ब-ए-हज़ी मता-ए-जाँ यूँँ शाद कीजिए
कसरत के साथ आप हमें याद कीजिए

दौलत में चाहते हो इज़ाफा अगर शजर
तो बेकसों यतीमों की इमदाद कीजिए
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Shajar Abbas
ये मुझ सेे चाँद तारे कह रहे हैं
मता-ए-जाँ तुम्हें बाँहों में ले लूँ
Shajar Abbas
चाँद को देख कर ये लगता है
तुम मेरी जान आसमान में हो
Shajar Abbas
और क्या ही था हमारे पास देने को तुम्हें
ख़्वाब मेरे आँख के तुम को मुबारक हो सनम
Subrat Tripathi
ऐ शहर-ए-जान-ए-जाँ ऐ शहर-ए-हमदम
अगर ज़िन्दा रहे फिर आएँगे हम
Shajar Abbas
किसी उम्मीद का ये इस्तिआरा जान पड़ता है
कि तन्हा ही सही सच झूट से अब रोज़ लड़ता है
Tarun Pandey
उम्र भर मेरी उदासी के लिए काफ़ी है
जो सबब मेरी ख़मोशी के लिए काफ़ी है

जान दे देंगे अगर आप कहेंगे हम सेे
जान देना ही मुआ'फ़ी के लिए काफ़ी है
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Aakash Giri
ज़िस्त की जान जाते भी देखा हूँ मैं
मौत को साँस आते भी देखा हूँ मैं

सब तो हँसते ही हैं मेरे हालात पे
दर्द को मुस्कुराते भी देखा हूँ मैं
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SHIV SAFAR
नाज़-ओ-नख़रे क्या उठाए, क्या सुने उस के गिले
देखते ही देखते लड़की घमंडी हो गई

देखते रहने में उस को और क्या होता, मगर
जो थी जान-ए-आरज़ू, वो चाय ठंडी हो गई
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Kazim Rizvi
जिस किसी से तेरा चक्कर चल रहा था
उस को मैं अच्छी तरह से जानता था

रातें रौशन थी किसी की तुझ सेे दिलबर
तो किसी का तेरे बा'इस रत-जगा था
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Dileep Kumar
मुझ को जो अपनी जान कहता था
वो मेरा दोस्त मर गया है क्या
Nirbhay Nishchhal
इसीलिए तो हिफ़ाज़त में बैठा रहता हूँ
मेरे बदन में कोई नीम जान रहता है
Nirmal Nadeem
चाहे हो आसमान पे चाहे ज़मीं पे हो
वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो

दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
Read Full
Nirmal Nadeem
हमारे दोस्तों और अक़रिबा की जानिब से
मता-ए-जान को ईद-उल-अज़हा मुबारक हो
Shajar Abbas
ये हक़ीक़त है, मज़हका नहीं है
वो बहुत दूर है, जुदा नहीं है

तेरे होंटों पे रक़्स करता है
राज़ जो अब तलक खुला नहीं है

जान ए जांँ तेरे हुस्न के आगे
ये जो शीशा है, आइना नहीं है

क्यूँ शराबोर हो पसीने में
मैं ने बोसा अभी लिया नहीं है

उस का पिंदार भी वहीं का वहीं
मेरे लब पर भी इल्तेजा नहीं है

जो भी होना था हो चुका काज़िम
अब किसी से हमें गिला नहीं है
Read Full
Kazim Rizvi
लो रख दी जान पलड़े पर
तुम अपनी शा'इरी रक्खो
Vikas Rana
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बताओ गर कोई बेजान है तो फिर मिलो उस से
किसी भी जिस्म में वो जान छू कर डाल सकती है
Harsh Raj
ऐसे असमंजस में मत डालो मुझे तुम मेरी जान
ठीक से सोचो समझ लो इश्क़ सा है इश्क़ है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
बेशक तू बे-वफ़ा का सनम नाम दे मुझे
बा'द आज़माने के मगर इल्ज़ाम दे मुझे
Ajeetendra Aazi Tamaam
ज़िंदा रहने की ये तरक़ीब निकाली हम ने
बात बिगड़ी हुई कुछ ऐसे सँभाली हम ने

उस सेे समझौता किया है उसी की शर्तों पे
जान भी बच गई इज़्ज़त भी बचा ली हम ने
Read Full
Divyansh Shukla
हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ
जल रही है दिल-ए-पुर-नूर की लंका देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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पहले पहले जान छिड़कता था उस पे
अब मैं उस सेे जान छुड़ाना चाहता हूँ
Avtar Singh Jasser
कहाँ तक साथ दोगी तुम हमारा
सनम जावेदाँ है ये ग़म हमारा
Avtar Singh Jasser