Best Tanz Shayari Collection - Sharp words, sarcasm, and witty taunts in poetic form

Tanz shayari reflects the art of sarcasm, where words hit deeper than they appear. It blends wit, taana, and subtle criticism to express emotions with a sharp edge. Whether aimed at society, relationships, or personal experiences, these verses carry a powerful punch in just a few lines.

tanz shayari
सब के चेहरे पे जो तनक़ीद किया करते हैं
आइना उन को दिखा दो तो मज़ा आ जाए
Waseem Barelvi
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अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है
Ankit Maurya
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वो जो इक शख़्स मुझे ताना-ए-जाँ देता है
मरने लगता हूँ तो मरने भी कहाँ देता है

तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है
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Azhar Faragh
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तनक़ीद न तक़रार बड़ी देर से चुप हैं
हैरत है मेरे यार बड़ी देर से चुप हैं

गूँगों को तकल्लुक़ के मवाक़े हैं मुयस्सर
हम माहिर-ए-गुफ़्तार बड़ी देर से चुप हैं
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Ahmad Abdullah
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बेगानी इस दुनिया का, ताना-बाना सुन
उक्ता के उन सेे हिन्दी का इक गाना सुन
Alankrat Srivastava
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तंज़ करना फिर उसी से प्यार करना
जाँ कहा से सीखा है ये वार करना
Govind kumar
तुम तक ही था इन साँसों का ताना बाना
इक दिन पंछी उड़ जाएगा छोड़ ठिकाना
Umesh Maurya
सब के सब शामिल थे मेरी तरक़्क़ी में
सब ने ही की थी बेहद तनक़ीद मिरी
Meem Alif Shaz
बोल आया हूँ जिन के मुँह पे सच
अब वो तन्क़ीद कर रहे होंगे
Sohil Barelvi
चार थपेड़े पड़े हवा के एक भी दाना नहीं मिला
दिनभर भूखी घूमी चिड़िया लेकिन खाना नहीं मिला

इस दुनिया ने बहुत दिया लेकिन ता'ने भी खूब दिए
एक ये तेरा दर है मालिक जहाँ से ताना नहीं मिला
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Hritik chaurasia
सितम ये है वही तनक़ीद करते हैं शजर मुझ पर
कि जिन के ख़ुद के दामन पर हज़ारों दाग़ होते हैं
Shajar Abbas
मीर जैसा दर्द है तो रोज़ ही मरते हैं हम
तुम ज़रा छू कर तो देखो किस क़दर डरते हैं हम

हम पे कोई तीर ताना ही नहीं अच्छा किया
वरना हर इक ज़ख़्म में बस ज़ख़्म ही भरते हैं हम
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Meem Alif Shaz
उस पार जिस को पाने की जिन लोगों में उम्मीद है
कैसे कहूँ उन को कि वो जो चीज़ है बेदीद है

दीवार क्यूँँ बढ़ने लगी है हर किसी के बीच में
ये सब फ़क़त बातें नहीं ये सब मेरी तन्क़ीद है
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harshit karnatak
ता'रीफ़ किसे तो किसे तनक़ीद मुबारक
सब को सभी की आख़िरी उम्मीद मुबारक

देरी से सही जान निकल तो गया है चाँद
ऐ चाँद के टुकड़े तुझे ये ईद मुबारक
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Jagveer Singh
ज़माने में है ये जो तनक़ीद अपनी
भला कोई किस रास्ते को चुने यूँँ
Naviii dar b dar
इस आ
समाँ को मुझ सेे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूँ अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
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Ali Rumi
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं
Hastimal Hasti
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तसव्वुर तजरबा तेवर तमन्ना और तन्हाई
मिलेंगे फूल सब इस
में ग़ज़ल गुलदान है यारों

पढ़ाई नौकरी शादी फिर उस के बा'द दो बच्चे
हमारी ज़िन्दगी इतनी कहाँ आसान है यारों
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Tanoj Dadhich
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हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं
तेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैं

तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त
डुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं
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Abrar Kashif
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है
Zia Mazkoor
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जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हम सेे
कह गए हम को बे-वफ़ा हम सेे

राह तकते रहे थे फिर भी वो
नईं मिले आख़िरी दफ़ा हम सेे
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Shivam Mishra
जो ग़ुस्सा आ गया तो क्या ही कर लेंगे
ज़बाँ ये मेरी गाली भी नहीं देती
Irshad Siddique "Shibu"
चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR
कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई ख़ानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बे-वफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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हम समुंदर है हम को न रस्ते बता
हम मुसाफ़िर नहीं जो भटक जाएँगे

दुश्मनी यार किस किस से लेंगे भला
तेरे पहलू से हम ही सरक जाएँगे
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Nadeem Shaad
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तुम मिरी आँख के तेवर न भुला पाओगे
अन-कही बात को समझोगे तो याद आऊँगा
Wasi Shah
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ज़माना दोस्त है किस किस को याद रक्खोगे
ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझ से दुश्मनी हो जाए
Qabil Ajmeri
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राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर
दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा
Altaf Hussain Hali
खफा हम किसी से नहीं बस जरा वक़्त की कमी है
आसमान में उड़ने का ख़्वाब है और पैरों तले ज़मीं है
Shashank Tripathi
मुझ
में जो गुम है कहीं वो हिस्सा नहीं देखा मेरा
तुम ने प्यार देखा है अभी ग़ुस्सा नहीं देखा मेरा
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karan singh rajput
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अब मुझे कोई गिला नहीं है तुम भी मेरे हो वो भी मेरा
सभी से अपना वास्ता है सभी से अपनी दुश्मनी है
Parwez Akhtar
मिल चुके हैं ख़ाक में
और वो बेख़बर है कब से

अब निकल चुकी है ’जान’
और ’जान’ खफा है कब से
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Animesh Choubey
ठीक हैं ख़फ़ा होना जुदा होना ठीक नहीं है
इश्क़ होना ठीक हैं ख़ुदा होना ठीक नहीं है
Praveen Bhardwaj
दिल नहीं लग रहा है मेरा कही
तुम अभी भी ख़फ़ा हो क्या मुझ सेे
Ved prakash Pandey
दुश्मनी थी फ़क़त यही उन सेे
की नहीं दोस्ती ता-उम्र उन सेे
Vivek Chaturvedi
बात कर के देखिए तो बात क्यूँ करते नहीं
लब भले जल जाएँ हम लफ्ज़ से फिरते नहीं

दोस्ती में दुश्मनी हो दुश्मनी में दोस्ती
जब निभाना हो मुरव्वत हम कहीं करते नहीं
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Ali Mohammed Shaikh
आज पहली दफ़ा लगा मुझ को
वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को

बस बिना बात ही बिगड़ता था
बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
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Sandeep Thakur
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
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Sandeep Thakur
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हम ने फूलों से दुश्मनी कर ली
आज काँटों पे चल के आए हैं
Akash Rajpoot
जिस तरह देखा है मैं ने आप को
दुश्मनी से भी बुरी है दोस्ती
Prashant Sitapuri
हम आशिक़ों की नींद से है ख़ानदानी दुश्मनी
करवट से कर ली गुफ़्तगू जगकर गुज़ारा कर लिया
Saarthi Baidyanath
झूठा है सच्चा भी तो हो सकता है
चश्मा है गन्दा भी तो हो सकता है

बारिश केवल बादल की मज़बूरी है?
बादल का ग़ुस्सा भी तो हो सकता है
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Atul K Rai
जिस को ग़ुस्सा लग जाता है छोटी-छोटी बातों का
उस सेे क्या वा'दा लेना अब लंबे-लंबे साथों का
Sarvjeet Singh
शाम होते ही घर जाना पड़ता है
एक दिन सब को मर जाना पड़ता है

ख़्वाब में वो मुझ पर ग़ुस्सा करती है
सो हमें सच में डर जाना पड़ता है
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Rudransh Trigunayat
कुछ ख़ास ही मुझ सेे लगावट है उसे
बाक़ी किसी से वो खफ़ा होती नहीं
Sarvjeet Singh
तुम पहली लड़की हो जिसे मुझ पे
ग़ुस्सा करना अच्छा लगता है
Saahir
उसी से दुश्मनी करने लगा था
जिसे मैं घर में लाना चाहता था
Tiwari Jitendra
दुश्मनी मैं सभी से कर लेता
प्यार खैरात में नहीं रखता
Tiwari Jitendra
गुमान हम को नहीं अपनी शख़्सियत पे मगर
जो हम सेे दुश्मनी करते तो सर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
कोई भी काम ऐसा क्यूँँ करें हम
भला ग़ैरों पे ग़ुस्सा क्यूँँ करें हम
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
मेरा ग़ुस्सा शांत अब तक ना हुआ
और उस को फ़िक्र है सामान की
Sayeed Khan
न वो ख़ुश मुझ सेे न मैं ख़ुश , ख़फा वो भी है, मैं भी हूँ
मुसलसल ही चल रही है लड़ाई अपनी ख़ुदा से
A R Sahil "Aleeg"
साँप और नेवले की कहानी हुई ज़िन्दगी अब मेरी
रब ख़फ़ा, सब ख़फ़ा, मर भी सकता नहीं जी भी पाता नहीं
A R Sahil "Aleeg"
नए इस साल में क्या ही नया है
तिरा ग़ुस्सा वही नख़रे वही हैं
Sarvjeet Singh
अना और इश्क़ की है दुश्मनी सिन से
कभी इक साथ रह सकते नहीं साहब
A R Sahil "Aleeg"
रहा है इस साल भी रब ख़फ़ा मुझ सेे, मैं भी रब से
न बदला अपनी दुआ मैं, न रब ने अपना इरादा
A R Sahil "Aleeg"
तू ख़फ़ा है और मेरा आजकल
दोस्तों से राब्ता होता नहीं
Dileep Kumar
ग़ुस्सा भी माँ का प्यार से तो कम नहीं
मैं मर-मिटूँगा इतनी प्यारी चीख पर
Sabir Hussain
अच्छे ख़ासे सत्ता के गलियारों में दागी हो जाते हैं
कुर्सी की ख़ातिर अपनों के ही तेवर बाग़ी हो जाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
तरकीब हज़ारों हैं लेकिन बोसा पहले नंबर पर
पेशानी पर ले लो जब ग़ुस्सा रहता है अंबर पर
Sandeep dabral 'sendy'
यार समझो मिरी बात को
तुम ख़फ़ा हो मगर हम नहीं
Arohi Tripathi
इश्क़ करने की मनाही है यहाँ पर
दुश्मनी करते है सीना तान कर के
Umesh Maurya
वो बे-वफ़ा रहे पर मुझ को वफ़ा रहेगी
आख़िर वो कब तलक ही मुझ सेे जुदा रहेगी

मुझ को यक़ीन इक दिन वो आ मिलेगी मुझ सेे
तितली भी फूल से यूँँ कब तक ख़फ़ा रहेगी
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Ravi 'VEER'
नदामत, बे-क़रारी, हिज्र, ज़िल्लत और तन्हाई
मोहब्बत में यही दो–चार ग़म हर–बार होते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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अरे! माँ तो हमेशा बोलती है बात सच आख़िर
अरे! बेटा सभी माँ पे यहाँ तेवर बदलता है
Raunak Karn
आप की सरकार है जी आप ही फ़रमाइए
हम अगर बोले तो फिर हम सेे खफ़ा हो जाओगे
Ajeetendra Aazi Tamaam
मैं दुश्मनी को रोज़ भुलाता चला गया
अपनी ख़ुशी को ख़ूब बढ़ाता चला गया
Meem Alif Shaz
इतना ग़ुस्सा आता है शहजा़दी पर
कैसा होगा हाल मिरी बर्बादी पर

बाइस को मैं आधी बाजी हारा हूँ
मर जाऊँँगा यार तुम्हारी शादी पर
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Tanha
उदासी कौन लाया है मिरे घर
मिरा भाई मुझी से अब ख़फ़ा है
Meem Alif Shaz
ज़रूरी है ज़माना भी ख़फ़ा हो
हमें तो अब बदलना है ज़रूरी
Meem Alif Shaz
तुम्हारी बात से मुझ को कभी जो चोट पहुंँची तो
मुझे ग़ुस्सा नहीं आया मुझे रोना ही आया है
Nirbhay Nishchhal
वसिय्यत में मिली है दुश्मनी हम को यहाँ साहब
नहीं चर्चे थे कम वर्ना हमारी दोस्ती के भी
Shivam Mishra
दौलत के साथ मुफ़्त में आती है दुश्मनी
मैं इस लिए भी रहता हूँ मनहूस धन से दूर
shaan manral
बेकार मेरा ग़ुस्सा कुछ काम का नहीं है
बाहों में भर ले गर वो सब भूल जाता हूँ मैं
Prashant Beybaar
ग़ुस्सा आया आँसू टपके रिश्ता टूटा
इश्क़ हमारा कच्चा था ये तो होना था
Meem Alif Shaz
मैं कब तक तेरा ग़ुस्सा देखूँ
इश्क़ नहीं है रिश्तेदारी है
Meem Alif Shaz
मेरी दीवानगी से वो ख़फ़ा था
सफ़र में साथ छोड़ेगा पता था
Aatish Indori
जब मुड़ती हो तो हँस देती हो तुम भी ना
फिर सारा ग़ुस्सा पी लेती हो तुम भी ना
Meem Alif Shaz
आँखों में ग़ुस्सा, होंठों पे चाहत
इस को कहते है थोड़ी सी हिम्मत
Meem Alif Shaz
तू जो हमेशा ही औरों को पुकारता है
तुझ को ख़बर है तू मुझ को कितना मारता है

तुझ को तो चाहिए तू सब कुछ उतार दे पर
तू मेरे सामने बस ग़ुस्सा उतारता है
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Kinshu Sinha
वो मुझ से भी खफ़ा है, होने दो
ये तो दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
पहले तो आया ग़ुस्सा ख़ुद पे मगर
बा'द में ख़ुद पे टुक तरस आया

आँखें तो करने वाली थी बारिश
पर कोई अब्र सा बरस आया
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Prince
ज़िन्दगी अब तेरे तेवर नहीं देखे जाते
माँ के बिकते हुए ज़ेवर नहीं देखे जाते
nilendra vikram singh
चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुम सेे लेकिन
मिट्टी की प्यास पे बादल ये बरस जाता है
Pritam sihag
अगर मिल जाए पूरा मोड़ दूँगा
ये ग़ुस्सा कोई पत्थर तो नहीं है
Meem Alif Shaz
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब
हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बे-वफ़ा हैं अब
Shivam Mishra
जो कहा था वो किया तो क्या खता मुझ सेे हुई है
बे-वफ़ा से की वफ़ा फिर वो खफ़ा मुझ सेे हुई है

जिस नज़र से ज़िंदगी को देख मरता मर चुका है
उस नज़र से की मोहब्बत क्या जफ़ा मुझ सेे हुई है
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Chetan
ख़ुशबू फूलों से ख़फ़ा बैठी है राज
वो गया है बाग़ से कुछ इस तरह
Raj Tiwari
आ गया हम को जौन जैसा फ़न
जिस को मिलना ज़रा ख़फ़ा करना
pankaj pundir
दीवार ने सब को जुदा कर ही दिया
भाई को भाई से ख़फ़ा कर ही दिया
Meem Alif Shaz
कमा कर पैसा तो दफ़्तर से लाते हो
मोहब्बत ये कहाँ पे छोड़ आते हो

न कुछ घर चेहरे पे मुस्की ही लाया कर
ये ग़ुस्सा दफ़्तरों का क्यूँँ ले आते हो
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Irshad Siddique "Shibu"
मुझ से ख़फ़ा है तो होने दो
ये दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
छोटी है मुझ सेे मुझ पर ग़ुस्सा करती है
जैसे कोई रानी राजा पर मरती है
Jasmeet singh 'Meet'
दुश्मनी दुश्मनी ही देती है
सर के बदले में सर नहीं देती
Ajeetendra Aazi Tamaam
कभी रुसवाई अपनी और ज़िल्लत याद आती है
तुम्हें जब देखता हूँ तो मुहब्बत याद आती है
Danish Balliavi
जो प्यार का दर्द है मिरा वो न मैं किसी को बता रहा हूँ
तिरी जफ़ा और दुश्मनी का ऐ जान दुख मैं जता रहा हूँ
Danish Balliavi
कभी वो दिन निकल आए कभी वो रात हो जाए
कभी ऐसा नहीं होता कि उन सेे बात हो जाए

कभी सोचा नहीं था ये कि तुम हम सेे खफ़ा होगे
कभी होगी लड़ाई जो हमारी मात हो जाए
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Afzal Sultanpuri
क्या हुआ कुछ बोलिए क्यूँ लग रहे बेज़ार से
छोड़िए ग़ुस्सा सनम जी बोलिए अब प्यार से
Afzal Sultanpuri
यार तू बेवजह ही मुझ सेे ख़फ़ा है
बेवफ़ाई आजकल रस्म-ए-वफ़ा है
Aatish Indori
ख़्वाब को साथ मिल कर सजाने लगे
घर कहीं इस तरह हम बसाने लगे

कर दिया है ख़फ़ा इस तरह से हमें
मान हम थे गए फिर मनाने लगे
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Ayush Shukla
किसी से ख़फ़ा मैं हुआ ही नहीं
कभी मुझ को ये हक़ मिला ही नहीं
Vaseem 'Haidar'
तेरी नीली आँखों ने उलझाया है हम को
उन में ग़ुस्सा है या मोहब्बत ये मालूम नहीं
Meem Alif Shaz